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N.B. Nazeel
अजीब खेल है ये मोहब्बत का , किसी को हम ना मिले ,कोई हमें ना मिला
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N.B. Nazeel's posts

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आसमां से वो परी उतरी नहीं तो क्या हुआ
चाल सितारों की अभी सीधी नहीं तो क्या हुआ || अबके किस्मत आपकी चमकी नहीं तो क्या हुआ || फसल उगा दी उल्फतों की इस सीने के खेत में , गर हमारे पास ये धरती नहीं तो क्या हुआ || जो  हुआ  दीदार  उनका  दूर  से  तो खुश  हुए , पास से नज़रें कभी मिलती नहीं तो क्या हुआ | ...

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मुहब्बत के शहर की तलाश है |
मुहब्बत से देखे हमें उस नज़र की तलाशहै | बीत जाए ज़िन्दगी बस हमसफ़र की तलाश है || हैं मकां तो लाखों-हजारों जहाँ में ,मगर हमें, हो रिश्तों की बुनियाद पे एक घर की तलाश है | बस जिंदा हैं जिस्म ,अरसा हुआ रूह को मरे हुए ले जाए जो हमको खुदा तक ,उसी सफ़र की तलाश है ...

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अल्लाह जो लिखे किस्मत की किताब में |
अल्लाह जो लिखे किस्मत की किताब में | कोई  कमी  न  रहे  कभी  उस  हिसाब में || माना कि बहुत दिलकश अदा है जनाब में | मालूम है  उसे  हम  भी  हैं  शबाब  में ख़त  है  लिखा  उसे   इजहारे-इश्क  में पर , मै  जानता  हूँ  जो  वो  लिखेंगे जवाब  में|| उनसे  जुदा  हुआ , ...

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बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥
बड़ा मुश्किल उसे मनाया है ॥  बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥  किसे कहते कि बेवफा है वो , हँसा हम पे जिसे बताया है ॥  बसा दिल-ओ-दिमाग में वो ही , अचानक सामने जो आया है ॥  लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे , हमारे के लिए बनाया है ॥  हुआ है एहसास जन्नत का ,  जो माँ ने गोद म...

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वो सताए है मुझे यादों में शामो - सहर
जिंदगी मेरी कहाँ जाके गई है तू ठहर ॥ ले गई है फिर वहां ,जो छोड़ आया था  शहर है खुदा भी एक ,एक ही आसमां , एक ही  ज़मीं सरहदों पर किस लिए हमने मचाया है  कहर  मारता आया है बरसों  बाद भी अक्सर  हमें ॥ घुल गया था जो दिलों  में  लकीरो  का जहर भूल कर भी भूल सकता हूँ...

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After you leave, I will become a tree
Alone on a hillside, loving wind and sun,
Waiting for you to return home to me
Though centuries of lonely stars may run.
I’ll grow tall and give lots of shade,
Sheltering birds and other bright-eyed things.
Pleased with all the progress that I’ve made,
I’ll spread my leafy branches out like wings.
But oh! Every moment of every day
I’ll miss you with the passion of the wind,
Gazing endlessly upon the way
That without you must empty, empty wind.
(Nicholas Gordon)

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Gurudwara Bhora Sahib in my town.
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Absence from whom we love is worse than death, and frustrates hope severer than despair
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