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Savita Aggarwal
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करवा चौथ पर कुछ हाइकु
१  माथे बिंदिया हाथ सजे कंगन पूजता – मन २ निकला चंदा अर्ध्य दें सुहागनें रीत हो पूरी ३ पति को पाया साल में एक बार ये दिन आया ४  शृंगार किये सुहागिनों की टोली मंदिर चली ५ थालियाँ सजीं सुहागिनों की पूजा चंदा ने सुनी ६  नारियाँ सजें करवा चौथ पूजें पानी न चखें ...

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नव वर्ष की नई डायरी एक और नई डायरी लेकर फिर एक नव वर्ष आया है हर दिन लिखा जायेगा एक नया पन्ना हर दिन की होगी नई गाथा हर सुबह की होगी नई आशा हर रात बुनेगी नया सपना हर उषा में दमकती किरणें होंगी चंदा में चमकती चांदनी होगी हर पन्ने पे बिखरेगा नया नूर हर कलम मे...

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नव वर्ष की नई डायरी एक और नई डायरी लेकर फिर एक नव वर्ष आया है हर दिन लिखा जायेगा एक नया पन्ना हर दिन की होगी नई गाथा हर सुबह की होगी नई आशा हर रात बुनेगी नया सपना हर उषा में दमकती किरणें होंगी चंदा में चमकती चांदनी होगी हर पन्ने पे बिखरेगा नया नूर हर कलम मे...

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" आई हूँ मैं द्वार तेरे " न्यारी न्यारी चीज़ें ले कर थाली खूब सजायी है तुझे रिझाने की खातिर मैं द्वारे तेरे आई हूँ       मंदिर के दर बैठी बाला       माँग की आस लगाये है       पंथ निहारे बैठा बौना       पल पल हाथ फैलाये है लुटिया में गंगा का पानी छलकत छलकत जा...

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नव रात्री पर मेरे कुछ हाइकु १. महा पर्व है नौ दुर्गे की शक्ति का माँ की भक्ति का २. नव दुर्गे माँ ज़रा-व्याधि को मिटा चेतना जगा ३. जय अम्बिके विपत्ति दूर करे जय चण्डिके ४. परिवर्तन लाये परिशोधन मन प्रसन्न ५. माता की भक्ति सौभाग्य से मिलती शक्ति भरती ६. नौ दि...

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हाइकु
१. टूटती डाल वृक्षों से अलग हो काँटा सी हुई २. एक ही वृक्ष समेटे है अनेकों शाख औ पात ३. गर्मी जो आई पानी में खेलकर मस्ती है छाई ४. रात अंधेरी भूत से खड़े पेड़  डरूं घनेरी  ५. गुच्छा फूलों का  दे रहा सीख हमें  मिल के रहो  सविता अग्रवाल "सवि" 

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     यादें भागती रही दूर तुमसे समय का अभाव था दौडती ज़िन्दगी में न कोई पड़ाव था जानती न थी तुम्हारी अहमियत नादान  ही थी समय गुज़रता गया दिन पर दिन बीतते गए कई दशक गुज़र गए यादें जुडती गयीं परतें जमतीं गयीं आज आया है वह पड़ाव जब यादों की परतें खुलेंगी एक के बाद ए...

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संस्मरण: पिता जी का प्यार     पौ
फटते ही चिड़ियों की चहचहाट शुरू हो गई | मेरी खिड़की के एक कोने में चिड़िया ने अपना
घोसला बना रखा था | छोटे छोटे   बच्चे चूं
चूं कर रहे थे | थोड़ी देर में मैंने देखा कि एक चिड़ा कहीं से उड़ कर आया और कुछ देर
के लिए चूं चूं की आवाज़ ...

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हाइकु १. नव सुषमा सजा है उपवन झूमता मन २. बरखा आयी धरा खूब नहाई शाख मुस्काई ३. प्रकृति मन बादलों की गरज हंसा आनन्  ४. नाप न पायी  सिन्धु की गहराई  आयी रुलाई  ५. अँखियाँ बंद  तन में सिहरन  स्नेहिल मन  ६. नभ में भरी  दामिनी की दमक  लाई चमक  ७. पक्षी किलोल  बन...
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