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दीपक भारतदीप
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वादों के सौदागरों का याद से नाता नहीं-दीपकबापूवाणी (vadon ke saudagar ko yaad se nata nahin-DeepakBapuWani)

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वादों के सौदागरों का याद से नाता नहीं-दीपकबापूवाणी (vadon ke saudagar ko yaad se nata nahin-DeepakBapuWani)
घासफूस के घर में भी इंसान रहते हैं , देह के पसीने में उनके बयान बहते हैं। ‘ दीपकबापू ’ शिकायतें अब नहीं करते , माननीयों की हर ठगी खुलेआम सहते हैं।। ----- वादे निभाने के लिये नहीं होते , करने वाले कभी शब्दों का बोझ नहीं ढोते। ‘ दीपकबापू ’ चतुराई से बेच रहे स...

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बेईमानों ने ईमान लाने की मुहिम चलाई-दीपकबापूवाणी (baiimono ne iman laane ki muhim chalai-DeepakBapuWani(

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बेईमानों ने ईमान लाने की मुहिम चलाई-दीपकबापूवाणी (baiimono ne iman laane ki muhim chalai-DeepakBapuWani(
आंखें देखें दिल चाहे न क्या फायदा, एक राह प्रेम चले यह नहीं कायदा। ‘दीपकबापू’ जुबां से चाहे जो शब्द बोलें, यकीन से दूर ही समझें वायदा।। - लक्ष्य सबका महल की सीढ़ियां चढ़ना है, कुचलकर पायदान आगे बढ़ना है। ‘दीपकबापू’ बादशाहों को देते सलामी, कौन उनकी नज़र में रोज ...

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लोकतंत्र में गिरगिट की तरह रंग बदलना रोज देखा जा सकता है-हिन्दी व्यंग्यचिंत्तन (loktantra mein Girgit ki tarah rang badalna dekha ja sakta hai-HindiSatire Article)

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अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने की बात अतार्किक लगती है-हिन्दी लेख (Chenge of religion by The Great Ashoka is Inlogicable-Hindi Article)

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लफ्जों से चल रहा व्यापार आरपार की जंग क्यों लड़ेंगे-छोटी हिन्दी मुक्त कवितायें (LaFzon se chal raha Vyapar-Hindi poem)

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लफ्जों से चल रहा व्यापार आरपार की जंग क्यों लड़ेंगे-छोटी हिन्दी मुक्त कवितायें (LaFzon se chal raha Vyapar-Hindi poem)
बाज़ार के खेल में नये चेहरे और नारे के साथ उत्पाद सजाते हैं। ठगी पर क्या रोयें हम भी पुराना कहते हुए लजाते हैं। - तख्त पर बैठकर आम इंसान की चिंता कौन करता है। प्रहरी खड़े दर पर सच के हमले से कौन डरता है। --- लफ्जों से चल रहा व्यापार आरपार की जंग क्यों लड़ेंगे।...

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कंपनी दैत्यों के लिये पूरा संसार एक क्लब की तरह है-दो हिन्दी व्यंग्य रचनायें (A Club made all World for Company Devil- Two HindiSatireArticle)
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