Profile cover photo
Profile photo
ajai rai
141 followers
141 followers
About
Posts

Post has attachment
मेरे गांव की नदी
------ सूखे में उफनाती बाढ़ में दुबराती करती कई कमाल मेरे गांव की नदी     कहते हैं चाचा सलखन जड़ें हैं इसकी गहरी पाताल तक छितराई हुई ईरान से तूरान और चीन से जापान तक भीतर-भीतर पसरी   मेरे गांव की नदी   दुनिया के कोने-कोने में कई तहखाने हैं इसके जिनमें छुपा ...
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

मेरे गांव की नदी 
------
सूखे में उफनाती 
बाढ़ में दुबराती 
करती कई कमाल 
मेरे गांव की नदी 
 
 
कहते हैं चाचा सलखन 
जड़ें हैं इसकी गहरी 
पाताल तक छितराई हुई 
ईरान से तूरान और 
चीन से जापान तक 
भीतर-भीतर पसरी  
मेरे गांव की नदी 
 
दुनिया के कोने-कोने में 
कई तहखाने हैं इसके 
जिनमें छुपा रखती है खूब पानी
मेरे गांव की नदी 
 
तपती है धरती जब 
व्याकुल हो उठती हैं नदियां जब 
फुंफकारती है, उफनाती है 
तहखानों से पानी ला 
हो जाती है लबालब 
मेरे गांव की नदी 
 
जब नदियां सूख जाती हैं तब भी 
चलते रहते हैं कारोबार इस पर 
चलते रहते हैं मालवाहक जहाज, 
चलती रहती हैं सैलानियों भरी नावें
गुलजार रहती है मेरे गांव की नदी 
 
ख्वाबों की केती को सींचती हुई 
सपनों की प्यास का पसारा समेटती
पत्थरों, रोड़ों को पीस बालू बनाती 
दौड़ती जाती है मेरे गांव की नदी 
 
 
डरते हैं आचमन करने में   
कोई नहीं पीता इसका पानी 
कहते हैं चाचा सलखन 
शापित है मेरे गांव की नदी। 
 
अजय राय  
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
एक और साल
एक और साल
chaaryaar.blogspot.com
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
मकान
मकान
chaaryaar.blogspot.com
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded