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parul singh
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इतना रहे ख्याल .....
स्त्री विमर्श दो स्तरों पर सामने आता है। एक सामाजिक स्तर पर व दूसरा पारिवारिक स्तर पर । दोनों ही स्तरों पर अपनी-अपनी तरह से काफी आंदोलन हुए हैं तथा चल रहे हैं । सामाजिक स्तर पर जंहा स्त्री के राजनैतिक,व्यवसायिक व समाज से जुड़ें हक़ों के मुद्दे हैं। तो पारिवार...

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किताब "101 किताबें गजलों की " लेखक : नीरज गोस्वामी
अभी कुछ दिनों पहले रेख्ता के प्रोग्राम जश्न ए रेख्ता में जावेद अख्तर जी को उर्दू,लेखन,ग़ज़ल आदि पर विस्तार से सुनने का मौका मिला। उन्होंने एक बात बहुत अच्छी कही कि अपना एक शेर कहने से पहले आपको ज्यादा नहीं तो कम से कम पांच सौं शेर तो औरों के याद हों। शायरी ही...

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अकाल में उत्सव : अद्वितीय कृति
मैं कोई आलोचक या समीक्षक कतई नहीं हूँ। ना ही इन दोनों के लिए स्वयं को समर्थ मानती हूँ ।  किन्तु तीन चार दिन पहले पंकज सुबीर जी का उपन्यास "अकाल  में उत्सव " पढ़ा तो, ह्रदय को झंकझोर गया। अभी तक दो बार पढ़ चुकी हूँ ।   कोशिश करने पर भी उसके पात्र उतर नहीं रहे ...

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"चाय"
 उन चुस्कियों की लज्ज़त कमाल थी .... सवेरे सवेरे हमारी बालकनी में  ठंडी हवा  झूमते मनी प्लांट  झूलती बोगनवेलिया  के इशारों पर  जो उनके साथ ली जाती थी सुबह की पहली l की  उन चुस्कियों की लज्ज़त कमाल थी जरा जरा जागे जरा जरा नींद में वो  ऊँघती मेरी जम्हाईयों से...

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नये हैं क्या ?
बेटी को लेकर एक बार गंगाराम हॉस्पिटल गयी थी | डाक्टर का कमरा खोजते हुए मैं गलती से पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में पहुँच गई | कोरीडोर के दोनों तरफ़ कमरे थे | हर कमरे में ६-८ बैड, हर बैड पर एक बच्चा | पास में एक माँ | गले में , नाक में नालियां लगे हुए बच्चे , बा...

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पेशावर वाली माँ
पेशावर वाली माँ एक महीना हो गया अब चली जाओ तुम मुझे आजाद कर दो अपनी क़ैद से तुम जीती जागती भला कैसे रूह बन कर मुझ पर साया हो सकती हो? तुम भूत नहीं हो| वो तो तुम्हारे बच्चे .....नहीं नहीं वो नाजुक नाजुक से बच्चे भूत नहीं बन गए  वो तो फ़रिश्ते हैं । फ़रिश्ते हैं...

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बेटी को लेकर एक बार गंगाराम हॉस्पिटल गयी थी | डाक्टर का कमरा खोजते हुए मैं गलती से पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में पहुँच गई | कोरीडोर के दोनों तरफ़ कमरे थे | हर कमरे में ६-८ बैड, हर बैड पर एक बच्चा | पास में एक माँ | गले में , नाक में नालियां लगे हुए बच्चे , बाल...
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