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parul singh
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रात
रात फ़कत रात नही हुआ करती नशा होती है और ये नशा मेरे सर चढ़ कर बोलता है मुझे रात में बस एक ही बात पसंद नही और वो है,सोना किसी के लिए रात आबिदा परवीन है किसी के लिए मेहदी हसन तो किसी के लिए जगजीत सिंह मेरे नजदीक रात है लग जा गले के फिर ये हसीं रात हो ना हो.....
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आवश्यकता निमित एक देह मात्र मै
आवश्यकता निमित एक देह मात्र मै  ....  ....  इसके आगे लिख नहीं पाती   जब जब भी  अंतर्मन में भावो का बवंडर उठता है  इतना तेज होता है कि  शब्दों के सांचो मे  भाव टिक ही नहीं पाते  भाव ममता , स्नेह और प्यार के  जिन पर अपने व्यर्थ होने का भाव भारी है  अंतर्मन मे...
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तिलिस्म
कभी-कभी ऐसे बात करते हो के एक दम रूहानी सा तिलिस्म बिछ़ा देते हो  मुझ से तुम तक। कुछ भी दरमिया नही। मीलों की दूरी नही,हवा नही, दरख्त,दरिया कुछ भी तो नही। बस करोड़ों ध्वल रोशनी-पुजँ। इधर मैं उधर तुम, ना कोई लफ्ज़ ना आवाज। बस दो जोड़े मुस्कुराती आँखें एक दूसर...
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विश्वास
यार ये आधा,पौना,तिहाई,चौथाई क्या होता है? विश्वास है तो है,नही है तो नही है। सूद थोड़े है जो सौ का तीस हर महीने बढ़े ही बढ़े। किसी पर विश्वास हो गया तो हो गया। दिन में पचास बार क्या तोलना कि विश्वास लायक है कि ना है। ये बात हो गई तो विश्वास बढ़ गया,वो बात क...
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प्रेम वही है जिसमें सम्पूर्ण समर्पण हो पर स्वाभिमान के साथ। प्रियतम भी वही है जिसे संपूर्ण समर्पण तुम्हारे स्वाभिमान के साथ स्वीकार्य है।जो तुम्हारे सम्पूर्ण समर्पण के साथ तुम्हारे स्वाभिमान के लिए भी सजग हो। प्रेम को समझना है तो सम्पूर्ण समर्पण व स्वाभिमान...
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वो ये इश़्क़ ही है
दिन के जाते जाते  बेचारे सूरज की मटकी  फूट ही गई  उतरते उतरते शाम की सीढ़ियाँ। बादलों ने दोनों हाथों से  समेटा तो बहुत आंचल में  सूरज का पिघला सोना। और लपेट लिपटा कर  सूरज को किया विदा। बादल तो डबल ड्यूटी पर हैं आज। रात भर बरसेंगे। हाथ पैर झाड़ कर जब बादल च...
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सतरंगी छ़ाता
 आज मुझे अपने facebook पेज के लिए एक पोस्ट लिखनी थी मैं कल से ही लिखने में लेट हो जा रही थी कभी किसी वजह से कभी किसी वजह से कई बार टॉपिक को लेकर ही कंफ्यूज थी खैर लिखने बैठी तो   आदतन अपने कमरे की बालकनी से बाहर हो रही बारिश देखने लगी तभी मेरे सामने वाली बि...
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