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A Soldier’s Heart Touching Story In Hindi

ये कहानी एक सैनिक की है, जो वियतनाम में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी! मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”
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ये कहानी एक सैनिक की है, जो वियतनाम में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी! मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”
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ये कहानी एक सैनिक की है, जो वियतनाम में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी! मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”
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A Soldier’s Heart Touching Story In Hindi

ये कहानी एक सैनिक की है, जो वियतनाम में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी! मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”
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सकारात्मक ऊर्जा : पंडित नेहरु का प्रेरक प्रसंग


भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होने के उपरांत पंडित जवाहर लाल नेहरु एक समारोह में सम्मिलित होने लंदन गए. वहाँ उनकी मुलाकात चर्चिल से हुई.

चर्चिल नेहरु जी के आलोचक थे. वे सदा उनकी आलोचना किया करते थे. लेकिन उस समारोह में आमने-सामने आने पर दोनों नेता सौहार्द भाव से एक-दूसरे से मिले और बहुत देर तक विभिन्न मुद्दों पर बातें करते रहे.

पुरानी बातें करते हुए अचानक ही चर्चिल ने नेहरु जी से पूछा, “मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ. आप बुरा तो नहीं मानेंगे?”

जब नेहरु जी ने उन्हें प्रश्न पूछने की अनुमति दी, तब चर्चिल बोले, “क्या मैं जान सकता हूँ कि आप अंग्रेजों की जेल में कितने वर्ष रहे?”

“यही कोई दस वर्ष.” नेहरु जी ने उत्तर दिया.

“हमने आपको कई वर्षों तक जेल में रखा. आपसे घृणित व्यवहार किया. मुझे लगता था कि आपके मन में हमारे प्रति बैर या द्वेष का भाव होगा. किंतु आपसे मिलने के बाद मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता.”

इस पर नेहरू जी बोले, “ऐसा हमारे नेता के मार्गदर्शन के कारण है. हमने जिस नेता के मार्गदर्शन में कार्य किया है, उन्होंने दो बातें हमें सिखाई है.”

“वह क्या?”

“पहली यह कि सर्वदा आत्मनिर्भर रहो और किसी से डरो मत. दूसरी, अपने मन में किसी के प्रति बैर या द्वेष का भाव मत रखो. इस कारण न तब हम आपसे डरते थे और न अब हम आपके प्रति बैर या द्वेष का भाव रखते है.”

मित्रों, भय तथा द्वेष का भाव मन में नकारात्मक उर्जा भर देता है और हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है. इस स्थिति में प्राप्त परिणाम भी नकारात्मक होते हैं. अतः सकारात्मक परिणाम के लिए सकारात्मक उर्जा के साथ कर्म पर ध्यान देना चाहिए.

दोस्तों, आप पढ़ रहे थे “Sakaratmak Urja Pandit Nehru Prerak Prasang“. इन प्रेरक प्रसंगों को भी अवश्य पढ़ें :
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जब एक वृद्धा ने लगाई पंडित नेहरू को डांट

प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार पंडित जवाहर लाल नेहरू इलाहबाद में कुंभ के मेले में गए. प्रधानमंत्री के आगमन की बात सुनकर वहाँ अपार जन-समूह उमड़ पड़ा. लोगों की भीड़ के बीच उनकी कार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी.

लोग पंडित जी को देखने के लिए उतावले हो रहे थे. जैसे ही वे उनकी झलक पाते, उनमें उत्साह और खुशी की लहर दौड़ जाती. पूरा वातावरण ‘जवाहरलाल नेहरू की जय’ के नारों से गुंजायमान था.

तभी अचानक एक वृद्धा भीड़ को चीरते हुए पंडित नेहरू की कार के सामने पहुँच गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “अरे ओ जवाहर कहाँ है तू? सुन मेरी बात. तू कहता है न कि आज़ादी मिल गई है. किसे मिली है आज़ादी? तुम जैसे मोटर में घूमने वालों को ही आज़ादी मिली होगी. हम जैसे गरीब लोगों को कहाँ? देख, मेरे बेटे को एक नौकरी तक नहीं मिल रही. अब बता कहाँ है आज़ादी?”

वृद्धा की चीखो-पुकार सुनकर पंडित नेहरू ने तुरंत कार रुकवाई. वे कार से उतरे और वृद्धा के सामने पहुँचकर हाथ जोड़कर खड़े हो गए.

फिर विनम्रता से बोले, “माँ जी! आप पूछ रही हैं कि आज़ादी कहाँ हैं. क्या आपको आज़ादी नहीं दिख रही? आज आप अपने देश के प्रधानमंत्री को ‘तू’ कहकर संबोधित कर रही हैं, उसे डांट रही हैं. क्या आप पहले ऐसा कर सकती थीं? अपनी शिकायत लेकर आप बेहिचक मेरे सामने चली आई, यही तो आज़ादी है.”

पंडित नेहरू की बात सुनकर वृद्धा का गुस्सा काफ़ूर हो गया. पंडित जी ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी शिकायत पर गौर किया जायेगा.

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तरजीह दिल को छूने वाली कहानी

एक दिन एक लड़की ने अपने पिता से पूछा, “पापा! क्या आप कभी मेरी वजह से वो रोये हैं?” उसके ऐसा पूछने का कारण ये था कि उसने कभी भी अपने पिता को रोते हुए नहीं देखा था.

इस सवाल के जवाब में पिता ने कहा, “हाँ, एक बार ऐसा कुछ हुआ था, जब तुम्हारी वज़ह से मैं रोया था.”

यह सुनकर लड़की उस बात को जानने के लिए उत्सुक हो गई कि आखिर वह क्या बात थी, जिसने उसके पिता को रुला दिया था.

इस उत्सुकतता को शांत करने के लिए पिता वह किस्सा सुनाने लगा –

“बात उस समय है, जब तुम ८ माह की थी. एक दिन मैंने तुम्हारे सामने तीन चीज़ें रखी – एक पेन, एक सिक्का और एक खिलौना. मैं ये जानना चाहता था कि तुम उन चीजों में से क्या उठाओगी. उनमें पेन बुद्धिमत्ता का प्रतीक था, सिक्का धन का और खिलौना मनोरंजन का प्रतीक था.

मैं ये सब बस एक जियासा के कारण कर रहा था. मेरे लिए ये जानना बहुत रोचक था कि मेरी बेटी के लिए आगे जाकर क्या सबसे अधिक मायने रखेगा? मैं तुम्हारे सामने बैठकर बेसब्री से तुम्हारे अगले कदम का इंतजार कर रहा था.

मैंने देखा कि कुछ देर बैठकर तुम उन चीज़ों को देखती रही. फिर घुटने के बल पर चलते हुए उनकी ओर बढ़ी. जब मैंने तुम्हें आगे बढ़ते हुए देखा, तो मेरी धड़कने मानो सी रुक गई.

लेकिन अगले ही पल तुमने उन सभी चीज़ों को अपने हाथ से एक तरफ हटा दिया और आगे बढ़कर मेरी गोद में चली आई. बस यही वो पल था, जब मेरा दिल भर आया था और तुम्हारी वज़ह से मैं रो पड़ा था.”

यह किस्सा सुनकर लड़की की आँखों में आंसु आ गए.
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बस एक दिन…प्रेम कहानी

एक लड़का और लड़की गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड थे. दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे. एक-दूसरे से मिले बिना और बातें किये बिना रह नहीं पाते थे.

एक दिन गर्लफ्रेंड ने बॉयफ्रेंड से कहा, “डिअर, एक पूरे दिन तुम मुझसे मिले बिना, कॉल किये बिना, कोई मैसेज किया बिना रहकर दिखाओ. ये तुम्हारे लिए एक चैलेंज है. देखती हूँ कि तुम ये कर भी पाते हो या नहीं. अगर कर पाये, तो मेरा प्यार तुम्हारे लिए और बढ़ जायेगा.”

बॉयफ्रेंड ने वह चैलेंज स्वीकार कर लिया. दूसरे दिन वह उससे मिलने नहीं गया, न ही उसे कॉल और मैसेज किया. उस दिन वह बहुत खुश था कि अपनी गर्लफ्रेंड के दिए चैलेंज में वह जीत जायेगा. लेकिन इस बात से बेखबर था कि उसकी गर्लफ्रेंड कैंसर से मर रही है.

अगले दिन वह खुशी-खुशी अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गया. वह बहुत एक्साइटेड था उसे यह बताने के लिए कि देखो मैंने तुम्हारे बिना एक पूरा दिन रह कर दिखा दिया. लेकिन वहाँ पहुँचने पर उसे पता चला कि उसकी गर्लफ्रेंड की एक दिन पहले ही मौत हो गई है. वह उसके लिए एक लैटर छोड़कर गई थी, जिस पर लिखा था – “डिअर, तुमने एक दिन मेरे बिना रह कर दिखा दिया. अब से ऐसा रोज़ करना. आई लव यू”

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