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Manish Kumar
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Travel writer, Music & Literature critique, Hindi Blogger, Energy Expert life has given me so many roles to play . I love to play each of th
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पारसनाथ ना केवल झारखंड की सर्वोच्च चोटी है बल्कि जैन मतावलंबियों के लिए सबसे पवित्र धर्मस्थल। पारसनाथ की यात्रा आसान नहीं है। मधुवन से पारसनाथ के सम्मेद शिखर तीर्थ यानि मुख्य मंदिर करीब नौ किमी की तीखी चढ़ाई पर है। ऊपर आम जन के रुकने की कोई सुविधा नहीं है यानि आपको उसी दिन वापस भी उतरना होगा। इसका मतलब ये है कि एक दिन में कम से कम अठारह किमी की यात्रा करनी पड़ेगी। कम से कम इसलिए कि अलग अलग पहाड़ों पर बसे सारे समाधि स्थलों और मंदिरों का भ्रमण करने पर आप इसमें आसानी से नौ किमी और जोड़ सकते हैं।

इस दूरी को कम करने के लिए हमने ऊपर तक जाने के लिए मोटरसाइकिल की सहायता ली और फिर विभिन्न मंदिरों और समाधिस्थलों का चक्कर लगाते हुए घने जंगलों के बीच से उतरना शुरु किया? कैसी रही हमारी बारह किमी की ये पद यात्रा चलिए आपको बताते हैं आज के इस आलेख में..

#Jharkhand #Monsoon #travelwithmanish #Parasnath #trek  
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इस बार मानसून का आनंद लेने के लिए हम लोगों ने पारसनाथ की पहाड़ियों को चुना। अगस्त के आख़िरी सप्ताहांत में शनिवार की सुबह जब हम घर से निकले तो हमारा इरादा राँची हजारीबाग रोड से पहले हजारीबाग पहुँचने का था पर घर से दो तीन किमी आगे निकलने के साथ योजना ये बनी कि क्यूँ ना इस खूबसूरत सुबह को पतरातू की हरी भरी वादियों में गुजारा जाए।

#jharkhand   #ranchi   #patratuvalley  #photofeature
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नूरजहाँ ने तो अपनी आवाज़ से परवेज़ जी के इस गीत को यादगार बनाया ही है। पर उनकी आवाज़ में जो ठसक है उसे सुनकर ऐसा लगता है कि किसी महीन मुलायम सी आवाज़ में ये गीत और जमता। हालांकि इंटरनेट पर मैंने कई अन्य गायकों को भी इस गीत पर अपना गला आज़माते सुना पर उनमें नूरजहाँ का वर्सन ही सबसे शानदार लगा। उम्मीद है कि किसी भारतीय कलाकार की आवाज़ से भी ये गीत निखरेगा। तो आइए सुनते हैं ये प्यारा सा नग्मा।
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पुराने हिंदी फिल्मी गीतों में अगर आर्केस्ट्रा का किसी संगीतकार ने सबसे बढ़िया इस्तेमाल किया तो वो थे शंकर जयकिशन। हालांकि उनके समकालीनों में सलिल चौधरी और बाद के वर्षों में पंचम ने भी इस दृष्टि से अपने संगीत में एक अलग छाप छोड़ी। शंकर जयकिशन का आर्केस्ट्रा ना केवल गीतों में रंग भरता था पर साथ ही इस तरह फिल्म के कथानक के साथ रच बस जाता था कि आप फिल्माए गए दृश्य से संगीत को अलग ही नहीं कर सकते थे।

#ShankarJaiKishan   #Shailendra   #EkShaamMereNaam  
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पिछले कुछ वर्षों में गुलज़ार एक फिल्म के गीतकार के तौर पर कम और बतौर शायर ज्यादा क्रियाशील नज़र आए हैं। करीब साल भर पहले अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा भी था कि उनकी प्राथमिकताएँ बदल गयी हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि बतौर शायर उनके पास देने को बहुत कुछ है और उस हिसाब से उनके पास वक़्त कम है। अपनी नज़्मों की श्रंखला की नई पेशकश के तौर पर दिसंबर 2017 में राधाकृष्ण से उनकी एक किताब आई जिनका उन्होंने नाम रखा था पाजी नज़्में। वैसे जानना नहीं चाहेंगे आप कि ख़ुद गुलज़ार क्या कहते हैं इन नज़्मों के बारे में

कहते हैं, कीचड़ में पत्थर मारो
तो अपने ही मुँह पर आता है।
मैने तो यही सोचकर मारा था,
मगर कुछ छींटे दूसरॊं के मुँह पर भी जा पड़े!
कान पकड़ के माफी मांग ली।
ये सब 'करो और कान पकड़ लो' वाली नज़्में हैं।
पाजी इसलिए कि अकसर गुद्दी पर धप पड़ती है और
'धत पाजी' की आवाज़ आती है।
हालाँकि मज़ा लो, तो इतनी पाज़ी भी नही है!

#PaajiNazmein   #Gulzar   #BookReview  
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नासिर काज़मी की ग़ज़लों को लेकर सजाए इस आलेख में सुनिए उनकी दो पसंदीदा ग़ज़लें नूरजहाँ की दिलकश आवाज़ में.

#Ghazals   #noorjehan   #nasirkazmi  
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जितना खूबसूरत सोनमर्ग है उससे कहीं ज्यादा मुझे उसके पहले और बाद के पन्द्रह किमी का रास्ता लगा। देवदार के पेड़ों से सजे कई खूबसूरत घने जंगल रास्ते में देखने को मिले। पोपलर, विलो, चीड़, सेव के पेड़ों के आलावा भी भांति भांति के पेड़ दिखे जिसे मैं तो पहचान नहीं पाया। मुझे ये भी पता था कि चूंकि हम लेह की ओर जा रहे हैं., पेड़ों से लदी इन पहरी हरी भरी ढलानों को देखने का सुख मुझे आगे नहीं मिलेगा। घाटी के पहाड़ों की खूबसूरती को आत्मसात करते हुए गुलज़ार की लिखी वो पंक्तियाँ याद आ गयीं जिसमें पर्वत का एक आमंत्रण है एक प्रकृति प्रेमी के लिए

कभी आना पहाड़ों पर...
धुली बर्फों में नम्दे डालकर आसन बिछाये हैं
पहाड़ों की ढलानों पर बहुत से जंगलों के खेमे खींचे हैं
तनाबें बाँध रखी हैं कई देवदार के मजबूत पेड़ों से
पलाश और गुलमोहर के, हाथों से काढ़े हुए तकिये लगाये हैं
तुम्हारे रास्तों पर छाँव छिडकी है
मैं बादल धुनता रहता हूँ,
कि गहरी वादियाँ खाली नहीं होतीं
यह चिलमन बारिशों की भी उठा दूँगा, जब आओगे....

श्रीनगर से सोनमर्ग तक के रास्ते की जो खूबसूरती आँखों में समाई वो आज आप की नज़र..
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श्रीनगर प्रवास के पहले दिन हजरतबल से लौटते हुए हम नगीन झील तक पहुँचे। कुछ देर यूँ ही सूरज को झील के किनारे लगे पेड़ों के पीछे डूबता जाते देखते रहे।

अपनी नाव में सवार होकर जब अपने शहंशाह से हमने विदा ली तो सूरज दूर क्षितिज में खो चुका था। इक्का दुक्का खाली शिकारे भी पर्यटकों को घुमा कर अपने घर लौट रहे थे़। दिख रही थीं तो बस दोनों किनारे लगी हाउसबोट की कतार और उनके पीछे घेरा डाले पोपलर और विलो के पेड़। दरअसल इन पेड़ों के घेरे के बीच में ये झील अँगूठी में जुड़े नगीने की तरह फैली हुई है। इसीलिए इसका नाम नगीन झील पड़ा। भला हो बाहर से आने वाले पर्यटकों का जिन्होंने इस नगीन को नागिन में 😆तब्दील कर दिया है। अब फिल्मों के पीछे पागल जनता से आप और क्या उम्मीद रख सकते हैं?

इस नगीन झील के किनारे गहराती साँझ और फिर चमकीली सुबह के कुछ मोहक नज़ारे आपकी नज़र आज की इस पोस्ट में....http://www.travelwithmanish.com/2018/04/nageen-lake.html

#NigeenLake #NageenLake #Srinagar #travelwithmanish #JammuandKashmir
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हवाई जहाज से दिल्ली से श्रीनगर का सफ़र डेढ़ घंटे का है। आधे घंटे बाद से ही खिड़की के बाहर का नज़ारा लुभावने वाला हो जाता है। ऊँचाई पर रहते हुए जहाँ बर्फ से ढकी चोटियाँ बादलों से घुलती मिलती दिखाई देती हैं वहीं श्रीनगर के पास आते ही पीर पंजाल की पर्वतमालाओं के बीच की हरी भरी मोहक घाटियाँ आँखों को तृप्त कर देती हैं।

श्रीनगर के अधिकांश आकर्षण डल लेक के किनारे स्थित हैं। इसलिए आप शंकराचार्य मंदिर जाएँ या निशात बाग या फिर शालीमार बाग, ये झील सड़क केे एक ओर आपका हाथ थामे चलती रहेगी। डल झील का चक्कर लगाते हुए सबसे पहले मैं निशात बाग पहुँचा। इस बाग के चारों ओर की प्राकृतिक छटा कुछ ऐसी है कि यहाँ आते ही मन प्रसन्न हो जाता है। शायद इसीलिए इस बाग का नाम निशात बाग यानि खुशियों का बाग रखा गया। इसके ठीक पीछे जावरान की पहाड़ियाँ हैं तो सामने डल झील की विशाल जल राशि जो इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देती हैं।

तो आइए आज साथ चलें श्रीनगर की सैर पर...

#Srinagar #travelwithmanish #KashmirValley
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