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satish sharma
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*आज बहुत हू गंभीर मुद्दे पर एक लेख लिख रहा हूं।*🚩🚩🚩👇🏻
गद्दारों का महाभोज :

आज की सुबह कांग्रेस के लिए बेहद बुरी खबर ले कर आई । कांग्रेस के समर्थक पूर्व थलसेना अध्यक्ष दीपक कपूर ने यह स्वीकार कर तहलका मचा दिया कि वे उस 'देशविरोधी' मीटिंग का हिस्सा थे जो पाकिस्तान के आला अधिकारियों के साथ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर के घर हुई थी । इस मीटिंग के पश्चात ही गद्दार अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नीच' कहा था ।

आपकी जानकारी के लिए पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के हाल ही के भारत दौरे के वक्त मणिशंकर अय्यर ने डिनर मीटिंग का आयोजन किया था। कसूरी भारत मे 'भारत-पाक मौजूदा संबंध' विषय पर आयोजित एक गोष्ठी में भी हिस्सा लेने आए थे।

इस गोष्ठी के बाद 6 दिसंबर 2017 को 'भारत को नष्ट करने ' विषय पर चर्चा करने हेतु 'महा गद्दार' अय्यर के घर एक मीटिंग रखी गयी। इस मीटिंग में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह, पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर, पूर्व राजनयिक सलमान हैदर, टीसीए राघवन, शरत सभरवाल और के. शंकर बाजपेयी मौजूद थे। बाजपेयी, राघवन और सभरवाल पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त भी रह चुके हैं।

यह सभी देश विरोधी चेहरे इंडियन एक्सप्रेस , ABP न्यूज से लेकर देश के सभी बड़े समाचार पत्रों में आज की सुर्खियों में है । यह सभी लश्करे कांग्रेस नामक उस संगठन के सदस्य है जो हमारे देश को बर्बाद करने का सपना पाले हैं ।

आज सबसे पहले चर्चा पूर्व सेनाध्यक्ष की। 2007 में जनरल दीपक कपूर को सेनाध्यक्ष बनाया था । जनरल कपूर ने उस समय के रक्षा उत्पाद राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के साथ मिलकर पुणे में सेना की ज़मीन को बेच घोटाला किया था*। *जनरल दीपक कपूर घोटालेबाज हैं ,इस पर जनरल V K सिंह ने जाँच भी बिठाई थी ।

6 दिसम्बर की रात महा गद्दार अय्यर के घर पाकिस्तानी उच्चायुक्त के साथ मिलने वालो में पूर्व सेनाध्यक्ष का शामिल होना एक बहुत ही चिंताजनक संकेत है । आज खबर निकली हैं की कपूर बोल रहा हैं उस मीटिंग में भारत - पाक रिश्ते की बात हुई थी ।अय्यर ,अंसारी ,मनमोहन जैसे गद्दार राजनीतिकों के साथ ये कपूर कौन सा रिश्ता निभा रहा था ? यह जानना जरूरी है ।

गद्दारों के इस महाभोज की जाँच अत्यंत जरूरी है । गद्दारो पर बिलकुल नरमी ना हो , यह मोदी सरकार को देखना होगा

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Amit Mishra जी के सौजन्य से:

घटना संख्या 1
सूरत शहर मे एक विवाहिता हिन्दू लड़की एक मुस्लिम के जाल में फंस जाती हैं , कुछ समय बाद लड़की को अपने पति का घर छोड़कर मुस्लिम लड़के के घर रहना पड़ता है (ब्लैकमेल) । बाल बच्चेदार पति बच्चो की खातिर उस लड़के से पत्नी वापिस प्राप्त करने जाता है जिसे मारपीट कर भगा दिया जाता है कि अब यह " हमारी " हो गई , लड़की अब तक कई लोगो द्वारा प्रयोग में लाई जा चुकी थी , वह भी अपनी करनी पर लज्जित इस नरक से बाहर निकलना चाहती थी लेकिन तब तक वहाँ आस पाड़ोस सहित समाज मे इस घटना से बदनामी आग की तरह फैल जाती है और वह पति शर्म से आत्महत्या कर लेता है ।
इस दबाव से अंतिम संस्कार के बहाने मूल गांव (राजसमंद का ही ) आई लड़की अपने पीहर ही रहकर इस नरक से निकलती है और आज समाज में नजर नीची किये रहती है ।
मुस्लिम लड़का बिल्कुल आराम से अब तक ऐसे 8-10 केस और निपटा चुका होगा ।

(मेरी आँखोदेखी घटना है और परिवार को मैं निजी रूप से बहुत अच्छे से जानता हूँ ,ब्राह्मण ही है ।)

घटना क्रमांक 2
राजसमंद के ही एक गांव में " खेल " (करतब) दिखाने ठहरे एक मुस्लिम दल द्वारा खेंतो मे डेरा (तंबू) डाला जाता है जहाँ से आगे खेंतो को जाने वाली एक विवाहित स्त्री को एक मुस्लिम लड़का शारीरिक सम्बंध बनाने के लिए फांसने का प्रयास करता है , लड़की साफ मना कर देती है । पति प्रदेश कमाने गया हुआ था , अगले दिन वह लड़का जबर्दस्ति पर उतारू हो जाता हैं लेकिन वह लड़की जैसे तैसे बच निकलती हैं और जाते जाते यह कहने की भूल कर देती है कि मैं यह बात अब गांव वालों को बताऊंगी ।
लड़का दौड़ कर आता है और उसे दबोचकर गला घोंटकर जान से मार देता है ।
गांव मे हड़कंप मच जाता हैं और सभी करतबी भी गायब हो चुके होते है तब तक , लोग हाइवे न 8 जाम कर देते है , पुलिस लड़के को ढूंढती है , गिरफ्तारी के बाद आगे क्या हुआ कोई नही जानता ।
ना सबूत ,ना पेशियां , पुलिसवालों को कुछ ले देकर वो छूट छाटकर गायब हो चुका ।
यह लड़की मेरी दूर की रिश्ते में बहन लगती थी तो ब्राह्मण ही थी , व्यथित हालात में मैने उनके पति को कहा कि काट क्यों नही देते उस मादर???द को ??
वो बोले इन बच्चो का क्या होगा माँ -बाप का क्या होगा , संपत्ति विवाद ,कर्जे , घर बार सबकुछ गिना दिया उन्होंने ।
मैं चुप हो गया , हर हिन्दू चुप ही रहता है ।

घटना क्र. 3 -
उदयपुर शहर चांदपोल क्षेत्र , कुछ मुस्लिम युवक सरेआम एक शादिशुदा जोड़े को रोककर महिला से बदतमीजी करते है , दूसरे दिन अखबार में समाचार पढ़के सारा शहर दंग रह जाता है कि उदयपुर जैसे शांत एवं सभ्य जगह पर जहाँ होली के दिन भी आप सपत्नीक दुपहिया वाहन पर निसंकोच आ जा सकते है हो वहाँ ऐसी हरकत ??

जिला राजसमंद ,गाँव धोइंदा

रैगर समाज के पुश्तेनी काम चर्मकारी को तथाकथित सामाजिक उत्थान आंदोलन और चमड़ा फैक्टरियां लूट चुकी तो अब यह समाज ज्यादातर कंस्ट्रक्शन साइटों पर मजदूरी करता है जहाँ कम पैसे के चक्कर में कई आयातित मुस्लिम भी मजदूरी /कारीगरी करते हैं।
ऐसे ही कुछ मुस्लिम कारीगरों ने रैगर समाज की 3-4 मज़दूरनियो को फांस कर पहले शोषण किया और फिर अपने साथ ले जाकर कालीचक (प.बंगाल का आपराधिक केंद्र ) वैश्यावृत्ति हेतु बेच दिया ।
उनमे से एक लड़की के मुँहबोले मामा का बेटा जो मार्बल का व्यापारी था और सजग धार्मिक नागरिक था वह स्तब्ध रह गया , दूर कस्बे की आग अब उनके पड़ोस के घर तक पहुंच चुकी थी । वह पुरुषार्थी था तो हिम्मत की अपनी बहन जैसी लड़की को बचाने उस "ममतामयी " चक्रव्यूह बंगाल से उस बहन को बचाके लाने की , मौत के घर मे जल्लादों से भिड़ कर युक्ति लगा कर वह उस लड़की को ले आया ।
लड़की तो आ गई लेकिन उन दल्लो और जल्लादों के आंखों में खटक गया कि ऐसे तो यह दुकानदारी ही खत्म हो जाएगी जिसमे "सभी का हिस्सा " बदस्तूर पहुंचता है ।बंगाली जल्लादों ने संदेश भिजवाया राजसमंद (हिंदुआ सूर्य की भूमि मेवाड़) के स्थानीय जल्लाद भाइयों को की इस गुस्ताख़ को इसकी औकात दिखाई जाए जिसने हमारे शिकार को बचाने की जुर्रत की ।
स्थानीय जल्लाद जिनके हौंसले हमेशा दीनी सहायता , मक्कारी तिकडमों और बेईमान बिके हुए हिन्दुओ की गद्दारी के बूते सांतवे आसमान पर ही होते है वे लगे उस वीर को धमकाने , बारह साल की मानसिक दिव्यांग लड़की तक के कत्ल की धमकियों के साथ !
मूर्ख नही था वह ! पता था कि जो जंग उसने छेड़ी है उसमें सामने वाला पक्ष प्रतिघात तो करेगा ही पहले से अधिक घातक वार के साथ करेगा । बहुत विचार किया उसने , बहुत कागजी शेरों को एक्शन के नाम पर संवैधानिक होते देखा , कईयों ने तो बुद्ध ,महावीर और गांधी तक कि कसमें दिला दी लेकिन जाने वह कौनसी मिट्टी का बना था उसने क्रूरता का जवाब दो कदम और घटिया क्रूरता से देने का निर्णय किया ।

पता था उसे की पुलिस ,प्रशासन और कोर्ट से ज्यादा प्रश्न उन्ही के दिलो मे उठेंगे जिनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए वह अपना जीवन बलिदान करने जा रहा है ।

आप वीडियो देखकर विचलित हो गए ??
प्राकृतिक हैं ,नही देखा जाता , अभ्यास जो नही है , इराक मे isis के धर्मगौरव लड़ाकों द्वारा मारी गई कूर्द बच्चियों के केवल मृत शरीर देखियेगा ये वीडियो भूल जाएंगे आप ।

महाभारत के युद्ध का एक दृश्य हैं जब अर्जून क्रोध में भरकर अपनी खड्ग लिए अपने ही सेनापति और श्याले धृष्टद्युम्न को मारने दौड़ते है , शस्त्र त्याग कर युद्धभूमि पर निशस्त्र समाधिस्थ गुरुश्रेष्ट द्रोण के सिर को काटकर धृष्टद्युम्न प्रतिशोध का उत्सव मना रहा होता है पागलों की तरह , लेकिन कृष्ण रोकते है अर्जुन को और कहते है कि यह युद्ध है इसमे भीम भी चाहिए जो दुःशासन की भुजाएं उखाड़ फेंके और हृदय का रक्त पी जाएं , यहाँ घटोतकच्छ भी चाहिए जो शत्रु सैनिक को बीच मैदान जीवित निगल जाए और धृष्टद्युम्न भी चाहिए जो द्रोण को मार सकें जिसे मारने की ईच्छा तुम पांडवो की कभी थी ही नही और किसी का यह सामर्थ्य नही ।धृष्टद्युम्न ने जो किया सही किया या नही यह प्रश्न है ही नही ,प्रश्न है कि कौरवों के सफाये के लिए यह कृत्य अपरिहार्य हैं या नही , और हाँ यदि यह टाला जा सकता था तो द्रोपदी चीर हरण के नए संस्करण के लिए स्वयं को तैयार कर लो पार्थ ।

हिन्दू समाज को भी यह समझना पड़ेगा " its bloody war ! Damn war for the existence of fittest , at any cost ! "

शम्भू ने जो किया वह उचित /अनुचित , सही /गलत से परे अपरिहार्य मात्र था । बेईमान पुलिस , जालसाज शत्रु , सत्तालोलुप नेताओ और नपुंसक न्यायव्यवस्था से निराश एक स्वाभिमानी व्यक्ति और कर भी क्या सकता था ??
कौन जिम्मेदार है आखिर इस विभत्स घटना का ??
मात्र शंभु ?
मृतक अफराजुल ?
जेहादी मानसिकता जो अब वैश्यावृति जेहाद तक पहुंच गई है ?
हिन्दू -मुस्लिम वैमनस्य ?
वोट बैंक की प्यासी सरकारे ?
न्याय व्यवस्था की लीपापोती करने वाला प्रशासन ??
रिश्वतखोर भ्रष्ट पुलिस ?
सोते हिन्दू ??

क्या सभी जिम्मेदार नही है इस घटना के लिए ??
हर समाज कुछ लिखित +अलिखित नियमो से चलता है , स्त्री पर आधिपत्य भी एक ऐसा ही विषय है ।
आपको देश का कानून इजाजत दे सकता है अंतर्धार्मिक विवाह की लेकिन संबंधित समाज कभी इन संबंधों को स्वीकृति नही देता जिनके रीति ,रिवाजो , खान पान , रहन-सहन , जीवन मूल्यों एवं मुख्य विचारधारा मे उत्तर -दक्षिण का फर्क हो !
हम कितने भी सभ्य सुसंस्कृत क्यों ना हो जाये स्त्री पर आधिपत्य को लेकर हमारे अवचेतन मे हमेशा कबीलाई संस्कृति ही जिंदा रहेगी और खासकर तब जबकि एक पक्ष बिल्कुल आदिकालीन कब्जाई रणनीति ओर उतर आया हो ।
क्या कोई जाति ,धर्म अपने अस्तित्व के लिए आत्मरक्षा के लिए लड़ें भी नही जबकि जिम्मेदार व्यवस्थाएं मात्र पाखंड कर के इतिश्री कर ले ।

जो मारा गया वह उस नेक्सस का सबसे आसान शिकार था , शम्भू ने लड़ाई की शुरुआत आसान शिकार से की ताकि बाकी के अपेक्षाकृत अधिक क्रूर और संसाधनों से लैस उसके साथी जल्लादों तक उसके आक्रमण का संदेश इस तरह से जाए कि उनकी चूलें हिल जाए , इसीलिये उसने इतना क्रूर कर्म करना स्वीकार किया जिसका स्वयं वह भी अभ्यस्त नही था ।

मुस्लिम भाइयों ! चालाकी और धूर्तता आपको एक मोर्चा जितवा सकती है विश्वयुद्ध नही , ये काठ की हांडी रोज नही काम दे सकती । भारत मे रहकर हिन्दुओ के शोषण का जो अनैतिक पाप आप लोग चंद सत्तालोलुपो के उकसाने पर कर रहे है हो वह कभी न कभी आपके लिए अस्तित्व का खतरा बनके सामने आएगा ही और उस दिन ये लोग एक क्षण में पाला बदल लेंगे और आपके साथ दूसरा बर्मा घटित हो जाएगा । अपने युवाओ को बच्चो को दूसरे समाज की स्त्रियों के प्रति उचित व्ययवहार का प्रशिक्षण दीजिये अन्यथा बिलो दी बेल्ट आघात का प्रतिघात सिक्स इंच बिलो दी बेल्ट ही मिलेगा ,यह तय है । हिन्दुओ की धार्मिक सहिष्णुता और वैचारिक टॉलरेन्स का बहुत दुरपयोग हो चुका अब भी वक्त है सुधर जाइये । भारत जैसी भूमि और ऐसे लोग कही नही मिलेंगे यह सिद्ध करने की आवश्यकता नही है ।
आपके नकली रहबर आजकल शम्भू की ही तरह माथे पर चंदन लगाए मंदिर मंदिर भटक रहे है ,ये इशारा है समझ जाइये ।

भाजपा सरकार और प्रशासन जो स्वयं बांग्लादेशियों को बंगाली आधार कार्ड देकर भारत भर के शांत इलाको को बर्बाद करने के षडयंत्रो को देखते हुए भी शुतुरमुर्ग की तरह मिट्ठी मे मुँह दबाके के बैठी है वह भी उतनी ही दोषी है जो अब इस घटना को शंभू की निजी सनक और मानसिक स्तिथि का नाम देकर लीपापोती मे लगी हुई है ।

आखिर क्या हम अपने खून पसीने से टैक्स इसलिए चुकाते है कि ये बांग्लादेशी /रोहिंग्या दरिंदे हमारी ही भूमि और हमारे ही संसाधनों का दोहन करके हमारी ही बहन बेटियों से वैश्यावृत्ति करवाये ??
शर्मनाक है यह स्टैंड इन सरकारो का और इस घोर अन्यायपूर्ण आत्मघाती अन्धव्यवस्थाओ का ।

आज हजारों शांतिदूतों की भीड़ के सामने आप रेगरों के साथ अन्याय करके जो इस आग को दबाने का प्रयत्न कर रहे हो यही आग एकदिन ज्वालामुखी बनकर फूटेगी बर्मा ,मुजफ्फरनगर और गुजरात की तरह शायद तभी सभी को समझ आयेगा की राजसमंद मे आखिर हुआ क्या था ?

और है वीडियो देख़कर आंसुओ से बुद्ध बन जाने वाले हिन्दुओ कम से कम चुप रहकर ही अपनी मूर्खता साबित होने से बचालो अन्यथा वह दिन दूर नही जब ये आग तुम्हारे भी घर के ठीक पास ही होगी ।

-अज्ञात लेकिन सभी को ज्ञात
हर हर महादेव

साभार Yogeshwer Paliwal

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24 घंटे आक्सीजन देने वाली तुलसी के पेड़ के नीचे घी का *🔥दीपक जलाने वाले हिन्दुओ को अंधविश्वासी कहने वाले...

25 दिसंबर को प्लास्टिक के पेड़ 🎄पर ढेरों बल्ब जला कर अपनी आधनुकिता का परिचय देंगे ...
😊😊😊😊
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6 दिसम्बर 1992 शौर्य दिवस पर प्रथम शहीद राम कोठारी – शरद कोठारी एवं कारसेवा में अपना बलिदान देने वाले कोटि-कोटि जनों को श्रद्धांजलि. भारत की संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतिक भगवान श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बने, यही उन कारसेवको को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया. स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया. इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और काशी विश्वनाथ मन्दिर के सीने पर बनी मस्जिदें सदा से हिन्दुओं को उद्वेलित करती रही हैं. इनमें से श्रीराम मन्दिर के लिये विश्व हिन्दू परिषद् ने देशव्यापी आन्दोलन किया, जिससे 6 दिसम्बर, 1992 को वह बाबरी ढाँचा धराशायी हो गया.श्रीराम मन्दिर को बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीर बाकी ने 1528 ई. में गिराकर वहाँ एक मस्जिद बना दी. इसके बाद से हिन्दू समाज एक दिन भी चुप नहीं बैठा. वह लगातार इस स्थान को पाने के लिये संघर्ष करता रहा. 23 दिसम्बर, 1949 को हिन्दुओं ने वहाँ रामलला की मूर्ति स्थापित कर पूजन एवं अखण्ड कीर्तन शुरू कर दिया. ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ द्वारा इस विषय को अपने हाथ में लेने से पूर्व तक 76 हमले हिन्दुओं ने किये; जिसमें देश के हर भाग से तीन लाख से अधिक व्यक्तियों का बलिदान हुआ; पर पूर्ण सफलता उन्हें कभी नहीं मिल पायी.विश्व हिन्दू परिषद ने लोकतान्त्रिक रीति से जनजागृति के लिये श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन कर 1984 में श्री रामजानकी रथयात्रा निकाली, जो सीतामढ़ी से प्रारम्भ होकर अयोध्या पहुँची. इसके बाद हिन्दू नेताओं ने शासन से कहा कि श्री रामजन्मभूमि मन्दिर पर लगे अवैध ताले को खोला जाये. न्यायालय के आदेश से 1 फरवरी, 1986 को ताला खुल गया.इसके बाद वहाँ भव्य मन्दिर बनाने के लिये 1989 में देश भर से श्रीराम शिलाओं को पूूजित कर अयोध्या लाया गया और बड़ी धूमधाम से 9 नवम्बर, 1989 को श्रीराम मन्दिर का शिलान्यास कर दिया गया. जनता के दबाव के आगे प्रदेश और केन्द्र शासन को झुकना पड़ा. पर मन्दिर निर्माण तब तक सम्भव नहीं था, जब तक वहाँ खड़ा ढांचा न हटे. हिन्दू नेताओं ने कहा कि यदि मुसलमानों को इस ढाँचे से मोहहै, तो वैज्ञानिक विधि से इसे स्थानान्तरित कर दिया जाये; पर शासन मुस्लिम वोटों के लालच से बँधा था. वह हर बार न्यायालय की दुहाई देता रहा. विहिप का तर्क था कि आस्था के विषय का निर्णय न्यायालय नहीं कर सकता. शासन की हठधर्मी देखकर हिन्दू समाज ने आन्दोलन और तीव्र कर दिया.इसके अन्तर्गत 1990 में वहाँ कारसेवा का निर्णय किया गया. तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी. उन्होंने घोषणा कर दी कि बाबरी परिसर में एक परिन्दा तक पर नहीं मार सकता; पर हिन्दू युवकों ने शौर्य दिखाते हुए 29 अक्तूबर को गुम्बदों पर भगवा फहरा दिया. बौखला कर दो नवम्बर को मुलायम सिंह ने गोली चलवा दी, जिसमें कोलकाता केदो सगे भाई राम और शरद कोठारी सहित सैकड़ों कारसेवकों का बलिदान हुआ.इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी. एक बार फिर 6 दिसम्बर, 1992 को कारसेवा की तिथि निश्चित की गयी. विहिप की योजना तो केन्द्र शासन पर दबाव बनाने की ही थी; पर युवक आक्रोशित हो उठे. उन्होंनेवहाँ लगी तार बाड़ के खम्भों से प्रहार कर बाबरी ढाँचे के तीनों गुम्बद गिरा दिये. इसके बाद विधिवत वहाँ श्री रामलला को भी विराजित कर दिया गया. इस प्रकार वह बाबरी कलंक नष्ट हुआ और तुलसी बाबा की यह उक्ति भी प्रमाणित हुई – "होई है सोई, जो राम रचि राखा/"

🚩🚩जय श्रीराम🚩🚩
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आज राहुल गांधी खुद इस विवाद मैं फंस गए हैं कि वे हिन्दू हैं या गैर हिन्दू क्या देश का प्रधानमंत्री बनकर वे बिना पढ़े हस्ताक्षर कर सकते हैं यह एक विचारणीय प्रश्न है जो भारत के लिए कभी भी खतरा हो सकता है उसे कांग्रेस अपनी पार्टी का अवयश पद क्यों देना चाह रही हैं
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❓❓ कहाँ गए वो प्यारे दिन जब... ❓❓

➨ रात को सोने से पहले परिवार के सारे सदस्य घंटो बातें किया करते थे और रात का एक बज जाता था, बच्चों को शूरवीरों की कहानियाँ सुनाई जाती थी |
अब सब हाथ में मोबाइल लिए हुए सो जाते हैं.....
.
➨ लाइट जाती थी तब पूरा मोहल्ला बड़ के पेड़ के नीचे बैठ कर एक दुसरे की टांग खीचते थे |
अब तो inverters की वजह से घर से ही नहीं निकलते....
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➨ चूल्हे की आग पर डेगची में गुड़ वाली चाह् (चाय) की महक 10 किल्ले दूर तक जाती थी |
आज चाय गैस पर बनती है महक छोडो स्वाद का भी पता नहीं लगता....
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➨ औरतें घूँघट काढती थी और लडकिया चुन्नी लेती थी |
अब कवारियां ढाठा मार के सुल्ताना डाकू बन रही हैं और ब्याही हुई सर भी नहीं ढक रही....

➨ पहले पूरे दिन हारे पर कढोणी में दूध उबलता था और सीपी से खुरचन तार के खाते थे और उस दूध की दही इतनी स्वाद बनती थी |
अब तो गए दूकान पर 15 का दही पाउच ले लिया....
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➨ कोई रोता था तो सब चुप करवाते थे |
अब सब रुलाते है....
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➨ कच्ची फूस की छान में पानी मार कर झोपडी में सोने में बहोत मज़ा आता थी बिलकुल ठंडी हो जाती थी |
अब वैसे ठंडक AC भी नहीं दे रहे....
.
➨ पहले बड़ी मूँछ और सफ़ेद पगड़ी में चौधरियों की चौधर न्यारी ही दिखती थी | एक आवाज से ही पूरा गाँव कट्ठा हो जाता था |
अब ना पगड़ियाँ ना मूँछ क्लीन शेव रहते है और ना आवाज में कोई दम....
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➨ दारु बड़े बूढे पीते थे |
अब तो 8वीं से ही पीना शुरू कर देते हैं....
.
➨ पहले ज़मीन को माँ समझा जाता था |
अब एक जमीन का टुकड़ा जिसे बेच कर कोठी बना लो, एक कार ले लो और रोज उस कार में बैठ कर दारु और मुर्गा चलने दो....
.
➨ पहले गाँव की लड़की वापिस अपने मायके आती तो पूरा गाँव पूछता की बेटी ठीक है ना सब |
अब इसलिए मुँह घुमा लेते है कहीं 10 रूपए मान के ना देने पड़ जाऐं....
.
➨पहले सभी एक दूसरे को राम राम बोलते थे |
अब हेल्लो हाय....

🔜 पहले लड़ाइयां इज़्ज़त और सम्मान के लिए लड़ी जाती थी |
अब दारु पीकर अपने आप हो जाती हैं....

गाय हमारी
COW बन गयी,
शर्म हया अब
WOW बन गयी,

काढ़ा हमारा
CHAI बन गया,
छोरा बेचारा
GUY बन गया,

योग हमारा
YOGA बन गया,
घर का जोगी
JOGA बन गया,

भोजन 100 रु.
PLATE बन गया,
..हमारा भारत
GREAT बन गया..

घर की दीवारेँ
WALL बन गयी,
दुकानेँ
SHOPING MALLबन गयीँ,

गली मोहल्ला
WARD बन गया,
ऊपरवाला
LORD बन गया,

माँ हमारी
MOM बन गयी,
छोरियाँ
ITEM BOMB बन गयीँ,

तुलसी की जगह
मनी प्लांट ने ले ली..!
चाची की जगह
आंटी ने ले ली..!

पिता जी डेड हो गये..!
भाई तो अब ब्रो हो गये..!
बेचारी बेहन भी अब
सिस हो गयी..!

दादी की लोरी तो अब
टांय टांय फिस्स हो गयी..!

टी वी के सास बहू में भी
अब साँप नेवले का रिश्ता है..!
पता नहीं एकता कपूर
औरत है या फरिश्ता है..!!!

जीती जागती माँ बच्चों के
लिए ममी हो गयी..!
रोटी अब अच्छी कैसे लगे
मैग्गी जो इतनी यम्मी हो गयी..!

गाय का आशियाना अब
शहरों की सड़कों पर बचा है..!
विदेशी कुत्तों ने लोगों के
कंधों पर बैठकर इतिहास रचा है..!

बहुत दुखी हूँ ये सब देखकर
दिल टूट रहा है..!

हमारे द्वारा ही हमारी
भारतीय सभ्यता का
साथ छूट रहा है.....





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