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Umesh Kumar Patel
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गोरखपुर 30 अक्टूबर 2015
आठवें दिन राष्ट्रीय पुस्तक मेले में भक्ति संगीत की बही सरिता
पुस्तक मेला 1 नवम्बर तक चलेगा
गोरखपुर 30 अक्टूबर 2015। टाउनहाल के मैदान में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय पुस्तक मेंले में आज वैदिक भक्ति संगीत और वेद पर प्रवचन आयोजित हुआ, जिसमें गुरुकुल होशंगाबाद म0प्र0 के विद्वान आचार्य योगेन्द्र यज्ञिय ने साहित्य संस्कार-संस्कृति की वैदिक अभिव्यक्ति के माध्यम से भारत वर्ष के पूर्व गौरवमयी गरिमा का दिग्दर्शन करने के साथ ही साथ उपस्थित श्रोताओं की समस्याओं का समाधान वेद सम्मत विचारों से करते हुए दयानन्द सरस्वती के अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश को पढने से प्ररित भी किया। दिनेश दत्त ने अपने सुमधुर गीतों तथा उपदेशों की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। श्री नेम प्रकाश आर्य ने वेदों में वर्णित धनुर्विद्या का अत्यंत ही सजीव प्रदर्शन करतु हुए शब्द भेदी बाण का आंख बन्द करके लक्ष्यों का भेदन कर धनुर्विद्या के चमत्कार को दिखा कर लोगों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गो0वि0वि0 गोरखपुर के संगीत एवं ललित कला के पूर्व विभागाध्यक्ष भारत भूषण जी थे। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।
अपराह्न 4 बजे लेखक से मिलिए कार्यक्रम के अन्तर्गत सुप्रसिद्ध कवि आर.डी.एन. श्रीवास्तव ने अपनी रचना प्रक्रिया में समाज में घट रही घटनाओं का व्यंग्य के माध्यम से अभिव्यक्ति करने की छटपटाहट के बारे में बताया। बहराइच से आये प्रसिद्ध गजलकार डा0 अशोक गुलशन ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा कि समाज में जो भी घटित घटनायें होती हैं उन्हें रचनाओं में ढालने का प्रयास ही मेरी रचना सृजन करने की प्रेरणा होती है। गुलशन ने अपनी गजल में समाज के बदलते परिवेश में बिखण्डित होती मान्यतओं को सहेजने का प्रयास करती गजल प्रस्तुत कर लोगों की आंखे नम कर दिया। बस्ती के जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र ‘गैर’ ने बताया कि वे समाज में जो कुछ भी देखते और सुनते हैं उन्हें कलमबद्ध करने कला ही मेरी रचना का मुख्य विन्दु रहा है। उन्होंने समाज में हो रही विसंगतियों पर आधारित गजल सुनाकर लोगों भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डा0 उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया। अन्त में मेला संयोजक देवराज अरोरा ने मंचासीन साहित्यकारो को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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29 अक्टूबर 2015 गोरखपुर टाउनहाल के मैदान में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय पुस्तक मेंला.........
सातवें दिन राष्ट्रीय पुस्तक मेला कहानी पर रहा केन्द्रित
लेखक से मिलिए कार्यक्रम के अन्तर्गत युवा कथाकार अमित कुमार ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा कि साहित्य सृजन मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि एक बेहतर दुनियां के निमार्ण का स्वप्न भी है। साहित्यकार सदैव स्वप्नदृष्टा होता है। अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कथाकर मदन मोहन ने कहा कि किसी लेखक की रचना प्रक्रिया उसका एकदम निजी मामला होता है, परन्तु उसकी रचना जब पूर्ण हो जाती है तो वह निजी नहीं रह जाता, बल्कि लोक का हो जाता है। प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह पढकर मैं इतना उद्वेलित हुआ कि मैं यह सोचने का विवश हो गया और वहीं से लेखन का बीज प्रस्फुटित हुआ। इतिहासकार डा0 रमाकान्त कुशवाहा ‘कुशाग्र’ ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में अपस्थित श्रोताओं से चर्चा करते हुए कहा कि परिस्थितियों ने ही मुझे लेखक बनाया, क्योंकि मेरे जीवन के घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी की तरह है, जहां बचपन से ही प्रतिदिन एक संघर्ष से दो चार होना पड़ता है। बुद्ध को पढने और जानने के बाद मेरे मन में उनके इतिहास को जड़तक जानने की विवशता हुई जिसका परिणाम बुद्ध के बंशज, बुद्ध और सम्राट अशोक एवं खत्तीय जातियां पुस्तकों के रुप में पाठकों के समझ है। कार्यक्रम का संचालन डा. उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया।
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गोरखपुर के टाउनहाल मैदान में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में उमेश पटेल ‘श्रीश’ का स्वागत एवं सम्मानित करते हुए मेला संयोजक देवराज अरोरा एवं उमेश ढल्ल
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19/11/15
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गोरखपुर के टाउनहाल मैदान में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में उमेश पटेल ‘श्रीश’ का स्वागत एवं सम्मानित करते हुए मेला संयोजक देवराज अरोरा एवं उमेश ढल्ल
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24 अक्टूबर 2015
गोरखपुर के टाउनहाल मैदान में आयोजित दूसरा राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लेखक से मिलिए कार्यक्रम मे लखनऊ के अजय श्री अजय और दिल्ली की श्रद्धा पांडे के साथ उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने भारी जनसमूह के समक्ष अपनी रचना प्रक्रिया पर चर्चा करते हुये
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पांचवे दिन राष्ट्रीय पुस्तक मेले में संविधान चर्चा की रही धूम
पुस्तक मेला 1 नवम्बर तक चलेगा
आज 27 अक्टूबर।
भारतीय गणराज्य में लोकतंत्र पूरे विश्व में अपनी विशेषता और विस्तृतता के लिए जाना जाता है और उस लोकतंत्रीय व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है, हमारा संविधान। वास्तव में भारतीय संविधान, उसकी मूल बातों की जानकारी देश के जागरिकों को बहुत कम ही पता होती है। भारतीय जनता का संविधान के अनुरुप मूल अधिकार और कर्तव्य क्या हैं ? यह बहुत कम लोगों को ही पता है। संविधान की मूल बातों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ‘जागो गणराज्य जागो’ नामक पुस्तिका मुफ्त में वितरित की जा रही है। आज उस पुस्तिक के लेखक गिरीश पाण्डे जी आज मेला पंडाल के सांस्कृतिक मंच पर स्वयं उपस्थित होकर संविधान कथा के माध्यम से संविधान की महत्वपूर्ण बातों की जानकारी सरल और सुबोध भाषा में लोगों को बताये। संविधान कथा की चर्चा में भाग लेने के लिए मंच पर से.नि. डी.जी.,आन्ध्र प्रदेश के विवेक दूबे,प्रो0 मिहिर राय चैधरी, प्रो0टी.एन.पाण्डेय, से.नि. प्रो0 अशोक सक्सेना, मेला संयोजक देवराज अरोरा एवं उमेश ढल जी ने भी अपने विचार रखे। जिसको सुनने के लिए काफी तादाद में लोगों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का कुशल संचालन उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया।
आज पुस्तक मेले में उमेश हिन्दुस्तानी की पुस्तक ‘अफसाना-ए-दिल’ का लोकार्पण किया गया, जिसके मुख्य अतिथि डा0 वेदप्रकाश पाण्डेय एवं विशिष्ट अतिथि के रुप में सुचित कुमार श्रीवास्तव एवं सुधीर श्रीवास्तव जी उपस्थित थे। डा0 पाण्डेय ने पुस्तक की चर्चा करते हुए बताया कि आलोचना के साथ सामयिकता लाते हुए यह रचना निश्चित रुप से साहित्य में अपना एक स्थान रखेगी।
अपराह्न 4 बजे - लेखक से मिलिए कार्यक्रम में आज लखनऊ से आये प्रेम नारायण मेहरोत्रा ने अपनी रचना प्रक्रिया में -राम नाम की मधुशाला के अन्तर्गत आध्यात्मिक चिंतन और भक्तिमय मौहौल से श्रोताओं को अभिभूत कर दिया। दूसरे लेखक के रुप में कहानीकार कृष्ण गोपाल श्रीवास्तव ने जीवन के कटु यथार्थ को मिथकीय प्रयोगो के माध्यम से कहानी ‘खो गये हैं आप’ की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का कुशल संचालन उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया। अन्त में रचनाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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26 अक्टूबर 2015
गोरखपुर के टाउनहाल मैदान में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लेखक से मिलिए कार्यक्रम मे भारी जनसमूह के समक्ष अपनी रचना प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए भोजपुरी के वरिष्ठ कवि रवीद्र श्रीवास्तव ‘जुगानी जी’ के साथ मंच पर पत्रकार एवं साहित्यकार डा0 चेतना पाण्डेय, खेल और विज्ञान लेखक संजय वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डा0 रामदेव शुक्ल और कार्यक्रम संचालक की भूमिका में डा0 उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’
अन्त में मंचासीन साहित्यकारों का मेला संयोजक देवराज अरोरा ने सम्मान भी किया
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28 अक्टूबर 2015
गोरखपुर के टाउनहाल मैदान में दिनांक 23 अक्तूबर 2015 से चल रहे दूसरे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में छठवें दिन लेखक से मिलिए कार्यक्रम के अन्तर्गत कवि सुरेश चंद ने जहां गांव एवं गरीबी का वास्तविक परिदृश्य का बड़ी ही बेबाकी के साथ प्रस्तुति किया।
वहीं कवियत्री अनीता अग्रवाल ने पारिवारिक सम्बंधों को जोड़ते हुए कहा कि भावनाएं कभी भी समाप्त नहीं होती बल्कि परिवर्तित रुप में विद्यामान रहती हैं।
मशहूर शायर फिरोज अश्क ‘लक्ष्मीगंजवी’ ने अपनी ओेजपूर्ण वाणी में भ्रूण हत्या का ऐसा चित्रण किया कि उनकी प्रस्तुति देखकर लोगों की आंखे नम ही नहीं हुई, बल्कि बेटी बचाओ अभियान मे उनकी रचना काफी हद तक मददगार बनेगी।
कार्यक्रम का संचालन डा. उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया।कार्यक्रम के अन्त में सभी साहित्यकारों को राष्ट्रीय पुस्तक मेला संयोजक देवराज अरोरा ने सम्मानित भी किया
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29 अक्टूबर 2015 गोरखपुर टाउनहाल के मैदान में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय पुस्तक मेंला.........
सातवें दिन राष्ट्रीय पुस्तक मेला कहानी पर रहा केन्द्रित
लेखक से मिलिए कार्यक्रम के अन्तर्गत युवा कथाकार अमित कुमार ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा कि साहित्य सृजन मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि एक बेहतर दुनियां के निमार्ण का स्वप्न भी है। साहित्यकार सदैव स्वप्नदृष्टा होता है। अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कथाकर मदन मोहन ने कहा कि किसी लेखक की रचना प्रक्रिया उसका एकदम निजी मामला होता है, परन्तु उसकी रचना जब पूर्ण हो जाती है तो वह निजी नहीं रह जाता, बल्कि लोक का हो जाता है। प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह पढकर मैं इतना उद्वेलित हुआ कि मैं यह सोचने का विवश हो गया और वहीं से लेखन का बीज प्रस्फुटित हुआ। इतिहासकार डा0 रमाकान्त कुशवाहा ‘कुशाग्र’ ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में अपस्थित श्रोताओं से चर्चा करते हुए कहा कि परिस्थितियों ने ही मुझे लेखक बनाया, क्योंकि मेरे जीवन के घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी की तरह है, जहां बचपन से ही प्रतिदिन एक संघर्ष से दो चार होना पड़ता है। बुद्ध को पढने और जानने के बाद मेरे मन में उनके इतिहास को जड़तक जानने की विवशता हुई जिसका परिणाम बुद्ध के बंशज, बुद्ध और सम्राट अशोक एवं खत्तीय जातियां पुस्तकों के रुप में पाठकों के समझ है। कार्यक्रम का संचालन डा. उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने किया।
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गोरखपुर 1 नवम्बर 2015
राष्ट्रीय पुस्तक मेला के अन्तिम दिन लोगों की भारी भीड़ रही
टाउनहाल के मैदान में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय पुस्तक मेंले के अन्तिम दिन लोगों की भीड़ देखते ही बनी। लोग अपनी पसन्द की पुस्तकों के लिए इतने उतावले दिखे कि देर तक लोग स्टालों पर जमे रहे।
आज इतिहासकार डा0 रमाकान्त कुशवाहा ‘कुशाग्र’ की पुस्तक ‘बुद्ध और सम्राट अशोक’ का बुद्ध पी.जी.कालेज, कुशीनगर के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष डा0 वीरेन्द्र कुमार एवं दलित चितंक एवं लेखक अलख निरंजन के हाथों लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डा0 कुशाग्र ने अपनी पुस्तक के बारे में प्रकाश डालते हुए बताया कि मेरी पुस्तक में बुद्ध और सम्राट अशोक को नये नजरिये से देखने का प्रयास किया है। जो अन्यत्र कहीं और नहीं दिखती। मुख्य वक्ता के रुप में बोलते हुए अलख निरंजन ने यद्यपि इतिहास पढ़ना अत्यन्त कठिन एवं उबाऊ होता है, किन्तु डा0 कुशाग्र ने इतने सरल एवं सहज भाषा शैली में लिखने का प्रयास किया है, जिसे पाठक एक कहानी की तरह जब पढ़ने लगता है तो अन्त तक उसमें डूब कर पढता ही चला जाता है। मुख्य अतिथि के रुप में डा0 वीरेन्द्र ने अपनी बात में बताया कि इतिहास की बहुत सी ऐसी बातें हैं जो खुलकर सामने नहीं आ पाती हैं, इस प्रयास में डा0 कुशाग्र ने बुद्ध और सम्राट के बारे में ऐसे अनेक अनझुये पहलुओं के बारे में दृढता के साथ प्रस्तुत करने का जो प्रयास किया है, वह सराहनीय प्रयास है। पुस्तक में बुद्ध के साथ ही ईसामसीह, कार्ल माक्र्स, चन्द्रगुप्त मौर्य, मोहम्मद साहब एवं डा0 अम्बेडकर के साथ साम्यता लाने का भी प्रयास किया है। आगे उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध मात्र ‘लाइट आफ एशिया’ ही नहीं बल्कि वे ’लाइफ आफ यूनीवर्स’ मानना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कार्यक्रम की गुणवक्ता इसी से हो जाती है कि लोकार्पण के बाद श्रोताओं ने उस पर जमकर बहस की जो एक परिचर्चा के रुप में हो गयी। कार्यक्रम का संचालन उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’ ने किया।
सायंकाल पुस्तक मेला के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में नगर की महापौर डा0 सत्या पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में पुस्तक मेले की सार्थकता और इसके आयोजकों का धन्यवाद देते हुए बताया कि कुछ करने का संकल्प ही किसी कार्य को आगे बढाता है, जिसे देवराज अरोरा, उमेश ढल एवं उमेश पटेल ‘श्रीश’ ने पूरा किया है, यह स्वागत योग्य है। यह पुस्तक मेला का समापन न होकर अगले वर्ष के लिए लगने वाले मेले की शुरूआत की सूचना है। मेला संयोजक देवराज अरोरा ने अपने संबोधन में कहा कि गोरखपुर के पाठकों और साहित्य प्रेमियों का प्यार और उत्साह को देखते हुए यहां बार-बार पुस्तक मेले का आयोजन करना मेरी मजबूरी हो गयी है। डा0 उमेश पटेल ‘श्रीश’ अपने उद्बोधन में बताया कि गोरखपुर में पुस्तक मेला का आयोजन कराना अपने यहां के साहित्य प्रेमियों एवं पाठकों के लिए अत्यंत ही हर्ष की बात है। पुस्तक मेला के चलते यहां के पाठकों में पुस्तकों के प्रति जो ललक पैदा हुई है। यह पुस्तक मेले की सार्थकता को दर्शाता है। मेला संयोजक उमेश ढल ने आभार ज्ञापित करते हुए गोरखपुर के नगरवासियों का प्यार देखते हुए इस शहर में बार-बार आने का जिज्ञासा होती है। पुस्तक मेला आयोजन समिति की ओर से महापौर डा0 सत्या पाण्डेय को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। महापौर के हाथों कुशलता पूर्वक मंच संचालन के लिए डा0 उमेश पटेल ‘श्रीश’ को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अन्त में पुस्तक मेले में आये महत्वपूर्ण प्रकाशकों का सम्मान भी किया गया।
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