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Mousmi Pandey
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Mousmi Pandey

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ise kahte hain vison .......... aap apni baat kahte hain sir ki aap kis tarah kya karenge ............ jisko karna hota hai wo batata hai kis tarah ............ bakiyo me aur aap me bahut fark hai lekin logo ko jhuthe sapne dikhane waloo aur comedy karne walon per zyada yakeen ho gaya hai . jai ho!
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madhav aggarwal's profile photosinglenumber's profile photo
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Vision ??? He and his party is in full majority for the last 10 years, is this a small period to materialize his 'Vision' ?? He resemble his father a lot " hum karenge, dehenge, zoor lagayenge" RG is bullshit .
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Mousmi Pandey

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thx to everyone
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Mousmi Pandey

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जब देश की जनता सरकार का साथ ना दे और सरकार को जादूगर समझे तो देश सरकार नहीं भगवान भरोसे ही चलेगा । सोना ना खरीदने की गुजारिश की थी हमारे वित्त मंत्री ने, इस देश की पब्लिक ने कितना साथ दिया? सरकार को गाली देना ,कोसना और ख़ुद समझोता करने मे बहुत फर्क होता है ।घर पर जब संकट आए तो घर के मुखिया पर भरोसा करके उसकी बात मानी जाती है । वंदे मातरम और जय हिन्द के नारे लगाना एक बात है और हिन्द की हिफाज़त करना एक अलग बात है । येही अपील अपनी पब्लिक से ओबामा करता तो पूरा अमेरिका उनके साथ होता । वहाँ लोग जिम्मेदार हैं अपने देश के प्रति यहाँ की तरह नहीं कि कि उस पार्टी कि सुनेगे जिससे आपका अपना लाभ हो, देश का लाभ नहीं ।
सिर्फ सरकार को अकेले ज़िम्मेदारी देकर आप अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकते । "हम" मे देश है "मै" मे नहीं।
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Pankaj Dwivedi's profile photoMousmi Pandey's profile photoRajkumar Yadav's profile photo
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very good thought kash kahin aisa hi sare log sonchate jai hind 
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Mousmi Pandey

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मजबूरी नही मजबूती का नाम महात्मा गाँधी हे
July 25, 2013 at 12:14pm
अगर व्यापक स्तर पर देखा जाए तो महात्मा गांधी एक शख्स का नाम नहीं बल्कि एक संस्कृति एक विरासत है. महात्मा गांधी के जीवन से मनुष्य को सीखने के लिए बहुत कुछ मिलता है, लेकिन यह भी एक सत्य है कि उनकी विचारधारा को कुछ घंटों में समझना मुश्किल है. इसके लिए पर्याप्त अध्ययन की जरूरत है.  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है. उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था. दुनिया के महान लोगों की प्रेरणा के रूप में गांधी जी आज भी जिंदा हैं.
जो चीज गांधी जी को एक आदर्श शख्सियत और पाठशाला बनाती है वह हैं उनके प्रयोग और सिद्धांत. उनके हर सिद्धांत के साथ कई प्रयोग और कई अनुभव जुड़े हैं. चाहे वह अहिंसा का सिद्धांत हो या उनके ब्रह्मचर्य का प्रयोग, सभी में आप गांधी जी प्रयोगात्मक सोच को पाएंगे. आइए आज हम गांधी जी के विचारों और सिद्धांतों पर सिलसिलेवार तरीके से नजर डालें.
 
अकसर कई लोग विपरीत परिस्थितियों में एक जुमले का प्रयोग करते है जो इस तरह से है कि “मजबूरी का नाम महात्मा गांधी”. गांधी जी और मजबूरी को एक साथ रखने वाले अज्ञानी लोग यह भूल जाते हैं कि महात्मा गांधी अगर मजबूर होते तो आज देश शायद आजाद न होता. अगर गांधी जी मजबूरी का प्रतीक होते तो वह नमक कानून को तोड़ने के लिए सरकार के आदेश को तोड़ने का दुस्साहस ना करते. अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध तन कर खड़ा होने वाला यह निर्णायक क्षण ही गांधी को गांधी बनाता है और किसी भी अन्याय/अत्याचार का प्रतिकार करने वाले अदम्य साहस और आत्मबल का पता देता है.
कई लोग गांधी जी को पाश्चात्य संस्कृति का समर्थक भी मानते थे और उनकी जीवनशैली पर नजर डालें तो पाएंगे कि कुछ हद तक उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति को भी अपनाया था. उनके लिए पाश्चात्य संस्कृति का स्वागत करने का आशय कुछ ऐसा ही था जैसे घर की खिड़की द्वारा बाहर की स्वच्छ हवा को घर में आने देना. लेकिन इसके साथ ही वह कहते थे कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान तो सही है लेकिन उसे ऐसे ग्रहण भी नहीं करना चाहिए कि उसकी आंधी में हम औंधे मुंह गिर पड़ें. उनका कहना था कि भारतीय अंग्रेजी ही क्यों, अन्य भाषाएं भी पढ़ें, परंतु जापान की तरह उनका उपयोग स्वदेश हित में किया जाए.
 
 
जो चीज गांधी जी को उपरोक्त सिद्धांतों पर खरा उतरने और उन्हें सफल बनाने में सहायक सिद्ध हुई वह थी उनकी प्रयोग की आदत फिर चाहे वह द. अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन कर उसे भारत में भी इस्तेमाल करना हो या अपने निजी जीवन में ब्रह्मचर्य का प्रयोग कर अपने शिष्यों को भी उस पर चलने की सीख देना. कौन भूल सकता है कि गांधी जी ने जीवन में मूलभूत जरूरतों को पूरा करने और बेहद कम आजीविका पर भी जीवित रहने के लिए खुद के ही भोजन पर प्रयोग किया था. यह देखने के लिए कि कितने कम खर्च में वे जीवित और स्वस्थ रह सकते हैं, उन्होंने अपनी खुराक को लेकर भी प्रयोग किया. सैद्धांतिक रूप से वे फल, बकरी के दूध और जैतून के तेल पर जीवन निर्वाह करने लगे.
गांधी जी जब देश के बारे में बात करते थे तो उनकी दृष्टि से समाज के अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति ओझल नहीं हो पाता था. उनकी नजर में वह मनुष्य उतना ही महत्वपूर्ण था जितना कि राष्ट्र. लेकिन आज सरकार की निगाहों में समाज बंटा हुआ है. एक तरफ वह समाज है जिसे सरकार सिर्फ वोट बैंक की भीड़ मानती है और दूसरी तरफ वह वर्ग है जिसके द्वारा उसे पैसा मिलता है या लाभ होता है. आज नैतिकता की बजाए अवसरवाद पर आधारित भ्रष्ट राजनीति के दौर के राजनेता महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने का साहस नहीं कर सकते.
लेकिन इस महापुरुष की यादें आज लोगों को सिर्फ 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को ही आती हैं. आज गांधी जी समाज में सिर्फ “अतिथि” बनकर रह गए हैं. जयंती और पुण्यतिथि पर गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर समाज उस गांधी से बचना चाहता है जिसे जीवन में अमल में लाकर शायद जीवन एक आदर्श जीवन बन जाए. व्यक्ति और राष्ट्र किन मूल्यों को अपनाकर श्रेष्ठता के शिखर पर पहुंच सकते हैं महात्मा गांधी ने इसकी ओर बार-बार याद दिलाया है.
by:
Dr Harishankar Marmat
Ex. Vice President ujjain vikas pradh
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Mousmi Pandey

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HAPPYY HOLI ................
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Mousmi Pandey

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Mousmi Pandey

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स्वतन्त्रता  दिवस की शुभकामनायें...........
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Mousmi Pandey

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welcome :)
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Mousmi Pandey

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क्या लगता है आरक्षण से वाकई बहुत बड़ा फायेदा होने वाला है ??या हम प्रतिभा को दबोचने का प्रयास लगातार कर रहे हैं, ....... मुझे बचपन मे सिखाया गया गया था जब ब्लाक बोर्ड पर एक बड़ी लाइन हो और एक लाइन छोटी हो तो हम बड़ी लाइन को मिटाते नहीं बल्कि छोटी लाइन को उसके बराबर करने का प्रयास करते हैं लेकिन यहाँ मिटाने का प्रयास लगातार हो रहा है । नोट कर लीजिये आप सब, ये तरीका कभी कारगर नहीं होगा ........... आज भी प्राइवेट सैक्टर मे प्रतिभा काम करती है और हर जगह काबलियत का ही बोलबाला होगा ............
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  • singer, present
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hiiiiiii

i m a singer....simple n down to earth........

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