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Ruby Arun रूबी अरुण
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Ruby Arun has 27 years of experience in TV and Print Media in India and Abroad. Nw she is Editorial Consult in Zee Media Corporation Limited
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सुनो जानाँ ,
नहीं देख सकती
मैं तुम्हें, किसी और के साथ

तुम्हारी तन्हाइयों में
जब तुम रहते हो
अपनी खामोशियों के साथ
तब जलता है दिल मेरा,
जब तुम भीड़ में गुम रहते हो
अपने ख़यालों के साथ ,
तब भी मुझे अच्छा नहीं लगता

मेरे प्रेम में
मीरा की सी भक्ति नहीं,
न ही मेरा प्रेम
राधा का समर्पण है

मेरा प्रेम तो
शिव का वैराग्य है,

जिसमें तुम नहीं तो
मैं स्वयं भी नहीं,

मेरा प्रेम शक्ति की यात्रा है
जो होता है जीवन कुंड में
सती बार-बार,

जिसको तरने हैं
मोक्ष के सभी द्वार
तुम तक पहुंचने के लिए नहीं,

वरन तुममें
सम्मिलित होने के लिए...

-( ना जाने कौन 😂)
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मैं लाता हूँ अपना क़ुरान
तुम अपनी गीता निकालो
दोनों को आग लगाकर
जलालो
उसपर एक पतीला
चावल का चढ़ालो !
देख लेना
तुम्हारे चावल
पकने से पहले ही
आग बुझ जायेगी !
लेकिन...
यह न समझो
इनमें ताक़त नहीं !
रददी के यहि पुलिंदे
पूरे गाँव में
आग लगा सकते है
पूरे शहर को जला सकते है
पूरे मुल्क में
दंगा और फसाद
करा सकते है
लेकिन
घर का चूल्हा
नहीं जला सकते
चावल नहीं पका सकते !
क्योंकि इनका ईजाद
भूख मिटाने के लिए नहीं
बल्कि
घरों को फूंकने के लिए
ही हुआ है !
रद्दी के यही पुलिंदे
गरीब का पेट
नहीं भर सकते
लेकिन
दंगाइयों को नेता
जरूर बना देते हैं !
रद्दी के यही पुलिंदे
एक वक्त का
चूल्हा नहीं जला सकते
लेकिन अमीरों को
सत्ता तक
जरूर पहुंचा सकते हैं !
एक गरीब के लिए
गीता और कुरान
बंदरिया के
मरे हुए बच्चे के समान है
जो बंदरिया उसे
सीने से चिपकाये रहती है !
नेताओ और मठाधीसों के लिए
मुल्लाओं और न्यायाधीशों के
लिए
रद्दी के यही पुलिंदे
जीवंत होते है
उन्हें ऊर्जा देते हैं !
अमन और शांति के लिए
परिवर्तन और क्रांति के लिए
रद्दी के इन पुलिंदों को..
आग में झोंकना ही होगा
आग में झोंकना ही होगा !!

-- नम हिंदुस्तानी
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हालांकि बहुत कुछ खोया है
इस साल, सीने में दरका है
बहुत कुछ

फिर भी
आते हुए नए साल को देखती हूँ ...
उम्मीद से...मुस्कराहट से...
दुआओं में भीगती हुयी...
बची हुई ज़िन्दगी में
जो जो काम
बच गए हैं, करने को
उनकी नयी लिस्ट बनानी है.

जाते हुए साल का शुक्रिया...
कितनी चीज़ों से
खाली हुई तो भरी भी जिंदगी...
भगवान जी...
बीत रहे साल का
ढेर सा शुक्रिया...
कृपा बनाए रखना.

इसके अलावा उन सभी दोस्तों का शुक्रिया
कि जिन्होंने इस आभासी दुनिया में भी
अपने साथ का भरोसा और प्यार दिया...
जो साथ साथ मुस्कुराए और
मेरे सम्मान को अपना स्वाभिमान समझा...

शुक्रिया, शुक्रिया...
ऐसे ही संग साथ रहिएगा
अापका प्यार, मेरा मान है...
बढ़ाते रहिएगा....

आप सभी को प्यार,
बहुत सारा प्यार
सादर.... 🙏🙏
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India backing wrong side on
#Jerusalem issue....
Ambassador of Palestine attends #HafizSaeed's rally and #India is busy ignoring #Israel for Palestine, #Modi heading for another blunder. #Palestine always support PAK on #kashmir issue..
Palestinian crooks doesn't deserve respect...The shitheaded ambassador
sharing Dias with #MumbaiBombattack conspirator Hafiz saeed...
#IndianGovt should openly support Israel....
A tight slap to Indian #MEA diplomacy.Days before India vote against US decision to #Jerusalem as Israel New capital supporting Palestine opposition, but within few days Palestine's #Pakistan envoy Waleed Abu sharing a platform with India's Most wanted Terrorist chief #HafizSaeed.
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India backing wrong side on
#Jerusalem issue....
Ambassador of Palestine attends #HafizSaeed's rally and #India is busy ignoring #Israel for Palestine, #Modi heading for another blunder. #Palestine always support PAK on #kashmir issue..
Palestinian crooks doesn't deserve respect...The shitheaded ambassador
sharing Dias with #MumbaiBombattack conspirator Hafiz saeed...
#IndianGovt should openly support Israel....
A tight slap to Indian #MEA diplomacy.Days before India vote against US decision to #Jerusalem as Israel New capital supporting Palestine opposition, but within few days Palestine's #Pakistan envoy Waleed Abu sharing a platform with India's Most wanted Terrorist chief #HafizSaeed.
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गुजरातः जान बची तो लाखों पाए

गुजरात में भाजपा जीत गई और कांग्रेस हार गई। जीत तो जीत है, फिर वह कैसी भी हो ! यदि भाजपा के कार्यकर्त्ता जश्न मना रहे हैं तो इसमें गलत क्या है ? लेकिन गुजरात के जो परिणाम आए हैं, उन्हें बारीकी से देखा जाए तो पता चलेगा कि भाजपा की यह जीत कितनी मंहगी है। गुजरात का चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने अपनी जान लगा दी थी। किसी प्रधानमंत्री ने किसी प्रादेशिक चुनाव में अपनी इज्जत इस तरह दांव पर लगा दी हो, मुझे याद नहीं पड़ता। भाजपा के केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और सांसदों ने खून-पसीना एक कर दिया। हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए वे पाकिस्तान की शरण में चले गए। देश के कई पूर्व कर्णधारों को पाकिस्तान के इशारे पर साजिश करते हुए दिखाया गया। मणिशंकर अय्यर की व्यक्तिगत टिप्पणी को जातिगत रुप दे दिया गया। राहुल की छवि बिगाड़ने के लिए उसके दादा-परदादा तक को घसीटा गया। गुजरात के शहरी निगमों को कई-कई अरब की खैरात बांट दी गई। इसके बावजूद भाजपा को सिर्फ 100 सीटें मिल रही हैं याने यह लेख लिखते वक्त वह 15 सीटों से हार रही है। पिछले चुनाव के मुकाबले उसे 15 सीटें कम मिल रही है। उसे कम से कम 15 सीटें ज्यादा मिलनी चाहिए थीं। उसे 130 सीटें मिलतीं तो मैं खुश होता लेकिन कोई बात नहीं। जान बची तो लाखों पाए!

इस चुनाव ने कांग्रेस की सूखती जड़ों को हरा कर दिया है। 2014 में वह संसद के चुनाव में सभी 26 सीटें हार गई थीं। इस हिसाब से उसका सूंपड़ा साफ हो जाना चाहिए था लेकिन उसकी लगभग 20 सीटें बढ़ गई हैं। वह 80 का आंकड़ा छू रही है। जाहिर है कि इस बढ़त का श्रेय तीनों- पाटीदार, दलित और पिछड़े- युवा नेताओं को है लेकिन मोदी के मुकाबले राहुल की छवि सुधरी है। 2019 के संसदीय चुनाव के लिए गुजरात ने एक संयुक्त मोर्चे की नींव रख दी है। गुजरात में मोदी को सिर्फ एक तत्व ने बचाया- गुजरात नो बेटो ! यह तथ्य क्या अन्य प्रांतों में काम आ पाएगा ? यह तथ्य कांग्रेस के जातिवाद और मोदी के हिंदूवाद से भी ज्यादा भारी सिद्ध हुआ। मोदी की लहर भी काम की नहीं रही। यदि भाजपा को 2019 जीतना है तो उसे अपने नेतृत्व और अपनी सरकार के काम पर पुनर्विचार करना होगा।

डॉ वेदप्रताप वैदिक
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वैसे गुजरात और हिमाचल के
चुनाव परिणामों से मैं बहुत खुश हूं ...
और मुझे लगता है कि मेरे जैसे
वो तमाम लोग भी बहुत खुश होंगे
जो 2019 का चुनाव लंतरानियों की बजाय
सिर्फ मुद्दों पर लड़ते हुए देखना चाह रहे हैं .

क्योंकि अब जबकि, पूरे देश में भाजपा का
एकछत्र राज हो चुका है ,
महज 4 राज्यों को छोड़कर...
तो आपके पास अपने वादे पूरे ना करने का
कोई भी बहाना नहीं बचता.
ऐसी स्थिति में अब मोदीजी की ज़रूरत और मज़बुरी दोनों ही है कि
वे आवाम के मन की बात सुनें
बजाय देश को अपने मन की बात सुनाने के,
विकास का जुमला फेंकने की जगह,
विकास को चरितार्थ करने के.

क्योंकि हमारे जैसे मेहनतकश
मध्यवर्गीय लोगों को इस बात से
व्यक्तिगत तौर पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि
सरकार किस पार्टी की है.
हमें तो अंतर इस बात से पड़ता है कि
कौन सी सरकार अपनी कार्यशैली से
हमारी जीवन शैली को आसान या
मुश्किल कर देती है.
किस सरकार की नीतियाँ
हमारे बच्चों का भविष्य उज्जवल करती हैं
या अनिश्चितता की तरफ़ धकेलती हैं....

तो मोदीजी, यह वक्त है
आपके चेत जाने का.
अपने लफ्जों पर अमल करें
और, देश को आपने जो आस बंधाई हैं
उसे पूरा करें.....
वरना आज तो आपकी उम्मीदें
कमोबेश पूरी हो गईं....
पर शायद कल
देश आपकी उम्मीदों पर खरा ना उतरे....😊
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एक जनेऊ ने इतना बवंडर मचा रखा है
तो अगर राहुल जी ने किसी दिन मंच पर
ये कह दिया....
"सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे "

फिर, अल्लाह जाने क्या होगा आगे.... 😂😂
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मोदीजी, मेरी जान
यह तो किस्मत किस्मत की बात होती है ना.

आपकी किस्मत में था गरीब घर में पैदा होना. राहुल की किस्मत थी,
बादशाह के घर में पैदा होना...
मेरी किस्मत है
चप्पल चटकाते हुए, कलम घिसना....
यह तो पूरी तरह से राम जी के हाथ में होता है ना

किसी मनुष्य के बस की बात तो ये है नहीं ...
तो इस पर मोटीबेन की तरह
ताने क्यों मारना.....
रामजी से शिकायत कीजिए ना हुज़ूर......
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आज तक पर
अंजना ( बेहद तीखे अंदाज़ में) -- राहुल गांधी की एक क़ाबिलियत बता दें, जिसकी वज़ह से वे कांग्रेस अध्यक्ष बने?? अगर सवाल पूछने की इजाज़त है तो...

प्रियंका चतुर्वेदी -- कांग्रेस को से सवाल पूछने की इजाज़त लेने की आपको ज़रूरत नहीं... आपकी इजाज़त तो भाजपा के पास अटक जाती है....
बहरहाल, राहुल जी के MP बनने के बाद से Congress ने 25 राज्यों के चुनाव जीते...लोकसभा चुनाव जीता.....
पर अंजना आप ये बताएं कि अमित शाह के BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की क़ाबिलियत क्या थी? क्या ये कि वो तड़ीपार थे.....

अंजना तिलमिलाते चिल्लाते हुए---
..यह तो वंशवाद है...लोकतंत्र कहाँ है..

Urmilesh Urmil जी --
अंजना, वंशवाद कहाँ नहीं है... अगर यहाँ परिवारवाद है तो BJP में भी तो संघपरिवार है और देश की हर पार्टी का यही स्वरूप है, आप ही बताएं कहाँ नहीं है..... ब्रिटेन की पार्टियों की तरह आंतरिक लोकतंत्र तो भाजपा में भी नहीं. यहाँ भी सबकुछ संघ ही तय करता है, BJP, TDP, samajwadi, Trinmul...हर जगह यही किस्सा है....

अंजना.... भक्क चेहरा लिए, भौं टेढ़ी किए चुप्प... कुछ क्षणों बाद -----
पुण्य प्रसून जी आपको कुछ पूछना है....

( आमतौर पर मैं Tv debate नहीं देखता. पर Urmilesh Jee अगर बोलते हुए दिख जाते हैं, तो ज़रूर सुनती हूँ. शांत, तार्किक
और तथ्यपरक तरीके से जब वे सवाल पूछने वाले को धराशायी करते हैं, तो उनसे सीखना को बहुत कुछ होता है )
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