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JINDGI SE MUTHBHED
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अज़ीज़ जौनपुरी : तोड़ दी माला किसी नें
नाम चरणामृत का लेकर विष  पिला डाला किसी नें  जब सुमिरनी  हाथ में ली तोड़  दी  माला  किसी नें  सत्य की इक मूरत गढ़ी थी  चूर  कर   डाला   किसी  नें न्याय  की  जब  दी  दुहाई बेडीं पाँव में डाला किसी नें  ले  हाथ  समिधा ज्यों बढ़ा बुझा दी यज्ञशाला किसी नें  आरती  ...
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अज़ीज़ जौनपुरी : पिया गंध मोरे सासन में है
                   सुख  दुख  का  है ताना  बाना जीवन   तो   है   आना  जाना जोलहा जी  इक साड़ी बनाना रंग  पिया  ओहमा  भर  जाना जीवन है सांसों    की    गठरी   कभी   ओढ़ना  कभी बिछाना पिया  गंध  मोरे  सासन  में है वही    सूंघना   वही   सुंघाना काशी    देखी    मथु...
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अज़ीज़ जौनपुरी : मिलन की घड़ी में प्रणय दीप पावन
  मिलन की घड़ी में प्रणय दीप पावन   जिसने जलाए उसी नें बुझाए   लिखी थी कहानी कहीं इक शिला पर   समय के बवंडर नें जिसको मिटाए  छिन गई सारी खुशियाँ जीवन की अपने   चादर तिमिर की किसी ने उढाए  चमन में न तितली दिखती कहीं भी   तूफ़ा ने कितने कहर ज़ुल्म ढाए  इक तस्बीर...
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अज़ीज़ जौनपुरी : सूनी सेज तुम्हरि बिन साजन
कहाँ   गयो  मेरो   प्रीतम    प्यारे अँखियाँ   रोअत    साँझ    सकारे सूनी  सेज  तुम्हरि बिन   साजन कब   होइहीं   धन    भाग  हमारे बहुत   दिनन  से  अँखियाँ  तरसत कहाँ   छुप  गए  मेरो साजन प्यारे छतिया  बिच  अगिया  दहकत  हैं घिर  - घिर   आवत    बदरा   कारे  दर...
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अज़ीज़ जौनपुरी : न रोज खाता न उधार करता हूँ
न  रोज  खाता  हूँ   न  उधार  करता हूँ न ग़मों को जिंदगी में सुमार करता हूँ ज़ुल्मों-सितम कभी मेरे ख़ूँ में नही रहा  मैं खुद पे  बेइन्तिहाँ   ऐतबार  करता हूँ दुनिया की खातिर रेहन  रख दिया खुद को   खुद से ज्यादा मैं दुनिया को प्यार करता हूँ इश्क ख़ुदा पे  इक ...
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