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Sanjay Grover (संजय ग्रोवर)
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बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे
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बात यूं है कि बात कुछ भी नहीं
गज़ल हाथ आई हयात कुछ भी नहीं बात यूं है कि बात कुछ भी नहीं                            11-01-2013 यू तो मेरी औक़ात कुछ भी नहीं काट लूं दिन तो रात कुछ भी नहीं                                   29-10-2018 -संजय ग्रोवर 29-10-2018
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गड़ढे में ‘मंटो’
कृश्न चंदर की एक कहानी थी ‘गड्ढा’। एक आदमी ऐसे गहरे गड्ढे में गिर जाता हैं जहां से दूसरों की मदद के बिना निकलना संभव नहीं है। लोग आते हैं, तरह-तरह की बातें करते हैं, अपना टाइम पास करते हैं, मनोरंजन करते हैं, सुबह से शाम हो जाती है पर कोई उसे गड्ढे से निकालन...
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सच में या अफ़साने में / मंटो पागलखाने में
ग़ज़ल सच में या अफ़साने में मंटो पागलखाने में मंटो, तेरे और मेरे है क्या फ़र्क़ ज़माने में सच लोगों को भाता हैं सिर्फ़ रहे जब गाने में झूठ हंसेगा टीवी में मैं चलता हूं थाने में झूठ को मैंने खोया है अपने सच को पाने में हर पगले का नाम लिखा सच के दाने-दाने में -संजय...
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बैन करेगा क्या / ख़ुद क़िताब हो लें
ग़ज़ल आओ सच बोलें दुनिया को खोलें झूठा हंसने से बेहतर है रो लें पांच बरस ये, वो इक जैसा बोलें अपना ही चेहरा क्यों ना ख़ुद धो लें राजा की तारीफ़ जो पन्ना खोलें क्या कबीर मंटो किस मुह से बोलें ! सबको उठना है- सब राजा हो लें ! वे जो थे वो थे हम भी हम हो लें बैन क...
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सच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां
ग़ज़ल जब खुल गई पहेली तो है समझना आसां सच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां  पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओ फिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसां वैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबे माइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसां जो तुम तलक है पहुंचा, उन तक ...
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जाने कैसा ख़ालीपन है ख़ानदानों में
ग़ज़ल भागते फिरते हैं वो सुंदर मकानों में ठग कभी टिकते नहीं अपने बयानों में शादियों में नोंचते हैं फूल अलबत्ता प्यार की भी कुछ तड़प होगी सयानों में             भीड़ में इनका गुज़र है, भीड़ में आनंद जाने कैसा ख़ालीपन है ख़ानदानों में जाने क्या सिखलाया उन्ने व्याख...
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बच्चे न पैदा करने की सुंदर भावना पर एक निबंध
उनसे मैं बहुत डरता हूं जो वक़्त
पड़ने पर गधे को भी बाप बना लेते हैं। इसमें दो-तीन समस्याएं हैं- 1.       बाप बनना बहुत ज़िम्मेदारी का काम है। ऐसे ज़िम्मेदार बाप का दुनिया को अभी भी इंतेज़ार है
जो सोच-समझ के बच्चा पैदा करे। वैसे जो सोचता-समझता होगा वो क्या बच्चा...
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What a pity!
Short Story created by sanjaygrover+ "Do you want any help ?" "Are you you free to help someone ?" "................" "Ok, first I must try to free you so that you may help me." "Oh thanks, you could understand me finally."
What a pity!
What a pity!
quotesofmin.blogspot.com
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एक मुर्दा कहीं से ले आओ
photo by Sanjay Grover ग़ज़ल भीड़, तन्हा को जब डराती है मेरी तो हंसी छूट जाती है सब ग़लत हैं तो हम सही क्यों हों भीड़ को ऐसी अदा भाती है दिन में इस फ़िक़्र में हूं जागा हुआ रात में नींद नहीं आती है भीड़, तन्हा से करती है नफ़रत और हक़ प्यार पे जताती है एक मुर्दा कहीं...
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भगवान और उद्देश्य!
photo by Sanjay Grover लोग कहते हैं कि भगवान हमें किसी विशेष उद्देश्य से धरती पर भेजता है। कभी-कभी मैं सोचता हूं कि हो सकता है बात सही हो। अंततः भगवान को समझ में आता है कि ये लोग उद्देश्य को पूरा करने में अक्षम हैं इसलिए इन्हें वापस बुला लेता है।  इससे पता ...
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