Profile cover photo
Profile photo
sweta sinha
3,981 followers -
अब मेरी हथेलियों मे ही सूरज उगा करते है... श्वेता🍁
अब मेरी हथेलियों मे ही सूरज उगा करते है... श्वेता🍁

3,981 followers
About
sweta's posts

Post is pinned.Post has attachment
http://swetamannkepaankhi.blogspot.in
अन्तर्मन के आसमान में
रंग बिरंगे पंख लगाकर
उड़ते फिरते सोच के पाखी
अनवरत अविराम निरंतर
मन में मन से बातें करते
मन के सूनेपन को भरते
शब्दों से परे सोच के पाखी

कभी नील गगन में उड़ जाते
सागर की लहरों में बलखाते
छूकर सूरज की किरणों को
बादल में रोज नहाकर कर आते
बारिश में भींगते सोच के पाती

चंदा के आँगन में उतरकर
सितारों की ओढ़नी डालकर
जुगनू को बनाकर दीपक
परियों के देश का रस्ता पूछे
ख्वाब में खोये सोच के पाखी

नीम से कड़वी नश्तर सी चुभती
मीठी तीखी शमशीर सी पड़ती
कभी टूटे टुकडों से विकल होते
खुद ही समेट कर सजल होते
जीना सिखाये सोच के पाखी

जाने अनजाने चेहरों को गुनके
जाल रेशमी बातों का बुनके
तप्त हृदय के सूने तट पर मौन
सतरंगी तितली बन अधरों को छू
कुछ बूँदे रस अमृत की दे जाते
खुशबू से भर जाते सोच के पाखी

#श्वेता🍁

Photo

Post has attachment
खुद को दिल में तेरे छोड़ के चले जायेगे एक दिन
तुम न चाहो तो भी बेसबब याद आयेगे एक दिन

जब भी कोई तेरे खुशियों की दुआ माँगेगा रब से
फूल मन्नत के हो तेरे दामन में मुसकायेगे एक दिन

अंधेरी रातों में जब तेरा साया भी दिखलाई न देगा
बनके इल्मे ए चिरां ठोकरों से बचायेगे एक दिन

तू न देखना चाहे मिरी ओर कोई बात नहीं,मेरे सनम
आईने दिल अक्स तेरा बनके नज़र आयेगे एक दिन

तेरी जिद तेरी बेरूखी इश्क में जो मिला,मंजूर मुझे
मेरी तड़पती आहें तुझको बहुत रूलायेगे एक दिन

आज तुम जा रहे हो मुँह मोड़कर राहों से मेरे घर के
दोगे सदा फिर कभी खाली ही लौटके आयेगे एक दिन

#श्वेता🍁

Photo

Post has attachment
आभार आपका बहुत सारा यशोदा दी।

Post has attachment
बस यही कही मेरे आस पास हो
मेरे धड़कनों में छिपे एहसास हो

कभी ओढ़ती कभी बिछा लेती हूँ
मेरी ख्वाहिशों का तुम लिबास हो

गली चौबारे में नज़रे ढूँढती है जिसे
टूटती हसरत तुम अधूरी तलास हो

मातम सा पसरा दिल की बस्ती में
तुम आओ तो फिर कोई उल्लास हो

तुम्हारे लिये एक गुजरता लम्हा मैं
मेरे लिए तुम बस तुम ही खास हो

#श्वेता🍁


Photo

Post has attachment
रिश्ते
--------- http://swetamannkepaankhi.blogspot.in
रिश्ते बाँधे नहीं जा सकते
बस छुये जा सकते है
नेह के मोहक एहसासों से
स्पर्श किये जा सकते है
शब्दों के कोमल उद्गारों से
रिश्ते दरख्त नहीं होते है
लताएँ होती है जिन्हें
सहारा चाहिए होता है
भरोसे के सबल खूँटों का
जिस पर वो निश्चिंत होकर
पसर सके मनचाहे आकार में
रिश्ते तुलसी के बिरवे सरीखे है
जिन्हे प्यार और सम्मान
के जल से सींचना होता है
तभी पत्तों से झरते है आशीष
चुभते काँटों से चंद बातों को
अनदेखा करने से ही
खिलते है महकते रिश्तों के गुलाब
सुवासित करते है घर आँगन
बाती बन कर रिश्तों के दीये में
जलना पड़ता है अस्तित्व भूल कर
तभी प्रकाश स्नेह का दिपदिपाता है
रिश्ते ज़बान की तलवार से नहीं
महीन भावों के सूई से जोड़े जाते है
जिससे अटूट बंधन बनता है
पूजा के मौली जैसे ,
रिश्ते हवा या जल की तरह
बस तन को जीवित रखने के
नहीं होते है,
रिश्ते मन होते है जिससे
जीवन का एहसास होता है।

#श्वेता🍁


Photo

Post has attachment
बरखा ऋतु
---------
तपती प्यासी धरा की
देख व्यथित अकुलाहट
भर भर आये नयन मेघ के
बूँद बूद कर टपके नभ से
थिरके डाल , पात शाखों पे
टप टप टिप टिप पट पट
राग मल्हार झूम कर गाये है
पवन के झोंकें से उड़कर
कली फूल संग खिलखिलाए
चूम धरा का प्यासा आँचल
माटी के कण कण महकाये है
उदास सरित के प्रांगण में
बूँदों की गूँजें किलकारी
मौसम ने ली अंगड़ाई अब तो
मनमोहक बरखा ऋतु आयी है।

कुसुम पातों में रंग भरने को
जीवन अमृत जल धरने को
अन्नपूर्णा धरा को करने को
खुशियाँ बूँदों में बाँध के लायी है
पनीले नभ के रोआँसें मुखड़े
कारे बादल के लहराते केशों में
कौंधे तड़कती कटीली मुस्कान
पर्वतशिख का आलिंगन करते घन
घाटी में रसधार बन बहने को
देने को नवजीवन जग को
संजीवनी बूटी ले आयी है
बाँह पसारें पलकें मूँदे कर
मदिर रस का आस्वादन कर लो
भर कर अंजुरी में मधुरस
भींगो लो तन मन पावन कर लो
छप छप छुम छुम रागिनी पग में
रूनझुन पाजेब पहनाने को
बूँदों का श्रृंगार ले आयी है
जल तरंग के मादक सप्तक से
झंकृत प्रकृति को करने को
जीवनदायी बरखा ऋतु आयी है।

#श्वेता🍁
http://swetamannkepaankhi.blogspot.in
Photo

Post has attachment
सादर आभार आदरणीय मेरी रचना को मान देने के लिए

Post has attachment

Post has attachment
चोटिल होकर यथार्थ के धरा से
बोझिल मन जब नीर बहाता है
टूट टूट कर टुकड़ो में जीवन का
जब सब सार समझ में आता है
बेकल मन क्षण दो क्षण के लिए
बेसुध सुधबुध भूलना चाहता है
उस विश्राम के पल में थका मन
पकड़ के कुछ यादों की डोरी
सुखद स्वप्न लोक में ले जाता है

गुलाब लदी डालियों के कंटक
भीनी सुगंध से मन भरमाते है
तितली सा उड़ मन को छूकर
अधरों को चूम रागिनी गाते है
पतझड़ न आया हो जहाँ कभी
बहार ही बहार की सौगाते है
उर स्पंदित हो जाता क्षण में
पकड़ उँगलियाँ भँवर प्रेम के
सुखद स्वप्न लोक में ले जाता है

अंधेरे मन के आँगन में टूटकर
चाँद कोने कोने में भर जाता है
तारें लेकर दीपक मन मुंडेर पे
निःशब्द टिमटिम मुस्काते है
जीवन से चुरा समय के पन्ने
सुनहरी कविताएँ रचे जाते है
तोड़ के बंधन सारे रस्मों के
अतुल नेह के फेरे लग जाते है
क्षणभंगुर ही सही पर मनचाहे
साथ की कल्पना में उड़ता मन
सुखद स्वप्न लोक ले जाता है

#श्वेता🍁
Photo

Post has attachment
मेरी बिटिया के पापा
---------
कल रात को अचानक नींद खुल गयी, बेड पर तुम्हें न पाकर मिचमिचाते आँखों से सिरहाने रखा फोन टटोलने कर टाईम देखा तो 1:45 a.m हो रहे थे।बेडरूम के भिड़काये दरवाजों और परदों के नीचे से मद्धिम रोशनी आ रही थी , शायद तुम ड्राईग रूम में हो, आश्चर्य और चिंता के मिले जुले भाव ने मेरी नींद उड़ा दी। जाकर देखा तो तुम सिर झुकाये एक कॉपी में कुछ लिख रहे थे।इतनी तन्मयता से कि मेरी आहट भी न सुनी।
ओह्ह्ह....,ये तो बिटिया की इंगलिश लिट्रेचर की कॉपी है! तुम उसमें करैक्शन कर रहे थे।कल उसने एक निबंध लिखा था बिना किसी की सहायता के और तुमसे पढ़ने को कहा था , तब तुमने उससे वादा किया था आज जरूर पढ़ोगे, पर तुम्हारे व्यस्त दिनचर्या की वजह से आज भी तुम लेट ही आये और निबंध न चेक कर पाये थे। मैंने धीरे से तुम्हारा कंधा छुआ तो तुमने चौंक कर देखा और शांत , हौले से मुस्कुराते हुये कहा कि ' उसने इतनी मेहनत से खुद से कुछ लिखा है अगर कल पर टाल देता तो वो निराश हो जाती।'
ऐसी एक नहीं अनगिनत घटनाएँ और छोटी छोटी बातें है बिटिया के लिए तुम्हारा असीम प्यार अपने दायित्व के साथ कदमताल करता हुआ दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा है। इन नौ सालों में एक पिता के रूप में हर बार विस्मत किया है।
मुझे अच्छी तरह याद है बिटिया के जन्म के बाद पहली बार जब तुमने उसे छुआ था तुम्हारी आँखें भींग गयी थी आनंदविभोर उसकी उंगली थामें तुम तब तक बैठे रहे जब तक हस्पताल के सुरक्षा कर्मियों ने आकर जाने को नहीं कहा। उसकी एक छींक पर मुझे लाखों हिदायतें देना,उसकी तबियत खराब होने पर रात भर मेरे साथ जागना बिना नींद की परवाह किये जबकि मैं जानती हूँ 5-6 घंटों से ज्यादा सोने के लिए कभी तुम्हारे पास वक्त नहीं होता। उसकी पहले जन्मदिन में उसके लिए बचत खाता खोला भविष्य के सपनों के पूरा करने के लिए । जबकि अभी वो मात्र नौ साल की ही है। बिटिया भी तो उसकी कोई बात बिना पापा को बताये पूरी.कब होती.है। जितना भी थके हुए होवो तुम पर जब तक दिन भर की सारी बातें न कह ले तुम्हें दुलार न ले सोती ही नहीं, तुम्हारे इंतज़ार में छत की मुंडेरों से अनगिनत बार झाँक आती है।
जब तुम दोनों मिलकर मेरी हँसी उड़ाते मुझे चिढ़ाते हो ,ऊपर से भले ही मैं चिड़चिडाऊँ पर मन का ये असीम आनंद शब्दों म़े बता पाना मुश्किल है।

तुम दोनों का ये प्यार देखकर मेरे पापा के प्रति मेरा प्यार और गहरा हो जाता है, जो भावनाएँ मैं नहीं समझ पाती थी उनकी , अब सारी बातें समझने लगी हूँ उन सारे पलों को फिर से जीने लगी हूँ।
पापा को कभी नहीं बता पायी कि मैं उनके प्रति मेरी भावनाएँ , पर आज सोचती हूँ कि उनसे जाकर जरूर कहूँगी कि उनको मैं बहुत प्यार करती हूँ।

तुम्हें अनेको धन्यवाद देना था ,नहीं तुम्हारी बेटी के प्रति तुम्हारे प्यार
के लिए नहीं बल्कि मेरे मेरे पापा के अनकहे शब्द़ो को उनकी अव्यक्त भावनाओं को तुम्हारे द्वारा समझ पाने के लिए।

#श्वेता🍁
Photo
Wait while more posts are being loaded