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Acharya Sushil Awasthi
क्रोध सदैव भूतकाल में हो चुकी घटना के कारण आता है, क्रोध हमें नीचे गिराता है, हम हमेशा हो चुकी क्रिया के लिये क्रोध करते हैं, हमारे क्रोध से हो चुकी घटना में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला, पर हम क्रोध करते हैं ये हमारा अहंकार है. दया और क्षमा हमें ऊपर उठाता है....... क्रोध हमें नीचे गिराता है................... क्रोध करते समय ये ध्यान दें कि आप ऊपर उठ रहे हैं या गिर रहे हैं ! क्रोध के बाद ग्लानि होती है....... निवेदक:--- आचार्य सुशील अवस्थी "प्रभाकर" http://www.astrologykp.com/ +91-9236075255 +91-8081825333
क्रोध सदैव भूतकाल में हो चुकी घटना के कारण आता है, क्रोध हमें नीचे गिराता है, हम हमेशा हो चुकी क्रिया के लिये क्रोध करते हैं, हमारे क्रोध से हो चुकी घटना में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला, पर हम क्रोध करते हैं ये हमारा अहंकार है. दया और क्षमा हमें ऊपर उठाता है....... क्रोध हमें नीचे गिराता है................... क्रोध करते समय ये ध्यान दें कि आप ऊपर उठ रहे हैं या गिर रहे हैं ! क्रोध के बाद ग्लानि होती है....... निवेदक:--- आचार्य सुशील अवस्थी "प्रभाकर" http://www.astrologykp.com/ +91-9236075255 +91-8081825333
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श्रीमद्भागवत कथा : प्रथम स्कन्ध, (अष्टम अध्याय) परिक्षित रक्षा तथा कुन्ती का कृष्ण प्रेम
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प्रिय मित्रों, जय श्री कृष्ण...
परमात्मा कृष्ण की कृपा और आप सभी के मार्गदर्शन से मैंने श्रीमदभागवत जी की रसमयी कथा को अपने शब्दों में इस ब्लोग में लिपिबद्ध करने का प्रयास किया है, मेरा ऐसा अनुभव है कि परमात्मा की कृपा के बिना उनका चिन्तन और मनन नहीं किया जा सकता है, आउर आप सभी पर उनकी कृपा निरन्तर बरस रही है, आप सभी से विनमृ निवेदन है कि इस ब्लोग का आनन्द लें तथा "भाग्यशाली समर्थक भक्त" पर क्लिक कर में शामिल हों.........
बृज की महारानी श्री राधा रानी आप सभी के जीवन में आनन्द प्रादन करें,,,,,,
http://mybhagwat.blogspot.in/2015/07/blog-post_18.html
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प्रिय मित्रों, जय श्री कृष्ण...
परमात्मा कृष्ण की कृपा और आप सभी के मार्गदर्शन से मैंने श्रीमदभागवत जी की रसमयी कथा को अपने शब्दों में इस ब्लोग में लिपिबद्ध करने का प्रयास किया है, मेरा ऐसा अनुभव है कि परमात्मा की कृपा के बिना उनका चिन्तन और मनन नहीं किया जा सकता है, आउर आप सभी पर उनकी कृपा निरन्तर बरस रही है, आप सभी से विनमृ निवेदन है कि इस ब्लोग का आनन्द लें तथा "भाग्यशाली समर्थक भक्त" पर क्लिक कर में शामिल हों.........
बृज की महारानी श्री राधा रानी आप सभी के जीवन में आनन्द प्रादन करें,,,,,,
http://mybhagwat.blogspot.in/2015/07/2.html
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प्रिय मित्रों, जय श्री कृष्ण...
परमात्मा कृष्ण की कृपा और आप सभी के मार्गदर्शन से मैंने श्रीमदभागवत जी की रसमयी कथा को अपने शब्दों में इस ब्लोग में लिपिबद्ध करने का प्रयास किया है, मेरा ऐसा अनुभव है कि परमात्मा की कृपा के बिना उनका चिन्तन और मनन नहीं किया जा सकता है, आउर आप सभी पर उनकी कृपा निरन्तर बरस रही है, आप सभी से विनमृ निवेदन है कि इस ब्लोग का आनन्द लें तथा "भाग्यशाली समर्थक भक्त" पर क्लिक कर में शामिल हों.........
बृज की महारानी श्री राधा रानी आप सभी के जीवन में आनन्द प्रादन करें,,,,,,
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यह ब्लोग यहां से समाप्त कर दिया है अगर आप इसे पढ्ना चाहते हैं तो निम्न पते पर यह ब्लोग उप्लब्ध है... http://mybhagwat.blogspot.in/
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श्रीमदभागवत कथा, प्रथम स्कन्ध, (पंचम-अध्याय) भगवान के यश कीर्तन की महिमा
मित्रों आपने पिछले ब्लाग में पढा कि व्यास जी जिन्होंने 
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श्रीमदभागवत कथा, प्रथम स्कन्ध, (तृतीय-अध्याय) भगवान के अवतारों का वर्णन
       प्रिय पाठकों आप सभी नें श्रीमदभागवत जी की कथा
के प्रथम स्कन्ध के द्वितीय अध्याय की कथा का अनन्द लिया अब हम इस अध्याय में सूत
जी से परमात्मा के अवतारों के बारे में जानेंगे ......        सूत जी सुन्दर आसन पर विराजित हैं उनके सामने
शौनकादि ऋषि आदि श्रोत...
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