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Sonam Saini
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बहुत कोशिश करते हैं प्रैक्टिकल होने की लेकिन अंदर जो एक सेंसिटिव और इमोशनल इन्सान रहता है वह गाहे-बगाहे जाग ही जाता है. अपना दुःख इतना दर्द नही देता जितना दुसरो का गम देता है. हर एक बुरी घटना मन पर इतना गहरा असर छोडती है कि कुछ ऐसा महसूस होने लगता है जो उदासी से ज्यादा और आंसुओ से कम होता है. सब कुछ छोड़कर कहीं भाग जाने का मन होता है. कहीं ऐसी जगह जहाँ दिलो से दिलो का कोई बंधन न हो. जहाँ न कोई हो, न कहीं कुछ भी बुरा घटित होने का दुःख हो. जहाँ न किसी की जिंदगी से ख़ुशी महसूस हो न किसी की मौत से दुःख. Continue
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To know about the "Tez" Mobile App read full article below.
अगर सीधे शब्दों में कहा जाये तो इस एप्प के जरिये Bank to Bank Transactions की जायेगीं। जैसे कि मान लीजिए आपको किसी के बैंक अकाउंट में 10,000/- रुपये जमा करवाने हैं और आपके पास समय नहीं है या समय है भी लेकिन आप कहीं बाहर हैं जहां आपके पास आपका ATM Card नहीं है जिससे कि आप Paytm या Bhim जैसी एप्प में पैसे एड करके सैंड कर सके तो उस समय यह ‘Tez’ App आपके बहुत काम आने वाली है। आप सिर्फ कुछ सैकेंण्स में ही दूसरे व्यक्ति के अकाउंट मे पैसे जमा कर सकते हैं कहीं से भी किसी भी समय सिर्फ सामने वाले के अकाउंट न0 व IFSC Code के साथ। इसके लिए आपको किसी बैंक में जाने की जरूरत नहीं होगी और न ही यह जरूरी होगा कि जिसे आप पैसे भेजना चाहते हैं उसके मोबाइल में भी “Tez” App डाउनलोड़ हो।
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एक इंसान के मन में एक दिन में लाखों-करोड़ो ख्याल घूमते हैं. एक टीवी सीरियल था गंगा. जिसमें जब छोटी- सी गंगा से ये सवाल पूछा गया कि सबसे तेज गति किसकी होती है तो उसने बड़ी ही समझदारी से जवाब दिया था कि “मन की गति” सबसे तेज होती है। वास्तव में सच भी तो यही है, मन की गति ही तो सबसे तेज होती है. हम बैठें कहीं ओर होते हैं और हमारा मन कहीं और ही घूम रहा होता है। हम जी कुछ और जिन्दगी रहे होते हैं और हमारा मन किसी और तरह के जीवन की उम्मीद लगाये बैठा रहता है। हम सब कुछ भूलना चाहते हैं और हमारा मन उन्हीं पूरानी यादों के चारो ओर चक्कर काटता रहता है. हम मन को समझाते हैं, मन हम को समझाता है। Read full article here
http://sonamsaini.com/mann-ki-mannmarziyan/
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एक ख्याल हमें हर वक्त घेरे रखता है. उसका यूं आना और यूं चले जाना. आखिर इस सब के पीछे मकसद क्या था. सब कुछ नॉर्मल सा चलता रहता है कि अचानक एक बेचैनी सी घेर लेती है. बेचैनी उस इंसान को फिर से पा लेने की। क्यों मन इतना तरसता है किसी के लिए जबकि हम समझते भी हैं कि आना-जाना तो निश्चित है. आज नहीं तो कल जाना ही है. फिर पागल मन समझता क्यों नहीं है. क्यों अचानक ही आंखें आंसूओ से भीग जाती है. Read full article below.
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सरकारी ऑफिस कैसे होते हैं यह मैंने सिर्फ टीवी में ही देखा था. फिर जब खुद सरकारी ऑफिस जॉइन किया तब पता चला कि टीवी में जो हालत सरकारी कार्यालयों की दिखायी जाती है वास्तव में भी सरकारी कार्यालय ऐसे ही होते हैं। वो लोहे के रैक, लकड़ी की कुर्सियां, मेज, BSNL वाला टेलीफोन और दुनिया भर की पुरानी-पुरानी फाइलें सब वैसा ही था जैसे अक्सर टीवी में दिखाया जाता है :) :) Read full article here.
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हम लोग इतने समझदार तो अब हो ही गये हैं कि यह समझ सकें कि क्या हमारे लिए अच्छा है और क्या बुरा । दिवाली पर कुछ पटाखे जला लेने से इस दुनियां में वैसे भी कुछ नही बदलना, हर रोज इतने लोग अपनी जान गंवा रहे हैं छोटी-छोटी बातों पर होने वाली हत्याओं में, मासूम बच्चियों के रेप हो रहे हैं, बिना किसी जुर्म के छोटे-छोटे बच्चों को मार दिया जा रहा है, घर से अकेले निकलते हुए डर लगता है, बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है, हर तरफ तो मौत का साया हमारे साथ-साथ चल रहा है. अगर आप सच में इस दुनियां को जीने लायक बनाना चाहते हैं, प्रदूषण मुक्त करना चाहते हैं तो ये जो हर तरफ हवाओ में नफरत का धुंआ फैला है ना इसे खत्म करने के बारे में कुछ निर्णय लीजिए. जो हत्याओं के, रेप के और बाकि गुनाहों के मामले आपने लटका कर रखें हैं उन पर फैसला दीजिए. गाड़ियों की संख्या निर्धारित करियें, अनावश्यक फैक्टरियों को बन्द कराईये. जंगलों को जीवित करिये, मरते हुए खेतों की मिट्टी को सींचियें, अगर आप ये सब करने में सफल होते हैं तो यकीन मानिए आप को कभी किसी दिवाली पर पटाखे बैन करने की आवश्यकता नहीं पडेगी। Read Full Article here
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Sonam Saini commented on a post on Blogger.
Wow एकदम ... मन कर रहा है, खुद भी एक बार घूम आयें ।
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जहां सब कुछ है भी और कुछ भी नही है.
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