Ramdoot Atulitbaldhama
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Hanuman Chalisa Tells Us The Distance Between Earth & Sun

When Hanuman was very young he flew from earth to the sky in the direction of the sun to eat it, assuming it to be a ripe, luscious fruit. Tulsidas while stating this incident in the chalisa in simple languages gives the distance between Earth and the Sun.
The Line is - “Yug Sahastra Yojan Par Bhanu Leeyo Taahi Madhur Phal Janu!”
Meaning, sun is at the distance of Yug Sahastra Yojan. After, certain intellectuals decoded this famous line of Hanuman Chalisa by Tulsidas they could find the distance of earth and guess what? It is exactly the same as that discovered by scientist later. In the year 1653, astronomer Christiaan Huygens with his guesswork estimated the distance from earth to the sun. However, since his work was a guess, he doesn’t get the credit. It is Giovanni Cassini who is named as the discoverer of the distance from earth to sun who gave a scientific study in the year 1673.
Now Let’s See what the Intellectuals (Garjajev’s Research Group) got after Decoding the Lines of Hanuman Chalisa Written by Tulsidas.
1 Yuga is 12000 years
1 Sahastra is 1000 years
1 Yojan is 8 miles
Yuga X Shastra X Bhanu is par Bhanu 12000 X 1000 X 8 = 96000000 miles 1 mile is 1.6 km So, 96000000 X 1.6 = 1536000000 km
This is the exact round figure distance of earth from Sun on 3rd July because studies mention the distance of 152,093,481 km from earth to sun during the aphelion (The period when earth is farthest from the Sun) . www.atulitbaldhama.com
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एक वेबसाइट का दावा है कि प्रत्येक 41 साल बाद हनुमानजी श्रीलंका के जंगलों में प्राचीनकाल से रह रहे आदिवासियों से मिलने के लिए आते हैं। वेबसाइट के मुताबिक श्रीलंका के जंगलों में कुछ ऐसे कबीलाई लोगों का पता चला है जिनसे मिलने हनुमानजी आते हैं।

इन कबीलाई लोगों पर अध्ययन करने वाले आध्यात्मिक संगठन 'सेतु' के अनुसार पिछले साल ही हनुमानजी इन कबीलाई लोगों से मिलने आए थे। अब हनुमानजी 41 साल बाद आएंगे। इन कबीलाई या आदिवासी समूह के लोगों को 'मातंग' नाम दिया गया है। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में पंपा सरोवर के पास मातंग ऋषि का आश्रम है, जहां हनुमानजी का जन्म हुआ था।

वेबसाइट सेतु एशिया ने दावा किया है कि 27 मई 2014 को हनुमानजी श्रीलंका में मातंग के साथ थे। सेतु के अनुसार कबीले का इतिहास रामायणकाल से जुड़ा है। कहा जाता है कि भगवान राम के स्वर्ग चले जाने के बाद हनुमानजी दक्षिण भारत के जंगलों में लौट आए थे और फिर समुद्र पार कर श्रीलंका के जंगलों में रहने लगे। जब तक पवनपुत्र हनुमान श्रीलंका के जंगलों में रहे, वहां के कबीलाई लोगों ने उनकी बहुत सेवा की।

जब हनुमानजी वहां से जाने लगे तब उन्होंने वादा किया कि वे हर 41 साल बाद आकर वहां के कबीले की पीढ़ियों को ब्रह्मज्ञान देंगे। कबीले का मुखिया हनुमानजी के साथ की बातचीत को एक लॉग बुक में दर्ज कराता है। 'सेतु' नामक संगठन इस लॉग बुक का अध्ययन कर उसका खुलासा करने का दावा करता है।

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हनुमान जी की पूजा के साधारण नियम
हनुमान जी की पूजा के साधारण नियम श्रीराम के अनन्य भक्त
हनुमान जी की कृपा प्राप्त होते ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं।
हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार माता सीता
द...