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Zeashan Zaidi
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यू आई डी - भाग 2 (अन्तिम भाग)
थोड़ी ही देर बाद प्रोफेसर ने अपने को एक अलग अनोखी दुनिया में पाया। ऐसी अनोखी दुनिया उसने सपने में भी कभी नहीं देखी थी। उसके आसपास हर तरफ रंग बिरंगी तरह तरह की धारियाँ लहरा रही थीं। उन धारियों का न तो कोई शुरूआती सिरा दिख रहा था न ही कोई अंतिम छोर। जब फिज़ा मे...
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अभी प्रोफेसर घनश्याम ने अपने शहर पहुंचने का आधा रास्ता ही तय किया था कि तेज़ आँधी तूफान ने उसे घेर लिया। बादल इतने घने थे कि हेड लाइट जलानी पड़ी थी। लेकिन मूसलाधार बारिश में उसे आगे का रास्ता मुश्किल से ही दिखाई दे रहा था। बिजलियाँ भी कड़क रही थीं। प्रोफेसर घनश्याम जल्दी से जल्दी अपनी लैब पहुंच जाना चाहता था ताकि उस अद्वितीय बच्चे का डीएनए टेस्ट कर सके।
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यू आई डी - भाग 2 (विज्ञान कथा)
अभी प्रोफेसर घनश्याम ने अपने शहर पहुंचने का आधा रास्ता ही तय किया था कि तेज़ आँधी तूफान ने उसे घेर लिया। बादल इतने घने थे कि हेड लाइट जलानी पड़ी थी। लेकिन मूसलाधार बारिश में उसे आगे का रास्ता मुश्किल से ही दिखाई दे रहा था। बिजलियाँ भी कड़क रही थीं। प्रोफेसर घन...
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यू आई डी - भाग 1
देश के जाने माने साइंटिस्ट प्रोफेसर घनश्याम की कार जब उसकी बहन के दरवाज़े पर रुकी तो उस समय रात के दो बज रहे थे। प्रोफेसर घनश्याम इस समय दूसरे शहर में रहने वाली अपनी बहन से मिलने आया था और इसके लिये पूरी रात उसने खुद ही कार ड्राइव की थी।
उसने काल बेल पर उंगली रखी।
इससे पहले कि वह दूसरी बार बेल पर उंगली रखता, अप्रत्याशित रूप से दरवाज़ा जल्दी खुल गया। वरना रात को दो बजे कौन इतनी जल्दी बिस्तर से उठना गवारा करता है।

दरवाज़ा खोलने वाली उसकी बहन ही थी जिसकी उम्र अब ढलने लगी थी। वह प्रोफेसर घनश्याम से दस साल बड़ी थी और घनश्याम की उम्र भी पचपन के लगभग थी।
प्रोफेसर ने देखा कि उसकी आँखें लाल हैं मानो वह रोती रही हो, और ऐसा बिल्कुल नहीं मालूम हो रहा था कि वह सोते से उठकर आयी है।
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यू आई डी - भाग 1
देश के जाने माने साइंटिस्ट प्रोफेसर घनश्याम की कार जब उसकी बहन के दरवाज़े पर रुकी तो उस समय रात के दो बज रहे थे। प्रोफेसर घनश्याम इस समय दूसरे शहर में रहने वाली अपनी बहन से मिलने आया था और इसके लिये पूरी रात उसने खुद ही कार ड्राइव की थी। उसने काल बेल पर उंगल...
यू आई डी - भाग 1
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