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Mohit Kushwah
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Mohit Kushwah

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bye .. google +
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Mohit Kushwah

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sat sat naman sir aapko...........
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Mohit Kushwah

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Leave a tribute message for Kalam Sir,
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Mohit Kushwah

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kahin na dekhi aisi bhakti..........
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Mohit Kushwah

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arjun ka ghamand
 
"एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनको श्रीकृष्ण ने समझ लिया।  एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए।

रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी।

अर्जुन ने उससे पूछा, ‘आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव हिंसा के भय से सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह उपकरण तलवार क्यों आपके साथ है?’

ब्राह्मण ने जवाब दिया, ‘मैं कुछ लोगों को दंडित करना चाहता हूं।’

‘ आपके शत्रु कौन हैं?’ अर्जुन ने जिज्ञासा जाहिर की।

ब्राह्मण ने कहा, ‘मैं चार लोगों को खोज रहा हूं, ताकि उनसे अपना हिसाब चुकता कर सकूं।

सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को आराम नहीं करने देते, सदा भजन-कीर्तन कर उन्हें जागृत रखते हैं।

फिर मैं द्रौपदी पर भी बहुत क्रोधित हूं। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकारा, जब वह भोजन करने बैठे थे। उन्हें तत्काल खाना छोड़ पांडवों को दुर्वासा ऋषि के शाप से बचाने जाना पड़ा। उसकी धृष्टता तो देखिए। उसने मेरे भगवान को जूठा खाना खिलाया।’

‘ आपका तीसरा शत्रु कौन है?’ अर्जुन ने पूछा। ‘

वह है हृदयहीन प्रह्लाद। उस निर्दयी ने मेरे प्रभु को गरम तेल के कड़ाह में प्रविष्ट कराया, हाथी के पैरों तले कुचलवाया और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश किया।

और चौथा शत्रु है अर्जुन। उसकी दुष्टता देखिए। उसने मेरे भगवान को अपना सारथी बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का तनिक भी ध्यान नहीं रहा। कितना कष्ट हुआ होगा मेरे प्रभु को।’ यह कहते ही ब्राह्मण की आंखों में आंसू आ गए।

यह देख अर्जुन का घमंड चूर-चूर हो गया। उसने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, ‘मान गया प्रभु, इस संसार में न जाने आपके कितने तरह के भक्त हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूं।’
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Mohit Kushwah

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"Charity given out of duty, without expectation of return, at the proper time and place, and to a worthy person is considered to be in the mode of goodness. But charity performed with the expectation of some return, or with a desire for fruitive results, or in a grudging mood is said to be charity in the mode of passion." ~ Bhagavad Gītā 17.20-21
Jai Shri Krishna! 
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Mohit Kushwah

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देश के अंदर बैठे हुए सबसे बड़े विदेशी शत्रु से स्वयं मिसाइल बनकर देश की रक्षा की थी ..
2004 में " आतंकवाद समर्थक " सेकुलरियों के द्वारा प्रधान मंत्री पद के लिए सर्व-सम्मति से चुनी गयी विदेशी सोनिया गांधी को महा महिमा डॉ .कलाम ने राष्ट्रपति रहते हुए शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था ...
डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम देश के एकमात्र ऐसे सपूत थे जिन्होंने विदेशी शक्तियों के विरुद्ध देश की रक्षा के लिए अपना सारा जीवन लगा दिया और जीवन के उत्तरार्ध में देश को इस विदेशी महिला के चंगुल में जाने से बचा लिया ...
राष्ट्र के प्रति ऐसी अगाध निष्ठा , चिंता और देश प्रेम रखने वाला कोई दूसरा उदाहरण शायद ही मिलेगा ...
आज राष्ट्र ने एक दूसरा चाणक्य खो दिया है ....
देश से " छद्म सेकुलरियों " को समाप्त करना ही इस ' माटी के लाल ' को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ...
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Mohit Kushwah

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At 10 Rajaji Marg, New Delhi, paying my respects to Dr. Kalam.
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Mohit Kushwah

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sun sathiya........ wat a nice song.
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Mohit Kushwah

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wah wah ..........
 
बहुत जबरजस्त है जरूर पढ़ना
--
ये कहानी इक ऐसे व्यक्ति की है
जो एक फ्रीजर प्लांट में काम करता था ।
वह दिन का अंतिम समय था व् सभी घर जाने
को तैयार थे तभी प्लांट में एक
तकनीकी समस्या उत्पन्न
हो गयी और वह उसे दूर करने में जुट गया ।
जब तक वह कार्य पूरा करता तब तक अत्यधिक देर
हो गयी ।
दरवाजे सील हो चुके थे व्
लाईटें बुझा दी गईं ।
बिना हवा व् प्रकाश के
पूरी रात आइस प्लांट में फसें रहने
के कारण
उसकी बर्फीली कब्रगाह
बनना तय था ।
घण्टे बीत गए तभी उसने
किसी को दरवाजा खोलते पाया ।...
क्या यह इक चमत्कार था ?
सिक्यूरिटी गार्ड टोर्च लिए खड़ा था व् उसने उसे
बाहर निकलने में मदद की। वापस आते समय उस
व्यक्ति ने सेक्युर्टी गार्ड से पूछा "आपको कैसे
पता चला कि मै भीतर हूँ ?" गार्ड ने उत्तर दिया "
सर, इस प्लांट में 50 लोग कार्य करते हैँ पर सिर्फ एक आप हैँ
जो सुबह मुझे नमस्कार व् शाम को जाते समय फिर मिलेंगे कहते हैँ ।
आज सुबह आप ड्यूटी पर आये थे पर शाम
को आप बाहर नही गए । इससे मुझे शंका हुई और
मैं देखने चला आया ।
वह
व्यक्ति नही जानता था कि उसका किसी को छोटा सा सम्मान
देना कभी उसका जीवन बचाएगा ।
याद रखेँ, जब भी आप किसी से मिलते
हैं तो उसका गर्मजोश मुस्कुराहट के साथ सम्मान करें । हमें
नहीं पता पर हो सकता है कि ये आपके
जीवन में भी चमत्कार दिखा दे ।
कॉपी पेस्ट हैं अच्छा लगे तो आगे बढ़ाये
जिन्दगी में दो चीजें कभी
मत कीजिए.....
झूठे आदमी के साथ "प्रेम"
और
सच्चे आदमी के साथ
" गेम "
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mala bhutani's profile photoHs Chouhan's profile photo
 
Nice thought!
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