Profile

Cover photo
Mohit Kushwah
1,184 followers|251,781 views
AboutPosts

Stream

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
sun sathiya........ wat a nice song.
1
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
wah wah ..........
 
बहुत जबरजस्त है जरूर पढ़ना
--
ये कहानी इक ऐसे व्यक्ति की है
जो एक फ्रीजर प्लांट में काम करता था ।
वह दिन का अंतिम समय था व् सभी घर जाने
को तैयार थे तभी प्लांट में एक
तकनीकी समस्या उत्पन्न
हो गयी और वह उसे दूर करने में जुट गया ।
जब तक वह कार्य पूरा करता तब तक अत्यधिक देर
हो गयी ।
दरवाजे सील हो चुके थे व्
लाईटें बुझा दी गईं ।
बिना हवा व् प्रकाश के
पूरी रात आइस प्लांट में फसें रहने
के कारण
उसकी बर्फीली कब्रगाह
बनना तय था ।
घण्टे बीत गए तभी उसने
किसी को दरवाजा खोलते पाया ।...
क्या यह इक चमत्कार था ?
सिक्यूरिटी गार्ड टोर्च लिए खड़ा था व् उसने उसे
बाहर निकलने में मदद की। वापस आते समय उस
व्यक्ति ने सेक्युर्टी गार्ड से पूछा "आपको कैसे
पता चला कि मै भीतर हूँ ?" गार्ड ने उत्तर दिया "
सर, इस प्लांट में 50 लोग कार्य करते हैँ पर सिर्फ एक आप हैँ
जो सुबह मुझे नमस्कार व् शाम को जाते समय फिर मिलेंगे कहते हैँ ।
आज सुबह आप ड्यूटी पर आये थे पर शाम
को आप बाहर नही गए । इससे मुझे शंका हुई और
मैं देखने चला आया ।
वह
व्यक्ति नही जानता था कि उसका किसी को छोटा सा सम्मान
देना कभी उसका जीवन बचाएगा ।
याद रखेँ, जब भी आप किसी से मिलते
हैं तो उसका गर्मजोश मुस्कुराहट के साथ सम्मान करें । हमें
नहीं पता पर हो सकता है कि ये आपके
जीवन में भी चमत्कार दिखा दे ।
कॉपी पेस्ट हैं अच्छा लगे तो आगे बढ़ाये
जिन्दगी में दो चीजें कभी
मत कीजिए.....
झूठे आदमी के साथ "प्रेम"
और
सच्चे आदमी के साथ
" गेम "
 ·  Translate
View original post
3
1
mala bhutani's profile photoHs Chouhan's profile photo
 
Nice thought!
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
 
कोरा ही रहा ख़त का पन्ना मेरी लाखों कोशिशों के बावजूद***
राधे
तेरे लिए चुन सकूँ जिन्हें वो लफ्ज ही नहीं मिले मुझे ...
 ·  Translate
2 comments on original post
1
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
tum hi ho bandhu sakha tum hi ho....

jay shree radhe
 
"Prescribed duties should never be renounced. If one gives up his prescribed duties because of illusion, such renunciation is said to be in the mode of ignorance." ~ Bhagavad Gītā 18.7
Jai Jai Shri KrishnaBalrama!
6 comments on original post
2
mala bhutani's profile photoMohit Kushwah's profile photo
2 comments
 
+mala bhutani
 thanx
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
radhe radhe........
 
Oh Krishna Krishna Krishna
you are the greatest musician of this world....
Oh lord of my soul ..Ohh accept my heart,my life,my all...
My Beloved Prince....
Krishna Krishan Krishna
8 comments on original post
1
mala bhutani's profile photo
 
Radhy- Radhy:)
Add a comment...
In his circles
1,159 people
Have him in circles
1,184 people
najela nur's profile photo
Toshi Bhavsar's profile photo
Karthick Raj's profile photo
Neha Singh's profile photo
MAHI OJHA's profile photo
Veer meena's profile photo
shivam yadav's profile photo
Cat of the Day's profile photo
MDRadio Hashi's profile photo

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
kahin na dekhi aisi bhakti..........
1
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
arjun ka ghamand
 
"एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनको श्रीकृष्ण ने समझ लिया।  एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए।

रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी।

अर्जुन ने उससे पूछा, ‘आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव हिंसा के भय से सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह उपकरण तलवार क्यों आपके साथ है?’

ब्राह्मण ने जवाब दिया, ‘मैं कुछ लोगों को दंडित करना चाहता हूं।’

‘ आपके शत्रु कौन हैं?’ अर्जुन ने जिज्ञासा जाहिर की।

ब्राह्मण ने कहा, ‘मैं चार लोगों को खोज रहा हूं, ताकि उनसे अपना हिसाब चुकता कर सकूं।

सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को आराम नहीं करने देते, सदा भजन-कीर्तन कर उन्हें जागृत रखते हैं।

फिर मैं द्रौपदी पर भी बहुत क्रोधित हूं। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकारा, जब वह भोजन करने बैठे थे। उन्हें तत्काल खाना छोड़ पांडवों को दुर्वासा ऋषि के शाप से बचाने जाना पड़ा। उसकी धृष्टता तो देखिए। उसने मेरे भगवान को जूठा खाना खिलाया।’

‘ आपका तीसरा शत्रु कौन है?’ अर्जुन ने पूछा। ‘

वह है हृदयहीन प्रह्लाद। उस निर्दयी ने मेरे प्रभु को गरम तेल के कड़ाह में प्रविष्ट कराया, हाथी के पैरों तले कुचलवाया और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश किया।

और चौथा शत्रु है अर्जुन। उसकी दुष्टता देखिए। उसने मेरे भगवान को अपना सारथी बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का तनिक भी ध्यान नहीं रहा। कितना कष्ट हुआ होगा मेरे प्रभु को।’ यह कहते ही ब्राह्मण की आंखों में आंसू आ गए।

यह देख अर्जुन का घमंड चूर-चूर हो गया। उसने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, ‘मान गया प्रभु, इस संसार में न जाने आपके कितने तरह के भक्त हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूं।’
 ·  Translate
3
1
Hs Chouhan's profile photo
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
 
 
"Charity given out of duty, without expectation of return, at the proper time and place, and to a worthy person is considered to be in the mode of goodness. But charity performed with the expectation of some return, or with a desire for fruitive results, or in a grudging mood is said to be charity in the mode of passion." ~ Bhagavad Gītā 17.20-21
Jai Shri Krishna! 
12 comments on original post
3
Add a comment...

Mohit Kushwah

Shared publicly  - 
3
mala bhutani's profile photo
 
Beautiful post!
Add a comment...
People
In his circles
1,159 people
Have him in circles
1,184 people
najela nur's profile photo
Toshi Bhavsar's profile photo
Karthick Raj's profile photo
Neha Singh's profile photo
MAHI OJHA's profile photo
Veer meena's profile photo
shivam yadav's profile photo
Cat of the Day's profile photo
MDRadio Hashi's profile photo
Basic Information
Gender
Male
Looking for
Friends
Relationship
Single
Other names
mohan
Story
Tagline
can i help u ..............
Links
Other profiles
Contributor to