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Mohit Kushwah
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everything is zero...........
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gr8 mathematician of the world "ramanujan "
do u know him...
plz watch this movie "The Man Who Knew Infinity"
महान भारतीय प्रतिभा के साथ अन्याय-
कक्षा 6 से कक्षा 12 तक स्कूल शिक्षा सलेब्स में
रामानुजन पर केवल 6 पंक्तियाँ
औरंगजेब खिलजी आदि हत्यारों के महिमामण्डन पर स्कूल की पुस्तकों में (6 से 12 कक्षा तक ) कुल मिलाकर 100 पेज.
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रामानुजन जी की अप्रतिम प्रतिभा का प्रमाण

इलिनॉय विश्वविद्यालय के गणित के प्रोफ़ेसर ब्रूस सी. बर्नाड्ट ने रामानुजन की तीन पुस्तकों पर 20 वर्षों तक शोध किया और इस शोध का निष्कर्ष पाँच पुस्तकों के संकलन के रूप में प्रकाशित हुआ है। ब्रूस सी. बनोड्ट कहते हैं, "मुझे यह सही नहीं लगता जब लोग रामानुजन की गणितीय प्रतिभा को किसी दैवीय या आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ कर देखते हैं। यह मान्यता ठीक नहीं है। उन्होंने बड़ी सावधानी से अपने शोध निष्कर्षों को अपनी पुस्तिकाओं में दर्ज किया है।" सन् 1903 से 1914 के बीच, कैम्ब्रिज जाने से पहले रामानुजन अपनी पुस्तिकाओं में 3,542 प्रमेय लिख चुके थे। उन्होंने ज़्यादातर अपने निष्कर्ष ही दिए थे, उनकी उत्पत्ति ( प्रमाण) नहीं दी। शायद इसलिए कि वे काग़ज़ ख़रीदनें में सक्षम नहीं थे और वे अपना कार्य पहले स्लेट पर करते थे। बाद में बिना उपपत्ति दिए उसे पुस्तिका में लिख लेते थे।
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सन् 1967 में प्रोफ़ेसर ब्रूस सी. बर्नाड्ट को प्रोफ़ेसर आर. ए. रेंकिन ने 'टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च बाम्बे (मुम्बई)' द्वारा प्रकाशित 'रामानुजन नोट बुक्स' दिखाई पर उस समय प्रोफ़ेसर बर्नाड्ट की इस पुस्तक में कोई रुचि नहीं थी। सन् 1974 में इन्होनें एमिल ग्रॉसवॉल्ड के दो पत्रों को पढ़ा जिनमें ग्रॉसवॉल्ड ने रामानुजन के कुछ प्रमेयों की उत्पत्तियाँ दी थीं। प्रोफ़ेसर ब्रूस सी. बर्नाड्ट को लगा कि वह भी रामानुजन के प्रमेयों की उत्पत्तियाँ दे सकते हैं और वह 'रामानुजन नोट बुक्स' के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गए। प्रोफ़ेसर बर्नाड्ट प्रिंसटन विश्वविद्यालय गए और वहाँ से 'टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च' द्वारा प्रकाशित 'रामानुजन नोट बुक्स' की एक प्रति ले आए। यह देखकर प्रोफ़ेसर बर्नाड्ट रोमांचित हो गए कि वह कुछ और प्रमेयों की उत्पत्ति देने में सक्षम थे परंतु उस पुस्तक में ऐसे हजारों प्रमेय थे जिनकी उत्पत्ति वे नहीं दे सकते थे और इस तरह प्रोफ़ेसर बर्नाड्ट ने अपना पूरा ध्यान रामानुजन की पुस्तकों के शोध में लगा दिया।
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रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में इन्होने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया। इनका उनका वह पुराना रजिस्टर जिस पर वे अपने प्रमेय और सूत्रों को लिखा करते थे 1976 में अचानक ट्रिनीटी कॉलेज के पुस्तकालय में मिला। क़रीब एक सौ पन्नों का यह रजिस्टर आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इस रजिस्टर को बाद में रामानुजन की नोट बुक के नाम से जाना गया। मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान द्वारा इसका प्रकाशन भी किया गया है। रामानुजन के शोधों की तरह उनके गणित में काम करने की शैली भी विचित्र थी। वे कभी कभी आधी रात को सोते से जाग कर स्लेट पर गणित से सूत्र लिखने लगते थे और फिर सो जाते थे। इस तरह ऐसा लगता था कि वे सपने में भी गणित के प्रश्न हल कर रहे हों। रामानुजन के नाम के साथ ही उनकी कुलदेवी का भी नाम लिया जाता है। इन्होने शून्य और अनन्त को हमेशा ध्यान में रखा और इसके अंतर्सम्बन्धों को समझाने के लिए गणित के सूत्रों का सहारा लिया। रामानुजन के कार्य करने की एक विशेषता थी। पहले वे गणित का कोई नया सूत्र या प्रमेंय पहले लिख देते थे लेकिन उसकी उपपत्ति पर उतना ध्यान नहीं देते थे। इसके बारे में पूछे जाने पर वे कहते थे कि यह सूत्र उन्हें नामगिरी देवी की कृपा से प्राप्त हुए हैं। रामानुजन का आध्यात्म के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि वे अपने गणित के क्षेत्र में किये गए किसी भी कार्य को आध्यात्म का ही एक अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे।

वे कहते थे कि
गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिसमें ईश्वर सम्बन्धी विचार न मिलते हों।
जन्म: 22 दिसम्बर 1887

मृत्यु: 26 अप्रैल 1920
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think positive do positive.....

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nonsense................
JNU के गद्दारो को सम्भाल नही सकते और बात करते चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने की... सिर्फ सियासतदान बदले है मुल्क के हालात नहीं.........
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i hope its ur dream frndss
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never forget love for life..........
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live with truth ..........
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