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Neeraj Tyagi
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आई बरखा
आई बरखा मस्ती  छलकी मन मयूर मचला  सुंदरी वो थिरकी/ बूंद बूंद फुहारें                         बनी नरम चादर  सूरज भी दुबका बोल उठे दादर/ बादल से मिले बादल टकराए चमकें बिजली भीग गए वस्त्र सब मानस में उड़ती तितली/ आ नृत्य देख चंचल  जा छोड़ सारे दलदल मस्ती में थिर...
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प्राण प्रतिष्ठा
  मौन हुआ तो अन्तः शक्ति बोल उठा तो अभिव्यक्ति  / नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया कल्पित देव  ,  मन में ध्याया  / पूज आराधन औ गुण गान यही सहज था वही महान  / यही  , यही तो मनुष्य भाव है पत्थर पूजें दिव्य भाव है  / मूर्ति बना यदि पूजा उसको माना देवता  , भाव शक्ति क...
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प्राण प्रतिष्ठा
मौन हुआ तो अन्तः शक्ति बोल उठा तो अभिव्यक्ति  / नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया कल्पित देव  ,  मन में ध्याया  / पूज आराधन औ गुण गान यही सहज था वही महान  / यही  , यही तो मनुष्य भाव है पत्थर पूजें दिव्य भाव है  / मूर्ति बना यदि पूजा उसको माना देवता  , भाव शक्ति को ...
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प्राण प्रतिष्ठा
       मौन हुआ तो अन्तः शक्ति बोल उठा तो अभिव्यक्ति  / नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया कल्पित देव  ,  मन में ध्याया  / पूज आराधन औ गुण गान यही सहज था वही महान  / यही  , यही तो मनुष्य भाव है पत्थर पूजें दिव्य भाव है  / मूर्ति बना यदि पूजा उसको माना देवता  , भाव शक...
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प्राण प्रतिष्ठा
मौन हुआ तो अन्तः शक्ति बोल उठा तो अभिव्यक्ति / नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया कल्पित देव , मन में ध्याया / पूज आराधन औ गुण गान यही सहज था वही महान / यही ,यही तो मनुष्य भाव है पत्थर पूजें दिव्य भाव है / मूर्ति बना यदि पूजा उसको माना देवता ,भाव शक्ति को / हम चेतन ...
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