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Shirin Mansoori Taskin
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हर झूठी उम्मीद के साथ
हर झूठी उम्मीद के साथ हर राह पर  आज भी तुम्हारा  इंतज़ार करती हूँ  शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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क्या करूँ साहिब ?
क्या करूँ
साहिब ? रिश्ता मुझे
ईमानदारी से निभाना आता है आप मेरी इस
कमजोरी को कमजोरी समझे तो हाँ साहिब
मैं कमजोर ही सही आपकी नजर में.... शीरीं मंसूरी
"तस्कीन"    
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इतने सालों में मिले तो थे हम तुम
इतने सालों में मिले तो थे हम तुम दिल में खुशी थी खुशी पहले जैसी न
थी उस जगह बैठे तो थे हम तुम मगर तुम तुम न थे मैं मैं न थी शायद वक़्त ने हम दोनों को बदल दिया हम दोनों होकर भी वहाँ नहीं थे शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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हज़ार मर्तबा लेने के लिए तैयार हूँ
ढेर सारे आँसूओं के साथ जब तुम मेरे चेहरे पर खिलखिलाती हुई
मुस्कान  दे जाते हो कसम खुद की मैं
तुम्हारे दिए हुए उन हज़ार आँसूओं को हज़ार मर्तबा लेने के लिए तैयार
हूँ                                   शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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लोगों ने सच ही कहा है
लोगों ने सच ही कहा है वक़्त किसी जा नहीं होता अब तुम तुम न रहे  और हम हम न रहे वक़्त ने हम दोनों को बदल डाला सच है वक़्त से कोई बड़ा नहीं होता शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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शिकायतें तो बहुत हैं तुमसे
शिकायतें तो बहुत हैं तुमसे मगर डर लगता है कि कहीं तुम रूठ न जाओ हमसे.... शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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मेरा कसूर सिर्फ इतना ही तो है
मेरा कसूर सिर्फ इतना ही तो है कि मैंने तुमसे बेइन्तहा प्यार
किया है इस बात की मुझे इतनी बड़ी सजा मत
दो रहम खाओ मेरे दिल पे अब आ भी जाओ
न शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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सच ही कहा है लोगों ने
सच ही कहा है लोगों ने मोहब्बत के आगे हर कोई हारा है मैं भी हार चुकी हूँ इससे तुम्हें पाने की तिशनगी दिन-व-दिन बढ़ती जा रही है                              मेरे महबूब शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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इस नादान से दिल के आगे
इस नादान से दिल के आगे मैं इससे लड़ते-लड़ते हार चुकी हूँ
अब दिन-व-दिन तुम्हें पाने की चाहत इसकी बढ़ती ही चली जा रही है                       मेरे हमनवां शीरीं मंसूरी "तस्कीन"
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दिन के बाद रात आती है
दिन के बाद रात आती है ख़ुशी के बाद गम आता है विरह के बाद मिलन आता है अँधेरे के बाद उजाला आता है पतझड़ के बाद हरयाली आती है   सूखे के बाद वारिश आती है हर किसी न किसी जाने के , बाद वापस आता है पर तुम तो ऐसे गये , कि फिर वापस न आये अब बस बहुत हुआ लौट आओ न शीरीं ...
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