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Lokoday Prakashan
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समाज में लेखक अपनी कलम न केवल सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
करने के लिए उठाता है , अपितु उन्हें बदल कर नये आयाम स्थापित करने के लिये
भी प्रतिबद्ध रहता है। चाहे वह किसी भी वय का हो। उसे हर समय अपने आसपास हो रही
गतिविधियों की जानकारी होती है जिन्हें वह अपने शब्...

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हास्य-व्यंग नाटिका ‘चलें पोरबन्दर’ के प्रति दो शब्द
हास्य-व्यंग नाटिका ‘ चलें पोरबन्दर ’ के प्रति दो शब्द गद्य , कविता , कहानी , लेख , नाटक , नौटंकी
विधाओं पर साहित्य-लेखन करने वाले साहित्यकार प्रदीप कुमार सिंह कुशवाह विरचित
हास्य-व्यंग नाटिका ‘ चलें पोरबन्दर ’ नयनेन्द्रियों का विषय बनने वाले काव्य-रूप अर्था...

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5/26/17
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शीघ्र प्रकाश्य 
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प्रतिक्रिया
यह चौथी किताब है । इस किताब मे अलग अलग समय पर विभिन्न विषयों पर लिखे गये आलेखों का संग्रह है । कुछ मेरे प्रारम्भिक लेख भी इसमें है जैसे आदिकाल और लोकजीवन, भक्ति का उदय और लोक की भूमिका, सन्तपरम्परा और दादू दयाल, लेकिन अधिकतर आलेख पढी हुई किताबों पर हैं । सा...

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शीघ्र प्रकाश्य 
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प्रकाशनाधीन 
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शीघ्र प्रकाश्य 
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शीघ्र प्रकाश्य 
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