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पूर्णिमा S. दुबे
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बाढ़ तो हमारे यहाँ किसी न किसी राज्य में हर साल ही आती है.
लेकिन मुझे तो याद नही कि कभी अरब से चंदा आया हो हर बार हमारे लिये भारत सरकार ही खड़ी होती है और वो काफी भी होता है
बड़े आश्चर्य की बात है सऊदी देश अचानक एक भारतीय राज्य की मदद क्यों कर रहे हैं?जबकि बिहार,उत्तराखण्ड,असम की जल विपदाओं में तो आज तक कोई योगदान इन देशों ने नही दिया ये कौन सा रिश्ता है जो सामने आया है ?
सरकार को भी सीधा जवाब दे देना चाहिए कि जो देना है उसे सीधे #प्रधानमंत्री_राहत_कोष मे भेज दें
NGO के जरिये अब पैसा भेजने का खेल बंद होने के बाद कही ये नया दुष्चक्र तो नहीं देश के विरोधी तत्वों तक पैसा पहुंचाने का ?
वमियों की ममता भी अभी ही उतर रही है, वरना कभी इससे पहले अपील करते नही दिखे
ये इनकी #एकतरफा_मोहब्बत समझ के बाहर है।

क्या भारत सरकार ने किसी अन्य देश से मदद मांगी है ??
यदि नही मांगी तो इसकी जांच होनी चाहिए कि ये किसके आग्रह पर मदद आयी
आज आखिर क्यूँ केरल से क्राॅस और जालीदार टोपी गायब हैं?सिर्फ खाकी पैंट ही टिका हुआ है खूँटा गाड़कर
गर्व है हमें देश की सेना और RSS पर
#रश्मि जी
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#जम्हूरियत....#कश्मीरियत....#इंसानियत

( सत्ता भोगते हुए दस वर्ष से ज़्यादा हो गए...असली कश्मीर घाटी कुछ तो जान लो )

कश्मीर घाटी में #कक्षा_तीन के मुस्लिम बच्चे अपनी इंग्लिश टेक्स्ट बुक में क्या पढ़ते हैं,ज़रा देखें और जानिए कि पूरी की पूरी पीढ़िया कैसे जेहादी और भारत विरोधी हो गईं :-

"Little children,be very calm
I will tell you what is islam.
You may be few and without army,
But you must fight for Islam."

यही किताब आगे बच्चों को बताती है

"We are Kashmiris and our country is Kashmir.it is surrounded by India, Pakistan China and Iran"

घाटी में हिंदी...संस्कृत और भारतीय भाषाओं को पढ़ाने पर प्रतिबंध है...

क्या हम मूढ़ और मूर्ख नहीं है कि जिन शिशुओं को घुट्टी में 70 साल से यही पढ़ाया जा रहा हो कि वह अलग कश्मीरी राष्ट्र है,पाकिस्तानी हमारे भाई हैं...निज़ाम ए मुस्तफा हमारा हक और कायदा है और भारत ने कश्मीर पर अनाधिकृत और नाजायज़ कब्ज़ा जमाया हुआ है...भारतीय सेना से युद्ध करना जिहाद है....हर कश्मीरी मुस्लिम का फर्ज है कि भारतीय सेना से युद्ध करे...ऐसे बच्चे क्या बनेंगे ?

मगर भारत की सरकारों की दयानतदारी देखिए....भारत के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कालेज... NIT...,इंजीनियरिंग कालेज,विश्वविद्यालय और अब एम्स घाटी में दिए गये है जहां से आतंकियों और भारत के विरोधियों का निकलना जारी है।बरसो पहले अल फ़तेह का एक आतंकवादी जिसका नाम फज़ल उल हक़ कुरैशी था ,वह एक उच्च शिक्षित Mcom था....कश्मीर सरकार ने जनरल एमनेस्टी के तहत उसे माफ़ी दी और साथ में सरकारी नौकरी भी...परंतु श्रीनगर स्टेट सेक्रेटेरिएट में एकाउंट्स ऑफिसर रहते...एक आतंकवादी की टिप पर जब कुरैशी के घर पर छापा मारा गया तो उसके घर पर एके -47 और 12 बम प्राप्त हुए।
कश्मीर को हैंडल करने में हुई गलती की कीमत 50000 से ज़्यादा सैनिकों को खोकर इस देश ने उठाई है....खेद है...वही सड़ी गली, असफल और तुष्टिकरण नीतियां...आज भी हमारे आरएसएस तक के नेता ढो रहे हैं...

और जवानों का मरना जारी है!!

Pawan Saxena
Il Kashmir
Il Kashmir
kashmir.it
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अगर कोई चमचा, पिद्दी या गुलाम आपसे पूछे कि मोदी के आने के बाद देश मे क्या बदला है तो ये पोस्ट कॉपी मारना और चिपका देना -

मोदी सरकार के 30 ऐसे काम जिनको जानने के बाद आपको भक्त होने पर गर्व होगा।

◆ आज़ादी के 70 साल बाद देश के दूर दराज 18000 गांवों में पहली बार बिजली पहुँची।

◆ आज़ादी के 70 साल बाद देश के 34 करोड़ लोगों ने पहली बार बैंक में खाता खुलवाया। 2014 में देश के 34 प्रतिशत लोगों के पास बैंक खाता था आज 82 प्रतिशत के पास है।

◆ आज़ादी के 70 साल बाद पहली बार 17 करोड़ लोगों का बीमा किया गया। 2014 में देश मे 9 प्रतिशत लोगों के पास बीमा था आज 26 प्रतिशत लोगों के पास है।

◆ 2014 में देश के 18 प्रतिशत विद्यालयों में टॉयलेट थे आज 100 प्रतिशत विद्यालयों में हैं।

◆ आज़ादी के बाद पहली बार 3.5 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को एलपीजी का कनेक्शन मिला और उन्हें धुएं से छुटकारा मिला। 2014 से पहले मात्र 96000 समृद्ध ग्रामीण परिवारों के पास गैस कनेक्शन था।

◆ 2014 तक हर दिन 1 किलोमीटर नई सड़क बनती थी आज 8 किलोमीटर प्रतिदिन बनती है।

◆ 2014 में सेना के पास दो दिन युद्ध लड़ने का आयुध था आज 16 दिन लड़ने का आयुध उपलब्ध है।

◆ 2004 से 2014 तक 10 सालों में 3 लाख 90 हज़ार गरीब परिवारों को घर मील थे और 2014 से 2018 तक 4 सालों में 76 लाख गरीब परिवारों को अपने घर मिले हैं।

◆ 2014 तक 9 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास शौचालय था और आज 56 प्रतिशत के पास है।

◆ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की वजह से भ्रस्टाचार के मामले में 70 प्रतिशत तक कमी आयी है और लाखों की संख्या में फ़र्ज़ी बेनिफिशियरी को बेनिफिट बन्द की गई है।

◆ डिमोनटाईजेशन और जीएसटी की वजह से टैक्स पेयर की संख्या में 30 प्रतिशत की बृद्धि हुई है।

◆ अंतरराष्ट्रीय ट्रेड नियमों में बदलाव की वजह से देश के बाहर काला धन भेजने का ट्रेंड लगभग शून्य हो गया है।

◆ योगा जो भारत की लाखों सालों से सांस्कृतिक पूंजी थी आज पूरे विश्व मे जाना जाने लगा है ।

◆ रिकार्ड 4 सालों में भारत ने स्वदेश निर्मित पनडुब्बी कलवरी को समुद्र में उतारकर नया कीर्तिमान बनाया है।

◆ आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों लगभग 50 करोड़ गरीब लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देने का कार्य प्रगति पर है।

◆ देश के 3.5 करोड़ युवाओं को स्टार्टअप योजना के तहत कम इंटरेस्ट पर लोन देकर रोजगार के अवसर पैदा किये गए हैं।

◆ प्रधानमंत्री कौशल विकाश योजना के तहत 6 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार के अवसर खोले गए हैं।

◆ जोजिला दर्रे पर 15 किलोमीटर टनल रोड बनाकर लेह लद्दाख को 12 महीने देश से जोड़े रखने का काम शुरू हो गया है ।अभी तक लद्दाख साल के 7 महीने देश से कटा रहता था।

◆ मेक इन इंडिया के तहत 20 बड़ी कंपनियों ने देश मे अपने मैनुफैक्चरिंग यूनिट या तो शुरू कर दी है या प्रोसेस में है।

◆ 2014 में मोबाइल डेटा जो 500 रुपये में 3 जीबी मिलता था डिजिटल क्रांति के बाद आज एवरेज 300 रुपये में 90 जीबी मिलता है।

◆ एयर इंडिया, भारतीय रेल और भारतीय डाक जो 2014 तक घाटे में थे आज फायदे में हैं।

◆ 1980 के बाद पहली बार है कि लगातार 4 सालों तक किसी सरकार के मंत्री को घोटाले की वजह से या तो जेल न जाना पड़ा हो या पद न छोड़ना पड़ा हो।

◆ आज़ादी के बाद पहली बार 3.5 करोड़ लोगों ने सब्सिडी लेने के बजाय प्रधानमंत्री के एक आह्वान पर सब्सिडी छोड़ दिया।

◆ सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके अपना शौर्य दिखाया।

◆ आज देश के पीएम के विदेशी दौरों का कई देशों में लाइव प्रसारण होता है।1970 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है।

◆ मेघालय, मणिपुर और अरुणाचल में पहली बार ट्रेन पहुंची।

◆ भारत और बांग्लादेश के बीच बाड़ लगाकर बांग्लादेशी घुसपैठ को रोका।

◆ आज़ादी के बाद पहली बार राजस्थान के रेगिस्तानी सरहद पर जवानों के लिए ऐसी और कूलर की व्यवस्था की गई।

◆ आज़ादी के बाद पहली बार किसानों के लिए किसान चैनल, मुफ्त एक्सपर्ट एडवाइस और मिनिमम 150 प्रतिशत सपोर्ट प्राइस के लिए योजना बनी।

◆ तुष्टिकरण को रोककर हज सब्सिडी खत्म कर बचे पैसे का प्रयोग अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान के लिए किया गया।

◆ आजादी के 70 साल बाद अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट एयरपोर्ट से पहली कमर्शल हवाई यात्रा शुरू हुयी

अभी भी बहुत कुछ है।
#फिर से मोदी सरकार2019

via MyNt
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एक बार एक ईसाई मित्र से बात हो रही थी, विषय मैंने ही उठाया था, विपदाओं में फंसे लोगों का सहायता के बहाने कनवर्ज़न का ।

मैंने पूछा कि विपदाओं में ईसाई भी फँसते हैं जिनको हिंदुओं की स्वयंसेवी संगठनाएँ केवल सेवाभव से निरपेक्ष मदद करती हैं । अगर वे भी उन फंसे हुए इसाइयों के सामने हिन्दू होने की शर्त रखेंगे, तो आप लोग तो कितना हल्ला करोगे !

उसने शांति से कंधे उचककर जवाब दिया - हाँ वो तो हम करेंगे, लेकिन आप लोग तो केवल यही सवाल उठाने के सिवा कुछ करते भी हो कभी ? आप को आश्वस्ति है कि हम हल्ला करेंगे । उतना डर ही आप को ऐसा करने से रोकने को पर्याप्त है । हमें भी पता है कि आप भी हल्ला करेंगे । और यह भी पता है कि उसके आगे कुछ नहीं करेंगे। और समझाना तो जरूरी नहीं आप को !

मैं तो समझ गया था, उम्मीद है कि आम हिन्दू भी समझ जाएँ ।

द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की हालत खराब थी ..प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण इंग्लैण्ड में कोई घर ऐसा नहीं था जिसमें की पुरुष न मारा गया हो ...अंग्रेजों के पास अपनी सेना नहीं थी ..जो थी वो भारतीय सेना थी या तुरंत बनाई हुई ब्रिटिश सेना ...

ऐसा ही समय 1857 में भी आया था जब अंग्रेजों को चुन चुन कर मारा गया था ..और इसमें भारतीय महिलाएं और सामान्य कृषक मजदूर सभी शामिल थे औरतों ने अंग्रेजो की गर्दनें दरातियों से काट डालीं थी इस भयानक संहार के बाद कुल 3-4 सौ अंग्रेज किसी तरह भारत से जान बचाकर भागे थे या छुप कर रह रहे थे... बाकीयों को क्रांतिकारियों ने मार डाला था ...1857 की क्रांति सफल थी राजनैतिक ऐक्यता नहीं थी इस फूट ने पुनः विदेशी गुलामी की नींव डाली

जब अंग्रेजों से देश खाली था उस समय के कुछ गद्दार देशी राजाओं ने अंग्रेजों को पत्र लिखे थे की आओ और यहाँ शासन करो ...उसके बाद अंग्रेजों ने यहाँ के देशी राजाओं नवाबों के साथ मिल कर भारतीय क्रांतिकारी परिवारों गाँवो शहरों और प्रान्तों में खूनी खेल शुरू किया और ये दमन किया जो निरंतर चलता रहा ...इसका स्वरूप बदल गया भारतीय प्रजा को दीन हीन बनाया गया

राजनैतिक धार्मिक और भारतीय के रूप में लोग एक दूसरे से उतने जुड़े हुए नहीं थे ..छूत अछूत मत मतान्तरों का अंधकार था लोग शिक्षा विहीन थे ..जिन्हें उठा कर खड़ा करना था ...भारतीय समाज के लोगों ने इसकी जिम्मेदारी ली ..महान व्यक्तियों ने जनजागरण का कार्य पुनः शुरू किया ...ऋषि दयानन्द उनके शिष्यों और आर्य समाज का इसमें प्रथम और अविस्मरणीय योगदान हैं ...जिन्होंने छुआ छूत अविद्या जाति पांति भाषा प्रान्त से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए समाज को आंदोलित किया ...स्वसंस्कृति और स्वराज्य की उपासना आकांक्षा के लिए प्रेरित किया और अब तक भी नित्य इनकी सुरक्षा और संवर्धन के नित्य प्रयत्नशील हैं...

नई जागृति ने नए आंदोलनों को जन्म दिया स्वदेशी हिन्दीभाषा स्वधर्म गौरक्षा इन सभी आंदोलनों और भारतीय क्रांतिकारियों के अदम्य शौर्य और उत्साह का प्रदर्शन किया ..अंग्रेजों को व्यवस्था संभालने में भय हो रहा था ..उन्हें वही पुराने दिन स्मरण हो रहे थे ...किसी तरह अंग्रेजों के मित्रों गांधी आदि ने अहिंसा की लाठी से लोगों को धकेल रखा था ..

सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज अंग्रेजों पर आक्रमण करने वाली थी ...तब अंग्रेजों ने अपने भारतीय मित्र(गद्दार) राजाओं से नवाबों से पूछा की जब सुभाषचंद्र बोस ब्रिटिश गवर्मेंट पर आक्रमण करेंगे तो आप लोग हमारी साहयता करोगे या नहीं अपनी सेना हमे दोगे या नहीं ...राजाओं का उत्तर था कि नहीं हम आप लोगों की कोई सहायता नहीं कर सकते अगर हम ऐसा करते हैं तो हमारी प्रजा ही हमे मार डालेगी

तब अंग्रेजों ने अपने शुभचिंतक गांधी से मदद मांगी ...गांधी ने कहा कि अब और जनमानस को नहीं रोका जा सकता देश तो आपको छोड़ना ही है ...हम आपकी स्थिति को सम्मानजनक बना सकते हैं ...हम ये कर देंगे की आपने अपनी इच्छा से भारतियों पर मेहरबानी करके शासन भारतियों को सौंप दिया है ..आप भागे या हारे नहीं हो ...उसके बाद ...

भारत पाकिस्तान बंटवारा उसके लिए कमेटियां लोग नियुक्त हुए और दुनिया भर की कवायद और राजनैतिक चालबाजियां चली गईं ...अंग्रेजों के चापलूसों को शासन में हिस्सेदारी मिली ..अंग्रेजों के पिट्ठुओं और नीतियों ने ही इस देश पर अधिकतर समय पर राज किया ...सच को हमेशा छुपाए रखा ..भारतीय जनमानस को तकनीक और संचार माध्यमों से दूर रखा ...

ये पढ़ाते और सिखाते रहे की ..साबरमती के संत ने कर दिया कमाल दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल।

आजादी जबकि पूरी नहीं है ये ट्रांसफर ऑफ पावर है ..सत्ता का हस्तांतरण है ..आधा है पर ...ये विजय ये स्वतंत्रता किसी व्यक्ति की नहीं लाखों लाख बलिदानियों ने प्राण और लहू देकर मूक और व्यक्त संघर्ष किया है ..इस स्वतंत्रता को अंग्रेजों की मेहरबानी या अहिंसा से प्राप्त हुआ बताना और मानना न केवल मूर्खता है बल्कि इतिहास को दूषित करके आने वाली पीढ़ी को संघर्ष से विमुख करना है।

जय हिंद
जय भारत
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कुछ चीजें कहां बदलती हैं...सगा दोस्‍त आज भी अबे और साला कहकर ही आवाज देता है...दोस्‍तों के मिलने पर आज भी बचपना सिर पर छा जाता है...नाश्‍ते में आज भी कचौड़ी और जलेबी लुभाती है...मां को देखकर आज भी गाय उच्‍छास से रंभाती है...स्‍कूल बंक करने में बचपन को आज भी मजा आता है....छोटू से झगड़ा होने पर बड़ा भाई आज भी सजा पाता है...बच्‍चा आज भी पिता से भय और मां के सामने जिद पर अड़ जाता है..आज भी बच्चा सोते वक़्त चादर को लात मारकर गिराता है....आज भी रविवार हफ्ते का सबसे शानदार दिन होता है….आज भी अख़बार और चाय के बीच गहरा नाता है....न गीता बदली.. न रामायण...न प्राचीन वेद....सिर्फ तुम बदले हो और मैं...
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चढ गये जो हंसकर सूली, खाई जिन्होने सीने पर गोली, हम उनको प्रणाम करते हैं, जो मिट गये देश पर. हम उनको सलाम करते हैं.. स्वतंत्रता दिवस की बधाई
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स्वतंत्रता दिवस की सभी मित्रो,मित्राणियों,दुश्मनों को बहुत बहुत शुभकामनाएं 💐💐.....

जो लोग मोदी का विरोध करते हैं वो निश्चित ही बेहद लालची प्रवृत्ति के होते हैं, जिनका इस सरकार में कुछ फायदा नही हो रहा , जरूर उनकी ये चाहत होती है कि देश को लल्लू चंपू पपेट प्रधानमंत्री देकर अपनी झोली भरने की वरना देश के लिए समर्पित एक ऐसे सख्श का विरोध करने का कोई औचित्य नही है जिसका अपना कुछ नही है न आगे न पीछे बस अगर कोई है तो "उनके प्यारे देशवासी " ....
आंख नम हो जाती है जब इस व्यक्ति की देश के लिए समर्पण और डिग्निटी देखती हूँ 😢😢...

आज फुफाओ से एक बात जरूर पूछना चाहूँगी कि " स्वार्थ से परे अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार जरूर सोचिए कि क्या इस देश को राहुल मायावती अखिलेश ममता केजरीवाल जैसे स्वार्थी और धुर्त नेताओ के हाथों में सौप देना हितकर होगा ?
या आपके #नोटा जैसी गलती से उपजा कोई भी कठपुतली नेता आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा ?"..
हो सकता है कि आपके नोटा से कोई कन्हैया या खालिद या हार्दिक या केजरीवाल या तेजपत्ता पैदा हो जाये और आप बाद में पछताने के सिवा कुछ न कर सकें ?
आपके लालच से पैदा हुआ व्यक्ति ईमानदार तो नही होगा ?
याद रहे मोदी और योगी जैसे लोग बार बार पैदा नही होते।

मुझे गर्व है कि मैंने एक ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा बनाई है जो सिर्फ देश के लिए सोचता है न कि दलित स्वर्ण मुस्लिम ईसाई के लिए।

हां मैं अंधभक्त हूँ ,मेरी इस भक्ति से अगर किसी को आपत्ति हो वो सहर्ष लिस्ट से जा सकता है 🙏...

वंदेमातरम 🙏🙏...

नोटा के पीछे की कांग्रेसी चाल:-
बस देश की जागरूक जनता को याद दिलाना और बताना चाहता हूं कि Emerdata ही कैम्ब्रिज Analytica का नया नाम है और कांग्रेस के लिये अंदरखाने मे काम कर रही है..!हिंदुत्व की बात करके हिन्दुओ को मोदी के खिलाफ भड़काना और उन्हें किसी तरह NOTA के बटन तक पहुँचाना ही छिपा एजेंडा है!
कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम बहुत ही चालाकी से काम कर रही है। ये लोग सोशल मीडिया पर हजारों की संख्या में फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप पर पेज, ग्रुप और प्रोफाइल हिंदूवादी नाम से बनवा कर भ्रमित कर रहे है।
इन सभी में पोस्ट डालने के लिए कांग्रेस की आईटी सेल हजारों पेड चारणों को नियुक्त भी कर चुकी हैं जो दिन रात भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
ये सभी इन ग्रुप्स में हिंदूवादी बातें करते है। हिंदूवादी पोस्ट डालते है। और हिन्दुओ को मोदी के खिलाफ भड़काते है की मोदी की सरकार ने ये नहीं किया वो नहीं किया।*
जिस पर पल मे तोला और पल मे माशा वाला अधीर और भावुक समर्थक तुरंत बिना अपना कान देखे, लट्ठ ले कर कौव्वे के पीछे दौड लगा देता है।
नजदीक से देखो तो लगा भी रहा है!

आप सोच रहे होंगे कि NOTA पर वोट दिलाने से कांग्रेस का क्या लाभ है ??
इन हजारों ग्रुपों को बताया गया है कि हिंदूवादी मानसिकता के लोग कांग्रेस को तो किसी सूरत में वोट देंगे नहीं और कांग्रेस का नाम लेने पर साजिश खुल जायेगी फिर वोटर सावधान हो जायेगा।
तो इनको मोदी के खिलाफ हिंदुत्व पर ही भड़का कर इनको नोटा तक पहुँचा कर राष्ट्रवाद के जहाज मे उस पर सवार लोगों से ही छेद कराया जाय।
ऐसे तमाम ग्रुप्स में जो पोस्ट डाले जाते है उनमे भी नोटा को वोट देने के लिए उकसाया जाता है, कांग्रेस चाहती है की अगर हिन्दुओ का वोट उसे न मिले तो ये वोट बीजेपी को भी न मिले और हिन्दुओ को इसी कारण मोदी के खिलाफ भड़काने के लिए ये ग्रुप्स और पेज बनाये गए है ताकि वो अगर वोट देने जायें तो नोटा का बटन दबाएँ, और या तो फिर वोट ही न देने जाये, जिसका सीधा लाभ और हर हाल में लाभ कांग्रेस को ही मिले!

समझिये साजिश को और सावधान रहिये तथा सजग करिये समाज को।

नोटा के पीछे की कांग्रेसी चाल:-
बस देश की जागरूक जनता को याद दिलाना और बताना चाहता हूं कि Emerdata ही कैम्ब्रिज Analytica का नया नाम है और कांग्रेस के लिये अंदरखाने मे काम कर रही है..!हिंदुत्व की बात करके हिन्दुओ को मोदी के खिलाफ भड़काना और उन्हें किसी तरह NOTA के बटन तक पहुँचाना ही छिपा एजेंडा है!
कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम बहुत ही चालाकी से काम कर रही है। ये लोग सोशल मीडिया पर हजारों की संख्या में फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप पर पेज, ग्रुप और प्रोफाइल हिंदूवादी नाम से बनवा कर भ्रमित कर रहे है।
इन सभी में पोस्ट डालने के लिए कांग्रेस की आईटी सेल हजारों पेड चारणों को नियुक्त भी कर चुकी हैं जो दिन रात भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
ये सभी इन ग्रुप्स में हिंदूवादी बातें करते है। हिंदूवादी पोस्ट डालते है। और हिन्दुओ को मोदी के खिलाफ भड़काते है की मोदी की सरकार ने ये नहीं किया वो नहीं किया।*
जिस पर पल मे तोला और पल मे माशा वाला अधीर और भावुक समर्थक तुरंत बिना अपना कान देखे, लट्ठ ले कर कौव्वे के पीछे दौड लगा देता है।
नजदीक से देखो तो लगा भी रहा है!

आप सोच रहे होंगे कि NOTA पर वोट दिलाने से कांग्रेस का क्या लाभ है ??
इन हजारों ग्रुपों को बताया गया है कि हिंदूवादी मानसिकता के लोग कांग्रेस को तो किसी सूरत में वोट देंगे नहीं और कांग्रेस का नाम लेने पर साजिश खुल जायेगी फिर वोटर सावधान हो जायेगा।
तो इनको मोदी के खिलाफ हिंदुत्व पर ही भड़का कर इनको नोटा तक पहुँचा कर राष्ट्रवाद के जहाज मे उस पर सवार लोगों से ही छेद कराया जाय।
ऐसे तमाम ग्रुप्स में जो पोस्ट डाले जाते है उनमे भी नोटा को वोट देने के लिए उकसाया जाता है, कांग्रेस चाहती है की अगर हिन्दुओ का वोट उसे न मिले तो ये वोट बीजेपी को भी न मिले और हिन्दुओ को इसी कारण मोदी के खिलाफ भड़काने के लिए ये ग्रुप्स और पेज बनाये गए है ताकि वो अगर वोट देने जायें तो नोटा का बटन दबाएँ, और या तो फिर वोट ही न देने जाये, जिसका सीधा लाभ और हर हाल में लाभ कांग्रेस को ही मिले!

समझिये साजिश को और सावधान रहिये तथा सजग करिये समाज को।
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