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alok chantia
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हिंदी चीनी भाई बहन !!!!!!!!!!!!!!!!
क्या क्या हुआ क्या मैंने कुछ गलत कह दिया ???? जी जी १९६२ की लड़ाई आप को याद नहीं है पर मुझको याद है और हो भी क्यों ना हमारे देश में भाई बचे ही कहा ?????? सरे बही तो चीन चले गए १९६२ की लड़ाई के बाद इसी लिए तो उन्होंने भारत की बहनों के लिए बाज़ार में चीनी राखी भेजी है ....वो देखिये वो देखिये एक बहन जी चीनी राखी कह्रीद कर १९६२ की लड़ाई याद कर रही है आखिर हिंदी चीनी भाई बहन जो है ....................अब आप आप आँख क्यों दिखा रहे है क्या ये काफी नहीं है चीनी देश की बहनों का दर्द समझे तो आप तो बहनों को सड़क पर दर्द से चीखने के लिए छोड़ देते है !!!!!!!!!!!!!!!!!! क्या नहीं छोड़ते !!!!!!!!! आप हुमांयू है जो हिन्दू बहन के राखी भेजने पर दौड़ा दौड़ा आया था तो क्या अब बहन चीनी राखी भेज कर चीनियों को भारत में बुला रही है ??????? ओह हो अब समझा आप क्या कहना चाहते है तभी चीनी देश की सीमा में घुस आये थे और आते भी क्यों ना आखिर देश की बहनों ने चीनी राखी की लाज बचाने के लिए बाज़ार के माध्यम से चीन की सेना के लिए पैसा जो भेजा है ........................ये आप क्या आनप सनाप बक रहे है ???????? मैं मैं बक रहा हूँ अब बताइए क्या आप कहना चाहते है की भारत में लोग कम दिमाग के है .बिलकुल सीधी गादित है भारत की बहन अपने को इस देश में सुरक्षित नहीं पाती है और वो अपने चीनी भाई से मदद चाहती है तो चीनी भाई आये कैसे ........अब एक ही चारा है की हिंदी बहने चीनी राखी बाज़ार से खरीदे और ज्यादा से ज्यादा पैसा चीन को पहुचाये तभी तो चीनी भारत में कब्ज़ा मतलब आ पाएंगे ....................और आपको अपनी बहनों की इज्जत करनी आती नहीं ??????????????? आती है तो क्यों नहीं वो देशी राखी बांध रही ...........क्या आप बता पाएंगे कि उनको चीनी , हुमायूँ पर ज्यादा विश्वास क्यों है ??????????? क्या उनको अपने भाइयो से ??????????????? इतने आंखे क्यों तरेर रहे हो देश के भैया ( ये भैया मुंबई वाले ?????????? शायद नहीं ) नहीं नहीं ये भाई नहीं ये तो अम्मा के पेट वाले भैया है इसी लिए बहने इनको चीनी राखी बांध कर बता रही है कि अगर भैया नहीं बने तो ये चीनी राखी खरीद खरीद कर देश कि आर्थिक स्थिति को बर्बाद कर देंगी ( प्रधानमंत्री जी आप सुन रहे है ना ये बहने कितनी ताकतवर है ....इनको चीनी राखी खरीदने से रोकिये ) ...............जी रिश्तो को बाज़ार में उतर कर वैसे भी इस देश में रिश्ते को रात में रिसते देखा गया है ......चीखते सुना गया है पर अब तो चीनी आर्थिकी के आगे रिश्ते खुद को गिरवी रख रहे है ...................क्या बहन अपनी अस्मिता को समझ नहीं पा रही या खुद अपनी माँ ( भारत ) कि इज्जत नीलाम कर देंगी क्योकि हम सब रिश्ते का मतलब ही भूल गया ...................गर नहीं तो कम से कम बहनों को समझिए कि चीनी राखी ना खरीदे और चीनी खरीददारों को इस देश में अपनी रक्षा के लिए ना बुलाये ..................क्या अब भी हिंदी चीनी भाई बहन आप अपने घर में आने देंगे ????????? क्या कलाई पर देश को गुलाम बनाने वाली राखी आप अपनी अहं से बंधवाने जा रहे है ???????????? रुकिए इस राखी के पैसे से चीन हमारे देश में अंदर आ रहा है .........................क्या आप नहीं रुकेंगे ????? आपको आ बैल मुझे मार पसंद है !!!!!!!!!!!!!!!!! घर फूंक तमाशा देखो का मतलब समझना चाहते है !!!!!!!!!!!!!!!! क्या जब तक भारत पूरा मिट नहीं जायेगा तब तक देश कि बहने हिंदी चीनी भाई बहन का खेल खेल कर राखी खरीदती रहेंगी ................क्या आप को वसुधैव कुतुम्बुकम का सपना पूरा करना है भले पूरा देश चीन का गुलाम हो जाये ???????? माँ का मतलब समझने के लिए माँ को मारना जरुरी है क्योकि बिना मरे स्वर्ग नहीं दिखाई देता .......पर क्या ऐसे चीन अधिकृत भारतमे आप चीनी राखी के बल पर कितने दिन चीनीयों के आगे बहन बनी रह पाएंगी ??????????????? सोचिये सोचिये ????????? यानि हिंदी चीनी को चीनी में घोल कर पी लीजिये ताकि महंगी होती चीनी कुछ सस्ती हो जाये .......तो कहिये हीनी में हिंदी राखी यानि देश कि इज्जत को लुटने से बचाना !!!!!!!!!!!!! समझ गए ना ( ये व्यंग्य समझ कर पढ़ा जाये )All Indian RIghts Organization PRESENTS

Indian media versus Foreign media ...
Girish malviya ki wall se..

मोदीजी से अनुरोध है कि विदेशी मीडिया पर भी थोड़ा अंकुश लगाने का प्रयास करे, ओर माननीय अडानी साहब से भी विनती है कि एक मानहानि का मुकदमा ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन पर भी ठोक दे, ताकि उस अखबार के ट्रस्टी हुजूर माईबाप कहते हुए आपके पैरों पर गिर पड़े,ताकि आप उसके निरीह सम्पादक को निकालने का सौदा कर सके

गार्डियन को मिले दस्तावेज के अनुसार भारतीय कस्टम विभाग के डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवन्यू इंटलीजेंस (डीआरआई) ने आपके यानी अडानी समूह के खिलाफ फर्जी बिल बनाकर करीब 1500 करोड़ रुपये टैक्स हैवेन (टैक्स चोरों के स्वर्ग) देश में भेजने का आरोप लगाया है
अखबार यह भी कहता हैं कि अडानी समूह ने दुबई की एक जाली कंपनी के माध्यम से अरबों रुपये का सामान महाराष्ट्र की एक बिजली परियोजना के लिए मंगाया और बाद में कंपनी ने वही सामान अडानी समूह को कई गुना ज्यादा कीमत पर बेच दिया। रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह ने इन सामान की कीमत बिल में औसतन चार गुना ज्यादा दिखाया
अब सवाल यह पैदा होता हैं कि इस पैसे का किया क्या गया ?, गार्डियन कहता है कि अडानी समूह ने दक्षिण कोरिया और दुबई की कंपनियों के माध्यम से मारीशस स्थित एक ट्रस्ट को पैसा पहुंचाया जिस पर अडानी समूह के सीईओ गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नियंत्रण है
हाल ही में सेबी तीन लाख शैल कम्पनियो पर कार्यवाही की बात कह रही थी उसमें शायद ये कंपनियां नही आती होगी ! खैर जाने दीजिए..............
अब जरा लगे हाथों विनोद अडानी के बारे मे भी जान लीजिए,............... पनामा पेपर्स में इनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है, चाहे पड़ोस के देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपनी गद्दी पनामा पेपर्स के कारण छोड़ना पड़े , लेकिन यहाँ भारत मे इस मामले में पत्ता भी नही खड़कता........

भारतीय बैंकों के अनुसार विनसम डायमंड्स देश की दूसरी सबसे बड़ी डिफॉल्टर कंपनी है. इसके मालिक जतिन मेहता विनोद अडानी के समधी है,मेहता के बेटे सूरज की शादी कृपा से हुई है. कृपा , गौतम अडानी के भाई विनोद शांतिलाल अडानी की बेटी हैं.
जतिन मेहता भी विजय माल्या की तरह सेंट किट्स में जाकर बैठ गए है ,चूंकि विजय माल्या का कांग्रेस कनेक्शन जग जाहिर है इसलिए उसका मामला हमेशा सुर्खियों में बना रहता है ,लेकिन जतिन मेहता , अडानी कनेक्शन की वजह से आसानी से बच जाते है

मीडिया रिपोर्टे कहती हैं कि मेहता पर स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक समूह के 4,680 करोड़ रुपये और पंजाब नेशनल बैंक समूह के 2121.82 करोड़ रुपये बकाया हैं. इस तरह विनसम एवं सहयोगी कंपनियों पर कुल 6,700 करोड रुपये बकाया हैं. बैंको ने इस रकम को अपने डूबत खाते में शामिल कर लिया है

अब अनोखा तथ्य विनोद अडानी के बारे में ओर जान लीजिए ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी मीडिया समूह फेयरफैक्स मीडिया ने दावा किया था कि एबॉट प्वाइंट पोर्ट की लीज उनके नाम पर है, न कि गौतम अडानी के नाम पर. ओर यह लीज अडानी की ऑस्ट्रेलिया स्थित महत्वाकांक्षी कार्माइकल कोल माइन प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है.
अब भगवान ही जानता है कि भारतीय स्टेट बैंक ने 6000 करोड़ का कर्ज अडानी को कैसे ओर किस बिना पर दिया है

लेकिन एक बात तो तय है कि हमे अब सच्चाई जानने के लिए विदेशी मीडिया पर ही निर्भर रहना होगा, देसी मीडिया की तो अब कोई ताकत नही बची है जो हमे सच्चाई बता पाए

All Indian RIghts Organization PRESENTS a beautiful story for those who ignore elderly people
एक राज्य में एक राजा थे।एक दिन उन्होंने अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि 50 वर्ष से अधिक आयु वाले बुड्डे-बूढ़ी सिवाय खाने-पीने के अलावा कोई काम नहीं करते और यह बोझ बन गये हैं । सब रियासतदारों को आदेश भेजो कि वह हर जिले में एक खूब बड़ा गड्डा खुदवाए और उसमें 50 साल से ऊपर के सभी बुड्डे-बूढ़ी को गिरवा दें, कोई भी बूढ़ा-बुढ़ी राज्य में दिखायी न दें । इस पर मंत्री ने कहा कि महाराज यह सही नहीँ हैं इन बूढ़े-बूढ़ी के अनुभव का लाभ राज्य को मिलता हैं जो फ़िर नहीँ मिलेगा ।
पर राजा ने मंत्री की बात नहीँ मानी और सभी नागरिकों को अपने घर के 50 साल से अधिक आयु के बूढ़े-बूढ़ी को 30 दिन के अंदर गड्डे में फेंकने के आदेश दिये गये ।
इसी आदेश पर जब एक व्यक्ति अपने पिता को कंधे पर बैठाकर शहर में खुदे गड्डे में फेंकने ले जा रहा था तो उसका पिता रास्ते में पड़ने वाले पेड़ से पत्तियाँ तोड़कर रास्ते में डाल देता था , इस पर बेटे ने पूछा तो उसने कहा कि जब तू मुझे फेंककर वापिस घर आयेगा , रास्ता भूलने पर इन पत्तियों को देखकर घर पहुँच जायेगा । इस पर बेटे के मन में विचार बदल गया और उसने फ़ैसला किया जो मेरा इतना ध्यान रखता हैं उसे मैं कभी गड्डे में नहीँ फेंकुंगा ।
बाद में उसने अपने पिता को घर में छुपाकर रख लिया ।30 दिन बाद राजा ने मंत्री से पूछा कि अब कोई बूढ़ा-बूढ़ी नही बचा हैं , मंत्री ने कहा कि - नहीँ । इस पर राजा ने चुटकी ली कि अब अनुभव की परीक्षा हो जाये । कोई एक काम पूरे राज्य से करवाओ और उसे करने वाले को उचित इनाम दो ।
मंत्री ने ऐलान किया कि तीन दिन में जो शंख में धागा पिरोकर लायेगा उसे 100 स्वर्ण मुद्रा मिलेंगी ।इस बात को जब उस व्यक्ति ने अपने पिता से शेयर किया तो उसने कहा कि चींटी के पैर में धागा चिपकाकर शंख के एक सिरे पर छोड़ दो जब चींटी चलेगी तो चींटी के साथ धागा दूसरे सिरे से निकल आयेगा । बेटे ने ऐसे ही किया और शंख में धागा आर-पार हो गया । उसने राजा के पास जाकर इनाम पा लिया ।
इस पर राजा ने फ़िर मंत्री से चुटकी ली कि अनुभव का क्या काम ? इस पर मंत्री ने एक और सवाल पूछने की इजाज़त माँगी तो राजा ने कहा कि चलो एक बार और सही !
फ़िर मंत्री में ऐलान किया कि जो कोई तीन दिन में राख से रस्सी बनाकर लायेगा उसे 500 स्वर्ण मुद्रा मिलेंगी , इस पर पूरे राज्य में कोई सफ़ल नही हो पाया जब उस व्यक्ति ने अपने पिता से पूछा तो उसने कहा कि एक ट्रे में रस्सी का टुकड़ा रखकर उसमें आग लगा दो जब आग बुझेगी तो राख की रस्सी ही मिलेगी ।
जब व्यक्ति राजभवन पहुँचा और उसने इनाम पाया तो मंत्री को शक हुआ कि दोनों बार एक ही व्यक्ति क्यों ? ज़रूर इसके घर में कोई बूढ़ा-बूढ़ी हैं । इस पर मंत्री ने व्यक्ति से सच्चाई निकलवा ली और तब राजा को एहसास हुआ कि उसका आदेश ग़लत था , अनुभव का कहीँ कोई विकल्प नहीँ ।

Always respect your elders

क्या आप समझते है कि देश में कोई नेता ही नहीं बचा है ??????????????????? ताने देना किसको नहीं आता आता ?????????????? तो कोई भी उठाई गिरा हो ताने देना तो आता है ना !!!!!!!!!!!!!!!! अब करना क्या है बस जैसे देश को उलट कर रख दिया है बिकुल वैसे ताने को उल्टा कर दीजिये ..........................बन गए ना आप नेता !!!!!!!!!!!!!!!!!!!! अब करिए जो भी करना चाहे कभी अपने चारो ओर नेता गिने आप ने ???????????????? नहीं ना चलिए गिनिये एक अरब तीस करोड़ .............बाकी सब इस देश के नागरिक है ..........................ओर नागरिक किससे कहे अपने शोषण के लिए ??????????? जी जी नहीं ये ताने नहीं है .ये तो .............हमारे नेता है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!आखिर इस देश में नेता नहीं बन पाए तो क्या ???????????????????????

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खत्म हुई स्वतंत्रता दिवस की खरीद फरोख्त ...........१५ दिन तक मचा कोहराम(व्यंग्य )
आपको मेरी पोस्ट में ये हेडिंग किसी समाचार चैनल के वाचक की तरह लगेगी पर सच आप को भी पता है कि इस बार हमने खूब बेचा स्वतंत्रता दिवस पर आपको याद आएगा ही नहीं पर आपने झंडा बेचा आपने मिठाई बेचीं और नाप तोल ने न जाने कितनी छुट दी आखिर देश स्वतात्न्त्र हुआ था पर जब स्वत्रता दिवस बेचा जा रहा था तो उसको खरीद कौन रहा था !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! क्या किसी गरीब या बिना पैसे वाले को भी स्वतंत्रता खरीदने का मौका मिला !!!!!!!!!! अब नहीं मिला तो क्या हुआ आप ही कौन से अमीर है अगर अमीर होते तो भूखे नंगो की तरह माल ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए दौड़ते आखिर जिसको देखिये वो ५० से ७० प्रतिशत की छुट दे रहा था वो भी स्वत्र्ता के नाम पर और स्वतंत्रता का ननगा सच ये था कि इस देश में गरीब की छोडिये ऐसे लोगो की नजाने कितनी गिनती देखने को मिली जिनके पास पैसा था ही नही और इसी लिए ५० प्रतिशत की छुट पाकर अपने घर या तन को ढकने क एलिए दौड़ पड़े वैसे ये छूट देश की समृद्धि को बता रहा था या फिर महंगाई और खोखले जीवन का आइना बन कर खड़ा था | वैसे स्वतंत्रता दिवस को बेचने वाले उनके लिए क्या लाये थे जो रिक्शा खीच रहे थे !!!!!!!!!!!! उन बच्चो के लिए क्या लाये जो सड़क के किनारे छोटे छोटे सामान बेच रहे थे क्योकि उनकी अम्मा ने बताया था कि आज पैसे अच्छे मिलेंगे |मैंने झंडे को खरीद कर फहराने का विरोध करता हुआ चौराहे पर खड़ा था एक छोटी सी बच्ची छोटे छोटे झंडे पकडे थी एक तरह देश था दूसरी तरह भारत का असली चेहरा नन्ही सी मुठ्ठी में कई झन्डे पकडे खडी थी सारा आदर्श हिल रहा था और ऐसा लग रहा था मानो बच्चे भगवन की मूरत है , की बात अपना सच दिखा रही थी मैंने बहुत सहस करके पूछा कि बिटिया तुम कितनी साल की हो .......८ साल की हूँ अंकल !!!!!!!!!!!!! झंडे ले लो मुझसे मैंने कहा झंडे क्यों बेच रही हो !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मुझे तो मम्मी ने भेजा है और कहा कि जाओ अगर पेन्सिल चाहिए तो इसे बेच आओ और मुझे स्कूल जाना है ना और वो चुप चाप देखने लगी उसने चुप चाप अपना झंडा पकडे हुए हाथ मेरी तरह बढ़ा दिया ................मैं अवाक् था क्या झंडा खरीद लूँ पर अपने देश के वीरो का अपमान मैं ही कैसे करूँ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मैंने पूछा कितना का है बेटा.......... २ रुपये का ( क्या देश है वीरो का खून दो रुपये का ) मैंने पूछ कितने बेचे उसने कहा एक भी नहीं मैंने कहा कि मुहे तो बस एक चाहिए और मेरे पास दस रुपये है !!!!!!!!!!!!!!!!!!! बिटिया उदास हो गयी फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं तुम्हरे साथ कोई और है उसने कुछ दूर कहदे अपने भाई की तरह इशारा किया जो शायद १२ साल का रहा होगा मुझे मौका मिल गया मैंने कहा जाओ अपने भाई से १० रूपये देकर ८ रुपये ले आओ और जैसे ही वो बिटिया भाई की तरह १० रुपये लेकर बढ़ी मैंने भीड़ में खो गया ............लेकिन सामने बड़े बड़े बैनर लगे थे १५ अगस्त तक ही छूट है पूरे ५० प्रतिशत की छूट हर तरह की खरीद पर क्या एक नन्ही सी बच्ची देश की स्वतंत्रता बेच रही थी या गरीबी स्वतंत्रता बेच रही थी या फिर ये बहुराष्ट्रीय कंपनी एक देश की स्वतंत्रता को अपने लाभ के लिए बेच रही थी अगर कंपनी ५० से ७० प्रतिशत लाभ छूट देने की स्थिति में है तो आप खुद सोचिये कि एक कंपनी आपको पूरा साल कितना लूटती है तो बिकी न आप की स्वतंत्रता लेकिन वो कौन लोग है जो कश्मीर में गोली खा रहे थे लाल किले से बलूचिस्तान के लिए चेता रहे थे क्या अपने देश की स्वतंत्रता को अक्षुण रखने के लिए ये सही स्वतंत्रता दिवस नहीं था !!!!!!!!!!!!!!!!!!! पर आप तो कहेंगे ही ये भी कोई स्वतंत्रता है क्या फायेदा गोली खाने में दुसरे के मामले में टांग उलझाने की .....स्वतंत्रता तो वो है जिसमे हमको फायेदा हो देखिये ना हमने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर कितनी खरीददारी की हमको कोई कुत्ते ने थोड़ी ना काटे है जो ऐसा मौका छोड़ दे तो फिर अंग्रेजो ने क्या गलत किया आपको रोटी देकर आपके देश को बर्बाद कर डाला ............क्योकि आप तो मानने से रहे कि १५ अगस्त से ज्यादा पीछे १५ दिन सिर्फ खरीद फरोख्त मानते रहे हम सब ( कभी तो मान लिया कीजिये कि आप पासे से ज्यादा कुछ नहीं मानते )

खत्म हुई स्वतंत्रता दिवस की खरीद फरोख्त ...........१५ दिन तक मचा कोहराम(व्यंग्य )
आपको मेरी पोस्ट में ये हेडिंग किसी समाचार चैनल के वाचक की तरह लगेगी पर सच आप को भी पता है कि इस बार हमने खूब बेचा स्वतंत्रता दिवस पर आपको याद आएगा ही नहीं पर आपने झंडा बेचा आपने मिठाई बेचीं और नाप तोल ने न जाने कितनी छुट दी आखिर देश स्वतात्न्त्र हुआ था पर जब स्वत्रता दिवस बेचा जा रहा था तो उसको खरीद कौन रहा था !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! क्या किसी गरीब या बिना पैसे वाले को भी स्वतंत्रता खरीदने का मौका मिला !!!!!!!!!! अब नहीं मिला तो क्या हुआ आप ही कौन से अमीर है अगर अमीर होते तो भूखे नंगो की तरह माल ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए दौड़ते आखिर जिसको देखिये वो ५० से ७० प्रतिशत की छुट दे रहा था वो भी स्वत्र्ता के नाम पर और स्वतंत्रता का ननगा सच ये था कि इस देश में गरीब की छोडिये ऐसे लोगो की नजाने कितनी गिनती देखने को मिली जिनके पास पैसा था ही नही और इसी लिए ५० प्रतिशत की छुट पाकर अपने घर या तन को ढकने क एलिए दौड़ पड़े वैसे ये छूट देश की समृद्धि को बता रहा था या फिर महंगाई और खोखले जीवन का आइना बन कर खड़ा था | वैसे स्वतंत्रता दिवस को बेचने वाले उनके लिए क्या लाये थे जो रिक्शा खीच रहे थे !!!!!!!!!!!! उन बच्चो के लिए क्या लाये जो सड़क के किनारे छोटे छोटे सामान बेच रहे थे क्योकि उनकी अम्मा ने बताया था कि आज पैसे अच्छे मिलेंगे |मैंने झंडे को खरीद कर फहराने का विरोध करता हुआ चौराहे पर खड़ा था एक छोटी सी बच्ची छोटे छोटे झंडे पकडे थी एक तरह देश था दूसरी तरह भारत का असली चेहरा नन्ही सी मुठ्ठी में कई झन्डे पकडे खडी थी सारा आदर्श हिल रहा था और ऐसा लग रहा था मानो बच्चे भगवन की मूरत है , की बात अपना सच दिखा रही थी मैंने बहुत सहस करके पूछा कि बिटिया तुम कितनी साल की हो .......८ साल की हूँ अंकल !!!!!!!!!!!!! झंडे ले लो मुझसे मैंने कहा झंडे क्यों बेच रही हो !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मुझे तो मम्मी ने भेजा है और कहा कि जाओ अगर पेन्सिल चाहिए तो इसे बेच आओ और मुझे स्कूल जाना है ना और वो चुप चाप देखने लगी उसने चुप चाप अपना झंडा पकडे हुए हाथ मेरी तरह बढ़ा दिया ................मैं अवाक् था क्या झंडा खरीद लूँ पर अपने देश के वीरो का अपमान मैं ही कैसे करूँ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मैंने पूछा कितना का है बेटा.......... २ रुपये का ( क्या देश है वीरो का खून दो रुपये का ) मैंने पूछ कितने बेचे उसने कहा एक भी नहीं मैंने कहा कि मुहे तो बस एक चाहिए और मेरे पास दस रुपये है !!!!!!!!!!!!!!!!!!! बिटिया उदास हो गयी फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं तुम्हरे साथ कोई और है उसने कुछ दूर कहदे अपने भाई की तरह इशारा किया जो शायद १२ साल का रहा होगा मुझे मौका मिल गया मैंने कहा जाओ अपने भाई से १० रूपये देकर ८ रुपये ले आओ और जैसे ही वो बिटिया भाई की तरह १० रुपये लेकर बढ़ी मैंने भीड़ में खो गया ............लेकिन सामने बड़े बड़े बैनर लगे थे १५ अगस्त तक ही छूट है पूरे ५० प्रतिशत की छूट हर तरह की खरीद पर क्या एक नन्ही सी बच्ची देश की स्वतंत्रता बेच रही थी या गरीबी स्वतंत्रता बेच रही थी या फिर ये बहुराष्ट्रीय कंपनी एक देश की स्वतंत्रता को अपने लाभ के लिए बेच रही थी अगर कंपनी ५० से ७० प्रतिशत लाभ छूट देने की स्थिति में है तो आप खुद सोचिये कि एक कंपनी आपको पूरा साल कितना लूटती है तो बिकी न आप की स्वतंत्रता लेकिन वो कौन लोग है जो कश्मीर में गोली खा रहे थे लाल किले से बलूचिस्तान के लिए चेता रहे थे क्या अपने देश की स्वतंत्रता को अक्षुण रखने के लिए ये सही स्वतंत्रता दिवस नहीं था !!!!!!!!!!!!!!!!!!! पर आप तो कहेंगे ही ये भी कोई स्वतंत्रता है क्या फायेदा गोली खाने में दुसरे के मामले में टांग उलझाने की .....स्वतंत्रता तो वो है जिसमे हमको फायेदा हो देखिये ना हमने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर कितनी खरीददारी की हमको कोई कुत्ते ने थोड़ी ना काटे है जो ऐसा मौका छोड़ दे तो फिर अंग्रेजो ने क्या गलत किया आपको रोटी देकर आपके देश को बर्बाद कर डाला ............क्योकि आप तो मानने से रहे कि १५ अगस्त से ज्यादा पीछे १५ दिन सिर्फ खरीद फरोख्त मानते रहे हम सब ( कभी तो मान लिया कीजिये कि आप पासे से ज्यादा कुछ नहीं मानते )

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स्व ................तंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को शुभकामना .....अखिल भारतीय अधिकार संगठन
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