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कवि नारायण झाक कविता 'अकनगर आँखि' ओ परिभाषा
1. अकनगर आँखि नील अकासकेँ सुरूजक लालिमा रक्तिम आभा सँ रंगैत बढ़ैत प्रस्फुटित भ$  होअय चाहैए साकार भोर भेनाइ स्वाभाविके अहाँ बुझैत रहु जे एखन तँ निशाभाग रातिये अछि  लाल - पियर गेना - गुलाब बेली - चमेलीक कोढ़ही फुलाइ लेल सुरूजक धाहक प्रतिक्षामे अछि  अहाँ बुझैत ...
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राजविराज: सुनिल बाबूक स्मृति मे श्रद्धाञ्जलि सभा
प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डाक्टर सुनिल कुमार झाक देहावसानक तेरहम दिन मे राजविराज स्थित दूटा संस्था, मैथिली साहित्य परिषद आ मिथिला साहित्य-कला प्रतिष्ठान द्वारा श्रद्धाजलि सभा आयोजित कएल गेल. मैथिली साहित्य परिषद राजविराजक संस्थापक कार्यकारिणी सदस्य रहल डाक्टर...
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5 गोटे कें भेटल नेपाल विद्यापति मैथिली पुरस्कार!
नेपाल सरकार द्वारा स्थापना कएल गेल नेपाल विद्यापति पुरस्कार कोष एहि वर्षक लेल विभिन्न बिधाक मैथिली पुरस्कार पाँच गोटे साहित्यकार कें प्रदान करबाक घोषणा कएलक अछि. नेपाली दू लाख रुपैया नगद राशि सहितक नेपाल विद्यापति मैथिली भाषा-साहित्य पुरस्कार धनुषा जिलाक रो...
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टिप्पणी: एहन इजोत मे अपन लोक कतए!
मैथिलीक कथाकार माननीय अशोक झा (पटना) सं जनतब भेल जे आइ (3 नवंबर) चेतना समिति मे कार्यक्रम छै. आग्रह जे समय होअए त' आउ, बहुत रास अपन लोक सब सं परिचय भ' जाएत। कहने रहियनि जे कोशिश करबै जरूर। कार्यक्रमक आर कोनो सूचना नहि रहए। दिन भरिक दफ्तरी काजक पश्चात गेल रह...
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एमकी कलकत्ता आएल मारिते रास सम्मान ओ पुरस्कार!
कोलकाता केँ मिथिलाक तीर्थ, मिनी मिथिला आदि कहल गेल अछि. आ से कोलकाता एखनो अपन एहि पदवी केँ जोगा क' रखने अछि.  कोलकाता महानगरी ओ लगपासक रिसड़ा, बेलूड़, कोन्नगर, लिलुआ, हावड़ा, नैहट्टी आदि मे मैथिल सभक प्रायः सोड़हि भरि संस्था एखनो भाषा, साहित्य, संस्कृति, रं...
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विद्यापति कें पाबि धन्य मिथिला धन्य मैथिली!
कातिक मासक इजोरिया पक्षक त्रयोदशी तिथि केँ विद्यापतिक अवसान दिवसक ठेकान हुनकहि एकटा रचनाक माध्यम सँ सभ केओ अकानति छथि. हुनक जन्म आ' मृत्युक बरखक संबंध मे विद्वानक बीच मतैक्य नहि अछि मुदा जे कोनो शोध आइ धरि सोझाँ आएल अछि ताहि सभक आधार पर मानल जाइछ जे चौदहम श...
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कवि अशोक कुमार दत्त केर 'झिझिरकोना' मे सं 3 गोट कविता
1. अखबार अखबार  जे आबय सब दिन  जे चायक चुस्की संग  साटि लैत अछि पढ़निहारक नजरि कें  केओ त' कहैछ ई थिक कालक गाल मे समायल  ओहि दिनुका वर्तमान  जे पड़ल रहैत अछि भूत-भविष्य  दुनूक अस्तित्व ओ महत्व लेने  मुर्दा जकां सजाएल रहैत अछि  भिन्न-भिन्न फरकी पर  आ एकर चटनिह...
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अपन लोक, अपन माटि सं साक्षात्कार करबैत अछि 'मिथिला यात्रा'
दशमी सं पहिने किछु युवा लोकनि 'मिथिला यात्रा' पर निकलल छलाह नेपालीय मिथिला मे. निश्चये ई युवा लोकनि आम युवा त' नहिए छलाह, कारण एतेक अवगति भेलनि तखने ई लोकनि ख़ास भ' गेलाह.  'मिथिलाक अनुपम डेग' नामक संस्था दिस सं 3 गोटेक टीम दशमी सं एकदिन पहिने मिथिला यात्रा ...
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कवि विद्यानंद झा केर चर्चित कविता 'भरदुतिया'
भाइ आ बहिन एक्के आमक दू कतरा एक्के गाछक दू ठाढ़ि एकहि मायक रक्त आ मज्जा सँ बनलनि जिनकर शरीर एक्के माय बापक डी एन ए सँ  बनलनि जिनकर मन प्राण एक्के माटि मे लोटेला जे सब एक्के बसातक सिहकी लगलनि जिनका सबकेँ एक्के बरखाक बुन्न जुड़ौलकन्हिं जिनका खेलेला एक्के संग ...
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कवि नारायण झाक 'अविरल-अविराम' मे सं 3 गोट कविता
1. गाम-शहर आब गाम हकोप्रत्यास गरदनि उठा-उठा तकैत रहैए बाट दिस सोचैत रहैए गाम नहि रहत केयो मरद जनानाक कहाओत गाम कि ओहो धरत गाड़ी के बुझैए  शहर थिक विकासक नाम लोक शहर दिस उठा चुकल कहिया ने डेग कतेक नगर बसा चुकल लोक अरजै खातिर ढौआ कS चुकल अछि साम्राज्यक विस्तार...
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