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Development Work  - 
 
मुसलमान,सिख,ईसाई,जैनो से शिक्षा लेनी चाहिये।वो नमाज के पक्के है और हम सन्ध्या वन्दन करते ही नही है,वो सुबह 5 बजे अजान करते है और हम 8 बजे तक सोते है,वो अपने बच्चो को कुरान और उर्दू की शिक्षा देते है हम अपने बच्चो को गीता और संस्कृत पढने नही देते,वो अपने धर्म प्रचार के लिये अपनी गाढी कमाई का 10 वा हिस्सा जरुर लगाते है और हम धर्म के लिये अपना समय भी नही दे सकते है,वो अपनी कौम के लिये एकजुट हो जाते है और हम अपनो को ही गिराने लगे रहते है,वो मस्जिद चर्च आदि मे नियमित अजान और साफ-सफाई रखते है और हम मंदिर में ही गंदगी फैलाते है,वो अपने धर्म को बढाने के लिये कुछ भी कर सकते है और हम अपने धर्म में कमिया ही निकाला करते है,वो अपनी मस्जित,चर्च में ही सजदा करते है और हम स्वार्थ वस कहीं भी सर पटकने लगते है,उनका धर्म गुरु जो बोल दे वह उनके लिये पत्थर की लकीर हो जाता है और हम संकराचार्य को गाली देने से भी नही चूकते है।
वह हम से श्रेष्ठ यह हमे स्विकार कर लेना चाहिये वरना आज से यह प्रण ले लीजिये कि हम अपने धर्म के लिये ही जियेगें और इसी के लिये मरेगें।जो उपदेश हमाचीन में लगातार भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है ? और इसका समाधान ?
अमेरिका के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए चीन ने अपने निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला किया। निर्माण उद्योग/व्यवसायिक इकाइयों को कारोबार करने के लिए प्रोत्साहन देने की नीति के चलते चीन के पास उद्योगों को दी जाने वाली नियमित अनुमतियाँ देने का अधिकार कनिष्ठ अधिकारियों के विवेकाधीन कर देने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था।
और ठीक इसी समय चीन के शीर्ष नेता कनिष्ठ अधिकारियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम और जनमत संग्रह प्रक्रियाओं का विरोध कर रहे थे। अंकुश न होने की वजह से कनिष्ठ अधिकारी बेलगाम होकर भ्रष्टाचार करने लगे। भ्रष्टाचार के कारण वे ज्यादातर फैसले उद्योग मालिकों के पक्ष में और श्रमिकों-कर्मचारियों के खिलाफ लेने लगे। कार्य घंटे बढ़ने और वेतन घटने से श्रमिकों-कर्मचारियों के शोषण में वृद्धि होगी और उनकी अतिरिक्त आय में कमी आएगी। नतीजतन उनके हुनर में सुधार के अवसर घटेंगे और अपने खुद के व्यवसाय शुरू करने की उनकी क्षमता घट जायेगी।
इसके अलावा सामान्य रूप से देखा गया है कि जब कोई पूर्व कर्मचारी अपना स्वयं का कारोबार/कारखाना शुरू करता है तो उसके पूर्व नियोक्ता द्वारा अमुक कर्मचारी पर कॉपीराइट ट्रेड मार्क का उलंघन करने, ग्राहक सूची चुराने, स्टाफ तोड़ने आदि के आरोप लगाए जाते है। ऐसी स्थिति में यदि मुकदमा जज के पास जाता है तो अधिकतर मामलो में जज घूस खाकर पूर्व नियोक्ता के पक्ष में ही फैसले देता है जिससे नए कारोबारियों के बाजार में आने की सम्भावनाऐं घट जाती है !!! साथ ही इससे कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और नए आविष्कारों के अवसर भी सिकुड़ जाते है। क्योंकि वेतन वृद्धि और आविष्कार 'नए कर्मचारियों' पर निर्भर करते है अधिकारियों पर नहीं। अधिकारी भी वेतन वृद्धि और आविष्कार में योगदान देते है लेकिन ऐसा सिर्फ नए प्रतिस्पर्धियो के बाजार में आने से होता है।
अतिरिक्त - इस सन्दर्भ में कुछ सामान्य सिद्धांत है, जो कि चीन ही नहीं बल्कि सभी देशो पर समान रूप से लागू होते है
निर्माण इकाइयों और कारोबारियों को अधिनियमित करने के लिए कनिष्ठ अधिकारियों को कुछ 'विवेकाधिकारो' की जरुरत होती है, ताकि व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को त्वरित और आसान बनाया जा सके। ऐसी स्थिति में यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है कि कनिष्ठ अधिकारी इन विवेकाधिकारो का इस्तेमाल घूस खाने में नहीं करेंगे ? इसके लिए उपलब्ध विकल्प इस प्रकार है -- शीर्ष अधिकारियों द्वारा इन पर नजर रखी जाए, नियुक्तियाँ सिर्फ लिखित परीक्षाओं द्वारा हो, स्थानांतरण, ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल आदि। लेकिन कार्पोरेटर के पद को छोड़कर चीन के शीर्ष अधिकारियों ने अन्य पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं, ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि का विरोध किया, और वे शीर्ष अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण, लिखित परीक्षाओं द्वारा नियुक्ति एवं स्थानांतरण के तरीकों का इस्तेमाल करते रहे।
शीर्ष अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण किये जाने से अनुमोदन के लिए लम्बा इन्तजार करना होता है, जिससे मझौले और निचले स्तर पर कार्यों की गति धीमी हो जाती है और उत्पादकता गिरती है।
जब चीन के नेताओ ने देखा कि अमेरिका से मुकाबला करने के लिए निर्माण उद्योग की गति बढ़ाना आवश्यक है तो उन्होंने सन् 2000 में व्यवसायिक अनुमोदनों के अधिकार कनिष्ठ और निचले क्रम के अधिकारियों को देने शुरू किये, लेकिन उन पर अंकुश रखने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि कानूनों का विरोध किया !! अधिकारों में वृद्धि से कनिष्ठ अधिकारीयों की शक्ति बढ़ी और नियंत्रण के अभाव में वे भ्रष्ट हो गए।
अमेरिका ने भी निर्माण उद्योग को गति देने के लिए अपने कनिष्ठ और निम्न अधिकारियों को व्यापक अधिकार दिए, किन्तु राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, मल्टी इलेक्शन और जमनत संग्रह प्रक्रियाओं ने उन्हें भ्रष्ट आचरण करने से रोका। तो इस प्रकार अमेरिका के कनिष्ठ अधिकारीयों के पास चीन के कनिष्ठ अधिकारियों की तुलना में अधिक शक्तियां होने के बावजूद उनमे बेहद कम भ्रष्टाचार पनपा।
अब फिर से हम चीन के विषय ौट आते है )
तो इस प्रकार जब चीन में श्रमिकों की आय और उनकी तरक्की के अवसर गिरेंगे तो उनमे कुंठा व निराश बढ़ेगी, और इससे मिशनरीज को सबसे ज्यादा फायदा होगा !!! परिणामस्वरूप हमें जल्दी ही चीन में मिशनरीज के गतिविधियों में सरगर्मी देखने को मिलेगी और धर्मांतरण में तेजी आएगी।
कुल मिलाकर अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने के लिए चीन ने अपने मझौले और निम्न अधिकारीयों के अधिकारों में वृद्धि की लेकिन उन पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल. ज्यूरी सिस्टम, जनमत संग्रह आदि क़ानून प्रक्रियाओं का विरोध किया, जिससे कनिष्ठ अधिकारी अमीर वर्ग से घूस खाकर अमीरों के पक्ष में और गरीबो के खिलाफ अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने लगे।
और इस प्रकार जल्दी ही अमेरिका चीन को पराजित कर देगा।
समाधान ?
.चीन हर मामले में भारत की तुलना में बहुत अच्छी हालत में है। जब मैं चीन के भ्रष्टाचार के बारे में लिख रहा हूँ तो मैंने चीन की तुलना अमेरिका से की है, भारत से नहीं !! भारत के मुकाबले चीन में भ्र्ष्टाचार बेहद कम है।
तो मेरे विचार में हमें भारत में फैली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि भारत की हालत चीन की तुलना में ज्यादा खराब है।
मित्रो हमारे देश मे नेताओं एवं अधिकारियो द्वारा खुल्लम खुल्ला किया जाने वाले भ्रष्टाचार, जन विरोधी कार्यो एवं जन सेवा के प्रति उदासीनता का मुख्य कारण ये है कि हम आम नागरिक किसी भी नेता अथवा अधिकारी को उपरोक्त कार्य करने पर पद से निष्कासित नही कर सकते | सभी महत्वपूर्ण अधिकारियों जैसे पुलिस कमिश्नर, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुख्या चिकित्सा अधिकारी आदि का निलंबन केवल संबंधित मंत्री अथवा न्यायालय ही कर सकते हैं| इसलिए ये अधिकारी केवल मंत्रियो के प्रति जवाबदेह होते हैं ना की जनता के प्रति| साथ ही साथ इन भ्रष्ट मंत्रियो का निष्कासन भी जनता नही कर सकती| जनता केवल ५ साल मे एक बार इनको चुन सकती है|

अब जैसा की हम जानते है की इन अधिकारिओ द्वारा भ्रष्टाचार होने पर एक हिस्सा संबंधित मंत्रियो को भी जाता है अतः इन सबकी मिलीभगत से हम नागरिको को अपने दैनिक जीवन मे अनेक समस्याओ का सामना करना पड़ता है तथा उत्पीड़न का भी शिकार होना पड़ता है|



तो क्या होना चाहिए ? (समाधान):

इन सभी सम़स्याओ का एक मात्र निवारण ये है की सभी महत्त्वपूर्ण अधिकारियो , नेताओ एवं मंत्रियो के निष्कासन का अधिकार सीधे जनता के पास होना चाहिए| अर्थात जनता किसी भी दिन, बिना किसी नेता की अनुशंसा के अथवा बिना कोर्ट मे प्रमाण दिए, बहुमत के द्वारा इन अधिकारियो से संतुष्ट ना होने पर उनको निष्कासित कर सके , ऐसा अधिकार ही एक मात्र समाधान है|

इसी क़ानून को राइट टू रिकाल नाम दिया गया है | (पद निष्कासान जन अधिकार)


क्या ऐसा कहीं होता है ? (उदाहरण ):

अमेरिका आदि कई देशो मे ऐसे अधिकार जनता को प्राप्त है| उदाहरणार्थ अमेरिका मे नागरिक अपने जिले के पुलिस कमीश्नर को बहुमत द्वारा हटा सकते हैं अतः अमेरिका मे पुलिस कमिश्नर ये सुनिश्चित करता है की उसके अधीन पुलिस कर्मचारी रिश्वत ना ले | इसके लिए अमेरिकी नागरिको को कोर्ट अथवा किसी नेता के पास नही जाना पड़ता|
इसी प्रकार से मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर 'पद निष्कासन जन अधिकार' होने पर वह सुनिश्चित करेगा की सभी सरकारी डाक्टर समय पर आए और मरीज़ो को देखे एवं दवाई की कमी ना हो| मूल बात ये है की इन सभी अधिकारियो के मन मे 'जनता' (नेता नहीं) का भय होना आवश्यक है|
जनता से नेता व् अधिकारी क्यों नहीं डरते ??
मूल बात ये है की असली लोक तंत्र वही है जिसमे नेता व अधिकारी जनता से डरे एवं जनता में अपनी छवि अच्छी रखने का यत्न करें ।
"भय बिनु होय न प्रीती" । वर्तमान व्यवस्था में जनता ५ वर्ष में एक बार ही मालिक बनती है तथा शेष समय जनता के पास पद निष्कासन का कोई अधिकार न होने पर ये नेता जनता के मालिक बन जाते है तथा ५ वर्ष जी भर कर, अधिकारियों के द्वारा लूट मचाते हैं ।
अधिकारी ???? जी हाँ ! एक प्रश्न आप सभी से !
थोड़ी देर के लिए मान लीजिये की आप भारत सरकार या प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त एक अधिकारी है । अब वर्तमान व्यवस्था में आपके तबादले , निष्कासन , पदोन्नति , दंड आदि का अधिकार एक मंत्री या नेता के पास है । तो प्रश्न ये है कि आप किसके प्रति जवाबदेह / वफादारी निभाएंगे ? क्या जनता के प्रति या नेता के प्रति ?
आप का जवाब चाहे जो भी हो लेकिन व्यवस्था ( सिस्टम) के अनुसार आप मंत्री के प्रति जवाब देह है न की जनता के प्रति।आपने चाहे जो भी सोचकर IAS/PCS परीक्षा पास की हो, आप का काम इन नेताओ द्वारा बनाये गए कानून तथा गैजेट में दिए गए आदेशो का पालन करना है । अतः आप Govt. सर्वेंट हो न की पब्लिक सर्वेंट ।
जब रक्षक ही भक्षक बन जाय तथा आम जनता पर शासन करने लगे तो ऐसे नेता/अधिकारी को गद्दी से उतार कर दंड देने का अधिकार सीधे जनता के पास होना चहिये। याद रहे महर्षि दयानंद सरवती एवं चाणक्य ने कहा था की राजा सदा प्रजा अधीन होना चाहिए । अन्यथा वह प्रजा को लूटकर राज्य का नाश कर देग। तो राजा को प्रजा के अधीन रखने का एक मात्र उपाय है "पद निष्कासन जन अधिकार" ।
१. राजा को प्रजा अधीन होना चाहिए अन्यथा वह राज का नाश कर देगा । ~ महर्षि दयानंद सरस्वती , सत्यार्थ प्रकाश
२.जिस गणराज्य की स्थापना हम करना चाहते है, उसमे प्रजा को अपने प्रतिनिधि को रिकॉल करने का अधिकार होगा । बिना रिकाल के चुनाव एक मजाक बन कर र्रह जायें

३. जिन्दा कौमें ५ साल इंतज़ार नहीं करती ।
४ . राजा प्रजा अधीन होना चाहिए अन्यथा वह राज्य को लूट लेगा ।
तो हम क्या कर सकते ह

मित्रो सबसे पहले तो आपको अपने संसद और विध
यदि देश में करोडो लोग ऐसा सन्देश अपने सांसद तथा विधायक को भेजे तो तो वो कोई भी कानून पास करवा सकते है । सच तो ये है की कहने को देश में लोक तंत्र है परन्तु किसी भी विषय पर आधिकारिक जनमत करवाने की व्यवस्था हमारे देश के नेताओं ने आज़ादी के ६५ वर्षों बाद भी नहीं की । किन्तु ये SMS Method, सत्यापित करा जा सकता है क्योंकि मोबाइल नंबर तथा वोटर आई-डी आपके नाम पर रजिस्टरड है तथा इसकी पुष्टि की जा सकती है। साथ ही साथ कोई फ़र्ज़ी सन्देश भी नहीं भेज सकता क्योंकि हज़ारो लाखों फ़र्ज़ी सिम तो खरीदे जा सकते है किन्तु हज़ारो लाखो नकली वोटर आई-डी नहीं बनायीं जा सकती ।
एक निवेदन आपसे ये है की अधिक से अधिक संख्या में यह विचार एवं प्रक्रिया आम लोगो तक पहुचाएं ।
नकली राइट टू रिकाल से सावधान :
मित्रों इस देश में कुछ सरकारों ने राइट टू रिकाल को लागु किया है परन्तु उसकी प्रक्रिया गलत है । उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में मेयर (महापौर) को वहां के सभासद ( कॉर्पोरेटर) बहुमत साबित कर के निष्कासित कर सकते हैं । किन्तु ये "राइट टू रिकाल - मेयर " कानून नकली है क्योंकि इसमें जनता को सीधे महापौर या सभासद को हटाने का अधिकार नहीं है । अब होगा ये की अगर कोई ईमानदार मेयर बना तो भ्रष्ट सभासद उसको निष्कासित कर सकेंगे । इसी प्रकार कुछ संघटन भी राइट टू रिकाल का नाम तो लेते है पर कभी इसके प्रक्रिया या कानून का ड्राफ्ट (मसौदा) नहीं देते । क्योंकि अगर देंगे तो पता चल जायेगा की वो असली के पक्ष में है या नकली के । " किसी नेता अथवा अधिकारी को निष्कासित करने का अधिकार सीधे जनता को मिले तो ही वो असली रिकाल है । यदि किसी जज या अन्य जान प्रतिनिधि को ये अधिकार दिया गया तो वो नकली राइट टू रिकाल होग। " अतः नक्कलो से सावधान रहें । अधिक जानकारी के लिए : अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक पर जाए तथा किताब डाउनलोड करें ।गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी ।

1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।
2. गौ माता में तैंतीस कोटी देवी देवताओं का वास है ।
3. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं ।
4. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है ।
5. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है ।
6. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते ।
7. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।
8. गौ माता के मुत्र में गंगाजी का वास होता है ।
9. गौ माता के गोबर से बने उपलों का रोजाना घर दूकान मंदिर परिसरों पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता है सकारात्मक ऊर्जा मिलती है ।
10. गौ माता के एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।
11. गाय इस धरती पर साक्षात देवता है ।
12. गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है । मनोकामना पूर्ण करने वाली है ।
13. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है ।
14. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है ।
15. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है । उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है ।
16. गौ माता का दूध अमृत है ।
17. गौ माता धर्म की धुरी है ।
गौ माता के बिना धर्म कि कल्पना नहीं की जा सकती ।
18. गौ माता जगत जननी है ।
19. गौ माता पृथ्वी का रूप है ।
20. गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है । गौ माता के बिना देवों वेदों की पूजा अधुरी है ।
21. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।
22. गौ माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है ।
23. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है ।
24. गौ माता साक्षात् मां भवानी का रूप है ।
25. गौ माता के पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं ।
26. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।
27. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है । उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती ।
28. तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है । वो वैतरणी गौ माता की पुछ पकड कर पार करता है। उन्हें गौ लोकधाम में वास मिलता है ।
28. गौ माता के गोबर से ईंधन तैयार होता है ।
29. गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यों की आराध्य है; इष्ट देव है ।
30. साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी उच्चा गौ लोक धाम है ।
31. गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है ।
32. गौ माता में दिव्य शक्तियां होने से संसार का संतुलन बना रहता है ।
33. गाय माता के गौवंशो से भूमि को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है ।
34. गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है । गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है ।
35. जहां गौ माता निवास करती है वह स्थान तीर्थ धाम बन जाता है ।
36. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है ।
37. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है ।
38. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।
39. गाय माता आनंदपूर्वक सासें लेती है; छोडती है । वहां से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे वातावरण शुद्ध होता है ।
40. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे ।
41. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं ।
42. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है ।
43. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं ।
44. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।
45. गाय इस संसार का प्राण है ।
46. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है ।
47. गाय धार्मिक ; आर्थिक ; सांस्कृतिक व अध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है ।
48. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है । हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं ।
49. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा ।
50. जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए ।
51. आज नही तो, कल निकलेगा।
अर्जुन के तीर सा सध,
मरूस्थल से भी जल निकलेगा।।
मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा।
ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी बल निकलेगा।
जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
गरल के समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा।
कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,b
जो है आज थमा थमा सरकार गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित और गरीबों के हितों से जुड़ी योजनाएं जारी रहेंगी।
संयुक्त राष्ट्र ने दाउद इब्राहिम के पाकिस्तान में होने के भारत के दावे की पुष्टि की।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर घाटी की स्थिति का जायजा लेने के लिए आज जम्मू कश्मीर के दौरे पर जाएंगे।
केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के एक लाख 40 हजार युवाओं को रोजगार देगी।
वस्तु और सेवा कर संविधान संशोधन विधेयक की पुष्टि के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा का आज एक दिन का विशेष सत्र।
उत्तर प्रदेश और बिहार में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ी। गंगा-यमुना और उसकी सहायक नदियां उफान पर।
रियो ओलिम्पिक में कांस्य पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक का दिल्ली पहुंचने पर
अहिंसा परमो धर्म ; धर्म-हिंसा तथैव च :

"अहिंसा परमो धर्म" एक अपूर्ण संस्कृत श्लोक है जिसका दुष्प्रचार मोहनभाई गाँधी ने किया था, इसका दूसरा भाग को छोड़ कर | इस श्लोक के दूसरे भाग का मतलब है "धर्म की रक्षा के लिए हिंसा भी श्रेष्ट है" यहाँ धर्म का मतलब अपना कर्तव्य है, अपने परिवार, अपने देश की रक्षा करना आदि | ये श्लोक का अधूरा रूप, आज अकसर बहुत सारे नेताओं द्वारा भी बोला जाता है, ताकि आम-नागरिक अपनी सुरक्षा नहीं कर पाएं, जब उनको नेता और उनके साथी गुंडे उनको लूटें |

सनातन धर्म अपने अनुयायों पर कभी भी पूरी तरह से अहिंसा नहीं थो है, सिवाय मुनियों पर
इसी तरह, भ्रष्ट उच्च-वर्ग के लोगों ने और भ्रष्ट बुद्धिजीवियों ने शास्त्रों के साथ छेड़-छाड की अपने आप क लाभ पहुँचाने के लिए और आम-नागरिकों को लूटने के लिए |

कुल मिलकर, हमें सबसे कम हिंस या सबसे अधिक अहिंसक मार्ग चुनना है, और आम-नागरिकों को हथियार रखने का अधिकार वो मार्ग है | कृपया इसके लिए कुछ प्रस्ताव-ड्राफ्ट चैप् 29, www.prajaadhinbharat.dpress.com में देखें (ये लिंक स्पैम नहीं है) | ये सभी प्रस्ताव पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली द्वारा बहुमत आम-नागरिकों के समर्थन द्वारा आयेंगे | कृपया पारदर्शी शिकायत/प्रसर्यकर्ताओं को ये समाधान-ड्राफ्ट आम-नागरिकों तक पहुँचाना चाहिए और अपने नेताओं से इसको भारतीय राजपत्र में छपने के लिए मांग करनी चाहिए मेसेज/मेल द्वारा और फिर ये नेता को मेसेज/मेल अपने वाल नोट, ब्लॉग आदि पर सबको दिखाना चाहिए ताकि जनता को प्रमाण मिले और दूसरे नागरिक भी प्रेरित हों |
[8/24, 11:45 AM] ‪+91 97316 00284‬: हम भारतीय हैं ....एक सर्वेक्षण के मुताबिक हम दुनिया के सबसे शर्मीले नागरिकों में से एक हैं ..इसके बावजूद हमारी जनसंख्या 132 करोड़ हैं ....मतलब समझे ??..चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जन समूह .......70 साल हो गए हमे आजाद हुवे .....132 करोड़ जनसँख्या ....33 लाख स्क्वायर किलो मीटर क्षेत्रफल और उसमे से भी आधे से ज्यादा भाग में खेती ...10 महान बहती हुई पवित्र नदियाँ ...इसके बावजूद भारत के जनसँख्या के एक बड़े हिस्से को आज भी साफ़ पानी नसीब नहीं होता ...एक सरकारी आकडे के अनुसार देश में आज भी 19.5 करोड़ लोग आधे पेट खा कर सोते हैं .....दुनिया के सबसे ज्यादा अमीर इंसानों का समूह आज भारत में है ....डेढ़ लाख से ज्यादा छोटे बड़े उद्योग होते हुवे भी भारत के 10 लाख स्नातकों को नौकरियां नहीं मिल पाती .......दुनिया का सबसे बड़ा खुदरा और थोक बाजार होने के बाद भी हमारी अर्थ व्यवस्था हमारे रुपये को मजबूत नहीं कर पाती जो की डालर के मुकाबले हमेशा कमजोर ही रहता है .......आज भी 1 डालर की वैल्यू 65 रूपये है ......साफ़ सफाई के मामले में भी हम शीर्ष 50 देशों में भी अपना स्थान नहीं बना पाते ......132 करोड़ के देश में हम एक ओलम्पिक मैडल के लिए तरसते हैं ..........जहाँ नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्व विख्यात शिक्षा स्थल रहे हो ..आज वहां की ग्रामीण जनसंख्या के 60 % से ज्यादा लोग अपना नाम भी नहीं लिख पाते ..जिस देश में विद्योत्मा जैसी विदुषी स्त्री का जन्म हुवा जिसने शास्त्रथ में काशी के विद्वानों को भी हरा दिया था उस देश की 60 % से ज्यादा ग्रामीण महिलाए अपना नाम तक नहीं लिख पाती .....जिस देश की मिटटी को सोना कहा जाता था ...आज वहां किसान हर रोज़ आत्महत्या कर रहा है ............जहाँ हरिश्चंद्र जैसे सत्यवादी राजा हुवे ..जहाँ हर्षवर्धन और महान कर्ण और महान दानवीर राजा बली का जन्म हुवा उस देश का नाम दुनिया के 60 सबसे भ्रष्ट देश की सूचियों में है ...........हम क्यों नहीं आगे बढ़ रहे हैं ??.....क्यों नहीं ये सोचते हैं हम ???....क्या 100 करोड़ के देश में आपको तैरने वाले तैराक नहीं मिले की ओलम्पिक में तैराकी में ही कोई मैडल जीतते .....??क्या 100 करोड़ के देश में एक भी पहलवान का जन्म नहीं हुवा जो ओलम्पिक में पहलवानी कर एक पदक दिला सके ......???क्यों करते है हम भाई भतीजा वाद ..प्रतिभाशाली को अवसर क्यों नहीं देते ...???......क्यों एक मंत्री की भैस की खोजाई में पूरा पुलिस महकमा लग जाता है और बुलंद शहर में माँ बेटी के रेप के 12 आरोपियों में से महज़ 3 की गिरफ्तारी हो पाती है ??..क्यों ???....हम भारतीय हैं जिस देश में शक्ति की पूजा होती है ..शिक्षा शक्ति और धन तीनो की क्षत्रों का प्रतिनिधित्व काली लक्ष्मी और सरस्वती करती हैं ..फिर भी कन्या भ्रूण हत्या में हम सबसे आगे हैं .........जिस देश में गाय का स्थान माँ के बराबर है वो देश आज दुनिया को सबसे ज्यादा बीफ सप्लाई करता है ........जिस देश में गंगा को माँ कहा जाता है वो uno के अनुसार दुनिया की पांच सबसे प्रदूषित नदी है .......जिस राम को भारत सहित पूरी दुनिया में आराध्य रूप में पूजा जाता है भारत में उसी के अस्तित्व पर सवाल खड़े किये जाते है .........भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जिसके राष्ट्रीय राजधानी के केन्द्रीय विश्व विद्यालय में भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते है .....सचमुच हमारा देश कितना महान है ...और हम सीना चौड़ा कर खुद को भारतीय ।।वन्दे मातरम्।।
स्वदेशी के प्रखर प्र्रेजों ने हमें चारित्रिक रूप से, और नैतिक रूप से नीचा दिखाने के लिए, कमज़ोर बनाने के लिए, शराब के साथ एक काम और भी किया था। और उसमें भी हम भारतवासी काफी डूब गए हैं और वह दूसरा काम यह था - भारत के वासियों को वेश्यावृत्ति के रास्ते पर धकेलना। बहुत खराब काम यह अंग्रेजों ने किया था।

आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि 1760 के पहले हिंदुस्तान में कोई शराब नहीं पीता था, ऐसे ही, 1760 के पहले के जो दस्तावेज़ हैं, रिकॉर्ड हैं, वे बताते हैं कि इस देश में कोई वेश्याघर नहीं था, वेश्यालय नहीं था। पूरे हिन्दुस्तान में ! ये अँगरेज़ थे जिंहोंने सबसे पहला वेश्यालय खोल सन 1760 में प्लासी के युद्ध के बाद कलकत्ते में। कलकत्ता में एक बहुत बदनाम इलाका कहा जाता है, जिसको सरकार रेड लाइट एरिया कहती है, और उसका नाम है सोनागाची। यह सोनागाची का रेड लाइट एरिया है - आपको सुनकर बहुत अफ़सोस होगा, दुःख होगा - यह अंग्रेजों का बसाया हुआ है, और अंग्रेजों का बनाया हुआ है। सन 1760 से पहले देश की किसी भी गाँव में, किसी नगर में वेश्याघर नाम की कोई भी चीज़ नहीं हुआ करती थी। तो आप बोलेंगे - मुस्लिम शासकों के ज़माने में क्या होता था? जब मुग़ल सम्राट इस देश में होते थे, मुग़ल शासक इस देश में होते थे, मुस्लिम धर्म को मानने वाले शासक इस देश में होते थे, तब क्या होता था? मुस्लिम शासकों के ज़माने में, सात सौ साल तक इस देश में, एक भी वेश्यालय नहीं बना, एक भी वेश्याघर नहीं बना। कुछ एक- दो मुस्लिम शासलों ने, जो कि अपवाद माने जाते हैं, जिनको उनके धर्म वाले भी गालियाँ देते हैं, एक ग़लत काम शुरू किया था - माताओं, बहन, बेटियों को घरों में से उठा लेना और ज़बरदस्ती उनको एक महल में रखना, उस महल का नाम हरम होता था। उस हरम में, मुस्लिम शासक अपने आमोद- प्रमोद के लिए, समय गुजारने के लिए, माताओं, बहन, बेटियों का नाच वगैरह कराया करते थे। तो, यह कुछ मुस्लिम शासकों ने किया, लेकिन वेश्यालय और वेश्याघर इस हिंदुस्तान में कभी नहीं बना।

आप बोलेंगे - पुराने ज़माने में तो हमारे देश में, हमने इतिहास में पढ़ा है, कुछ उपन्यास भी पढ़े हैं। हो सकता है आपने एक उपन्यास पढ़ा हो अपने जीवन में - वैशाली की नगर वधू। सम्राट अशोक के ज़माने की बात है, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त मौर्य के ज़माने की बात है, कि नगर वधू हुआ करती थी। हाँ, उस ज़माने में नगर वधू हुआ करती थी। लेकिन उसका काम वेश्या के काम से बिलकुल अलग होता था। नगर वधु जो होती थी, वह पूरे नगर की कोई सम्मान और इज्ज़त वाली कोई मां और बहन हुआ करती थी, और नगर वधु के शरीर को कोई भी पुरुष चाहे, तो अपनी वासना का शिकार नहीं बना सकता था। और नियम और क़ानून ऐसे थे कि नगर वधू के शरीर को कोई छू भी नहीं सकता था। आप बोलेंगे - फिर यह नगर वधू होती किसलिए थी? यह नगर वधू हुआ करती थी, समाज के लोगों को संगीत की ज्ञान देने के लिए, शिक्षा देने के लिए। जैसे, नृत्य सिखाने के लिए। जैसे गायन सिखाने के लिए। जैसे वाद्य सिखाने के लिए। वह संगीत की कला में बहुत निपुण कलाकार हुआ करती थी, और उनके द्वारा संगीत कला का शिक्षण और प्रशिक्षण का काम चला करता था। सम्राट अशोक के ज़माने में, सम्राट चन्द्रगुप्त के ज़माने में, सम्राट हर्षवर्धन के ज़माने में, सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के ज़माने में, जितने भी भारत में चक्रवर्ती सम्राट रहे हैं, उनके ज़माने जो नगर वधुएँ हुआ करती थीं, वे संगीत का शिक्षण और प्रशिक्षण देने वाली उच्च, इज्ज़तदार, बहुत रौबदार महिलायें हुआ करती थीं। वे अपने शरीर का सौदा करने वाली सामान्य वेश्याएं नहीं हुआ करती थीं।

तो, नगर वधू एक अलग बात थी, हरम में महिलाओं का रहना बिलकुल अलग बात थी। अंग्रेजों ने क्या किया - भारत वासियों के चरित्र को पूरी तरह ख़त्म कर देने के लिए सबसे पहली बार एक वेश्याघर खोल दिया और वह वेश्याघर सोनागाची का, कलकत्ता का वेश्याघर बन गया। अंग्रेजों ने वहां क्या किया - 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद रोबर्ट क्लाइव ने कलकत्ता को लूटा, इतिहास में आपने पढ़ा होगा, न सिर्फ कलकत्ता के धन संपत्ति को लूटा, बल्कि जिन घरों में वह गया, उन घरों की माताओं, बहन, बेटियों की इज्ज़त और आबरू को भी लूटा। और ऐसे सैंकड़ों घर थे जहां अँगरेज़ घुस गए, और उनहोंने हमारी मां, बहन बेटियों की आबरू को तार-तार कर दिया। फिर उन मां बहन, बेटियों का समाज में कोई रखवाला नहीं रहा। घर वालों ने उनको निकाल दिया, समाज ने उनको तिरस्कृत कर दिया और अंग्रेजों ने उन की इज्ज़त से खिलवाड़ किया। तो ऐसी मां, बहन, बेटियों को पकड़ पकड़ कर अंग्रेजों ने वेश्या बना दिया और नियमित रूप से उनके यहाँ अँगरेज़ सैनिक अपनी वासना की शांति के लिए, अपनी भूख की शांति के लिए, शारीर वासना की शांति के लिए जाया करते थे। और, धीरे-धीरे यह वेश्याघर कलकत्ता से आगे बढ़ कर भारत के दूसरे नगरों में फैलते चले गए। अंग्रेजों ने जहां जहां कब्ज़ा किया, जैसे कलकत्ता में, जैसे पूना में, जैसे पटना में, जैसे दिल्ली में, जैसे मुंबई में, मद्रास में, बगलौर में, हैदराबाद में, सिकंदराबाद में, ऐसे 350 बड़े शहरों में अंग्रेजों ने कब्ज़ा करके अपनी छावनियां बनायीं, और हर छावनी में अंग्रेजों ने एक-एक वेश्याघर बना दिया।

पहले क्या होता था - इन छावनी में दूसरे देशों से गुलाम बनाकर लायी लडकियां रखी जाती थीं। फिर भारत की मां , बहन, बेटियाँ जिनकी इज्ज़त अंग्रेज तार-तार करते थे, उनको रखवाना शुरू किया। और धीरे-धीरे यह काम बढ़ता गया, और बहुत दुःख और अफ़सोस की बात है कि हज़ारों-हज़ारों मां, बहन, बेटियों को अपनी इज्ज़त गंवा कर, अपनी अस्मत गंवा कर, अंग्रेजों की इस क्रूरता का शिकार होना पडा, अंग्रेजों की पिपासा का शिकार होना पडा, और उनको मजबूरी में यह वेश्या- धर्म अपनाना पडा। परिणाम उसका क्या हुआ - ऐसी वेश्याओं की संख्या बढती चली गयी, और वेश्याघरों की भी संख्या बढती चली गयी।

अफ़सोस है कि अँगरेज़ चले गए 15 अगस्त 1947 को, तो वेश्यावृत्ति ख़त्म होनी चाहिए थी। अंग्रेजों के जाने के बाद यह ग़लत काम इस देश में बंद होना चाहिए था, क्योंकि अंग्रेजों ने अपने शरीर की पिपासा को शांत करने के लिए यह दुष्कर्म शुरू किया था, तो अंग्रेजों के जाने के बाद इसे क्यूं चलते रहना चाहिए? लेकिन बहुत दुःख और अफ़सोस की बात है, कि अंग्रेजों के जाने के 62 साल के बाद भारतीय लोगों के नैतिक और चारित्रिक पतन करने वाला यह वेश्यावृत्ति का काम और तेज़ी से बढ़ गया है, और तेज़ी से फल-फूल रहा है, और ज्यादा पैमाने पर वेश्याघर खुल रहे हैं, और ज्यादा पैमाने पर हमारी मां, बहन, बेटियों को मजबूरी में इस व्यापार में धकेला जा रहा है। आंकड़ों में अगर मैं बात करूं तो, आपको सुनकर हैरानी होगी, 1760 में अंग्रेजों ने जो पहला वेश्याघर खोला था उसमें 200 के लगभग वेश्याएं हुआ करती थीं। अब आजादी के 62 साल के बाद इस देश में, अंग्रेजों के जाने के बाद जब काले अंग्रेजों का शासन आ गया है, अर्थात भ्रष्ट भारतीयों का शासन आ गया है, तो सरकार के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 20 लाख 80 हज़ार माताएं, बहनें वेश्यावृत्ति के काम में लग गयी हैं। अंग्रेजों के पहले, या अंग्रेजों के समय में, 200 माताएं, बहनें मुश्किल से इस काम में थीं। अब अंग्रेजों के जाने के 62 साल के बाद बीस लाख अस्सी हज़ार माताएं, बहनें इस वेश्यावृत्ति के काम में हैं।

औत गैर-सरकारी आंकड़ों की अगर बात की जाए, जो संस्थाएं वेश्याओं के उद्धार के लिए काम करती हैं, वेश्याओं को इस वेश्यावृत्ति से बाहर निकालने के लिए जो संस्थाएं भारत में काम करती हैं उनके आंकड़ों को अगर मैं आपको बताऊँ, तो उनका कहना है कि भारत में करीब एक करोड़ पचास लाख से ज्यादा माताएं, बहनें, जिनको मजबूरी में यह वेश्यावृत्ति का काम करना पड़ रहा है। उनकी मजबूरी क्या है - एक मजबूरी है उनकी सबसे बड़ी कि उनका पति शराबी है। एक मजबूरी दूसरी उनकी यह कि उनका पति उनको मारता-पीटता है। आप जानते हैं, हमारे देश की मां, बहन, बेटियों के साथ घरेलू हिंसा बहुत बड़े पैमाने पर होती है। पति अगर शराबी हो जाये तो पत्नी को पीटता है, और इतना पीटता है कि पत्नी घर छोड़कर भागने के लिए विवश हो जाती है, और ज़्यादातर माताएं और बहनें जब पत्नी के रूप में घर छोड़ने को विवश हो जाती हैं, तो वे जाने- अनजाने वेश्याघर में पहुँच जाती हैं, और हमारे देश में एक करोड़ पचास लाख माताएं और बहनें, जो गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार वेश्यावृत्ति के काम में लगी हुई हैं, उनमें से 34% माताएं, बहनें ऐसी हैं जो अपने शराबी पति के दुष्कर्म के चलते, पति से मार खाते-खाते, पिटते-पिटते, परेशान होकर, मजबूर होकर घर छोड़कर भागी हैं और इस काम में लग गयी हैं।

इसका मतलब - उन्होंने अपनी इच्छा से यह काम नहीं स्वीकार किया है। उन्होंने अपनी सद्भावना से अपने आप को इस काम में नहीं लगाया है। उनकी एक बहुत बड़ी मजबूरी है, जिसने उनको मजबूर किया है इस काम में लगने के लिए। और इस से भी ज्यादा दुःख की बात है, कि इन डेढ़ करोड़ माताओं, बहनों में, 18 साल से कम उम्र की माताओं, बहनों की संख्या 30% से ज्यादा है। 18 साल से कम उम्र की बहनें, बेटियाँ 30 प्रतिशत से ज्यादा हैं, जो इस वेश्यावृत्ति के रैकेट में धकेली गयी हैं। आपको मालूम है, कि यह बहुत बड़ा एक रैकेट चलता है। उड़ीसा में काफी ग़रीबी वाला इलाका है। हिंदुस्तान के सबसे ग़रीब इलाकों में कालाहांडी, हिंदुस्तान के सबसे ग़रीब इलाकों में बोलांगीर, हिंदुस्तान के सबसे ग़रीब इलाकों में ढेंकानाल, आदि जिले हैं। आपको पता है - हिन्दुस्तान के सबसे ग़रीब जिलों में से छः जिले उड़ीसा में ही पड़ते हैं। तो वहां क्या होता है - ग़रीबी के कारण कोई भी बाप, कोई भी मां, अपनी बेटी और बेटे को बेच देने के लिए मजबूर होते हैं। बेटी बिक जाती है, तो वेश्याघर में पहुँच जाती है।

बेटा बिक जाता है तो किसी के घर में नौकर बनकर पहुँच जाता है। तो उड़ीसा के ग़रीबी वाले इलाके से, झारखंड के ग़रीबी वाले इलाके से, बंगाल के ग़रीबी वाले इलाके से, आसाम के ग़रीबी वाले इलाके से, और उत्तर-पूर्व के ग़रीबी वाले इलाके से, और भारत के अन्य ग़रीबी वाले इलाकों से, मां, बहन, बेटियों को मजबूरी में जो माता, पिता बेच रहे हैं, और दलाल लोग उनको खरीद कर वेश्याघरों में लाकर डाल रहे हैं, यह दूसरा बड़ा दुश्चक्र है जो हमारे देश में यह चल रहा है।

और एक तीसरा बड़ा दुश्चक्र जो हमारे देश में है, कि बहुत सारी माता, बहन, बेटियाँ जिनको पैसे की इतनी ज्यादा आकांक्षा हो गयी है, कि थोड़े से पैसों में उनका गुज़ारा नहीं चलता - उनको बहुत ज्यादा पैसा चाहिए अपना जीवन चलाने के लिए, बहुत ज्यादा पैसा चाहिए खर्च चलाने के लिए, जिनके खर्च हज़ार, दो हज़ार, पांच हज़ार में पूरे नहीं होते, जिनके रोज के खर्च हज़ारों में होते हैं, दस-पंद्रह-बीस हज़ार से कम में जिनका जीवन नहीं चल सकता, ऐसी मां, बहन, बेटियों ने इच्छा के साथ इस पेशे में अपने को डाल दिया है, और हम उनको एक अंग्रेजी शब्द से संबोधित करते हैं - कॉल गर्ल। ये कॉल गर्ल वो बेटियाँ हैं, वो बहनें हैं, जो अपनी इच्छा से इस 'बिज़नेस' में आई हैं, और मात्र पैसे के लिए अपने शरीर की नुमाईश करके, अपने शरीर को बेच कर इस काम में लगी हुई हैं। तो तीन स्तर पर यह दुष्कर्म इस देश में चल रहा है, और इस देश के करोड़ों लोगों की नैतिकता और चरित्र को तार-तार कर दिया है। पहले वेश्याघरों में अँगरेज़ सैनिक जाया करते थे अपने शरीर की आग शांत करने लिए, अब उन्हीं वेश्याघरों में हमारे भारतवासी जा रहे हैं, शरीर की आग शांत करने लिए। और जो जा रहे हैं, वे चरित्र और नैतिकता में गिरते ही जा रहे हैं, डूबते ही जा रहे हैं। उनके पैरों में इतनी ताक़त नहीं है, उनके संकल्प में इतना दम नहीं है, कि समाज के दूसरे लोगों के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें।

तो यह दूसरा बड़ा दुश्चक्र हमारे देश में है - शराब के बाद वेश्यावृत्ति का, जिसमें हम काफी कुछ डूब गए हैं और करोड़ों भारतवासी इसमें शिकार हो गए हैं। तो मैं भारत स्वाभिमान की तरफ से एक अपील करना चाहता हूँ, कि हमको इस वेश्यावृत्ति को ख़त्म करने का आन्दोलन चलाना पड़ेगा - आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों। जैसे शराब में डूबे हुए बीस बाइस करोड़ भारतवासियों को हम निकालना चाहते हैं, और उनको उच्च चरित्र और उच्च नैतिकता देना चाहते हैं, वैसे ही इस वेश्त्यावृत्ति के घृणित काम में डूबी हुई बहनों, बेटियों को निकालना है और इस घृणित काम में लगे हुए भाइयों को भी इसमें से बाहर निकालना है। और इसके लिए बड़े पैमाने पर, पूरी ताक़त से इस काम में लगना पड़ेगा। अपने जीवन के सामने एक उच्च आदर्श और रखें।

पहला आदर्श अपने रखा है - व्यसनमुक्त भारतवर्ष बनाना, व्यसनमुक्त भारतीय समाज बनाना, तो दूसरा - वासनामुक्त भारत बनाना, वासनामुक्त भारतीय समाज बनाना। यह भी दूसरा बड़ा आदर्श हमें रखना पड़ेगा, तभी जाकर कोई बड़ी सामजिक क्रांति हम कर पायेंगे। आर्थिक क्रांति करना बहुत आसान काम है, राजनैतिक क्रान्ति करना भी बहुत आसान काम है, लेकिन सामजिक क्रांति करना, नैतिक क्रांति करना, चारित्रिक क्रांति करना बहुत मुश्किल काम होता है, बहुत ऊंचा काम होता है। इसको करने वाले भी विरले होते हैं, और करने वाले भी संख्या में बहुत कम होते हैं। तो आप सभी से मेरी विनम्र प्रार्थना है, विनम्र निवेदन है कि इस वासना में डूबे हुए भाइओं को, और इस वासना के कीचड में लिपटी हमारी मां, बहनों, बेटियों को जल्दी से जल्दी निकालने के लिए कमर कसकर अपने अपने स्थानीय स्तर पर अभियान चलायें, और इस अभियान को एक सार्थक और सफल मुकाम तक पहुंचाएं।

श्री राजीव दीक्षित जी को शत् शत् नमन
5000 वर्ष बाद बना जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग*                                          
इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर फिर एक बार वही संयोग बनने जा रहा है जो आज से 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण के जन्म पर बना था। इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी उदया तिथि तथा मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस बार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व अनूठा संयोग लेकर आ रहा है जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी कृष्ण जन्म के समय थी। इस लिहाज से ज्योतिषी इसे अत्यन्त शुभ बता रहे हैं।
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yogesh saxena

मन की बात  - 
 

Contribute your insights for PM Narendra Modi’s upcoming Mann Ki Baat on August 28th
[8/20, 6:20 PM] ‪+91 70843 95510‬: अयोध्या की कहानी जिसे पढ़कर आप रो पड़ेंगे। कृपया इस लेख को पढ़ें, तथा प्रतेक हिन्दूँ मिञों को अधिक से अधिक शेयर करें। जब बाबर दिल्ली की गद्दी पर आसीन हुआ उस समय जन्मभूमि सिद्ध महात्मा श्यामनन्द जी महाराज के अधिकार क्षेत्र में थी। महात्मा श्यामनन्द की ख्याति सुनकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा आशिकान अयोध्या आये । महात्मा जी के शिष्य बनकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा ने योग और सिद्धियाँ प्राप्त कर ली और उनका नाम भी महात्मा श्यामनन्द के ख्यातिप्राप्त शिष्यों में लिया जाने लगा। ये सुनकर जलालशाह नाम का एक फकीर भी महात्मा श्यामनन्द के पास आया और उनका शिष्य बनकर सिद्धियाँ प्राप्त करने लगा। जलालशाह एक कट्टर मुसलमान था, और उसको एक ही सनक थी, हर जगह इस्लाम का आधिपत्य साबित करना । अत: जलालशाह ने अपने काफिर गुरू की पीठ में छुरा घोंपकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा के साथ मिलकर ये विचार किया की यदि इस मदिर को तोड़ कर मस्जिद बनवा दी जाये तो इस्लाम का परचम हिन्दुस्थान में स्थायी हो जायेगा। धीरे धीरे जलालशाह और ख्वाजा कजल अब्बास मूसा इस साजिश को अंजाम देने की तैयारियों में जुट गए । सर्वप्रथम जलालशाह और ख्वाजा बाबर के विश्वासपात्र बने और दोनों ने अयोध्या को खुर्द मक्का बनाने के लिए जन्मभूमि के आसपास की जमीनों में बलपूर्वक मृत मुसलमानों को दफन करना शुरू किया॥ और मीरबाँकी खां के माध्यम से बाबर को उकसाकर मंदिर के विध्वंस का कार्यक्रम बनाया। बाबा श्यामनन्द जी अपने मुस्लिम शिष्यों की करतूत देख के बहुत दुखी हुए और अपने निर्णय पर उन्हें बहुत पछतावा हुआ। दुखी मन से बाबा श्यामनन्द जी ने रामलला की मूर्तियाँ सरयू में प्रवाहित किया और खुद हिमालय की और तपस्या करने चले गए। मंदिर के पुजारियों ने मंदिर के अन्य सामान आदि हटा लिए और वे स्वयं मंदिर के द्वार पर रामलला की रक्षा के लिए खड़े हो गए। जलालशाह की आज्ञा के अनुसार उन चारो पुजारियों के सर काट लिए गए. जिस समय मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाने की घोषणा हुई उस समय भीटी के राजा महताब सिंह बद्री नारायण की यात्रा करने के लिए निकले थे,अयोध्या पहुचने पर रास्ते में उन्हें ये खबर मिली तो उन्होंने अपनी यात्रा स्थगित कर दी और अपनी छोटी सेना में रामभक्तों को शामिल कर १ लाख चौहत्तर हजार लोगो के साथ बाबर की सेना के ४ लाख ५० हजार सैनिकों से लोहा लेने निकल पड़े। रामभक्तों ने सौगंध ले रक्खी थी रक्त की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे जब तक प्राण है तब तक मंदिर नहीं गिरने देंगे। रामभक्त वीरता के साथ लड़े ७० दिनों तक घोर संग्राम होता रहा और अंत में राजा महताब सिंह समेत सभी १ लाख ७४ हजार रामभक्त मारे गए। श्रीराम जन्मभूमि रामभक्तों के रक्त से लाल हो गयी। इस भीषण कत्ले आम के बाद मीरबांकी ने तोप लगा के मंदिर गिरवा दिया । मंदिर के मसाले से ही मस्जिद का निर्माण हुआ पानी की जगह मरे हुए हिन्दुओं का रक्त इस्तेमाल किया गया नीव में लखौरी इंटों के साथ । इतिहासकार कनिंघम अपने लखनऊ गजेटियर के 66वें अंक के पृष्ठ 3 पर लिखता है की एक लाख चौहतर हजार हिंदुओं की लाशें गिर जाने के पश्चात मीरबाँकी अपने मंदिर ध्वस्त करने के अभियान मे सफल हुआ और उसके बाद जन्मभूमि के चारो और तोप लगवाकर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया.. इसी प्रकार हैमिल्टन नाम का एक अंग्रेज बाराबंकी गजेटियर में लिखता है की " जलालशाह ने हिन्दुओं के खून का गारा बना के लखौरी ईटों की नीव मस्जिद बनवाने के लिए दी गयी थी। उस समय अयोध्या से ६ मील की दूरी पर सनेथू नाम का एक गाँव के पंडित देवीदीन पाण्डेय ने वहां के आस पास के गांवों सराय सिसिंडा राजेपुर आदि के सूर्यवंशीय क्षत्रियों को एकत्रित किया॥ देवीदीन पाण्डेय ने सूर्यवंशीय क्षत्रियों से कहा भाइयों आप लोग मुझे अपना राजपुरोहित मानते हैं ..अप के पूर्वज श्री राम थे और हमारे पूर्वज महर्षि भरद्वाज जी। आज मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि को मुसलमान आक्रान्ता कब्रों से पाट रहे हैं और खोद रहे हैं इस परिस्थिति में हमारा मूकदर्शक बन कर जीवित रहने की बजाय जन्मभूमि की रक्षार्थ युद्ध करते करते वीरगति पाना ज्यादा उत्तम होगा॥ देवीदीन पाण्डेय की आज्ञा से दो दिन के भीतर ९० हजार क्षत्रिय इकठ्ठा हो गए दूर दूर के गांवों से लोग समूहों में इकठ्ठा हो कर देवीदीन पाण्डेय के नेतृत्व में जन्मभूमि पर जबरदस्त धावा बोल दिया । शाही सेना से लगातार ५ दिनों तक युद्ध हुआ । छठे दिन मीरबाँकी का सामना देवीदीन पाण्डेय से हुआ उसी समय धोखे से उसके अंगरक्षक ने एक लखौरी ईंट से पाण्डेय जी की खोपड़ी पर वार कर दिया। देवीदीन पाण्डेय का सर बुरी तरह फट गया मगर उस वीर ने अपने पगड़ी से खोपड़ी से बाँधा और तलवार से उस कायर अंगरक्षक का सर काट दिया। इसी बीच मीरबाँकी ने छिपकर गोली चलायी जो पहले ही से घायल देवीदीन पाण्डेय जी को लगी और वो जन्मभूमि की रक्षा में वीर गति को प्राप्त हुए..जन्मभूमि फिर से 90 हजार हिन्दुओं के रक्त से लाल हो गयी। देवीदीन पाण्डेय के वंशज सनेथू ग्राम के ईश्वरी पांडे का पुरवा नामक जगह पर अब भी मौजूद हैं॥ पाण्डेय जी की मृत्यु के १५ दिन बाद हंसवर के महाराज रणविजय सिंह ने सिर्फ २५ हजार सैनिकों के साथ मीरबाँकी की विशाल और शस्त्रों से सुसज्जित सेना से रामलला को मुक्त कराने के लिए आक्रमण किया । 10 दिन तक युद्ध चला और महाराज जन्मभूमि के रक्षार्थ वीरगति को प्राप्त हो गए। जन्मभूमि में 25 हजार हिन्दुओं का रक्त फिर बहा। रानी जयराज कुमारी हंसवर के स्वर्गीय महाराज रणविजय सिंह की पत्नी थी। जन्मभूमि की रक्षा में महाराज के वीरगति प्राप्त करने के बाद महारानी ने उनके कार्य को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया और तीन हजार नारियों की सेना लेकर उन्होंने जन्मभूमि पर हमला बोल दिया और हुमायूं के समय तक उन्होंने छापामार युद्ध जारी रखा। रानी के गुरु स्वामी महेश्वरानंद जी ने रामभक्तों को इकठ्ठा करके सेना का प्रबंध करके जयराज कुमारी की सहायता की। साथ ही स्वामी महेश्वरानंद जी ने सन्यासियों की सेना बनायीं इसमें उन्होंने २४ हजार सन्यासियों को इकठ्ठा किया और रानी जयराज कुमारी के साथ , हुमायूँ के समय में कुल १० हमले जन्मभूमि के उद्धार के लिए किये। १०वें हमले में शाही सेना को काफी नुकसान हुआ और जन्मभूमि पर रानी जयराज कुमारी का अधिकार हो गया। लेकिन लगभग एक महीने बाद हुमायूँ ने पूरी ताकत से शाही सेना फिर भेजी ,इस युद्ध में स्वामी महेश्वरानंद और रानी कुमारी जयराज कुमारी लड़ते हुए अपनी बची हुई सेना के साथ मारे गए और जन्मभूमि पर पुनः मुगलों का अधिकार हो गया। श्रीराम जन्मभूमि एक बार फिर कुल 24 हजार सन्यासियों और 3 हजार वीर नारियों के रक्त से लाल हो गयी। रानी जयराज कुमारी और स्वामी महेश्वरानंद जी के बाद यद्ध का नेतृत्व स्वामी बलरामचारी जी ने अपने हाथ में ले लिया। स्वामी बलरामचारी जी ने गांव गांव में घूम कर रामभक्त हिन्दू युवकों और सन्यासियों की एक मजबूत सेना तैयार करने का प्रयास किया और जन्मभूमि के उद्धारार्थ २० बार आक्रमण किये. इन २० हमलों में काम से काम १५ बार स्वामी बलरामचारी ने जन्मभूमि पर अपना अधिकार कर लिया मगर ये अधिकार अल्प समय के लिए रहता था थोड़े दिन बाद बड़ी शाही फ़ौज आती थी और जन्मभूमि पुनः मुगलों के अधीन हो जाती थी..जन्मभूमि में लाखों हिन्दू बलिदान होते रहे। उस समय का मुग़ल शासक अकबर था। शाही सेना हर दिन के इन युद्धों से कमजोर हो रही थी.. अतः अकबर ने बीरबल और टोडरमल के कहने पर खस की टाट से उस चबूतरे पर ३ फीट का एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया. लगातार युद्ध करते रहने के कारण स्वामी बलरामचारी का स्वास्थ्य गिरता चला गया था और प्रयाग कुम्भ के अवसर पर त्रिवेणी तट पर स्वामी बलरामचारी की मृत्यु हो गयी .. इस प्रकार बार-बार के आक्रमणों और हिन्दू जनमानस के रोष एवं हिन्दुस्थान पर मुगलों की ढीली होती पकड़ से बचने का एक राजनैतिक प्रयास की अकबर की इस कूटनीति से कुछ दिनों के लिए जन्मभूमि में रक्त नहीं बहा। यही क्रम शाहजहाँ के समय भी चलता रहा। फिर औरंगजेब के हाथ सत्ता आई वो कट्टर मुसलमान था और उसने समस्त भारत से काफिरों के सम्पूर्ण सफाये का संकल्प लिया था। उसने लगभग 10 बार अयोध्या मे मंदिरों को तोड़ने का अभियान चलकर यहाँ के सभी प्रमुख मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ डाला। औरंगजेब के हाथ सत्ता आई वो कट्टर मुसलमान था और उसने समस्त भारत से काफिरों के सम्पूर्ण सफाये का संकल्प लिया था। उसने लगभग 10 बार अयोध्या मे मंदिरों को तोड़ने का अभियान चलकर यहाँ के सभी प्रमुख मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ डाला। औरंगजेब के समय में समर्थ गुरु श्री रामदास जी महाराज जी के शिष्य श्री वैष्णवदास जी ने जन्मभूमि के उद्धारार्थ 30 बार आक्रमण किये। इन आक्रमणों मे अयोध्या के आस पास के गांवों के सूर्यवंशीय क्षत्रियों ने पूर्ण सहयोग दिया जिनमे सराय के ठाकुर सरदार गजराज सिंह और राजेपुर के कुँवर गोपाल सिंह तथा सिसिण्डा के ठाकुर जगदंबा सिंह प्रमुख थे। ये सारे वीर ये जानते हुए भी की उनकी सेना और हथियार बादशाही सेना के सामने कुछ भी नहीं है अपने जीवन के आखिरी समय तक शाही सेना से लोहा लेते रहे। लम्बे समय तक चले इन युद्धों में रामलला को मुक्त कराने के लिए हजारों हिन्दू वीरों ने अपना बलिदान दिया और अयोध्या की धरती पर उनका रक्त बहता रहा। ठाकुर गजराज सिंह और उनके साथी क्षत्रियों के वंशज आज भी सराय मे मौजूद हैं। आज भी फैजाबाद जिले के आस पास के सूर्यवंशीय क्षत्रिय सिर पर पगड़ी नहीं बांधते,जूता नहीं पहनते, छता नहीं लगाते, उन्होने अपने पूर्वजों के सामने ये प्रतिज्ञा ली थी की जब तक श्री राम जन्मभूमि का उद्धार नहीं कर लेंगे तब तक जूता नहीं पहनेंगे,छाता नहीं लगाएंगे, पगड़ी नहीं पहनेंगे। 1640 ईस्वी में औरंगजेब ने मन्दिर को ध्वस्त करने के लिए जबांज खाँ के नेतृत्व में एक जबरजस्त सेना भेज दी थी, बाबा वैष्णव दास के साथ साधुओं की एक सेना थी जो हर विद्या मे निपुण थी इसे चिमटाधारी साधुओं की सेना भी कहते थे । जब जन्मभूमि पर जबांज खाँ ने आक्रमण किया तो हिंदुओं के साथ चिमटाधारी साधुओं की सेना की सेना मिल गयी और उर्वशी कुंड नामक जगह पर जाबाज़ खाँ की सेना से सात दिनों तक भीषण युद्ध किया । चिमटाधारी साधुओं के चिमटे के मार से मुगलों की सेना भाग खड़ी हुई। इस प्रकार चबूतरे पर स्थित मंदिर की रक्षा हो गयी । जाबाज़ खाँ की पराजित सेना को देखकर औरंगजेब बहुत क्रोधित हुआ और उसने जाबाज़ खाँ को हटाकर एक अन्य सिपहसालार सैय्यद हसन अली को 50 हजार सैनिकों की सेना और तोपखाने के साथ अयोध्या की ओर भेजा और साथ मे ये आदेश दिया की अबकी बार जन्मभूमि को बर्बाद करके वापस आना है ,यह समय सन् 1680 का था । बाबा वैष्णव दास ने सिक्खों के गुरु गुरुगोविंद सिंह से युद्ध मे सहयोग के लिए पत्र के माध्यम संदेश भेजा । पत्र पाकर गुरु गुरुगोविंद सिंह सेना समेत तत्काल अयोध्या आ गए और ब्रहमकुंड पर अपना डेरा डाला । ब्रहमकुंड वही जगह जहां आजकल गुरुगोविंद सिंह की स्मृति मे सिक्खों का गुरुद्वारा बना हुआ है। बाबा वैष्णव दास एवं सिक्खों के गुरुगोविंद सिंह रामलला की रक्षा हेतु एकसाथ रणभूमि में कूद पड़े ।इन वीरों कें सुनियोजित हमलों से मुगलो की सेना के पाँव उखड़ गये सैय्यद हसन अली भी युद्ध मे मारा गया। औरंगजेब हिंदुओं की इस प्रतिक्रिया से स्तब्ध रह गया था और इस युद्ध के बाद 4 साल तक उसने अयोध्या पर हमला करने की हिम्मत नहीं की। औरंगजेब ने सन् 1664 मे एक बार फिर श्री राम जन्मभूमि पर आक्रमण किया । इस भीषण हमले में शाही फौज ने लगभग 10 हजार से ज्यादा हिंदुओं की हत्या कर दी नागरिकों तक को नहीं छोड़ा। जन्मभूमि हिन्दुओं के रक्त से लाल हो गयी। जन्मभूमि के अंदर नवकोण के एक कंदर्प कूप नाम का कुआं था, सभी मारे गए हिंदुओं की लाशें मुगलों ने उसमे फेककर चारों ओर चहारदीवारी उठा कर उसे घेर दिया। आज भी कंदर्पकूप “गज शहीदा” के नाम से प्रसिद्ध है,और जन्मभूमि के पूर्वी द्वार पर स्थित है। शाही सेना ने जन्मभूमि का चबूतरा खोद डाला बहुत दिनो तक वह चबूतरा गड्ढे के रूप मे वहाँ स्थित था । औरंगजेब के क्रूर अत्याचारो की मारी हिन्दू जनता अब उस गड्ढे पर ही श्री रामनवमी के दिन भक्तिभाव से अक्षत,पुष्प और जल चढाती रहती थी. नबाब सहादत अली के समय 1763 ईस्वी में जन्मभूमि के रक्षार्थ अमेठी के राजा गुरुदत्त सिंह और पिपरपुर के राजकुमार सिंह के नेतृत्व मे बाबरी ढांचे पर पुनः पाँच आक्रमण किये गये जिसमें हर बार हिन्दुओं की लाशें अयोध्या में गिरती रहीं। लखनऊ गजेटियर मे कर्नल हंट लिखता है की “ लगातार हिंदुओं के हमले से ऊबकर नबाब ने हिंदुओं और मुसलमानो को एक साथ नमाज पढ़ने और भजन करने की इजाजत दे दी पर सच्चा मुसलमान होने के नाते उसने काफिरों को जमीन नहीं सौंपी। “लखनऊ गजेटियर पृष्ठ 62” नासिरुद्दीन हैदर के समय मे मकरही के राजा के नेतृत्व में जन्मभूमि को पुनः अपने रूप मे लाने के लिए हिंदुओं के तीन आक्रमण हुये जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दू मारे गये। परन्तु तीसरे आक्रमण में डटकर नबाबी सेना का सामना हुआ 8वें दिन हिंदुओं की शक्ति क्षीण होने लगी ,जन्मभूमि के मैदान मे हिन्दुओं और मुसलमानो की लाशों का ढेर लग गया । इस संग्राम मे भीती,हंसवर,,मकर ही,खजुरहट,दीयरा अमेठी के राजा गुरुदत्त सिंह आदि सम्मलित थे। हारती हुई हिन्दू सेना के साथ वीर चिमटाधारी साधुओं की सेना आ मिली और इस युद्ध मे शाही सेना के चिथड़े उड गये और उसे रौंदते हुए हिंदुओं ने जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया। मगर हर बार की तरह कुछ दिनो के बाद विशाल शाही सेना ने पुनः जन्मभूमि पर अधिकार कर लिया और हजारों हिन्दुओं को मार डाला गया। जन्मभूमि में हिन्दुओं का रक्त प्रवाहित होने लगा। नावाब वाजिदअली शाह के समय के समय मे पुनः हिंदुओं ने जन्मभूमि के उद्धारार्थ आक्रमण किया । फैजाबाद गजेटियर में कनिंघम ने लिखा "इस संग्राम मे बहुत ही भयंकर खूनखराबा हुआ ।दो दिन और रात होने वाले इस भयंकर युद्ध में सैकड़ों हिन्दुओं के मारे जाने के बावजूद हिन्दुओं नें राम जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया। क्रुद्ध हिंदुओं की भीड़ ने कब्रें तोड़ फोड़ कर बर्बाद कर डाली मस्जिदों को मिसमार करने लगे और पूरी ताकत से मुसलमानों को मार-मार कर अयोध्या से खदेड़ना शुरू किया।मगर हिन्दू भीड़ ने मुसलमान स्त्रियों और बच्चों को कोई हानि नहीं पहुचाई। अयोध्या मे प्रलय मचा हुआ था । इतिहासकार कनिंघम लिखता है की ये अयोध्या का सबसे बड़ा हिन्दू मुस्लिम बलवा था। हिंदुओं ने अपना सपना पूरा किया और औरंगजेब द्वारा विध्वंस किए गए चबूतरे को फिर वापस बनाया । चबूतरे पर तीन फीट ऊँची खस की टाट से एक छोटा सा मंदिर बनवा लिया ॥जिसमे पुनः रामलला की स्थापना की गयी। कुछ जेहादी मुल्लाओं को ये बात स्वीकार नहीं हुई और कालांतर में जन्मभूमि फिर हिन्दुओं के हाथों से निकल गयी। सन 1857 की क्रांति मे बहादुर शाह जफर के समय में बाबा रामचरण दास ने एक मौलवी आमिर अली के साथ जन्मभूमि के उद्धार का प्रयास किया पर 18 मार्च सन 1858 को कुबेर टीला स्थित एक इमली के पेड़ मे दोनों को एक साथ अंग्रेज़ो ने फांसी पर लटका दिया । जब अंग्रेज़ो ने ये देखा कि ये पेड़ भी देशभक्तों एवं रामभक्तों के लिए एक स्मारक के रूप मे विकसित हो रहा है तब उन्होने इस पेड़ को कटवा कर इस आखिरी निशानी को भी मिटा दिया... इस प्रकार अंग्रेज़ो की कुटिल नीति के कारण रामजन्मभूमि के उद्धार का यह एकमात्र प्रयास विफल हो गया ... अन्तिम बलिदान ... ३० अक्टूबर १९९० को हजारों रामभक्तों ने वोट-बैंक के लालची मुलायम सिंह यादव के द्वारा खड़ी की गईं अनेक बाधाओं को पार कर अयोध्या में प्रवेश किया और विवादित ढांचे के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया। लेकिन २ नवम्बर १९९० को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें सैकड़ों रामभक्तों ने अपने जीवन की आहुतियां दीं। सरकार ने मृतकों की असली संख्या छिपायी परन्तु प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सरयू तट रामभक्तों की लाशों से पट गया था। ४ अप्रैल १९९१ को कारसेवकों के हत्यारे, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस्तीफा दिया। लाखों राम भक्त ६ दिसम्बर को कारसेवा हेतु अयोध्या पहुंचे और राम जन्मस्थान पर बाबर के सेनापति द्वार बनाए गए अपमान के प्रतीक मस्जिदनुमा ढांचे को ध्वस्त कर दिया। परन्तु हिन्दू समाज के अन्दर व्याप्त घोर संगठनहीनता एवं नपुंसकता के कारण आज भी हिन्दुओं के सबसे बड़े आराध्य भगवान श्रीराम एक फटे हुए तम्बू में विराजमान हैं। जिस जन्मभूमि के उद्धार के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना रक्त पानी की तरह बहाया। आज वही हिन्दू बेशर्मी से इसे "एक विवादित स्थल" कहता है। सदियों से हिन्दुओं के साथ रहने वाले मुसलमानों ने आज भी जन्मभूमि पर अपना दावा नहीं छोड़ा है। वो यहाँ किसी भी हाल में मन्दिर नहीं बनने देना चाहते हैं ताकि हिन्दू हमेशा कुढ़ता रहे और उन्हें नीचा दिखाया जा सके। जिस कौम ने अपनेही भाईयों की भावना को नहीं समझा वो सोचते हैं हिन्दू उनकी भावनाओं को समझे। आज तक किसी भी मुस्लिम संगठन ने जन्मभूमि के उद्धार के लिए आवाज नहीं उठायी, प्रदर्शन नहीं किया और सरकार पर दबाव नहीं बनाया आज भी वेबाबरी-विध्वंस की तारीख 6 दिसम्बर को काला दिन मानते हैं। और मूर्ख हिन्दू समझता है कि राम जन्मभूमि राजनीतिज्ञों और मुकदमों के कारण उलझा हुआ है। जिन हिन्दुओं को शर्म नहीं आयी वो कृपया अपने घरों में राम का नाम ना लें...अपने रिश्तेदारों से कह दें कि उनके मरने के बाद कोई "राम नाम" का नारा भी नहीं लगाएं। विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता एक दिन श्रीराम जन्मभूमि का उद्धार कर वहाँ मन्दिर अवश्य बनाएंगे। चाहे अभी और कितना ही बलिदान क्यों ना देना पड़े -कहा जाता है कि 100 साल पहले गांव में हिन्दुओं के ऊंची जाति के लोगों ने इस समाज को मंदिर में घुसने से मना कर दिया था। इसके बाद से ही इन्होंने विरोध करने के लिए चेहरे सहित पूरे शरीर में राम नाम का टैटू बनवाना शुरू कर दिया क्या कहते हैं लोग… रामनामी समाज को रमरमिहा के नाम से भी जाना जाता है। जमगाहन गांव के महेतर राम टंडन इस परंपरा को पिछले 50 सालों से निभा रहे हैं। जमगाहन छत्तीसगढ़ के सबसे गरीब और पिछड़े इलाकों में से है। 76 साल के रामनामी टंडन बताते हैं, जिस दिन मैंने ये टैटू बनवाया, उस दिन मेरा नया जन्म हो गया । 50 साल बाद उनके शरीर पर बने टैटू कुछ धुंधले से हो चुके हैं, लेकिन उनके इस विश्वास में कोई कमी नहीं आई है। नजदीकी गांव गोरबा में भी 75 साल की पुनई बाई इसी परंपरा को निभा रहीं हैं। पुनई बाई के शरीर पर बने टैटू को वह भगवान का किसी खास जाति का ना होकर सभी के होने की बात से जोड़ती हैं। नई पीढ़ी ने खुद को इस परंपरा से दूर किया रामनामी जाति के लोगों की आबादी तकरीबन एक लाख है और छत्तीसगढ़ के चार जिलों में इनकी संख्या ज्यादा है। सभी में टैटू बनवाना एक आम बात है। समय के साथ टैटू को बनवाने का चलन कुछ कम हुआ है। रामनामी जाति की नई पीढ़ी के लोगों को पढ़ाई और काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। इसलिए ये नई पीढ़ी पूरे शरीर पर टैटू बनवाना पसंद नहीं करती। इस बारे में टंडन बताते हैं, आज की पीढ़ी इस तरह से टैटू नहीं बनवाती। ऐसा नहीं है कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। पूरे शरीर में न सही, वह किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाकर अपनी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। रामनामी समाज – यहाँ पुरे शरीर पर लोग लिखवाते है राम नाम, आखिर क्यों ? 100 सालों से भी ज्यादा लंबे वक्त से छत्तीसगढ़ की रामनामी समाज में एक अनोखी परंपरा चली आ रही है। इस समाज के लोग पूरे शरीर पर राम नाम का टैटू बनवाते हैं, लेकिन न मंदिर जाते हैं और न ही मूर्ति पूजा करते हैं। इस तरह के टैटू को लोकल लैंग्वेज में गोदना कहा जाता है। दरअसल, इसे भगवान की भक्ति के साथ ही सामाजिक बगावत के तौर पर भी देखा जाता है। टैटू बनवाने के पीछे बगावत की कहानी… इस समाज में पैदा हुए लोगों को शरीर के कुछ हिस्सों में टैटू बनवाना जरूरी है। खासतौर पर छाती पर और दो साल का होने से पहले। टैटू बनवाने वाले लोगों को शराब पीने की मनाही के साथ ही रोजाना राम नाम बोलना भी जरूरी है। ज्यादातर रामनामी लोगों के घरों की दीवारों पर राम-राम लिखा होता है। इस समाज के लोगों में राम-राम लिखे कपड़े पहनने का भी चलन है, और ये लोग आपस में एक-दूसरे को राम-राम के नाम से ही पुकारते हैं। नखशिख राम-राम लिखवाने वाले सारसकेला के 70 वर्षीय रामभगत ने बताया कि रामनामियों की पहचान राम-राम का गुदना गुदवाने के तरीके के मुताबिक की जाती है शरीर के किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाने वाले रामनामी। माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को शिरोमणि। और पूरे माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को सर्वांग रामनामी और पूरे शरीर पर राम नाम लिखवाने वाले को नखशिख रामनामी कहा जाता है। ज्यादातर रामनामी लोगों के घरों की दीवारों पर राम-राम लिखा होता है। रामनामी समाज ने कानूनन रजिस्ट्रेशन कराया है और ड्रेमोक्रेटिक तरीके से उनके चुनाव हर 5 साल के लिए कराए जाते हैं। आज कानून में बदलाव के जरिये समाज में ऊंच-नीच को तकरीबन मिटा दिया गया है और इन सबके बीच रामनामी लोगों ने बराबरी पाने की उम्मीद नहीं खोई है। http://nm-4.com/0j4u

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yogesh saxena

योजना एंव नीति  - 
 
Stalwarts speak on PM Modi http://nm4.in/1LABfAD via NMApp
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yogesh saxena

मन की बात  - 
 
बहादुर बेटा दरवाजे पर ठक ठक की आवाज ने रामलाल को उठने को मजबूर कर दिया पत्नी पड़ौस में चौका बर्तन का काम करने गई थी | उठकरदरवाजे तक आते-आते बाहर कोलाहल तेज सुनाई पड़ने लगा | रामलाल ने कौतूहलवश दरवाजा खोला तो सामने पड़ौस के ही दो तीन लोगों को खड़ा पाया | पीछे चालीस पचास
लोगों का हज़ूम गमगीन मुद्रा में नज़र आ रहा था | रामलाल ने प्रश्नवाचक नज़रों से देखा | एकदम से किसी ने कोई जबाब नहीं दिया| रामलाल सकपका गया | "क्या बात है भैया?" उसने सामने खड़े एक परिचित पड़ौसी से पूछा | " क्या हुआ मेरे बेटे को?" "मर गया गोली से, पुलिस की | थाना घेर डाला था लोगों ने, तुम्हारा बेटा भी था, थाने में आग लगा रहे थे, पुलिस ने भूंज दिया |" "अच्छा हुआ निकम्मा था आवारा कहीं का, क्या वह मर गया? शराब के नशे में रामलाल बुदबुदाया | बेटे की मौत की खबर को ऐसे सुना जैसे कोई साधारण सी बात हो | वापस आकर फिर खटिया पर लुड़क गया | दूसरे दिन दोपहर फिर दरवाजे पर खटखटाने की आवाज आई | "अब क्या हो गया ,चैन से सोने भी नहीं देते साले" रामलाल झुँझलाकर बड़बड़ाया और दरवाजा खोल दिया "क्यों तंग करते हो , अब क्या हो.... ? प्रश्न पूरा होने से पहले ही एक आदमी बोल पड़ा, ....".एस. डी. एम. साहब आये हैं,
मुआबजे का चेक है तुम्हारे लड़के की मृत्यु होने पर, सरकार ने तुम्हें दिया है, पूरे पच्चीस हज़ार का है, मरने वाले को सरकार देती है, उसके घावालों को देती है |"
रामलाल तो जैसे हक्का बक्का रह गया "पच्चीस हज़ार मुझे" वह खुशी से पागल सा हुआ जा रहा था | बड़बड़ाने लगा जैसे हिसाब लगा रहा हो कि इतने पैसे में वह कितने दिन दारू पी सकेगा | वह बेटे को दुआयें देने लगा, "ठीक वक्त पर मरा, दारू पीने के लिये घर में कुछ भी नहीं था | निकम्मा साला ,मरते-मरते ही सही बाप की आत्मा को तृप्त तो कर ही गया |" उसके मुँह पर हल्की सी मुस्कान आई
और आँखें गीली हो गईं | रामलाल ने ओंठों पर जीभ फेरी और चल पड़ा दारू के पवित्र स्थल की ओर, सूखे ओंठों से वह बुदबुदा रहा था, "सरकार जिंदा आदमी को कहां नौकरी देती है किंतु बहादुरी से मरने पर पैसा देती है, थाना फूंको तो पैसा मिलता है, बहादुर था मेरा बेटा |"
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Mehul Soni's profile photo
 
Kyun Government ki baja rahe ho ૐ
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yogesh saxena

व्यंग  - 
 
सिद्धांत का सवाल "गली गली में शोर है कल्लू बब्बा चोर है|' "लुच्चा गुंडा बेईमान कल्लूजी की है पहचान|"
जोरदार नारों की आवाज सुनकर मैं घर से बाहर निकल आया | मैंने देखा कि मेरा एक परिचित सा व्यक्ति जोर-जोर से नारेबाजी कर रहा था और कोई चालीस पचास लोगों का हज़ूम उसके पीछे चलता हुआ इन्हीं नारों को लयबद्ध होकर दुहरा रहा था | मैंने दिमाग पर जोर डाला तो याद आया कि वह टंटू पंडा था | कभी मेरे साथ पढ़ता था आठवीं में | पढ़ने में बहुत कमजोर था | मैं नौवीं में चला गया वह फेल होकर आठवीं में ही रह गया |
फिर मैं दसवीं में पहुँच गया वह आठवीं की ही शोभा बढ़ाता रहा | इसके बाद उसका पता नहीं लगा कि वह कहां गया | हां इतना जरूर स्मरण है कि वह स्कूल में भी नारे ही लगवाता था | पंद्रह अगस्त और छब्बीस
जनवरी के जलूस में वह सबसे आगे रहता और नारे लगवाता | वह कहता "महात्मा गांधी की" और हम लोग कहते "जय" वह फिर चिल्लाता "स्वतंत्रता दिवस " हम लोग कहते" अमर रहे अमर रहे |" इत्यादि |
खैर चुनाव का मौसम है और ऐसी नारेबाजी होती ही रहती है ऐसा सोचकर मैने कोई ध्यान नहीं दिया और अपने काम में लग गया | दूसरे दिन फिर कुछ लोग जलूस की शक्ल में नारेबाजी करते निकले | "घर घर से आई आवाज़ कल्लू बब्बा जिंदाबाद" "जब तक सूरज चांद रहेगा कल्लूजी का नाम रहेगा" जलूस की अगुवाई आज भी टंटू पंडा ही कर रहा था | मुझे आश्चर्य हुआ | मैंने टंटू को बुलाकर पूछा, "कल तो आप कल्लूजी के विरॊध में नारे लगा रहे थे, आज उनके पक्ष में कैसे? टंटूजी नाराज हो गये, कहने लगे, "इतना भी नहीं जानते मैं सिद्धांतों से समझोता नहीं करता | चाहे धरती फट जाये चाहे आसमान गिर पड़े मेरे सिद्धांत अटल हैं |" "जरा खुलकर बतायें मैं समझा नहीं" मैने पूछा | "जो रुपये ज्यादा दे उसके पक्ष में बोलना ही मेरा सिद्धांत है |" "मगर कल और आज में क्या अंतर आया" मैँने पूछा | "बब्बा ने अपने विरोधी से चार गुना ज्यादा पैसे दिये हैं आज | कल नंदू भैया ने पांच सौ रुपये दिये थे इससे बब्बा के विरोध में नारे लगा रहे थे | अब बब्बा ने दो हज़ार रुपये दिये हैं तो उनके पक्ष में नारेबाजी करेंगे कि नहीं? सिद्धांत का मामला बनता है कि नहीं? वह मॆरी आंखों में आंखें डलकर जैसे मुझसे इस प्रश्न का जबाब चाह रहा था | मैं चुप था, क्या जबाब देता सिद्धांतवादियों के सिद्धांत के सवाल का |
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yogesh saxena

मन की बात  - 
 

Contribute your insights for PM Narendra Modi’s upcoming Mann Ki Baat on August 28th
Sri Narendra Damodhar Das Modi Ji, Your excellency has reminded us so many time and also in the meeting of MY GOV organised after completion of the period of successful participations, that people posed the problem in relationship with the jurisdiction dealt with by the State Government. Your Honour further said on 7th August 2016 in Town Hall that still you cherish such ideals and sentiments and resolve such complaints by calling the meeting with chief Secretary of the particular State. My complaint is focus on one aspect of Rampant corruption eroding the foundations of the existence of the perceptions of the Primary Education imparted to the children up to the age of 14 Years under Article 21 - A of the Constitution of India. I am recollected that Lord Mauckley only tried to disrupt the steam of purity of our culture but our politicians have made our Education System and it's associated Food Scam as biggest scandel. The private managed Schools and institution are spoiling the future generation. our Chief Minister is concerned as to how to keep speculations by paradise lost to Rule like a Tyrant dynastically Ruled Dictator. in Foder Scam , one judge has given clean chit to Laloo Prasad Yadav and this Laloo Prasad Yadav as Railway Minister inducted Justice U. C. Banergee , a judge of supreme Court, who held that petrol or Caroline oil smell is not coming from the bougie burn at Godhara and thus car Sevak having recital of the name of Lord RAM might have burnt by there own. This Laloo Prasad Yadav during the Chief minister rship of wife namely Rabidi Devi converted the residence of Chief Minister in Jail. justice A. K Gaungli Judge of supreme Court was untangled in sex scandel with the intern Lady Student of of Law. Thus we can not do any thing against politician. Now these politicians are sharing in the Bribe earned by Dy. Registrar of society, funds and Chits at regional level usurping every institution in the credit of one caste belonging to YADAV and Muslims. Madame Mayawati get it done for Brahmans who without any practice are inducted as Advocate General and a HUB of 1200 Government Advocates earning through public exchequer. For giving approval of every appointment in basic Education Schools up to Degree college, the money of Rs. 25 Lacks to 50 Lacks are charged by the Education Authority. The share are distributed proportionally the entire state, what You 2 G Scam or Coal Scandals could not done in central Government, the state Government is acting like the Dacoits and earning the money beyond imagination. Thus I pose a challenge to our central Government, either to show your Political will or people will feed up by the mere slogan. Basic Education Institution were run by respective Local Bodies after Independence. . But after 1972 State govt. Is empowered to make Rules U/ Section 19 of U.P. Basic Education Act, 1972 ( No. 34 of 1972). Thus U. P. Basic Education ( teachers ) service Rules 1981 were framed. The BOARD as defined U /S 2 (1-C) of U.P. Act No. 34 of 1972 was constituted U/S 3, U.P. 4 & 5 of Act No.34 of 1972. Function & conduct of by Business respectively. The control of Board was done by Circular 25.4.1973. On 3. 1. 1981 U/S 19 (1) of 1972 promulgated U.P. Basic Education ( teachers) service Rules, 1981. The process of selection continued till 28. 6. 1993 as per seniority of candidate in their training course. By 5th amendment dated 28. 6. 1993 , the mode of selection was challenged. Rule 14 was inserted. NCTE Act 1993 enforced w.e.r. 1.7.1995. Article 21 A was inserted after Mohini Jain versus state of Karnataka and uni Krishna case. R.T.E Act of 2009 ( Act No. 35 ) was made and U/ S 23 of Act , the central government authorised the NCTE U/S 2 ( n) of Act of 2009 to fix minimum Qualification. NCTE vide Circular dated 23. 8. 2010 corrected on 29.7. 2011 determined TET and CTET as minimum Qualification. State Govt. Framed U.P. Right of children and compulsory education Ruled on 27. 7. 2011 U/S 38 of RTE Act 2009. State Govt. Proposed to fill up 72825 posted from candidate having BA. B.Sc. 50 % and B. Ed. 6 months training and notify 27. 9. 2011. The selected candidates must passed TET and thus selection programme was held 18. 10. 2011. After start of selection process, the mode of selection can not be changed. On 9.11. 2011 the state govt. Bring 12 th amendment. The vacancy has to filled only on the score mark of TET. Some vacancies were again notified on 30.11.2011. In between High power committee was constituted and submitted report. On 13 Nov. 2011 at 1151 center about 5,96,753 and 5, 24, 577 candidates for primary and higher primary level respectively appears. Dr. Prabha Tripathi informed that being secretary do not have information's that how many candidates selected or failed. one A series Question no. 6, 109, 141,144 and 145 and higher upper primary A Series Question no. 20,22,37, 51, 69 and 140 were changed and answer code Incorporated . The result was published on 30. 11. 2011. New vacancy on the 72825 posts were advertised which was quashed on 12. 12. 2011 in Writ petition no.70682 of 2011 Sarita Shukla versus State . Lalit Mohan filed Writ petition 71563 / 2011 , Tahira Begum versus state Writ no. 74109 of 2011 passed order in respect of urdu teacher variation of 8,707 candidates results were changed and amendment was done in examination result. Thus in Lali Mohan Writ failed candidates of primary level number 19829 were declared passed. By the same order 16.12.2011 , about 26194 candidates failed earlier were declared passed. On 31.12.2011, 5 person carrying RS.86.73 with documents to alteration in result were seized by police and case was registered in crime no. 675 of 2011 was registered and there after 12 person were arrested Rs96,95,300 /were found for changing result of compatative examination of TET exam. Director Sanjay Mohan of Basic Shiksha Parishad was arrested Challenging notification Writ petitions were filed, but dismissed. Special appeal no. 657 of 2015 was decided on16.1.2013. Special Appeal no.237 of2015 shiv Kumar pathak vs. State was decided on 20.11.2013. Challenging these the Civil Appeal no. 4347 - 4375 of 2014 state of U. P. Versus shiv Kumar pathak is pending in Supreme Court. The selection of 72825 candidates is done as per order of Apex Court. Notification dated 5.12.2012 was challenged in Writ petition no.71558 of 2011 which was decided 12.12. 2011. High power committee report dated10. 4. 2012 nor appendix inserted under Rule 14 (4) of Rule 1981 inserted on 21.6.1993 challenged. Nor Rule 5, 15 and 17 challenged . Thus the High court directed to fill up vacancies of14667 each for science and maths under Rule 5 proposed to fill up by 15 th and 16 th amendment promulgated on 30. 8.2012 and 5.12.2012 respectively. Writ petition no. 52521 of 2013 was dismissed as not pressed. Writ petition no.28686 of 2014 Brahm Dev Yadav versus state was filed for completion of selection process as per Government order dated 11.7. 2013 which was decided on 29.5. 2014. Special appeal no. 561 of 2014 Alok Kumar Daxit was dismissed on 12.6.2014 by no other but by Justice Sudhir Agrawal who subsequently decided the shiv Kumar Pathak case in contradistinction to his own Judgment. What is the value of state decisive, precedents and consistencies in Judgment of other Judges, what to say about two decisions by the same Judge in similar controversy. Another special Appeal no. 622 of 2014 Anil Kumar Singh was decided on 7.4.2015 Directing review / Recall before same single Judge which was filed on 29.5.2015 but dismissed by same Judge on 8. 5. 2015. Another Writ petition no. 24818 of 2015 was decided on 30.4.2015 in light of judgment dated 29.5.2014, but special appeal no.363 of 2015 was dismissed on 15.5.2015. In contempt application no. 3677 of 2015 Deepak Sharma versus Heera Lal Gupta on 21.8.2015 directions were issued to make appointment by 15th Sept 2015 else charges be framed. Most of the candidates joined on the post in view of 15th and 16th amendment Quality point marks with eligibility qualification of TET. Now Justice Sudhir Agrawal by giving a good bye to the precedents, consistency of Law has taken a reverse stand in Writ no. 57476 of2013 for which any public servant would have been punished and prosecuted for delimitation of Judicial power and criminal contempt of higher courts. The judgment is given on 18.5.2015 and special appeals no.657/of 2015 Deepak Sharma , Writ petition non. 28003 of2015 umesh Kumar Singh jointly decided on 18.5. 2015/having special Appeal no. 678/(d) of 2015 has been entertained and connected to it. Special Appeal no. 680/ 2015, 722 of2015 along with Writ petition no. 63258 of 2015, sanjeev kumar singh challenging selection process of 15000 vacancies , Writ petition no.54416 of 2015 Sita RAM and others challenging 9 (B) of NCTE dated 11.2.2011 as ultra vires , writ petition no. 3063 of 2016 to declare 16th amendment dated 5. 12. 2012 and praying for finalisation of selection of 29334 vacancies notified on 11.7.2013 by providing weightage to mark of TET Obtained after manipulations during Mayawati Government bunglings and usurpations of money power through the Process of Judicial pronouncement. This is mockery of Judicial system . let this system be over hauled and revive by appointment of better Judges. Judges who are above horizons and not those who are dragged due to Lust of power and power intoxicants. Whether the single Judge of High Court can sit and decide in contradiction to the judgment upheld in special appeal. Whether the single Judge A.P.Sahi in his own referring order may sit in Full bench and decide the full bench out side the scope of reference. High Court Rules 1952 specially chapter V Rules 3, 5, and 6 are not followed by these Judges, as was done in High court of Rajasthan by Justice Sethana by summoning chief Justice of India Sri J. S. Verma for not depositing circuit House changes of Rs 19/ 9 or some meager amount for availing accommodations. These Judges are pacifying there grudges from the Lawyers of better knowledge, better draftings and many Judges including present Acting chief Justice, Justice Dilip Gupta, Justice Tarun Agrawal are not sphered in their double standards and caste affiliations. Many Judges remained involved in P. F. Scam but they have been given clean chit as the main culprit sharing the money was murdered in Dhasna Jail at Gaziabad. http://nm-4.com/zz5u

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yogesh saxena

विचार-विमर्श  - 
 
इलाहबाद में भाई भतीजावाद के बाद
पंजाब और हरयाणा हाई कोर्ट में भरी रिश्तेदारी ।
read it carefully
corruption in PUNJAB AND HARYANA HIGH COURT
कौन खोलेगा हाई कोर्ट में फैली SCANDAL/SCAM/धोखाधड़ी ????
यह Nepotism नही है एक दो रिश्तेदारों को कह सकते है अगर इतनी भर्ती जजों की सिफरिश या रिश्तेदारी से होगी तो scam या Scandal ही कहेंगे या कुछ और ??
सारी हाई कोर्ट भरी पड़ी है सिफ़ारिशो से ।
यह तो एक छोटी सी पोस्ट है अगर कही पूरी investigation की जाये तो शायद Novel ही न बन जाये ।
करीब 19 जस्टिस पर इन्क्वायरी बिठाओ ।कारवाई करो ।करीब 19 जस्टिस उनके बच्चे उनके जूनियर 38 सिफारिशे ।
जजों का मकड़जाल । जरुर पढ़ना ।
हाई कोर्ट लोअर कोर्ट में सरकारी पैसो और जॉब पर क्या सिर्फ जजों और उनके रिश्तेदारों या सिफ़ारिशो का हक है ?
जब पंजाब हाई कोर्ट के justice ही अपनी पोस्ट का फायदा उठाकर अपने बच्चो या रिश्तेदारों/जूनियर को गलत तरीके से जजों की पोस्ट पर रखेंगे ।तो जनता क्या यकींन करेगी इनपर ???
कैसे जज/Justice अपने बच्चो, रिश्तेदारों /जूनियर को जज की पोस्ट पर रखवाता है। आम वकीलों और पब्लिक को धोखा देकर ।
1.Justice Kuldeep Singh Retd.
पहले वो खुद लगे । उनके अपने 3 जूनियर लगे या लगवाए गये ।
JUSTICE R.S.MONGIA
JUSTICE S.S. NIJJAR
JUSTICE M.M. KUMAR
दो बेटे SENIOR बनाये गये । VOTING से वोट किसके थे जजों के ।
1.SH. P.S. PATWALIA
2. SH. D.S. PATWALIA

2. फिर बारी आई JUSTICE S.S. NIJJAR की जिनके 2 जूनियर एडवोकेट्स के नाम भेजे सुप्रीम कोर्ट पर वो APPROVE नही हुए ।
SH. G.S.BAJWA
SH. J.S.PURI

3 फिर बारी आई जस्टिस M.M.KUMAR जी की जिनका भाई पवन कुमार सीनियर वकील बनाया गया । वोट किसके जजों के ।

4. उसके बाद आई बारीJUSTICE ASHOK BHAN RETD. जी की । जिनके 3 जूनियर वकील थे ।तीनो ही जज बने ।
SH. AJAY KUMAR MITTAL
SH. R.K.GARG
SH. G.S. SANDHAWALIA
इनके बेटे SHRI AKSHAY BHAN को हाल ही में सीनियर वकील बनाया गया वोट किसने डाले जजों ने । करीब 3 वोट तो घर के थे जिन जूनियर्स को जज बनाया था ।

5. Sh. AJAY KUMAR MITTAL के बेटे SH. ALOK MITTAL
SH. R.K. GARG की बेटी MS. SUPRIYA GARG
SH.AJAY TEWARI का भतीजा SH. ANIMESH SHARMA
तीनो को JUSTICE अशोक भान के बेटे सीनियर वकील AKSHAY BHAN के साथ लगाया गया है । क्या आने वाले टाइम में यह तीनो भी सीनियर वकील /सरकारी वकील या जज होंगे ?

6. अब बारी है JUSTICE JASBIR SINGH retd. JI की
जिनके 2 जूनियर थे
Sh. PARAMJIT SINGH जो अब हाई कोर्ट के जस्टिस है ।
SH. R.K.S BRAR जिनका नाम तो भेजा था पर सुप्रीम कोर्ट ने APPROVE नही किया ।
इनका अपना बेटा SH. NAVJOT SINGH हाई कोर्ट में ही काम करता है जिसमे यह जस्टिस थे ।
अभी हाल ही में Sh. SUNIL CHADHA JI को सीनियर बने ।
इनके पास JUSTICE JASBIR SINGH का बेटा जूनियर है । इनका नाम 2 बार सुप्रीम कोर्ट भेजा गया पर सुप्रीम कोर्ट ने APPROVE नही किया ।

7. अब बारी है JUSTICE V.K.BALI RETD.की
इनके जूनियर थे Surya Kant जो जस्टिस बने ।
इनका बेटा SH. PUNIT BALI जिसे अभी हाल ही में SENIOR बनाया गया है ।
इनका जूनियर वकील SH. ANIL KSHETARPAL इन्हें भी हाल ही में सीनियर बनाया गया है ।
वोट किसके थे जजों के ।

8. अब बारी है JUSTICE J.V.GUPTA RETD. जी की ।
इनका अपना बेटा JUSTICE HEMANT GUPTA हाई कोर्ट में रखा गया ।
SH. HEMANT GUPTA जी का Brother in law SH. RAJESH GARG जिसे अभी सीनियर बनाया गया ।

9. अब बारी है JUSTICE H.S. BRAR RETD. की ।
इनकी बेटी LISA GILL HIGH COURT में जस्टिस बनी ।
JUSTICE LISA GILL की बहन MS. ANU PAL. ASSISTANT ADVOCATE GENERAL हैं ।
SHRI AMAN PAL (Brother in law) HIGH COURT में ही प्रैक्टिस करते हैं ।
JUSTICE LISA GILL के पति श्री G.S. GILL को भी हाल ही में SENIOR वकीलों में शामिल किया गया है । वोट वोही जजों ने डाले ।
और तो और सभी रिश्तेदार हाई कोर्ट में ही हैं ।

10. अब बारी है retd. JUSTICE J.L GUPTA जी की ।
इनका बेटा SH. NIDHESH GUPTA भी सीनियर वकील है । जो जजों के वोटो से बनते हैं ।
(SHRI VIKAS BEHL को जिनसे सुनने में आया है कि SH. J.L GUPTA जी से नजदीकिया थी)

11. अब बारी है JUSTICE ANITA CHAUDHARY की ।
इनके पिता श्री HARBHAGWAN SINGH जी ALREADY सीनियर वकील हैं ।
इनके भाई श्री ARUN WALIA जिन्हें हाल ही में SENIOR बनाया गया है ।
वोटो द्वारा वोट जज डालते हैं ।

12. अब बारी है जस्टिस R P NAGRATH जी की ।
इनका बेटा श्री MANUJ NAGRATH , D.A.G. HARYANA है ।
SHRI SANJIV MANRAI से भी इनकी नजदीक की रिश्तेदारी है जिसे अभी हाल ही में SENIOR वकील बनाया गया ।

13. अब बारी आती है JUSTICE H.S BEDI की ।
जिनका बेटा श्री JASJIT SINGH BEDI हाल ही में senior advocate बनाया गया ।

14. अब बारी है RETD. JUSTICE UJAGAR SINGH जी की ।
इनके बेटे SHRI G.S PUNIA को हाल ही में SENIOR वकील बनाया गया ।

15. अब बारी है RETD. JUSTICE A.S ANAND की।
इनकी बेटी MS. MUNISHA GANDHI का नाम सुप्रीम कोर्ट भेजा गया था पर APPROVE नही हुआ ।
इन्हें हाल ही में SENIOR वकीलों में शामिल किया गया है ।
वोट जज डालते है ।
इनके बैलट पेपर
इनका सारा रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय करने का रूल बनाया गया क्यों ????
ताकि बाद में कोई अपनी दावेदारी पेश न कर सके ।
कहीं ऐसा तो नही जजों के रिश्तेदारों को वोट पूरे न मिले हो और डर हों कोई RTI के जरिये record न मांग ले । डिस्ट्रॉय करने का रूल बना दिया ???Contribute your insights for PM Narendra Modi’s upcoming Mann Ki Baat on August 28th
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yogesh saxena

मन की बात  - 
 

Contribute your insights for PM Narendra Modi’s upcoming Mann Ki Baat on August 28th
#मुख्य_न्यायाधीश_ठाकुर_साहब_के_आँसू_और_उनका_सच मुख्य न्यायाधीश टी.एस ठाकुर के पिता डीडी ठाकुर का इंदिरा गांधी और कांग्रेस के साथ राजनीतिक संबंध थे। डीडी ठाकुर इंदिरा-शेख समझौते के तहत जज के पद से इस्तीफा देकर जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री बने थे ! डी डी ठाकुर जम्मू-कश्मीर में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रह चुके हैं! डी डी ठाकुर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में 1973 में जज नियुक्त हुए थे, लेकिन उन्हें राजनीति पसंद था, इसलिए जज के पद से इस्तीफा देकर उन्होंने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की सरकार को ज्वाइन कर लिया। डी डी ठाकुर के पोते और टी.एस ठाकुर के सुपुत्र जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर भी आज जम्म्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में जज हैं! यही वर्तमान "काॅलेजियम" व्यवस्था है, जिसे समाप्त करने के लिए मोदी ने संसद में प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मोदी के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है...।। क्युंकि मोदी के प्रस्ताव मंजुर हो जाए तो ये एक ही कोंग्रेसी परिवार से जज बनने का और सभी क्राईम में कोंग्रेसीयों को बचाने का सिलसिला बंद हो जाएगा !! लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज ये प्रस्ताव पर रोक लगा रही है ताकि उनके एक ही परिवार की काली दूकान चलती रहे ...!! काला कोट....काली दूकान.... काली दाल चीफ जस्टिस हाथ धोकर क्यों पड़े हैं मोदी सरकार के पीछे chief justice of india tirath singh thakur dna analysis : पिछले कई दिनों से सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मोदी सरकार के पीछे पड़े हुए हैं, कभी मोदी के सामने आंसू बहाते हैं और कभी केंद्र सरकार को फटकार लगाते हैं, इसके अलावा आजकल वे मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं जिसकी वजह से कांग्रेस और केजरीवाल को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल गया है। तीरथ सिंह ठाकुर हाई कोर्ट में मुख्य जजों की नियुक्तियां करना चाहते हैं लेकिन जजों का नाम खुद उन्होंने चुना है, जिसके विरोध में करीब 1000 वकीलों ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास अर्जी भेजी है, अगर मोदी प्रधान न्यायाधीश की बात मान लेते हैं तो वकील हड़ताल कर देंगे जिसकी वजह से आन्दोलन शुरू हो जाएंगे, एक समस्या और है, इस वक्त हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त किये गए भ्रष्ट और घूसखोर जज भरे पड़े हैं, उन्हीं में से छंटनी करके तीरथ सिंह ठाकुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीशों की नियुक्ति करना चाहते हैं, मोदी सरकार की समस्या यह है कि अगर दो चार मुख्य न्यायाधीश चुन लिय गए तो तीन साल तक वे अनाप शनाप फैसले सुनकर बीजेपी सरकारों की मुसीबत बढाते रहेंगे, इसलिए मोदी सरकार भ्रष्ट जजों की न्यायालयों से सफाई चाहती है, यही सोचकर जजों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्था बनायी जा रही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस व्यवस्था के विरोध में है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्ष पहले जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी तो सुप्रीम कोर्ट की कांग्रेस के सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि सभी जजों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती थी इसलिए किसी जज में कांग्रेस सरकार को फटकार लगाने की हिम्मत नहीं होती थी, आज भी वही जज सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में भरे पड़े हैं और मौका मिलने पर मोदी सरकार को खूब फटकार लगा रहे हैं। थोडा बहुत कमी थी तो उसे तीरथ सिंह ठाकुर ने रो धोकर पूरा कर दिया। जब तीरथ सिंह ठाकुर हाथ धोकर मोदी सरकार के पीछे पड़ गए तो लोग सोचने लगे कि आखिर बात क्या हो सकती है, जब उनकी डीएनए एनालिसिस की गयी तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, ऐसा लगा कि तीरथ सिंह ठाकुर के अन्दर आज भी कांग्रेस भक्ति बसी हुई है, जिसकी वजह से वह मोदी सरकार के विरोधी बनते जा रहे हैं। पढ़ें तीरथ सिंह ठाकुर की डीएनए एनालिसिस तीरथ सिंह ठाकुर ने पिता देवी दास ठाकुर एक तरह से कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के भक्त थे, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की वजह से ही आज कश्मीर आतंकवाद और अलगाववाद का दंश झेल रहा है, सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि तीरथ सिंह ठाकुर के पिता देवी सास ठाकुर एक समय (1973-1975) जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट के जज थे लेकिन उन्हें सत्ता का ऐसा लोभ हुआ कि 1975 अपने पद से इस्तीफ़ा देकर शेख मुहम्मद अब्दुल्लाह की सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर बन गए। कौन थे शेख मुहम्मद अब्दुल्लाह शेख मुहम्मद अब्दुल्लाह ही नेशनल कांफ्रेंस (NC) के जन्मदाता था, ये पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दादा भी थे, बाद में इनके दामाद गुलाम मुहम्मद शाह भी जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री बने, दामाद के बाद इनके बेटे फारूख अब्दुल्लाह भी मुख्यमंत्री बने और उसके बाद उनके नाती उमर अब्दुल्ला भी जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। शुरू शुरू में जब कश्मीर भारत से अलग प्रान्त माना जाता था और हरी सिंह का कश्मीर पर शासन था तो इन्होने हरी सिंह का विद्रोह करके उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया, ये 1947 में कश्मीर के पहले प्रधान मंत्री भी बने थे लेकिन इन्हें 1953 में प्रधानमंत्री पद से हटाकर गुलाम मुहम्मद बख्सी को कश्मीर का प्रधानमंत्री बना दिया गया, जब 1965 में कश्मीर का भारत में विलय हो गया तो तो प्रधानमंत्री का पद ख़त्म करके मुख्यमंत्री और गवर्नर राज में तब्दील कर दिया गया। शेख मुहम्मद अब्दुल्लाह 1974 में फिर से कश्मीर के मुख्यमंत्री बने और मृत्यु तक (8 सितम्बर 1982) अपने पद पर बने रहे। शेख मुहम्मद की सरकार में ही तीरथ सिंह के पिता देवी दास ठाकुर वित्त मंत्री बने, जब शेख अब्दुल्लाह की मौत हो गयी तो उसके बाद उनके दामाद गुलाम मोहम्मद अब्दुल्लाह जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री बने, चूँकि देवी दास ठाकुर की अब्दुल्लाह परिवार से बढ़िया केमिस्ट्री थी इसलिए गुलाम मोहम्मद की सरकार में देवी दास जम्मू और कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री बनाए गए। गुलाम मोहम्मद शाह के बाद शेख मुहम्मद अब्दुलाह के बेटे फारूख अब्दुल्लाह कश्मीर के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उसके बाद जब प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या हो गयी तो वीपी सिंह को कांग्रेस ने नया प्रधानमंत्री बनाया। वीपी सिंह ने ही देवी दास ठाकुर को असम का गवर्नर बनाकर जम्मू और कश्मीर से दूर भेज दिया। परिवारवाद का रिजल्ट हैं तीरथ सिंह ठाकुर आप खुद देखिये, तीरथ सिंह ठाकुर के पिता जी हाई कोर्ट में जज थे, बाद में मंत्री बने, फिर उप-मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस की सरकार ने उन्हें गवर्नर बनाया, कितने रसूखदार थे तीरथ सिंह ठाकुर के पिता जी, उनकी मृत्यु 2007 में हुई लेकिन उन्होने मरने से पहले अपने दोनों बेटों को सेट कर दिया, तीरथ सिंह ठाकुर दो भाई हैं, उनके छोटे भाई धीरज सिंह ठाकुर भी जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट में जज हैं, तीरथ सिंह ठाकुर देश के सबसे गरिमामयी पद पर हैं, सुप्रीम कोर्ट से बड़ा क्या हो सकता है, अब वे चाहते हैं कि उनके भाई भी जज बनें, उनके बेटे भी जज बनें, उनके नाती भी जज बनें, जैसा कि उनके पिता ने किया और अपने दोनों बेटों को जज बना दिया, मोदी सरकार इसी व्यवस्था के खिलाफ है, उन्हें परिवारवाद बर्दास्त नहीं है। मोदी सरकार एक काॅलेजियम व्यवस्था के तहत जजों की नियुक्ति करना चाहती है लेकिन प्रधान न्यायाधीश अपनी मनमर्जी चलाना चाहते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने काॅलेजियम व्यवस्था पर रोक लगा दी है, इसलिए मोदी ने भी तीरथ सिंह के फैसले पर रोक लगा दी है। तीरथ सिंह को क्यों बताया जा रहा है कांग्रेस भक्त तीरथ सिंह ठाकुर के पिताजी जन गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार में उप-मुख्यमंत्री थे तो उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटालों के बहुत आरोप लगे, इसके अलावा इनके पिताजी दशकों तक कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं, कांग्रेस सरकार ने उन्हें असम का गवर्नर बनाया, तीरथ सिंह ठाकुर के ऊपर भी कांग्रेस की भक्ति का कुछ तो असर पड़ा ही होगा, आखिर उनके घर का ही माहौल कांग्रेसमय था, हर समय कांग्रेस की चर्चा होती रहती होगी, कांग्रेस के गुण गाये जाते रहे होंगे, बच्चों पर अपने बाप का कुछ तो असर पड़ता ही है, जिस कांग्रेस ने उनके परिवार को सेट किया, उनके पिताजी को सेट किया, हो सकता है उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट ने सेट किया गया हो, अब वे उसके लिए कुछ ना कुछ काम तो करेंगे ही जिसने उन्हें सेट किया है, शायद इसीलिए जब से केंद्र में मोदी सरकार आयी है सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार को फटकार पर फटकार लगा रहा है, कांग्रेस सरकार के समय तो बोलने की भी हिम्मत नहीं होती थी, सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दो साल तक कांग्रेस ने कालेधन पर SIT बनाने को कहा लेकिन कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की कभी भी परवाह नहीं की, कालेधन को कोई कार्यवाही नहीं की, लोगों को मौका मिला और उन्होंने अपने कालेधन को सेट कर लिया। http://nm-4.com/yg4u

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yogesh saxena

आदर्श भारत  - 
 
कहानी से सीख......जिन्दगी अवसरों से भरी हुई है. कुछ सरल हैं और कुछ कठिन. पर अगर एक बार अवसर गवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा. अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए
एक नौजवान आदमी एक किसान की बेटी से शादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया.
किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, " युवक, खेत में जाओ. मैं एक एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ. अगर तुम तीनों बैलों में से किसी भी एक की पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा." नौजवान खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा लेकरखडा हो गया. किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक बैल उसमे से निकला. नौजवान ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था. उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया. दरवाजा फिर खुला. आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला. नौजवान ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था. फिर उसने एक ओर होकर बैल को निकल जाने दिया. दरवाजा तीसरी बार खुला. नौजवान के चहरे पर
मुस्कान आ गई. इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला. जैसे ही बैल नौजवान के पास आने लगा, नौजवान ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले. पर उस बैल की पूँछ थी ही नहीं...
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yogesh saxena

धर्म  - 
 
प्यार का अंजाम शहर में चारों तरफ दंगा फैल गया था। ”......मारो.... .मारो....बचाओ.. .बचाओ” की आर्तनाद चीखें सुनायी दे रही थीं। एक आवाज उभरी- ‘‘मार डालो इन हिन्दुओं
को। इनके लड़के ने हमारी लड़की को भगाकर उसको नापाक किया है।’’ दूसरी आवाज उभरी- ‘‘छोड़ना नहीं इन मुसलमानों को। इनकी लड़की ने हमारे लड़के को बहला-फुसलाकर उसका धर्म भ्रष्ट कर दिया है।’’ ऐसी ही न जाने कितनी आवाजें आतीं और हर आवाज के साथ चारों तरफ खून का फव्वारा फूट पड़ता। इन सबसे बेपरवाह, मंदिर के कोटर के भीतर बैठा कबूतर उड़ा और सामने स्थित मस्जिद की दीवार पर बैठी कबूतरी के साथ चोंच मिलाकर गुटरगूं-गुटरगूं करने लगा। इस जगत का विधाता अपने ही बनाये दो प्राणियों के प्यार का अंजाम देख
रहा था और खामोश था......!!!
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  • No
    present
  • M.D.Jain, Agra
Basic Information
Gender
Male
Other names
yogrekha
Story
Tagline
Life a Bubble, I snap it today as days r like a minute, We waiting years to come, it may diminish their images, with flower & Ashes Yogesh
Introduction
It is an iron cage, not having any ventilation and people are living in the state of suffocation, virtually on the verge of their death point. There is a complete apathy of the custodian of the power towards their welfare and in our country "We, the people " who are regarded to be the sovereign of the nation are living a life full of abrogation and subjugation. I seldom consider that whether it is worthwhile to shout a voice and thereby invite some lighter sleeper to suffer the agony of the death
Work
Occupation
Advocate, High Court
Employment
  • Advocate
    Advocate, High Court, present
  • Yogrekha&company
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