हमरु सुरिलू उत्तराखंड...
ईदगा उद्गा नी केर भेजी हम ता पहाडा का लोग छो ई शहर मा ऐकि हमत अप नु पहाड़ थेकि भूली गयों हवा पाणी ऊ
मस्ती मौज खेत , श्यारा और गोर बकरों की खोज ऊ सुच्दा हवाला हम
किद्गा यख कमाना छों कैल जाणी हमर
दिल की हम किद्गा पछताना छो ये पुटुक की खातिर हमल सब घर बार छोड़ य...
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