+Amitabh Bachchan  wrote:
ये दर्द जाता नहीं ... और न ही जाता है उन दरिंदों का कांड हमारी सोच में से ...
" वो किसे दोषी ठहराए , और किसको दिख सुनाये , जब की मिटटी साथ मिटटी के करे अन्याय " ~ बच्चन 
सज़ा तो मिलनी चहिये , और वो भी कड़ी से कड़ी , उन जानवरों को, जिन्होंने ये साबित कर दिया, की उनके चेहरे समाज के कीचड़ में तो सने हुए हैं ही , लेकिन साथ में ये भी, की जिस कोख से वे जन्मे, उसका कितना निरादर किया I 
न जाने क्यूँ पुलिस ने जब उनमे से कुछ को पकड़ा , तो उन्हें पुलिस स्टेशन , उनके चेहरे पे कपड़ा डाल कर ले गए I खोलिए मुह उनका ... हम उन वैहशी जानवरों का चेहरा देखना चाहते हैं, और चाहते हैं की वो भी हमारी सूरत देखें और जाने की हम उन्हें किन नज़रों से देखते हैं I देश का यदि क़ानून अवसर देता , तो उन्हें बाज़ार में खुला छोड़ देना चाहिए था I फिर हम सब स्वयं उन्हें अपना क़ानून चखा देते I उनपर जब वही हरकत होती , जो उन्होंने उस बेचारी बच्ची के साथ किया , तब उन्हें पता चलता , और समाज के और दरिंदों को भी , की बलात्कार का मायने क्या होता है I 
फ़ासी पड़ने पर तो उनका उद्धार हो जायेगा ... उन्हें तो तिल तिल कर जीना चहिये - chemical castration के बाद !!!
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Image: Amitabh Bachchan Facebook
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