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golok behari rai
जन्म 7 मार्च 1957 सिसोटार,बलिया,उ प्र । प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।General Secretary organization , Forum for Awareness of National Security(FANS)
जन्म 7 मार्च 1957 सिसोटार,बलिया,उ प्र । प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।General Secretary organization , Forum for Awareness of National Security(FANS)
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“गीता” : एक ‘मानवीय ग्रंथ’ … एक ‘समग्र जीवन दर्शन’ … व ‘मानव समाज की अप्रतिम धरोहर’
            "गीता” का शाब्दिक अर्थ केवल गीत अर्थात् जो गाया जा सके से लिया जाता है । किन्तु आतंरिक रूप से इसका अर्थ है कि जिसने अपने गीत को पा लिया है, स्वयं के छन्द को जान लिया है, स्वच्छंद हो गया है । माना जाता है कि पूर्व अध्यात्म की यात्रा पर ध्यान केन्...
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अतिवाद की जड़ में - सामाजिक , आर्थिक विषमता
आज नक्सलवाद सह माओवाद देश के विकास की धारा को अवरुद्ध कर खड़ा है। देश में एक बड़े भू-भाग में इस माओवाद के कारण विकास योजनाएँ ठप्प है। फिर उन क्षेत्रों में विकास के नाम पर राजनेता-प्रशासन एवं अतिवादि माओवादियों का संगठित तंत्र लूट मचाये हुए है। इसकी मूल समस्...
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विस्मृति
शब्द जो बिछड़े थे किसी मोड़ पे पंख लगा कर उड़ गये शब्द जो साथ चले थे मेरे वो थक गये... ठहर गये शब्दों का होना अखरता है अब शब्द राह तो रहे पर मंज़िल न हुये शब्दों को लड़ना पसंद है... मरना पसंद है पर साथ जीना पसंद नही कितने भोले हैं ये मेरे शब्द
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यथार्थ का अंतर्मन
सिर पर मोरध्वज अधरों पर मुरली नंदलाल के मथुरा गमन पर कान्हा की एक हल्की सी मुस्कराहट पर गोपियों के समूह से अलग निमग्न हो खड़ी राधा स्थिर चित हो बोल पड़ी " सुनो जब तुम मुझे मुग्ध भाव से देखते हो ना मैं बिना श्रृंगार के ही सुंदर हो जाती हूँ मेरे जीवन में जितना ...
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एक वध और
अपनी भूख मिटाने के लिए बाँस की कोपलों में कुछ कीड़ों ने छेद कर दिये उन छेदों से जब जब हवा गुजरती कोपलों का रोना सुनाई देता उन कीड़ों को तो पता ही नहीं बंशी बनाने के उपक्रम में कि वे संगीत के सर्जन में हस्तक्षेप कर रहे हैं सम्यक विचारों को विस्तार दो कहते ही च...
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