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दिनेशराय द्विवेदी
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क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने ...!
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मेष संक्रान्ति, बैसाखी, बोहाग बिहु, पुथण्डु, विशु और बगाली नववर्ष पोइला बैशाख
आ ज 14 अप्रैल 2018 को बैसाखी (वैशाखी) है। हालांकि अधिकांश वर्षों में यह दिन 13 अप्रेल को होता है, क्योंकि यह सूर्य की मेष संक्रांति के दिन होता है। आज हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी निरन्तर एक अंडाकार कक्षा में निरन्तर सूर्य की परिक्रमा करती रहती है। इस से हो...
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साम्प्रदायिकता और संस्कृति
साम्प्रदायिकता और संस्कृति प्रेमचन्द 'साम्प्रदायिकता और संस्कृति' प्रेमचंद का महत्वपूर्ण लेख है जिस में उस ने साम्प्रदायिकता के पाखंड को उजागर करते हुए बताया है कि संस्कृति और साम्प्रदायिकता का वही संबंध है जो सिंह और सिंह की खाल ओड़े गधे का होता है  सा म्प...
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ईदगाह
ईदगाह -प्रेमचन्द र मजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी
है। कितना मनोहर , कितना सुहावना प्रभाव
है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है , खेतों
में कुछ अजीब रौनक है , आसमान पर कुछ अजीब
लालिमा है। आज का सूर्य देखो , कितना प्यारा , कितना शीतल है , यानी संसार को ईद की ब...
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उसकी माँ
'कहानी'   उसकी माँ पाण्डेय बैचेन शर्मा 'उग्र' दो पहर को ज़रा आराम करके उठा था। अपने पढ़ने-लिखने के कमरे में खड़ा-खड़ा धीरे-धीरे सिगार पी रहा था और बड़ी-बड़ी अलमारियों में सजे पुस्तकालय की ओर निहार रहा था। किसी महान लेखक की कोई कृति उनमें से निकालकर देखने की बात स...
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अपने घर के आसपास
  क ल
अपने गृह नगर बाराँ में था। अपने घर के बिलकुल पास के तीन चित्र साझा कर
रहा हूँ। पहले चित्र में कल्याणराय मंंदिर का मुख्य द्वारा है। यह बाराँ
नगर का सब से बड़ा मंदिर कहा जाता है। राजस्थान सरकार का देवस्थान विभाग इस
की व्यवस्था का संचालन करता है। पुर...
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ब्राह्मणवादी अहंकार
 लेखक आनंद तेलतुंबड़े अनुवाद: रेयाज उल हक   इं डिया टुडे के वेब संस्करण डेलियो.इन पर 27 नवंबर को बेल्जियम के घेंट यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर एस.एन. बालगंगाधर का एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “व्हिच इनटॉलरेंस इज ग्रोइंग इन इंडिया?”. यह उस गुस्से के जवा...
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यह महज असहिष्णुता नहीं है, ... अरुन्धति रॉय
सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए मिले राष्ट्रीय सम्मान को(नेशनल अवार्ड फॉर बेस्ट स्क्रीनप्ले) लौटाते हुए अरुंधति रॉय यहां उन सब बातों को याद कर रही हैं जिन पर हमें नाज करना चाहिए और उन सब
पर भी, जिनसे हमें शर्म आनी चाहिए और जिसके खिलाफ उठ खड़े होना चाहिए. हा लांकि...
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प्रगतिशील होने का पाखंड !
राष्ट्रवादी ढोंगी विकास के नारों की खाल ओढ़ प्रगतिशील नहीं हो सकते। -भँवर मेघवंशी ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- “भाई मैं जंतर मंतर में भरोसा नहीं करता, मैं लोकतंत...
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पुरस्कार वापसी से उठे सवालों के जवाब : अब सवाल पूछने की बारी हमारी है -अनिल पुष्कर
जि न लोगों ने यह सवाल पूछा है कि १९८४ के दंगों में पुरस्कार क्यूँ नहीं लौटाए? हाशिमपुरा दंगों में पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? बाबरी मस्जिद ढहाने में पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? मुम्बई सीरियल ब्लास्ट में मारे गये लोगों पर पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? २००२ के गुज...
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