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dheeraj sonker
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जुलूस
खुद को जो देखा तुम्हारी नज़र में मेरी कुर्बत न मेरे मुक़म्मल से थी, मेरी पहचान नासाज़ मौसम-सी थी, जो किसी धुंध में कोई गफलत सी थी कभी अच्छे सहर मे भी जागा करो  । खुद को जो देखा तुम्हारे शहर मे, हर बाशिंदे को मेरी भी पहचान थी, बस जुबाँ ही थी जो मेरी अनजान थी...

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आज फिर तुम्हारा जन्मदिन था  मैंने फिर से फ़ोन कर दिया  पर तुम हो की फ़ोन ही नही उठाती हो ! बस इतना पूछता की  मुम्बई कैसी है ? तुम कैसी हो ? लाइफ कैसी है ? जॉब कैसी है ? फिर से तो कंपनी  चेंज कर ली क्या ? और वो तुम्हारे   स्टार्ट उप का क्या हुआ ? क्या तुम अभ...

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तुम
तुझसे बातें करूँ तुझसे मिन्नत करूँ, तुझसे जिद्द भी करूँ और बगावत भी, कभी पलकों मे रखके इबादत करूँ, कभी नज़र मे चढ़ाकर शिकायत भी, तेरी मुस्कान पे आयतें भी लिखूँ, तेरी नादानियों पर हिदायत भी, तुझको उड़ने भी दुँ आसमां के परे, तुमको पल्कों मे रक्खूँ छुपाकर भी, ...

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तुम
तुझसे बातें करूँ तुझसे मिन्नत करूँ, तुझसे जिद्द भी करूँ और बगावत भी, कभी पलकों मे रखके इबादत करूँ, कभी नज़र मे चढ़ाकर शिकायत भी, तेरी मुस्कान पे आयतें भी लिखूँ, तेरी नादानियों पर हिदायत भी, तुझको उड़ने भी दुँ आसमां के परे, तुमको पल्कों मे रक्खूँ छुपाकर भी, ...

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जुस्तजूं
दिल को होते हैं तुझसे गिले शिक़वे गम क्यों ना तुझे मै पूरा जान लुँ !!  सजदा करूँ तुझको शाम-ओ-सहर ख्वाबों मे देखूँ तुझे हर पहर, रूमानियत में भी  तेरी करूँ इल्तिज़ा, क्यों न तुझको मै ऐसा खुदा मान लुँ ॥  हर नज़र में मेरी  तेरा ही अक़्स हो, बिन तेरे न कोई  फिर ...

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