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avnish anand
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avnish anand

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प्रेम (Prem) - अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh')
उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे। पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे। कभी संग निज संगियों का न छूटे। हमारा चलन घर हमारा न लूटे। सगों से सगे कर न लेवें किनारा। फटे दिल मगर घर न फूटे हमारा।1। कभी प्रेम के रंग में हम रँगे थे। उसी के अछूते रसों में पगे थे। उसी के लगाये ...
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avnish anand

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चारु चंद्र की चंचल किरणें ( Charu Chandra Ki Chanchal Kirnein ) - मैथिलीशरण गुप्त (Maithilisharan Gupt)
चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में। पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से, मानों झूम रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥ पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना, जिसके सम्मुख स्व...
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avnish anand

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बीती विभावरी जाग री ( Biti Vibhavri Jag Ri ) - जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad)
बीती विभावरी जाग री! अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा नागरी! खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा किसलय का अंचल डोल रहा लो यह लतिका भी भर ला‌ई- मधु मुकुल नवल रस गागरी अधरों में राग अमंद पिए अलकों में मलयज बंद किए तू अब तक सो‌ई है आली आँखों में भरे विहाग री!
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Zoya Mirza's profile photo
 
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दिवंगत पिता के प्रति ( Divangat Pita Ke Prati ) - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwardayal Saxena)
सूरज के साथ-साथ सन्ध्या के मंत्र डूब जाते थे, घंटी बजती थी अनाथ आश्रम में भूखे भटकते बच्चों के लौट आने की, दूर-दूर तक फैले खेतों पर, धुएँ में लिपटे गाँव पर, वर्षा से भीगी कच्ची डगर पर, जाने कैसा रहस्य भरा करुण अन्धकार फैल जाता था, और ऐसे में आवाज़ आती थी पि...
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avnish anand

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Ramanathan Krishnan and mother's jewellery
Ramanathan Krishnan's father, TK Ramanathan was besotted by the game of tennis but had no money to buy the expensive equipment. He sold his wife's jewellery to buy a tennis racquet. That racquet laid the foundation of Indian tennis' first family. Three generations and counting including ...
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avnish anand

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इन्द्र जिमि जम्भ पर (Indra Jimi Jambh Par) - भूषण ( Bhushan)
इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर, रावन सदंभ पर, रघुकुल राज हैं। पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यौं सहस्रबाह पर राम-द्विजराज हैं॥ दावा द्रुम दंड पर, चीता मृगझुंड पर, 'भूषन वितुंड पर, जैसे मृगराज हैं। तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर, त्यौं मलिच्छ बंस पर,...
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Vijai Kumar's profile photoavnish anand's profile photo
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Will share more soon.
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avnish anand

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मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझानेवाला ( Mera Desh Jal Raha, Koi Nahin Bujhanewala ) - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ (Shivmangal Singh 'Suman')
घर-आंगन में आग लग रही। सुलग रहे वन उपवन, दर दीवारें चटख रही हैं जलते छप्पर छाजन। तन जलता है , मन जलता है  जलता जन-धन-जीवन, एक नहीं जलते सदियों से जकड़े गर्हित बंधन। दूर बैठकर ताप रहा है, आग लगानेवाला, मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझानेवाला। भाई की गर्दन पर ...
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avnish anand

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मुक्ति की आकांक्षा ( Mukti Ki Aakansha ) - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwardayal Saxena)
चिडि़या को लाख समझाओ कि पिंजड़े के बाहर धरती बहुत बड़ी है, निर्मम है, वहाँ हवा में उन्हेंर अपने जिस्मब की गंध तक नहीं मिलेगी। यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है, पर पानी के लिए भटकना है, यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है। बाहर दाने का टोटा है, यहाँ चुग्गाह...
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avnish anand

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चलना हमारा काम है ( Chalna Hamara Kaam Hai ) - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ (Shivmangal Singh 'Suman')
गति प्रबल पैरों में भरी  फिर क्यों रहूं दर दर खडा  जब आज मेरे सामने  है रास्ता इतना पडा  जब तक न मंजिल पा सकूँ,  तब तक मुझे न विराम है,  चलना हमारा काम है।  कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया  कुछ बोझ अपना बँट गया  अच्छा हुआ, तुम मिल गई  कुछ रास्ता ही कट गया  क्या र...
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Public - 4 years ago
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