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Ved Vigyan Mandir
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Vedic and Modern Physics Research Center
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वेद से सम्पूर्ण सृष्टि विज्ञान व ब्रह्माण्ड के बनने की प्रक्रिया को वैदिक विज्ञान से सिद्ध करने का जो संकल्प आचार्य जी ने लिया था, उसका कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। शीघ्र ही (सन् 2017 में) हमारे समक्ष “वेद विज्ञान-आलोक” नामक विशालकाय ग्रन्थ आने वाला है, जो वैदिक विद्वानों एवं वर्तमान भौतिक वैज्ञानिकों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। सम्पूर्ण भूमंडल पर यह सिद्ध हो जाएगा कि वेद ही परमपिता परमात्मा का दिया ज्ञान है तथा यही समस्त ज्ञान विज्ञान का मूल स्रोत है।

शीघ्र प्रकाश्यमान
अब तक की उपलब्धियां...

Big Bang Theory को वैदिक सिद्धांतों से अपनी पुस्तक में मिथ्या सिद्ध किया। उसके बाद BARC के वैज्ञानिक डाॅ0 आभास कुमार मित्रा जी ने अपने Research Paper में Big Bang Theory को मिथ्या सिद्ध करके उसकी जगह Eternal Universe की नयी अवधारणा को विश्व में स्थापित किया। ध्यातव्य है कि Google द्वारा निकाली गयी अब तक के Top 20 Indian Physicist की लिस्ट में मित्रा साहब का भी नाम है।
आचार्य जी के द्वारा स्टीफन हाॅकिंग को लिखे गए पत्र के बाद उन्होंने अपनी Big Bang Theory जिसमें Zero Volume में infinite Energy मानते थे, में संशोधन किया।
आचार्य जी ने ऋग्वेद के “ऐतरेय ब्राह्मण” का वैज्ञानिक भाष्य पूरा कर लिया है, जो कि विश्व में सर्वप्रथम हुआ है।
आचार्य जी ने भारत व विश्व के कई वैज्ञानिकों, जैसे- स्टीफन हाॅकिंग तथा अनेकों प्रतिष्ठित संस्थाओं, जैसे- NASA, BARC को पत्र लिखे एवं आधुनिक विज्ञान की गम्भीर समस्याओं पर 12 प्रश्न पूछे परन्तु उनका समाधन किसी के पास नहीं मिला, जबकि उन प्रश्नों का समाधन आचार्य जी के द्वारा किये गए भाष्य से मिल जायेगा।
इन प्रश्नों पर चर्चा के दौरान डाॅ0 आभास मित्रा जी ने कहा-
“इन मे से कुछ प्रश्नों का उत्तर वर्तमान विज्ञान 100 वर्षों में भी नहीं दे सकेगा।”
5. एक तरफ हजारों वैज्ञानिक सर्न प्रयोगशाला में खोज में लगे है, वहीं दूसरी ओर आचार्य जी अकेले कठिन परिश्रम कर रहे हैं। आचार्य जी ने दावा किया है कि वे सर्न के वैज्ञानिकों से पहले यह सब खोज लेंगे।


उपाचार्य - विशाल आर्य [M.Sc. Physics (Delhi Univ.)]
मैं होली से आचार्य जी के सानिध्य में रहा हूँ। मैंने वर्तमान विज्ञान को गहराई से पढ़ा व समझा है। सौभाग्य से आचार्य जी के “वेद विज्ञान-आलोक” नामक महान् ग्रन्थ के सम्पादन का दायित्व मुझे सोंपा गया है। इस कारण मैं इस ग्रन्थ का अध्ययन कर रहा हूँ तथा पुस्तक में अनेक महत्वपूर्ण Diagrams बना रहा हूँ। मैं वर्तमान भौतिक विज्ञान तथा आचार्य जी के इस वैदिक विज्ञान की तुलना करता हूँ तो अनुभव करता हूँ कि यदि आधुनिक विज्ञान इसी प्रकार प्रगति करता रहा, तो वैदिक विज्ञान के निकट आगामी लगभग 100 - 200 वर्षों में पहुँच पायेगा। इस कारण यह ग्रन्थ आधुनिक वैज्ञानिक जगत् के लिये एक प्रकाश स्तम्भ का कार्य करेगा साथ ही उसे आध्यात्म विज्ञान से भी अनिवार्य रूप से जोड़ सकेगा।
मेरे अनुसार इस भाष्य के द्वारा-
ईश्वर का वैज्ञानिक स्वरूप एवं उसकी सत्ता सिद्ध हो सकेगी।
ईश्वर सृष्टि की प्रत्येक क्रिया को कैसे संचालित करता है, यह प्रकट हो सकेगा।
“ओम्” ईश्वर का मुख्य नाम क्यों है? इसकी ध्वनि इस ब्रह्माण्ड में क्या भूमिका निभाती है? यह ज्ञात हो सकेगा।
वैदिक ऋचाओं का वैज्ञानिक स्वरूप एवं इससे सृष्टि के उत्पन्न होने की प्रक्रिया ज्ञात हो सकेगी।
सृष्टि उत्पत्ति के प्रारम्भिक चरण से लेकर तारों तक के बनने की प्रक्रिया समझायी जा सकेगी।
ब्रह्माण्ड के सबसे जटिल विषय Force, Energy, Time, Mass, Space आदि के रहस्यों से पर्दा उठेगा।
आधुनिक विज्ञान Dark Matter & Dark Energy के बारे में बिल्कुल अनभिज्ञ है, वैदिक विज्ञान बताएगा कि Dark Matter & Dark Energy क्या है और उनका स्वरूप क्या है?
ग्रहों की गति व कक्षाओं के स्थायित्व पर एक सार्वभौमिक नियम स्थापित होगा, जो ब्रह्माण्ड के सभी ग्रहों पर लागू होगा।
आधुनिक विज्ञान मानता है कि प्रकाश से अधिक गति किसी भी पदार्थ की नहीं हो सकती, लेकिन वैदिक विज्ञान एक ऐसा पदार्थ बताएगा जिसकी गति प्रकाश से अधिक एवं 12 लाख Km/s होगी।
मूलकणों एवं क्वाण्टाज् के निर्माण की प्रक्रिया स्वरूप एवं संरचना का बोध हो सकेगा।
वेद के विद्वान् वर्तमान में वेद एवं आर्ष गन्थों के विज्ञान से नितान्त अनभिज्ञ हैं। वेद विज्ञान अनुसंधान की जो परम्परा महाभारत के पश्चात् लुप्त हो गयी थी, वह इस भाष्य से पुनर्जीवित हो सकेगी।
संस्कृत भाषा विशेषकर वैदिक संस्कृत को ब्रह्माण्ड की भाषा सिद्ध किया जा सकेगाा।
भारत विश्व को एक सर्वथा नयी परन्तु वस्तुतः पुरातन, अदभुत् वैदिक फिजिक्स दे सकेगा, इसके साथ ही वेद एवं आर्ष ग्रन्थों के पठन-पाठन परम्परा को भी नयी दिशा मिल सकेगी।
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