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सुमंत विद्वांस
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मोहि कहाँ विश्राम..!!
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Friends recently I have created a Channel on YouTube. May I request you to kindly subscribe to it and help me in increasing the subscribers base. Short term Goal: 500 .https://www.youtube.com/channel/UCJBLRzCByq_ea0h5LfozH1g

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बस यूं ही लिखा कुछ आज सुबह...

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इसमें कोई शक नहीं कि मोदीजी हिन्दी को जल्दी ही ‘अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड’ बना देंगे. लेकिन जब तक आम लोग खुद अपनी भाषाओं का उपयोग नहीं करते और अंग्रेज़ी को श्रेष्ठ मानने की मानसिकता से बाहर नहीं निकलते, तब तक ज्यादा कुछ होने वाला नहीं है. मैं हमेशा देखता हूँ कि मॉल्स, मल्टिप्लेक्स, मैकडोनाल्ड और पिज्ज़ा हट जैसी दुकानों, रेलवे के एसी डब्बों और हवाई जहाजों/हवाई अड्डों जैसी जगहों पर ज्यादातर लोग अक्सर अंग्रेज़ी में ही बात करते हैं. मैं ऐसी जगहों पर भी लगभग हमेशा ही हिन्दी/मराठी (पुणे में) में बात करता हूँ और हमेशा मुझे मेरी भाषा में जवाब भी मिला है. क्या सभी लोग ऐसा नहीं कर सकते? मैंने देखा है कि अक्सर लोग जब कोई फोन रिसीव करते हैं, तो शुरुआत ‘हैलो’ से ही होती है. मेरा काम कुछ ऐसा है कि मुझे अक्सर दुनिया के कई देशों के लोगों से बात करनी पड़ती है. कोई विदेशी भी अगर कॉल करे, तो मैं रिसीव करने पर ‘नमस्कार’ बोलता हूँ और मुझे जवाब में नमस्कार या नमस्ते सुनने को भी मिलता है. क्या सभी लोग ऐसा नहीं कर सकते? एक भाषा के रूप में अंग्रेज़ी सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन बेकार की अंग्रेज़ियत से बाहर निकलना ज़रूरी है. ये भ्रम तोड़ना ज़रूरी है कि अंग्रेज़ी के बिना दुनिया में काम नहीं हो सकता. कई विकसित देश हैं, जहां अंग्रेज़ी को कोई नहीं पूछता. भारत में अपनी आपसी बातचीत और व्यवहार में जब तक हम गर्व से हिन्दी और अपनी अन्य भारतीय भाषाओं का उपयोग नहीं करते, तब तक कोई सरकार, कोई क़ानून, किसी भाषा के विकास और विस्तार में कुछ नहीं कर सकता. मुझे विश्वास है कि आप भी बेवजह की अंग्रेज़ियत ओढ़ने के बजाय हिन्दी और अपनी अन्य भारतीय भाषाओं का ही उपयोग करते होंगे. भारतीय भाषाओं का उपयोग बढ़ाने के लिए ऐसे छोटे-छोटे क्या काम किए जा सकते हैं, इस बारे में अपने सुझाव ज़रूर दें.

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मुझे यह कहानी हममें से हर एक के जीवन से जुड़ी हुई लगती है। जिस तरह फिल्म में वह लड़की एक ही घटना में उलझी-रुकी हुई थी, शायद हम सबकी ज़िन्दगी में भी ऐसा कोई न कोई प्रसंग, कोई घटना, कोई पल होता ही है, जहाँ हमारा मन अटका रहता है।

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अजेय अपराजित योद्धा
आपने जूलियस सीज़र से लेकर सिकंदर तक और नेपोलियन से
औरंगज़ेब तक न जाने कितने सम्राटों, सेनापतियों और योद्धाओं के बारे में पढ़ा होगा।
लेकिन क्या आप मुझे उस सेनापति का नाम बता सकते हैं, जो अपने जीवन में एक भी लड़ाई
न हारा हो? क्या आप मुझे उस कुशल प्रशासक का नाम बत...

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नया चुनावी अनुभव...
वर्तमान
लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव यदि युद्ध है, तो मतदान केन्द्र युद्धभूमि
और वोटिंग मशीन हथियार है. कल 17 अप्रैल को मैंने भी पूरा दिन इसी युद्धभूमि में बिताया
और एक निर्वाचन बूथ पर अपनी पार्टी के मित्रों के साथ मतदाताओं का सहयोग
किया. पिछले कई वर्ष...
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