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Sukhmangal Singh
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नारी 💐


ज़िन्दगी के हर रूप को💐
देखने की चाहत रखती हूँ ।

ज़िन्दगी के रुख को,
बदलने की ताक़त रखती हूँ !

मेरे सेवा भाव को, मेरी
कमज़ोरी न समझो तू !

आँधियों में ख़ुद को,
खडे रखने की हिम्मत रखती हूँ।


अस्तित्व पर प्रहार करने वालों से
मैं भी लड़ने वाली हूँ !

मुझे निरीह न समझो लोगों ,
मैं भी अड़ने वाली हूँ !

मैं नश्वर देह के रक़्त में ,
नवसृजन की क्षमता रखती हूँ।


प्रेम, ममता, स्नेह व करुणा,
कीजीवन्त प्रतिमा मैं हूँ

सुसंस्कार के उज्ज्वल प्रकाश से ,
राट्र निर्माण करती हूँ।

मैं भी एक नारी हूँ ,
नारी की ताकत रखती हूँ || 💐- डा0 उपासना पाण्डेय
भिवाडी,राजस्थान ।
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श्री जगन्नाथ जी धाम उड़ीसा में श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा शुरू हो गई है | जाककर द र्शन का लाभ प्राप्त करें | -सुखमंगल सिंह मोबाइल -९१९४५२३०९६११
October 29, 2015
October 29, 2015
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"जीवन साथी "
जीवन का है अभिन्न अंग ,
ज्यों खुशियों की मीठी तरंग |
साथ निभाना दुःखों का जंग ,
बच्चों की परवरिश हो संग | |
कैसा निराला उसका ढंग ,
मृगमरीचिका करता भंग |
बढ़ता देता ऐसा सम्बल ,
मिलता आत्मसम्मान को बल ||
साहचर्य अनुभूति अनमोल ,
देती दिल की गिरह को खोल |
हृदय हिम्मत बढ़ाता हर -पल ,
कठिनाइयों का निकलता हल ||
उसमें कुछ है अनोखी बात !
मुझे करती है आत्मसात |
कर कोई न पाये मुझसे घात ,
रहता वह हरदम मेरे साथ ||
-डा0 उपासना पाण्डेय
भिवाडी,राजस्थान ।


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"बिटिया ही कीजो "
अगले जनम मोहे ,बिटिया ही कीजो
धन दौलत चौचक ,संतति मोहि दीजो |
भलाई - जीवन को , मूल बना दीजो
गुनाहों से तौबा ,दिल ऐसा दीजो |
जब होइहैं भौचक मैं घमंड लीजो
दारू मुर्गा सबै ,व्यसन भगा दीजो |
प्रभु मोहि ऐसा, वर दे खुश कीजो
अगले जनम मोहे ,बिटिया ही कीजो ||
धर्म -कर्म बल पर ,समाज साजो दीजो
कलह घर का मिटा ,दुनिया-दिखा दीजो |
सत साहित्य और कला - लेखन दीजो
अवगुण औ आलस्य मेरो हर लीजो |
प्रभु मोहि ऐसो वर दे खुश कीजो
मेल मिलाप शौकी चौकस घर दीजो |
अगले जनम मोहे ,बिटिया ही कीजो
धन दौलत चौचक ,संतति मोहि दीजो ||
अन्न धन लाधियन कोठिला भर दीजो
साथ-हाथ तुम्हार्यो ,दूजे ना लीजो |
पूजा -पाठ चारो टाइम हम कीजो
दुराचारी क सर चरण तोरिय दीजो |
धन दौलत चौचक ,संतति मोहि दीजो
अगले जनम मोहि ,बिटिया ही कीजो ||
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"मातृ दिवस"
माँ! माँ है माँ होती
ममता की माँ सूरत
धरा पर माँ एक सूरज |
खुद ही है माँ पलती
बच्चा भी है पालती
बच्चे को वह सुधारती |
गर्भ में धारण करती
बच्चा संवार कर रखती
निज रक्त मज्जा -पालती |
स्तन क दूध पिलाती
हल्राती -दुलराती
है प्यार उसे दिखाती |
वह साथ में सुलाती
रात भर जाग बिताती
विस्तार गीले रह जाती |
खुद भूखे रहकर भी
बच्चे को दूध पिलाती
सूखे विस्तार - लिटाती |
माँ माँ ही कहलाती
मजदूरी भले कर लाती
नन्हकी नन्हका खिलाती |
देती मति - मतिमान
मगण -मगज पिरोती
मगन मन ही मन होती |
मखतूली पहनाती
'मंगल' भावना भारती
बच्चे को भाति दुलराती |
माँ! माँ है माँ होती
ममता की माँ सूरत
धरा पर माँ एक सूरज ||
शब्दार्थ:- मति-बुद्धि | मतिमान- बुद्धिमान | मगण - चालाकी | मगज- दिमाग |मखतूली-काले रेशम का धागा |
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"सुखमंगल सिंह की' 'हिंदी साहित्य काव्य संकलन' में प्रकाशित रचनायें !"
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"क्लीनिंग स्प्रे "
नार्वे यूनिवर्सिटी आफ वर्गेन ने की एक शोध /
उड़ गये विश्व के तमाम लोंगों के बैठे बैठे होश |
टायलेट वाश वेसिन या शीशे सफाई वाले रसायन में दोष/
जिससे महिलाओं के फेफड़े समय से पहले होते हैं कमजोर |
वैज्ञानिकों के खोज में ज्ञात हुआ स्प्रे के रसायन में है खोट /
जिसने श्वास नली को पहुचाते रहते वायु के माध्यम से चोट |
उधर नाइजीरिया के मैदुगुरी शहर में हो गया है भारी विस्फोट /
शरीर- फेफड़े को कर रहे छलनी अट्ठारह हलात बाईस में छोभ |
हानिकारक रसायन म्यूकस की झिल्ली को करती रहती प्रभावित /
रसायन के असरदार असर फेफड़े पर पड़ता रहता है दुस्प्रभावित |
फेफड़े की क्रियाशीलता पड़ती मंद और उम्र होती रहती है भारी /
वर्गेन यूनवर्सिटी का यह अनुसंधान निकलेगा दुनिया पर प्रभावी ||

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आंतरिक देश द्रोही कार्य क्रम करने वालों पर शक्त कार्यवाही की जानी चाहिए |
"सठियाया भारत "?
फसलें लहलहा रहीं
ललकार रहा अपना भारत |
विश्व विदित विख्यात सभ्यता
वीर किसान महारत |
सदियों की संस्कृति अपनी
पुकार रहा अपना भारत |
हरि हर हाहाकार मचा
चिघाड़ रहा अपना भारत |
माथे 'मंगल 'माटी मल
स्वीकार रहा अपना भारत |
लक झक झंडा वहां कौन
पुकार रहा है भारत ||
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