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कमलेश्वरी देवी..
काली देवी को समर्पित कमलेश्वरी मंदिर त्रिपुरा के सबसे बड़े कस्बे कमलपुर में स्थित है। यह कस्बा जिला मुख्यालय अंबासा से 35 किमी दूर है। वहीं अगरतला से यह मंदिर 122 किमी दूर है।
कमलेश्वरी देवी काली का ही एक और नाम है, जिससे मंदिर का नामकरण हुआ है। वहीं मंदिर के नाम पर कमलपुर शहर का नाम पड़ा। वैसे तो मंदिर में पूरे साल श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सितंबर और मई के महीने में यहां आना सबसे अच्छा रहता है, क्यूंकि इस महीने में बरसात नहीं होती है और यहां पहुंचना आसान हो जाता है।
अगर आपके काम बनते- बनते बिगड़ जाते है या कोई समस्या या कोई सवाल है तो आप निचे दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी जानकारी और सवाल भेज सकते है :-
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अलोपी देवी मंदिर,इलाहाबाद....
इलाहाबाद स्‍थित अलोपी बाग में देवी का एक ऐसा मंदिर है, जहां कोई मूर्ति स्‍थापित नहीं है। यहां केवल एक पालना बनाया गया है, जिसे श्रद्धालु देवी का रूप मानकर पूजा करते हैं। इस मंदिर का नाम अलोपी देवी है। बताया जाता है कि इस देवी के नाम पर ही इस मोहल्‍ले का नाम अलोपी बाग पड़ा।

मान्‍यता है कि यहां रक्षा-सूत्र बांधने से भक्‍तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। ऐसे में यहां सामान्‍य दिनों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। वहीं, इन दिनों नवरात्रि को लेकर माता के दर्शन के लिए यहां हजारों की संख्‍या में भक्‍तों का तांता लगता है।

यहां मंदिर में पालने के स्‍वरूप में देवी विराजमान हैं। ऐसे में भक्‍त पालने की ही पूजा कर माता का आर्शीवाद लेते हैं।

जानिए अपना कल जिससे बेहतर हो आपका हर पल। निचे दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप भेजिए अपनी समस्या और पाईये उसका निदान :-
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Sri Sri Shakti Parivar - Mantra Upchar Sandhya episode 27

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Sri Sri Shakti Parivar - Mantra Upchar Sandhya episode 26

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आंत्री माता.....
मां आंत्री के पैर प्रतिदिन चंबल नदी पखारती है। मंदिर के चारों ओर वर्ष भर पानी रहता है। नगर से 25 किमी दूर गांधीसागर के डूबे क्षेत्र में आंत्री माता गांव है। यहां चंद्रावत राजपूतों की कुल देवी मां आंत्री का बड़ा दरबार है। मां आंत्री की महिमा अपरंपार है। माता के भक्तों और ग्रामीणों के अनुसार मन्नत पूरी होने पर कई भक्त मां को जीभ अर्पित करते हैं।
आंत्री माता का मंदिर करीब 900 साल पुराना माना जाता है। मंदिर प्राचीन होने के साथ इसकी धार्मिक व पुरातन मान्यता है। संवत्‌ 1211 में होलकर राजघराने की राजमाता अहिल्यादेवी होलकर ने आंत्री माता मंदिर को 500 बीघा जमीन की जागीर सौंपी थी, तब से लेकर अब तक मां आंत्री माता भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देवी मां के दरबार में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों की मानें तो मां आंत्री भक्तों की मन्नतें पूरी करती है। कहा जाता है कि मन्नत पूरी होने पर भक्त मां को जीभ काटकर अर्पित करते हैं। मां की कृपा से जीभ पुनः पूर्व की स्थिति में आ जाती है। मां आंत्री का मंदिर गांधीसागर के डूब क्षेत्र में है। वर्षभर मंदिर के चारों ओर चंबल नदी का पानी रहता है। यह पानी भी भक्तों की आस्था व भक्ति को डिगा नहीं पाता है।
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वांकल माता जी ....
चौहटन। वांकल माता का प्रसिद्ध धाम वीरातरा जन-जन की आस्था का केन्द्र है। वंाकल धाम वीरातरा में वर्ष में तीन बार मेले सजते हैं तथा नवरात्री एवं तेरस और चौहदस के दिन मेले सा माहौल रहता है। वांकल धाम पर लाखो की तादाद में श्रद्धालू अपने सुखद भविष्य की मन्नते मांगने आते हैं तथा देवी के चरणों में धोक लगाकर पूजा अर्चना करते हैं। वीरातरा धाम को लेकर कई मान्यताएं है, जिनके कारण यह स्थन जग प्रसिद्ध एवं श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है।
वांकल माता वीरातरा का मंदिर दर्जनों वर्षो पहले वीरातरा की हिरण्य भाखरी की चोटी पर बना हुआ था। पहाड़ी के बीच विकट कठिन ऊंचाई पर चढ़ कर श्रद्धालू धोक लगाने जाते थे। बताया जाता है कि एक वृद्ध महिला पहाड़ी की ऊंचाई पर चढ़ते-चढ़ते थक गई। उसके पांवों ने जवाब दे दिया अैर वह हिम्मत हार गई। उस वृद्धा ने वांकल माता से पुकार की कि हे मां मै सच्चे मन से तुम्हारे दर्शन करने के लिए आई हंू, लेकिन मेरा यह वृद्ध शरीर ऊंची पहाड़ी के मंदिर तक नहीं जा पा रहा है, हे मां मुझे दर्शन दो।
वृद्धा की पुकार सुनकर वांकल माता उसकी भक्ति और आस्था पर प्रसन्न हुई और जोरदार कम्पन के साथ एक बड़ा पत्थर जमीन पर आ पहुंचा। यह पत्थर नीचे आते ही बीच में से फटा जहां से वांकल माता की प्रतिमा प्रकट हो गई। यह वृद्धा वांकल माता के दर्शन कर खुश हुई तथा हमेश के लिए एवं कठिन पहाड़ी पर नहीं चढ़ पाने वाले श्रद्धालूओं के लिए यहीं मंदिर बनाया गया।
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माँ शाकुम्भरी आरती..
हरी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो
ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो
शताक्षी दयालु की आरती कीजो
तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप बखानी माँ
शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो
तुम्ही हो शाकुम्भर, तुम ही हो सताक्षी माँ
शिवमूर्ति माया प्रकाशी माँ,
शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो
नित जो नर - नारी अम्बे आरती गावे माँ
इच्छा पूर्ण कीजो, शाकुम्भर दर्शन पावे माँ
शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो
जो नर आरती पढ़े पढावे माँ, जो नर आरती सुनावे माँ
बस बैकुंठ शाकुम्भर दर्शन पावे
शाकुम्भरी अंबा जी की आरती कीजो
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