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Sant Shri Asaramji Ashram
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Sarvapitri Amavasya,Pujya Bapuji Performing Shraddh (recorded earlier at Haridwar)
Must Watch Video: https://www.youtube.com/watch?v=neQF51nmXHY
For peace of all the souls who passed away in your home, you must, on the day of Sarvapitri Amavasya, recite Bhagvad Gita, offer water and meal to Surya Narayan and pray:” He Suryadev, your son is Yamaraj; please offer peace to all who passed away in our home and pass on the virtues of today’s Gita recitation to them.”
If all ancestors are pleased, then good souls will take birth in your family. You must do this on the day of Sarvapitri Amavasya (23rd Sept 2014).
भगवान शिव कहते हैं- “हे पार्वती ! अब मैं सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाता हूँ, जिसे सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है।
पाटलिपुत्र नामक एक दुर्गम नगर है जिसका गोपुर (द्वार) बहुत ही ऊँचा है। उस नगर में शंकुकर्ण नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसने वैश्य वृत्ति का आश्रय लेकर बहुत धन कमाया किन्तु न तो कभी पितरों का तर्पण किया और न देवताओं का पूजन ही। वह धनोपार्जन में तत्पर होकर राजाओं को ही भोज दिया करता था।
एक समय की बात है। उस ब्राह्मण ने अपना चौथा विवाह करने के लिए पुत्रों और बन्धुओं के साथ यात्रा की। मार्ग में आधी रात के समय जब वह सो रहा था, तब एक सर्प ने कहीं से आकर उसकी बाँह में काट लिया। उसके काटते ही ऐसी अवस्था हो गई कि मणि, मंत्र और औषधि आदि से भी उसके शरीर की रक्षा असाध्य जान पड़ी। तत्पश्चात कुछ ही क्षणों में उसके प्राण पखेरु उड़ गये और वह प्रेत बना। फिर बहुत समय के बाद वह प्रेत सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ। उसका वित्त धन की वासना में बँधा था। उसने पूर्व वृत्तान्त को स्मरण करके सोचाः
‘मैंने घर के बाहर करोड़ों की संख्या में अपना जो धन गाड़ रखा है उससे इन पुत्रों को वंचित करके स्वयं ही उसकी रक्षा करूँगा।’
साँप की योनि से पीड़ित होकर पिता ने एक दिन स्वप्न में अपने पुत्रों के समक्ष आकर अपना मनोभाव बताया। तब उसके पुत्रों ने सवेरे उठकर बड़े विस्मय के साथ एक-दूसरे से स्वप्न की बातें कही। उनमें से मंझला पुत्र कुदाल हाथ में लिए घर से निकला और जहाँ उसके पिता सर्पयोनि धारण करके रहते थे, उस स्थान पर गया। यद्यपि उसे धन के स्थान का ठीक-ठीक पता नहीं था तो भी उसने चिह्नों से उसका ठीक निश्चय कर लिया और लोभबुद्धि से वहाँ पहुँचकर बाँबी को खोदना आरम्भ किया। तब उस बाँबी से बड़ा भयानक साँप प्रकट हुआ और बोलाः
‘ओ मूढ़ ! तू कौन है? किसलिए आया है? यह बिल क्यों खोद रहा है? किसने तुझे भेजा है? ये सारी बातें मेरे सामने बता।’
पुत्रः “मैं आपका पुत्र हूँ। मेरा नाम शिव है। मैं रात्रि में देखे हुए स्वप्न से विस्मित होकर यहाँ का सुवर्ण लेने के कौतूहल से आया हूँ।”
पुत्र की यह वाणी सुनकर वह साँप हँसता हुआ उच्च स्वर से इस प्रकार स्पष्ट वचन बोलाः “यदि तू मेरा पुत्र है तो मुझे शीघ्र ही बन्धन से मुक्त कर। मैं अपने पूर्वजन्म के गाड़े हुए धन के ही लिए सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ हूँ।”
पुत्रः “पिता जी! आपकी मुक्ति कैसे होगी? इसका उपाय मुझे बताईये, क्योंकि मैं इस रात में सब लोगों को छोड़कर आपके पास आया हूँ।”
पिताः “बेटा ! गीता के अमृतमय सप्तम अध्याय को छोड़कर मुझे मुक्त करने में तीर्थ, दान, तप और यज्ञ भी सर्वथा समर्थ नहीं हैं। केवल गीता का सातवाँ अध्याय ही प्राणियों के जरा मृत्यु आदि दुःखों को दूर करने वाला है। पुत्र ! मेरे श्राद्ध के दिन गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करने वाले ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराओ। इससे निःसन्देह मेरी मुक्ति हो जायेगी। वत्स ! अपनी शक्ति के अनुसार पूर्ण श्रद्धा के साथ निर्व्यसी और वेदविद्या में प्रवीण अन्य ब्राह्मणों को भी भोजन कराना।”
सर्पयोनि में पड़े हुए पिता के ये वचन सुनकर सभी पुत्रों ने उसकी आज्ञानुसार तथा उससे भी अधिक किया। तब शंकुकर्ण ने अपने सर्पशरीर को त्यागकर दिव्य देह धारण किया और सारा धन पुत्रों के अधीन कर दिया। पिता ने करोड़ों की संख्या में जो धन उनमें बाँट दिया था, उससे वे पुत्र बहुत प्रसन्न हुए। उनकी बुद्धि धर्म में लगी हुई थी, इसलिए उन्होंने बावली, कुआँ, पोखरा, यज्ञ तथा देवमंदिर के लिए उस धन का उपयोग किया और अन्नशाला भी बनवायी। तत्पश्चात सातवें अध्याय का सदा जप करते हुए उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया।
हे पार्वती ! यह तुम्हें सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया, जिसके श्रवणमात्र से मानव सब पातकों से मुक्त हो जाता है।”
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प्रेस विज्ञप्ति
दिनांकः
दिव्य प्रेरणा-प्रकाश के बारे में झूठ न फैलायें
पिछले कुछ दिनों से दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता के बारे में जो दुष्प्रचार किया जा रहा है वह बहुत ही निंदनीय है ।
वास्तव में प्रतियोगिता में बच्चों को दी जानेवाली पुस्तकों की सामग्री विद्यार्थियों के शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक विकास को बढ़ावा
देनेवाली तथा उन्हें आध्यात्मिक व चारित्रिक रूप से उन्नत बनानेवाली है । इन पुस्तकों में जीवनशक्ति के विकास के लिए विभिन्न
यौगिक प्रयोग, परीक्षा में सफलता के राज, तन को तंदुरुस्त, मन को प्रसन्न रखने की विविध कुंजियाँ दी गयी हैं । जीवन में संयम व
संस्कार की महिमा, भारतीय संस्कृति व मातृ-पितृ भक्ति की महिमा, स्वास्थ्य की अनुपम कुंजियाँ, योगासन व उचित खान-पान
विद्यार्थियों के अंदर राष्ट्रभक्ति जगे इस हेतु इन किताबों में देशभक्तों की कथाएँ व प्रसंग भी दिये गये हैं । साथ ही हमारे शास्त्रों -
श्रीमद् भगवद्गीता, रामायण व महाभारत पर आधारित ज्ञान भी इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को दिया जाता है । इन किताबों
में न केवल हिन्दू धर्म बल्कि जैन, बुद्ध आदि धर्मों के सद्विचारों, संस्कारों का समावेश है । इसमें अपने देश के ऋषि-मुनियों एवं विदेश
के सुप्रसिद्ध आधुनिक चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों के संयम की प्रेरणा देनेवाले श्रेष्ठ विचार दिये गये हैं । इन तथ्यों की सच्चाई हर कोई
उल्लेखनीय है कि यह प्रतियोगिता वर्ष 2008 से चल रही है । जिसका लाभ अभी तक देश के लाखों-करोड़ों विद्यार्थी ले चुके हैं ।
पिछले 8 वर्षों से पूरे भारत में हजारों स्कूलों में यह प्रतियोगिता हुई है । इस दौरान कई मंत्रियों, अधिकारियों, स्कूल के प्रचार्यों,
अध्यापकों व अभिभावकों ने प्रतियोगिता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए संस्था को आभार-पत्र भी दिये हैं । इन पुस्तकों को पढ़ने से
लाखों-लाखों विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं । हजारों विद्यार्थियों के पत्र व अनुभव भी इस संदर्भ में प्राप्त हुए हैं ।
इस प्रतियोगिता में विद्यार्थी स्वेच्छा से भाग लेते हैं । इसके लिए स्कूलों में किसी प्रकार की न ही अनिवार्यता रहती है और न
ही कोई दबाव होता है । जिस प्रतियोगिता से देशभर के लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों ने संयम-सदाचार की शिक्षा पायी है, उसके बारे में
इस प्रकार की अनर्गल बातें प्रचारित करना बहुत ही शर्मनाक है ।
मीडिया प्रभारी

https://play.google.com/store/books/details/Sant_Shri_Asharamji_Bapu_Ashram_Divine_Inspiration?id=CTfAAAAAQBAJ
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हिंदुत्व के लिए कार्यरत संघटनाएं है मीडिया के निशाने पर ?

'सनातन संस्था' जैसे राष्ट्रभक्त संघठन पर लांछन लगाना निंदनीय है! 
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आखिर पूज्य बापूजी पर अन्याय कब बंद होगा ? उन्हें कब रिहा किया जायेगा ?

नेपाल अपील करता है कि पूज्य आसाराम बापूजी को जमानत दी जाये – डाँ विष्णु हरि
 
पढ़े इस माह का “लोक कल्याण सेतु” http://www.lokkalyansetu.org
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सावधान ! आपका टूथपेस्ट आपको कैंसर का रोगी बना सकता है | 

आजकल बाजार में बिकनेवाले अधिकांश टूथपेस्टों में फ्लोराइड नामक रसायन प्रयोग किया जाता हैं । यह रसायन सीसे तथा आर्सेनिक जैसा विशेला होता हैं । इसकी थोड़ी–सी मात्रा भी यदि पेट में पहुँच जाये तो कैंसर जैसे गंभीर रोग पैदा हो सकते हैं । अत: सावधान । नीम की दातुन करें, यह सिर्फ दांतों की की नहीं अपितु पाचनतंत्र की भी सुरक्षा करती हैं । 
(ऋषि प्रसाद. अगस्त २००४.अंक.१४०...पेज ....२०,२१) 
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With massive support at ground level, social media roars in support of Asaram Bapu Ji today! #WhyMediaHideSupport4Bapuji
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असाध्य रोगों को ठीक करने वाला आयुर्वेदिक मन्त्र !
आयुर्वेद के आचार्य भगवान धन्वंतरि ने भगवन्नाम के उच्चारण को सर्वरोगनाशक अमृत बताया हैं :

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात ।
नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यह्म ।।

हे अच्युत, हे अनंत, हे गोविन्द इन नामों के उच्चारणरुपी औषधि से सब रोग नष्ट हो जाते हैं । मैं यह सत्य कहता हूँ...सत्य कहता हूँ ।’ 

(ऋषि प्रसाद. अप्रैल 2004 .... अंक.१३६...पेज 14)
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