Profile cover photo
Profile photo
Sant Gyaneshwar Ji (Bhagwan Sadanand Ji)
187 followers -
Bhagwan Sadanand JI
Bhagwan Sadanand JI

187 followers
About
Posts

Post has attachment
Add a comment...

धर्म एक सच्चा 'ज्ञान' है, 'सत्य का विधान' है
=========================
धर्म कोई मन्दिर-मस्जिद-गिरजाघर तो है नहीं । धर्म तो कोई पुराण-बाइबिल- कुर्आन-गुरुग्रन्थ साहब तो है ही नहीं । धर्म कोई 'अल्लाहु अकबर' या 'हर हर महादेव' तो है नहीं । धर्म एक सच्चा 'ज्ञान' है । धर्म एक 'सत्य का विधान' है । एक 'सम्पूर्ण विधान' हैं । कोर्इ धर्म वाला भेदवाची नहीं हो सकता । धर्म वाला जो दूषित भावनाओं से हीन हो जायेगा तो हिन्दू कहलायेगा । मुसल्लम ईमान आयेगा तो मुसलमान कहलाने लगेगा । सच्चा जीवन जीना सीख लेगा कि हमारा जीवन सच्चा कैसे हो तो 'सिक्ख' कहलायेगा । जीवन जीने की सम्पूर्ण शैली को जान ले कि हमको चोरी, बेइमानी, झूठ-फरेब की जरूरत नहीं है । ऐसा जीवन जान ले तो जैनी हो गये । धर्म तो सत्य का विधान है, सत्य है । इसमें सम्प्रदाय कहाँ से आ गया ? जहाँ सत्य और सत्य का विधान हो, वहाँ धर्म-निरपेक्षता कैसे ? और जहाँ धर्म निरपेक्ष हो जायेगा वहाँ के लोग कैसे होंगे ? वहाँ के लोग किस तरह से संचालित होंगे ? जब सच्चाई ही समाप्त हो जायेगी, ईमान ही परिभाषित नहीं रहेगी तब जीवन कैसे जीयेंगे ? क्यों भ्रष्ट नहीं होंगे ? क्यूँ झूठ नहीं बोलेंगे ? चोर-बेइमान नहीं होंगे ? क्यूँ नहीं छली-लुटेरा होंगे ? कानून ? अभी एक नकली दरोगा आ जाये और पता चल जाये तो एस0 पी0 साहब तुरन्त गिरफ्तार करवायेंगे तुरन्त ! लेकिन नकली महात्मा को नहीं ! नकली इन्सपेक्टर समाज को ठग रहे हैं तो गिरफ्तार करेंगे लेकिन नकली महात्मा समाज को बरबाद कर रहे हैं लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं । महात्मा तो धन और धरम दोनों ठग रहा है । इस पर सरकार की कोई विचार सिध्दान्त नहीं है । कैसे जनता चलेगी ? किसको धर्म वाला कहें ? सब अपने अपने राग को अलापने में लगे हैं ।
--------- सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस
Add a comment...

विद्यातत्वम पद्वति (संसार की समस्त समस्याओं का एक मात्र समाधान)
आज विश्व की समस्त सरकारें जनसंख्या, बेरोज़गारी, भुखमरी, अपराध, भ्रष्टाचार आदि समस्याओं से परेशान हैं। अरे क्यों परेशान हो जनसंख्या से ! सात अरब तो क्या सात खरब भी अगर जनसंख्या हो जाए तो भी परेशानी की कोई बात नहीं है । एक भी व्यक्ति बेकार नहीं रहेगा। एक भी बेरोज़गार नहीं रहेगा। दुनिया में एक भी अपराधी नहीं रहेगा। एक भी भूखा नहीं मरेगा। कोई भी भूखा नहीं रहेगा। मुकदमें खोजने पर भी नहीं मिलेंगे। किसी भी प्रकार की कोई दुश्मनी नहीं रहेगी। यहाँ तक कि दुख और बीमारी भी नहीं रहेगी। ये सारी बातें कोई कोरी कल्पना या कोई स्वप्न नहीं हैं। ये कोई ज्योतिषियों या भविष्यवक्ताओं की बातें नहीं हैं, बल्कि परमब्रह्म परमेश्वर का खुला निर्देश है, खुला ऐलान है, विश्व की समस्त सरकारों के लिए खुली चुनौती है। परन्तु शर्त यह है कि जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी वर्तमान गलत और भ्रष्ट शिक्षा प्रणाली के स्थान पर विद्यातत्वम पद्वति को लागू किया जाए।

आप कितना भी कठोर कानून बना लीजिए, जब तक इंसान की मानसिकता नहीं ठीक होगी तब तक कुछ नहीं हो सकता और मानसिकता का निर्माण होता है शिक्षा से। दुनिया की सभी समस्याओं का मूल कारण है गलत एवं भ्रष्ट शिक्षा पद्वति का होना। इसी के कारण आज दुनिया की यह दुर्दशा हो गई है कि विनाश के कगार पर पहुँच गई। अब इससे बचने का सिर्फ एकमात्र उपाय है कि विद्यातत्वम पद्वति को पूरी ईमानदारी के साथ प्रभावी ढंग से शीघ्रता के साथ लागू किया जाए। यह कथन स्वयं परमेश्वर द्वारा बताया गया सत्य वचन है। जिसके परिणाम स्वरूप अमन-चैन का राज्य होगा, सभी निर्भयता पूर्वक सत्य, धर्म, न्याय और नीति को स्वीकार करेंगे। असत्य, अन्याय या अत्याचार सुनने तक को नहीं मिलेगा देखना तो दूर कि बात है। सत्पुरुषों का राज्य होगा और सत्पुरुष ही शासन करेंगे। इस संसार से असत्य, अधर्म, अन्याय और अनीति को समाप्त करने की ताकत सिर्फ विद्यातत्वम पद्वति में है।

विद्यातत्वम पद्वति इस संसार को संचालित करने का ब्रह्माण्डिय विधान है जिसके अन्तर्गत परमाणु से लेकर परमेश्वर तक अर्थात संसार, शरीर, जीव, ईश्वर और परमेश्वर की वास्तविक जानकारी तथा शरीर एवं ब्रह्मांड के संचालन का विधान आता है। इस सिस्टम को चार श्रेणियों में बांटा गया है :

1- शिक्षा (Education) – शरीर और संसार से संबंधित समस्त भौतिक पदार्थों की जानकारी शिक्षा के अन्तर्गत आती है।

2- स्वाध्याय (Self Realization)- शरीर को चलाने वाले जीव या रूह से सम्बंधित जानकारी स्वाध्याय के अन्तर्गत आती है।

3- अध्यात्म (Spiritualization) – जीव को शरीर में स्थित रखकर शरीर को चलाने की क्षमता प्रदान करने वाले आत्मा(सोल, नूर, ईश्वर, ब्रह्म) की जानकारी अध्यात्म के अंतर्गत आती है।

4- तत्वज्ञान (True, Supreme and perfect Knowledge )- समस्त सृष्टि को पैदा करने वाले खुदा-गॉड-परमेश्वर की वास्तविक जानकारी तत्वज्ञान के अंतर्गत आती है। इस प्रकार जब इंसान इस पूरे सिस्टम को समझकर, उसके अनुसार जीवन जिएगा तो फिर कोई भी समस्या नहीं पैदा होगी। बिना सिस्टम को समझे सिस्टम में मनमाने तरीके से रहेंगे तो समस्या तो पैदा होगी ही।
-----------------------------संत ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded