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Ravishankar Shrivastava
Worked at मप्र विद्युत मंडल
Lives in Bhopal, India
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
बिग बॉस एक सेमिनार में न्यूयार्क जा रहे थे। विदेशी सेमिनार अवध के नवाबों के मुर्गे की तरह होते हैं जिन्हें हजम कर पाना सबके बस की बात नहीं। उन्हें आधुनिक नवाब यानी बिग बॉस ही हजम कर सकते हैं। साफ-सुथरे, धुले-पुछे बिग बॉस के न्यूयार्क अभियान में आतरिक स्थिति साफ-सुथरी, धुली-पुछी नहीं थी। विषकुंभपयोमुख जैसी स्थिति।

कई खम, कई पेच, कई लटके।

सेमिनार तकनीकी था, बीस गैर-तकनीकी, 'सिर्फ बीए.'। उन्होंने तकनीकी बनाने का चोर रास्ता अपनाया था। तकनीकी व्यक्ति के कंधे पर उचककर बैठ गए, बन गए तकनीकी। कंधे पर बैठे बेटे का सिर जब बाप के सिर से ऊंचा हो जाता है तो वह तालियां बजाकर चिल्ला उठता है 'मैं तो पापा से भी ऊंचा हो गया !' बॉस सेमिनार में एक आदर्श श्रोता की हैसियत से शामिल होंगे और अनौपचारिक वार्ताओं में 'दिस वे' दैट थिंग' 'आई मीन' 'मे बी' 'मे नॉट वी' 'यू अपियर टु बी करेक्ट' 'इट इज नॉट सो इन इंडिया' आदि से काम चलाएंगे। इसी तकनीकी विचार-विमर्श की पूंजी और ऊर्जा के बल पर वे लौटकर बताएंगे कि भारत की डूबती नाक उन्होंने कैसे बचाई। कुछ समय बाद वे दूसरे विभाग में चले जाएंगे। उद्योग विभाग उनके सेमिनार अनुभव का लाभ भले ही न उठाए, शिक्षा विभाग तो उठाएगा. 'शिक्षा भी तो एक उद्योग है।' आर्थिक कोण भी था। सरकार उनके विदेशगमन पर एक लाख खर्च कर रही थी। वह इतनी ही धनराशि की वस्तुएं सीमा शल्क बचाकर अपने साथ लाएंगे। आगे पढ़ें >>
http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_27.html 
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
विक्रमार्क ने हठ नहीं छोड़ा और एक बार फिर बैताल का शव पेड़ से उतार कंधे पर लादा और सदा की भांति मौन अपनी राह पर चल पड़ा । बैताल ने कुछ देर बाद कहा, ''मुझे तुम पर तरस आता है । तुम्हारा रास्ता काटने के लिए आज तुम्हें मैं तुम्हारी राजधानी दिल्ली का एक किस्सा सुनाता हूं । दिल्ली का एक आम इलाका है सराय रोहिल्ला, वहां बशेशरनाथ अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता है । लोअर मिडिल क्लास से तालुक रखता है । उसके दो बड़े भाई दिल्ली में ही अलग-अलग जगहों पर रहते हैं, एक इकलौती बहन है जो शादी के बाद अपने इकलौते पति के साथ हापुड में रहती है । इन चारों की मां मेरे किस्से की नायिका है । आगे पढ़ें >>
http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_71.html
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
झोपड़पट्टी की उस बेतरतीब बस्ती के पास रेंगता एक नाला है। सुअर के तीन बच्चे प्राय: उस नाले में किलोल करते पाए जाते हैं। एक किंचित बड़ा बच्चा है, शेष पिद्दीनुमा । वयस्क तथा बूढ़े सुअर भी उसी नाले में लोटते हैं अथवा किनारे की घास पर पड़े हुए अपने सुअर होने की नियति पर परिचर्चा आयोजित करते हैं। कीचड़ में लथपथ तीनों बच्चे, जब सुअर सा मुंह उठाए नाले में एक-दूसरे को ठेलते, गुरगुराते इस छोर से उस छोर तक छप-छप करते भागते हैं तब किनारे बैठे बूढ़े सुअर वात्सल्य रस में नहा जाते हैं (सुअर भी नहाते हैं) । ये बूढ़े सुअर प्राय: दार्शनिक मुद्रा में बैठकर यह सोचा करते हैं कि इन नादान बच्चों को कोई यह बताए कि सुअर के बच्चों तथा उल्लू के पट्टो, किस बात पर इतना किलोल कर रहे हो? नाले में ही कट जानी है तुम्हारी यह नश्वर जिंदगी । इन झोपडपट्टी के आदमियों जैसी हो गई है तुम्हारी जिंदगी--बूढ़े सुअर बस्ती की तरफ थूथन घुमाकर सोचते हैं। 'नादान तथा बेवकूफ नई पीढी . . : वे सोचते हैं और थूथन पर एक भद्दी मुस्कान लिए नाले के किनारे-किनारे टहलने निकल जाते हैं। >> यह मजेदार व्यंग्य आगे पढ़ें >>
http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_13.html
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
कामिक्स का मनोरंजक इतिहास जानने के लिए पढ़ें -
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Ravishankar Shrivastava

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व्यंग्य जुगलबंदी - नया साल नए सवाल
नया साल, हर साल आता है. कुछ के लिए साल में कई कई बार आता है. और बहुतों के लिए कभी नहीं आता. पर, जब भी नया साल आता है, हर बार नए सवालों के साथ आता है. इस दफा भी नया साल कई कई नए नए सवालों के साथ आया है. एक सवाल तो इस बार ऐसा आया है जिसे साल भर, और आने वाले क...
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
रचना समय - अगस्त-सितंबर 2016 : मिशेल फूको विशेषांक. संपादक - हरि भटनागर. मूल्य 150 रुपए. पीडीएफ ईबुक के रूप में नीचे दिए विंडो में पढ़ें. बड़े आकार में फुल स्क्रीन में पढ़ने के लिए संबंधित आइकन को क्लिक करें. पीडीएफ फ़ाइल भी डाउनलोड कर ऑफलाइन पढ़ सकते हैं.
http://www.rachanakar.org/2017/01/2016_18.html
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हिंदी साहित्य की ऑनलाइन पत्रिका hindi literature online magazine
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
चाँद को क्या मालूम...कि उसे कुछ ही घंटों बाद चांदनी से जुदा होना पड़ेगा या फिर नादान काली बदली भला कहाँ जानती हैं कि बहती हवा के साथ कितनी बूँदें बरसाकर अपना आँचल खाली कर देने के बाद भी वो मुस्कुराते हुए अपनी तन्हाई किसी पर ज़ाहिर नहीं होने देगी ..मासूम रातों में टिमटिमाता दिया अपने मद्धम प्रकाश के साथ कब तक डटा खड़ा रहेगा ये ना उसने जाना और ना ही कभी जानेगा .... और शायद उसी तरह मैं भी..अपने हृदय की वेदना की वेग को अपनी आँखों के कोरो से बहने से नहीं रोक पाता ..अंधियारी हो या उजियारी..तारों भरी या सूनी ..काटनी तो है ही .. कैसे बीतेगी...बीतेगी या फ़िर किसी पुरानी सुनी हुई कहानी की तरह केवल स्मृतियों में ही रह जाएगी, उन परी कथाओं की अद्भुत कहानियों की तरह,जिन के पात्र हमारे साथ हँसे ,खेलें और फिर नानी की कहानी खत्म होते ही वापस उनकी संदूकची में बंद हो गए। कितना खोजा उन्हें ,हर जगह, जहाँ तिल रखने की भी जगह ना थी, ऐसी मारामारी वाली भीड़ में ,जहाँ हृदय के स्पंदन को भी सुना जा सके ऐसे हर वीराने में, लरजती गरजती नदियों की कल कल से पहाड़ों की ऊंचाइयों तक केवल कल्पना ही जीवंत हो हंसती बोलती रही जिन पात्रों के साथ सारा बचपन बिता दिया वे ना जाने कहाँ गुम हो गए थे जिन्हें मैं चाह कर भी वापस ना बुला सका। अफसोस होता रहा कि क्यों नहीं उस संदूकची में मैं भी चला गया, उन्हीं राजा, वज़ीर ,विक्रम,वेताल,और ढेर सारे बौनों के देश में ,जहाँ पर हमेशा एक सुनहरे बालों वाली राजकुमारी किसी राजकुमार की प्रतीक्षा में खिड़की से बाहर देखती हुई उदास नीली आँखों से आँसूं गिरा रही होती जो ज़मीन पर गिर कर सफ़ेद चमचमाते मोती बन कर बिखर जाते थे या फ़िर चमकते सितारें रातरानी और मालती के गुच्छे बनकर लता के सहारे सारे जंगल में अपनी भीनी ख़ुश्बू का इंद्रजाल फैलाते हुए सभी को मदहोश सा कर देते। आगे पढ़ें >>

http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_37.html
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Ravishankar Shrivastava

साहित्य / कविता, कहानी, सुविचार आदि  - 
 
http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_3.html जयशंकर प्रसाद, निराला, मैथिली शरण गुप्त, दुष्यंत कुमार आदि प्रसिद्ध कवियों की प्रेम कविताएँ -
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  • मप्र विद्युत मंडल
    अतिरिक्त कार्यपालन अभियंता, 1984 - 2003
    विद्युत मंडल की सरकारी नौकरी - स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति - 2003शिक्षा – अभियांत्रिकी में स्नातक, अतिरिक्त कार्यपालन अभियंता, मप्रविमं, (स्वैच्छिक सेवानिवृत्त) कार्यपथ – 1. विगत 20 वर्षों से हिंदी में तकनीकी/साहित्य लेखन व संपादन तथा कंप्यूटरों, आईटी के हिंदी व छत्तीसगढ़ी भाषा में स्थानीयकरण में सक्रिय भूमिका. 2. शासकीय विद्युत मंडल में 20+ वर्ष से अधिक का प्रसाशकीय/प्रबंधन/तकनीकी अनुभव (भाषाई कंप्यूटिंग के क्षेत्र में कार्य करने हेतु 2003 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त). 3. नई दिल्ली से प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक फ़ॉर यू समूह की पत्रिका – लिनक्स फ़ॉर यू में 8+ वर्ष के लिए तकनीकी लेखन. 4. हिन्दी दैनिक चेतना, हिन्दुस्तान टाइम्स, कादम्बिनी, अहा! जिंदगी, भास्कर, नई दुनिया, प्रभासाक्षी.कॉम, अभिव्यक्ति.कॉम आदि प्रमुख व प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में तकनीकी स्तंभ व साहित्य लेखन. 5. प्रतिष्ठित ग्लोबल वाइसेज इंडिया में हिंदी अनुवाद कार्य. लिंक - http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/ , इंटरनेट का मानकीकरण करने वाली साइट W3C का हिंदी अनुवाद. लिंक - http://www.webstyles.in , ट्विटर को आरंभिक हिंदी रूप देने में प्रमुख भूमिका. 6. सीएसडीएस दिल्ली, हिंदी व छत्तीसगढ़ी कंप्यूटिंग के स्थानीयकरण हेतु 3 फ़ैलोशिप प्राप्त. 7. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अतिथि अध्यापन कार्य. 8. असंख्य सम्मेलनों, ऑनलाइन सम्मेलनों, कार्यशालाओं में हिंदी कंप्यूटिंग, ब्लॉग, हिंदी इंटरनेट संबंधी प्रस्तुतिकरण. 9. हिंदी लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रारंभिक रिलीज में महत्वपूर्ण भूमिका. 1000+ कंप्यूटिंग अनुप्रयोगों का हिंदी में स्थानीयकरण. अधिकतर कार्य GNU GPL के तहत, निःशुल्क, मानसेवी आधार पर. 10. छत्तीसगढ़ी लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम तथा छत्तीसगढ़ी विंडोज एप्लीकेशन सूट निर्माण में प्रमुख भूमिका. 11. 10+ वर्षों से नियमित रूप से हिंदी में तकनीकी/हास्य-व्यंग्य ब्लॉग लेखन, विश्व की पहली, सर्वाधिक समृद्ध और लोकप्रिय ऑनलाइन पत्रिका रचनाकार.ऑर्ग का संपादन तथा हिंदी की सर्वाधिक समृद्ध ऑनलाइन वर्गपहेली का सृजन. पुस्तकें – 1. रवि रतलामी के व्यंग्य 2. रवि रतलामी के ग़ज़ल और व्यंज़ल 3. लिनक्स पॉकेट गाइड हिंदी में 4. आसपास की कहानियाँ (हिंदी में सह-अनुवाद) पुरस्कार 1. रवि रतलामी का हिंदी ब्लॉग (वर्तमान नाम छींटे और बौछारें) – माइक्रोसॉफ़्ट भाषा इंडिया सर्वश्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग 2006 2. 2007-9 माइक्रोसॉफ़्ट मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफ़ेशनल 3. अभिव्यक्ति.ऑर्ग टेक्नोलॉजी लेखक 2007 4. छत्तीसगढ़ी गौरव सम्मान 2008 – सृजन सम्मान रायपुर छत्तीसगढ़ 5. FOSS IN 2008 – Nrcfoss (नेशनल रिसोर्स कौंसिल फ़ॉर फ्री ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर) प्रायोजित राष्ट्रीय पुरस्कार (KDE हिंदी अनुवाद हेतु) 6. आई टी मंथन 2009 (छत्तीसगढ़ी लिनक्स हेतु)
  • सॉफ़्टवेयर स्थानीयकरण, लेखन, संपादन, present
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