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राग देश Raag Desh
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बेबाक और बेलाग टिप्पणी, अलग शैली, अलग भाषा
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खादी कैलेंडर से क्यों हटाये गये गाँधी? दरअसल, इतिहास की 'धुलाई' कर मोदी जब तक नेहरू और गाँधी को स्मृतियों से 'साफ़' नहीं कर देंगे, तब तक ख़ुद को देश का पर्यायवाची बना देने का उनका सपना कैसे पूरा होगा और तब तक संघ के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा कैसे दूर होगी? इस हफ़्ते का 'राग देश': http://raagdesh.com/modi-replacing-gandhi-from-khadi-calendar/

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'जन वेदना सम्मेलन' में राहुल गाँधी ने काँग्रेसियों से कहा कि डरो मत! काँग्रेसियों को अब और क्या खोना है? वह तो ख़ाली हाथ हैं! राहुल जी, 'डरो मत' के बजाय कुछ करने की बात कीजिए! डरने के लिए काँग्रेस के पास कुछ भी नहीं बचा है. करने के लिए बहुत कुछ है. BBC Hindi के लिए लिखी गयी मेरी टिप्पणी आप यहाँ भी पढ़ सकते हैं: http://raagdesh.com/congress-in-oblivion/

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2017 के विधानसभा चुनाव के तीन सवाल हैं, नोटबंदी, अखिलेश और केजरीवाल. और इनसे जुड़ा एक चौथा सवाल भी है. वह यह कि 2019 में नरेन्द्र मोदी का रथ सरपट निकल जायेगा या विपक्ष की रंग-बिरंगी टुकड़ियाँ मिल कर उसे रोकने का कोई व्यूह रच पायेंगी? और अगर ऐसा हुआ तो विपक्ष का सेनापति कौन होगा, एक होगा या कई? इस हफ़्ते का 'राग देश': http://raagdesh.com/assembly-elections-2017/

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उत्तर प्रदेश चुनाव के ठीक पहले समाजवादी पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर है. पिता मुलायम ने बेटे को पार्टी से बाहर निकाल दिया है. लेकिन क्यों अखिलेश ने चतुराई से अपनी जंग जीत ली है? इस हफ़्ते का 'राग देश': http://raagdesh.com/samajwadi-party-facing-split/

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अखिलेश 'बबुआ' हैं या मुखिया? समाजवादी पार्टी में क्यों चल रहा है झगड़ा? और समय किसके साथ है, अखिलेश के या मुलायम के? फ़र्स्टपोस्ट हिन्दी के लिए लिखी गयी मेरी टिप्पणी आप यहाँ भी पढ़ सकते हैं. http://raagdesh.com/samajwadi-party-infighting/

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क्या हैं वे छह नुस्ख़े, जो राजनीति में नोटबंदी ला सकते हैं, राजनीतिक चन्दों में काले धन की खपत पूरी तरह रोक सकते हैं और चुनाव में बेतहाशा खर्च पर लगाम लगा सकते हैं? इस हफ़्ते का 'राग देश': http://raagdesh.com/notebandi-in-politics/

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नोटबंदी क्या एक 'अनाड़ी' फ़ैसला था? यह किसलिए की गयी थी? काला धन निकालने के लिए या 'लेस-कैश इकॉनॉमी' के लिए? काला धन करेन्सी में ज़्यादा होता नहीं है. तो 'लेस-कैश इकॉनॉमी' क्या पुरानी करेन्सी में नहीं लायी जा सकती थी? और क्या 'लेस-कैश इकॉनॉमी' के लिए पहले इन्फ़्रास्ट्रक्चर बनाने का काम किया गया? इस हफ्ते का 'राग देश': http://raagdesh.com/40-days-afetr-notebandi/

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ममता बनर्जी, मायावती, नवीन पटनायक, नीतीश कुमार, लालूप्रसाद यादव, चन्द्रबाबू नायडू, उमर अब्दुल्ला, अरविन्द केजरीवाल, नरेन्द्र मोदी, सोनिया-राहुल, करुणानिधि-स्टालिन, मुलायम-अखिलेश, प्रकाश-सुखबीर बादल को एक मिनट के लिए परिदृश्य से हटा दीजिए और फिर देखिए कि कैसी दिखती है इन पार्टियों की तसवीर? क्यों इतनी व्यक्ति-केन्द्रित है हमारी राजनीति? इस हफ़्ते का 'राग देश' :
http://raagdesh.com/cult-politics-in-india/

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एक महीने बाद जायज़ा नोटबंदी का. बीबीसी हिन्दी के लिए लिखा गया मेरा विश्लेषण आप यहाँ भी पढ़ सकते हैं. http://raagdesh.com/one-month-after-notebandi/

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बहसें हैं, मुद्दे हैं और 'सुविधा' के पैमाने हैं, जो 'राष्ट्रवाद' की सुविधा से बदलते रहते हैं. मुद्दों की शक्ल कब बदल जाती है, मुद्दों पर राय कब उत्तर से दक्षिण हो जाती है और मुद्दे कब टिघल कर बह जाते हैं, पता ही नहीं लगता और न कोई जानना चाहता है कि उनका क्या हुआ? इस हफ़्ते का 'राग देश' : http://raagdesh.com/notebandi-national-anthem-and-beyond/
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