अगर माना जाए तो हिन्दी,
मां रूपी भारत का आभूषण है। अगर आपकी मां का आभूषण आपके ही सामने कोई उतार ले तो आपको कैसा लगेगा? शायद बर्दाश्त से बाहर,ठीक उसी तरह से, भारतीय संस्कृति और हिन्दी की अवहेलना भी है। आपको इसका पूरा ख्याल रखना चाहिए। आगे मैं आपको बताना चाहूंगा कि हिन्दी की अवहेलना विदेशों में नही सिर्फ अपने ही देश में हो रही है। और उसके जिम्मेदार सिर्फ हम हैं, विदेशी नहीं, वो लोग तो तरसते हैं,हमारी भाषा सीखने के लिये। शायद यह आपको न पता हो। आपको बताना चाहूंगा कि आप अपने कम्प्यूटर पर सभी मुख्य सॉफ़्टवेयर, इंटरनेट आदि और सभी मुख्य कम्पनियों की मोबाइलों (स्मार्ट्फ़ोन) के
सारे कार्यों को आप आराम से हिन्दी में कर सकते हैं। सब कुछ आप जल्दी ही हिन्दी में प्राप्त
कर सकेंगे। यह सब उद्द्योग जगत या आम आदमी की मांग पर नहीं,हमारी हिन्दी के सम्मान में यह कम्पनियां (Google,Samsung, Microsoft, Nokia) कर रही
हैं। मेरे देश के गुलामों! सुधर जाओ और अपनी मां का वर्चस्व अपने ही हांथों उतार कर फेंकना बंद करो। हिन्दी की किसी भी लिपि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो कृपया मुझसे ९८९१३३९६४० पर सम्पर्क करें, मैं आपकी ऐसी हर समस्याओं के समाधान में बेहद खुशी होगी।
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