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KALKI AVATAR(Kalki Maha Avatar)arrived on Indian Soil after passing the 4,32,000 Years of KALIYUGA
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आदिश्री अरुण का महा उपदेश, भाग - 34; MAHA UPADESH OF AADISHRI PART – 34
आदिश्री अरुण का महा उपदेश, भाग - 34  ( आदिश्री अरुण ) आदिश्री अरुण   की 20 बातों को जो भी मनुष्य अपना लेता है वह सब दुखों से छुटकारा पाकर इसी शरीर में बिना मरे , विदाउट डेथ , जीवित अवस्था में ही मुक्ति को प्राप्त कर लेता है । वह 20 बातें निम्नलिखित हैं :- (...
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Gyan yog Part - 2 /ज्ञान योग, भाग - 2
ज्ञान योग, भाग - 2  ( आदिश्री अरुण ) पद्म
पुराण, उत्तर खंड, शीर्षक " भगवन विष्णु की महिमा, उनकी भक्ति के लिए भेद तथा
अष्टाक्षर मन्त्र के स्वरुप एवं अर्थ का निरूपण " पेज नम्बर - 923 में   श्री महादेव जी ने पार्वती जी से भगवान नारायण
(क्षीरदकोसाई विष्णु ) के ...
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19 techniques for changing the life / क्या हैं 19 तरीके जीवन में परिवर्तन लेन के लिए ?
क्या हैं 19  तरीके जीवन में परिवर्तन लेन के लिए ? ( आदिश्री  अरुण ) आदिश्री अरुण ने स्वधर्म   की स्थापना  करने  के उद्द्येश्य से   सम्पूर्ण मानव जाति के लिए   कुछ नियम बता ए   जिस पर चल कर मनुष्य   अपने जीवन में सुख - शांति प्राप्त कर सकता है । अगर कोई व्यक...
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Gyaan Yog - ज्ञान योग
ज्ञान योग ( आदिश्री अरुण ) सृष्टि के प्रारम्भ में परब्रह्म ( पूर्णब्रह्म ) ने अपने आपको तीन भागों में   विघटित किया । परब्रह्म ( पूर्णब्रह्म ) ने सबसे पहले प्रकृति को प्रकट किया जिसको (1) जड़ प्रकृति तथा (2) चेतन प्रकृति कहते हैं । जड़ प्रकृति को महा विष्णु  ...
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Imbibe-Yog / श्रवण-योग
श्रवण - योग ( आदिश्री अरुण ) श्रवण - योग सुनने की वह कला है जिसको अपनाने के बाद मनुष्यों को साधना करने की जरुरत नहीं होती । श्रवण - योग ऐसा श्रेष्टतम   और सहज साधन है जिसको अपनाने लोगों को मुक्ति मिल जाती है ।   इस साधन से लोगों को प्रेत योनि से मुक्ति मिल ...
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Wish granting Form of God - ईश्वर का वरदान देने वाला रूप
ईश्वर का   वरदा न   देने वाला रूप   ( आदिश्री अरुण ) जब कोई मनुष्य   भगवान नारायण का तप करता है तो भगवान नारायण प्रसन्न हो कर जिस रूप में वरदान देने के लिए अपना मनुष्य रूप रच कर मनुष्य के सामने आते हैं तो उस रूप को वरदायक रूप कहते हैं । ईश्वर के उस वरदायक र...
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आदिश्री अरुण का महा उपदेश, भाग - 34; MAHA UPADESH OF AADISHRI PART – 34
आदिश्री अरुण का महा उपदेश, भाग - 34 ( आदिश्री अरुण ) योग का अर्थ होता है भगवान से संपर्क स्थापित करना   । भगवद्भाव की भावना करते - करते प्राणी का ह्रदय जब भगवन्मय हो जाता है तब उसके कर्म - बीजों ( जन्म - मृत्यु के बीजों ) का खजाना ही जल जाता है और वह प्राणी...
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