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Himanshu Kumar Pandey
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"बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब / तमाशाए अहले करम देखते हैं।"
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मैंने सोचा मेरी यात्रा का हुआ अन्त..(गीतांजलि का भावानुवाद)
Geetanjali: Tagore I thought that my voyage had come to its end at the last limit of my power, - that the path before me was closed, that provisions were exhausted and the time come to take shelter in a silent obscurity. But I find that thy will knows no en...

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मेरे प्यारे मज़दूर
मैं जानता हूँ तुम्हारे भीतर कोई ’क्रान्ति’ नहीं पनपती पर बीज बोना तुम्हारा स्वभाव है। हाथ में कोई 'मशाल' नहीं है तुम्हारे पर तुम्हारे श्रम-ज्वाल से भासित है हर दिशा। मेरे प्यारे ’मज़दूर’! यह तुम हो जो धरती की गहरी जड़ों को नापते हो अपनी कुदाल से रखते हो अदम्य...

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सौन्दर्य लहरी - 21
स्वदेहोद्भूताभिर्घृणिभिरणिमाद्याभिरभितो, निषेवे नित्ये त्वामहमिति सदा भावयति यः। किमाश्चर्यं तस्य त्रिनयनसमृद्धिं तृणयतो, महासंवर्ताग्निविरचयति नीराजनविधिं ॥95॥ स्वशरीरोद्भूत किरणसमूह अणिमादिक सुसेवित जो स्वरूप त्वदीय नित करता निषेवित अहं भावित कौन सा आश्चर...
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