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Himanshu Kumar Pandey
Works at Basic Education
Attended Sakaldiha Inter College
Lives in Sakaldiha, Chandauli
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Himanshu Kumar Pandey

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पवन कुमार पाल's profile photo
 
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Himanshu Kumar Pandey

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Himanshu Kumar Pandey

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माँ की गोद ही चैत्र की नवरात्रि है ..
एक ज्योति सौं जरैं प्रकासैं कोटि दिया लख बाती। जिनके हिया नेह बिनु सूखे तिनकी सुलगैं छाती। बुद्धि को सुअना मरमु न जानै कथै प्रीति की मैना। दिपै दूधिया ज्योति प्रकासैं घर देहरी अँगन। नवेली बारि धरैं दियना॥ -(आत्म प्रकाश शुक्ल)   नवसंवत्सर ने आनन्द भरित अँग...
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नव संवत्सर के नवरात्र की एक अनूठी कसक है। भगवती का उन्मीलन रमणीयता की पालकी में होता है। क्षण-क्षण रमणीय, क्षण-क्षण नूतन, यही तो नव संवत्सर की भूमि है - क्षणे-क्षणे यन्नवतामुपैति तदैव रूपं रमणीयतायाः।
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Himanshu Kumar Pandey

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सौन्दर्य लहरी - 16
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान ...
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सौन्दर्य लहरी (स्तोत्र ६६ से ७०) - पाणि से / वात्सल्यवश / जिसको दुलारा हिमशिखर ने / अधरपानाकुलित जिसको / किया स्पर्शित चन्द्रधर ने / मुख मुकुर के वृन्त सम / पकड़ा जिसे सविलास शिव ने / कौन वर्णन कर सकेगा / उस अमोलक / चिबुक का फि...
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Chāru Samvād's profile photo
 
अनुवाद में स्रोतभाषा का प्रवाह नहीं उतर पाया है।आप प्रभुदयाल मिश्र का पद्यानुवाद एक बार अवश्य दृष्टिगत करें।
जगज्जननी की कृपा से आपका यह लघु-प्रयत्न 'बुध बिस्राम' के शिखर तक पहुँच सके, ऐसी मंगलाशा।
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Himanshu Kumar Pandey

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जाग जाये यह मेरा देश.. (गीतांजलि का भावानुवाद)
यह देश अपूर्व, अद्भुत क्षमताओं का आगार है। यहाँ जो है, कहीं नहीं है, किन्तु यहाँ जो होता दिख रहा है वह भी कहीं नहीं है। इस देश की अनिर्वच प्रज्ञा और अद्वितीय पौरुष को विस्मरण ने आकंठ आवृत कर लिया है। अपनी क्षमता को न पहचान सकने से हमारा विषद वैभव नीर कायरता...
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Himanshu Kumar Pandey

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सौन्दर्य लहरी - 15
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किय...
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प्रकृत्या‌‌ऽऽरक्तायास्तव सुदति दंतच्छदरुचेः/ प्रवक्ष्ये सादृश्यं जनयतु फलं विद्रुमलता...स्तोत्र ६१ से ६५ का हिन्दी भावानुवाद।
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Astrologer Sidharth's profile photo
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Himanshu Kumar Pandey

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करुणावतार बुद्ध - 10
करुणावतार बुद्ध- 1 , 2 , 3 , 4, 5 , 6 , 7 , 8 , 9 के बाद प्रस्तुत है दसवीं कड़ी...... (अगम्य-गम्य गिरि प्रान्तरों, कंदर खोहों तथा घोर विपिन में घूमते फिरते सिद्धार्थ के साथ लगी विद्वत मण्डली ने साथ छोड़ दिया। पंचभद्रीय विप्र उनके साथ लगे रहे। शयन-जागरण, उत्...
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मैं चिट्ठाकार हूँ पर.. गिरिजेश राव जैसा तो नहीं
मैं चिट्ठाकार हूँ, पर गिरिजेश राव जैसा तो नहीं जो बने तो निपट आलसी पर रचे तो जीवन-स्फूर्ति का अनोखा  व्याकरण- बाउ । संस्कारशील गिरिजेश राव कहूँ?- शृंखलासापेक्ष, पर्याप्त अर्थसबल, नितान्त आकस्मिकता में भी पर्याप्त नियंत्रित। जो प्रकृति का शृंगार है- चाहे वह ...
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Himanshu Kumar Pandey

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Chāru Samvād's profile photo
 
भोजपुरी रामायण से रामायण की कुशीलव परम्परा में भोजपुरी को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
सुखद साझाकरण।

बावला जी के गीतों में नवगीतों सा आस्वाद तथा जनगीतों जैसी प्रतिबद्धता का मणि-कांचन संयोग मिलता है।
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Himanshu Kumar Pandey

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क्या लिनेक्स पर आधारित मोबाइल फोन ज्यादा लोकप्रिय होंगे?
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Best known as the open source Linux-based desktop operating system, Ubuntu is now coming to mobiles. It introduced a completely new user experience centered not around apps, but around "scopes." Wait, what?
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Himanshu Kumar Pandey

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सुबह की प्रार्थना : निस्सीम ईजीकेल
जितना मेरा अध्ययन है उसमें भारतीय अंग्रेजी लेखकों में निस्सीम ईजीकेल का लेखन मुझे अत्यधिक प्रिय है। ईजीकेल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय अंग्रेजी कविता के पिता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आधुनिक भारतीय अंग्रेजी काव्य में विशिष्ट स्थान प्राप्त ईजीकेल सहज कविता, साम...
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Himanshu Kumar Pandey

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शैलबाला शतक - ७
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भ...
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Education
  • Sakaldiha Inter College
    Science, 1995 - 1997
  • Banaras Hindu University
    Language, 1997 - 2002
  • Puducherry University
    Language, 2002 - 2004
Basic Information
Gender
Male
Other names
Himaanshu
Story
Tagline
"बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब / तमाशाए अहले करम देखते हैं।"
Introduction
मैं क्या हूँ ? क्या सुनहली उषा में जो खो गया, वह तुहिन बिन्दु या बीत गयी जो तपती दुपहरी उसी का विचलित पल; या फिर जो धुँधुरा गयी है शाम अभी-अभी उसी की उदास छाया ? मैं क्या हूँ ?  जो सम्मुख हो रही है इस अन्तर-आँगन में वही ध्वनि, या किसी सुदूर बहने वाली किसी निर्झर-नदी का अस्पष्ट नाद ? मैं क्या हूँ ? बार-बार कानों में जाने अनजाने गूँज उठने वाली किसी दूरागत संगीत की मूर्छित लरी या फिर जिस आकाश को निरख रहा हूँ लगातार, उस आकाश का एक तारा ? मैं क्या हूँ ? - जानना इतना आसान भी तो नहीं !
Work
Occupation
Teacher
Skills
creative writing, translation, blogging
Employment
  • Basic Education
    Teacher, 2010 - present
  • Sakaldiha P.G.College
    Lecturer, 2007 - 2010
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Sakaldiha, Chandauli
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