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Himanshu Kumar Pandey
Works at Basic Education
Attended Sakaldiha Inter College
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Himanshu Kumar Pandey

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सौन्दर्य लहरी - 16
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान ...
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सौन्दर्य लहरी (स्तोत्र ६६ से ७०) - पाणि से / वात्सल्यवश / जिसको दुलारा हिमशिखर ने / अधरपानाकुलित जिसको / किया स्पर्शित चन्द्रधर ने / मुख मुकुर के वृन्त सम / पकड़ा जिसे सविलास शिव ने / कौन वर्णन कर सकेगा / उस अमोलक / चिबुक का फि...
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Himanshu Kumar Pandey

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क्या लिनेक्स पर आधारित मोबाइल फोन ज्यादा लोकप्रिय होंगे?
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Best known as the open source Linux-based desktop operating system, Ubuntu is now coming to mobiles. It introduced a completely new user experience centered not around apps, but around "scopes." Wait, what?
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Himanshu Kumar Pandey

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सौन्दर्य लहरी - 15
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किय...
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प्रकृत्या‌‌ऽऽरक्तायास्तव सुदति दंतच्छदरुचेः/ प्रवक्ष्ये सादृश्यं जनयतु फलं विद्रुमलता...स्तोत्र ६१ से ६५ का हिन्दी भावानुवाद।
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करुणावतार बुद्ध - 10
करुणावतार बुद्ध- 1 , 2 , 3 , 4, 5 , 6 , 7 , 8 , 9 के बाद प्रस्तुत है दसवीं कड़ी...... (अगम्य-गम्य गिरि प्रान्तरों, कंदर खोहों तथा घोर विपिन में घूमते फिरते सिद्धार्थ के साथ लगी विद्वत मण्डली ने साथ छोड़ दिया। पंचभद्रीय विप्र उनके साथ लगे रहे। शयन-जागरण, उत्...
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Himanshu Kumar Pandey

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शैलबाला शतक - ६
शैलबाला शतक भगवती पराम्बा के चरणों में वाक् पुष्पोपहार है। यह स्वतः के प्रयास का प्रतिफलन हो ऐसा कहना अपराध ही होगा। उन्होंने अपना स्तवन सुनना चाहा और यह कार्य स्वतः सम्पादित करा लिया। यह उक्ति सार्थक लगी- जेहि पर कृपा करहिं जन जानी/कवि उर अजिर नचावहिं ब...
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Himanshu Kumar Pandey

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पिया संग खेलब होरी...
सखि ऊ दिन अब कब अइहैं, पिया संग खेलब होरी । बिसरत नाहिं सखी मन बसिया केसर घोरि कमोरी । हेरि हिये मारी पिचकारी मली कपोलन रोरी । पीत मुख अरुन भयो री - पिया संग खेलब होरी । अलक लाल भइ पलक लाल भइ तन-मन लाल भयो री । चुनरी सेज सबै अरु नारी लाल ही लाल छयौ री । आन ...
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जाग जाये यह मेरा देश.. (गीतांजलि का भावानुवाद)
यह देश अपूर्व, अद्भुत क्षमताओं का आगार है। यहाँ जो है, कहीं नहीं है, किन्तु यहाँ जो होता दिख रहा है वह भी कहीं नहीं है। इस देश की अनिर्वच प्रज्ञा और अद्वितीय पौरुष को विस्मरण ने आकंठ आवृत कर लिया है। अपनी क्षमता को न पहचान सकने से हमारा विषद वैभव नीर कायरता...
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सुबह की प्रार्थना : निस्सीम ईजीकेल
जितना मेरा अध्ययन है उसमें भारतीय अंग्रेजी लेखकों में निस्सीम ईजीकेल का लेखन मुझे अत्यधिक प्रिय है। ईजीकेल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय अंग्रेजी कविता के पिता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आधुनिक भारतीय अंग्रेजी काव्य में विशिष्ट स्थान प्राप्त ईजीकेल सहज कविता, साम...
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Himanshu Kumar Pandey

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शैलबाला शतक - ७
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भ...
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Himanshu Kumar Pandey

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टू बॉडीज (Two Bodies) : ऑक्टॉवियो पाज़
प्रायः ऐसा होता है कि फेसबुक पर देखी पढ़ी गयी प्रविष्टियों पर कुछ कहने का मन हो तो उसके टिप्पणी स्थल की अपेक्षा ब्लॉग पर लिख देने की आदत बना ली है मैंने। यद्यपि ऐसा भी कम ही हो पाता है क्योंकि समय और सामर्थ्य की कमी से यहाँ भी आमद घट गयी है मेरी। फेसबुक पर अ...
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Himanshu Kumar Pandey

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बाबूजी ’प्रेम नारायण ’पंकिल’ की विशिष्ट कृति ’बावरिया बरसाने वाली’ स्व-प्रकाशन की परिपाटी में श्रेष्ठतम प्लेटफॉर्म पोथी.कॉम (Pothi.com) पर प्रकाशित होकर सहज उपलब्ध है। काव्य-रसिकों को यह रुचेगी-ऐसा विश्वास है। अभी यह प्रिंट फॉर्म में है। इसे पढ़ने के लिए किताब को पोथी.कॉम से ऑर्डर करना पड़ेगा। पोथी.कॉम से किताबें छपवाना और यहाँ से खरीदना दोनों श्रेयस्कर समझ में आता है। प्रकाशक की ओर दौड़ते-भागते-रिरियाते लेखक का रूप रुचता नहीं। पोथी सहज ही सब छाप देती है। यही इस तीव्र समय की सुगढ़ प्रकाशन व्यवस्था होनी चाहिए। रह गयी गुणवत्ता- उसकी स्क्रीनिंग कौन करेगा? बारह आने वाली समझ के लोग ज्यादा हैं-सोलह आने की अपेक्षा ठीक नहीं। पोथी के इस पहले अनुभव के बाद यह मेरे फेवरिट में शामिल हो गया है। ले देकर इस प्रकाशन के विशिष्ट फल देखने हों तो बाबूजी की यह काव्य रचना ज़रूर पढ़ें- इससे पोथी.कॉम का भी भला होगा और रचनाकार का भी। गुणवत्ता की कोई मारामारी नहीं- बस पढ़ें और मुग्ध हों।
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Himanshu Kumar Pandey

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फागुन मतवारो यह ऐसो परपंच रच्यौ..
आचारज जी का आह्वान सुन लपके ही थे कि तिमिरान्ध हो गये (यूँ फगुनान्ध होने को बुलाये गये थे)। बिजली फिर ब्रॉडबैण्ड- दोनों ही रूठ गये। उस वक्त जो लिखा था, पोस्ट नहीं कर पाया। यह कवित्त प्रस्तुत है, कारण खुद को जोड़ने की क़वायद है महोत्सव से- (१) ठौर-ठौर ब्लॉगन ...
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कवित्त शैली में ब्लॉग फाग। चुहल भरी कविताई। फागुन की सहज मस्ती है इस कवित्त में।
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Education
  • Sakaldiha Inter College
    Science, 1995 - 1997
  • Banaras Hindu University
    Language, 1997 - 2002
  • Puducherry University
    Language, 2002 - 2004
Basic Information
Gender
Male
Other names
Himaanshu
Story
Tagline
"बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब / तमाशाए अहले करम देखते हैं।"
Introduction
मैं क्या हूँ ? क्या सुनहली उषा में जो खो गया, वह तुहिन बिन्दु या बीत गयी जो तपती दुपहरी उसी का विचलित पल; या फिर जो धुँधुरा गयी है शाम अभी-अभी उसी की उदास छाया ? मैं क्या हूँ ?  जो सम्मुख हो रही है इस अन्तर-आँगन में वही ध्वनि, या किसी सुदूर बहने वाली किसी निर्झर-नदी का अस्पष्ट नाद ? मैं क्या हूँ ? बार-बार कानों में जाने अनजाने गूँज उठने वाली किसी दूरागत संगीत की मूर्छित लरी या फिर जिस आकाश को निरख रहा हूँ लगातार, उस आकाश का एक तारा ? मैं क्या हूँ ? - जानना इतना आसान भी तो नहीं !
Work
Occupation
Teacher
Skills
creative writing, translation, blogging
Employment
  • Basic Education
    Teacher, 2010 - present
  • Sakaldiha P.G.College
    Lecturer, 2007 - 2010
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