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Himanshu Kumar Pandey
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"बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब / तमाशाए अहले करम देखते हैं।"
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दिन पर दिन बीतते गए हा! मेरे प्राण बहुत बरसे हैं..(गीतांजलि का भावानुवाद)
Geetanjali : Tagore The rain has held back for days and days,  my God, in my arid heart.  The horizon is fiercely naked-not the thin- nest cover of a soft cloud,  not the vaguest hint of a distant cool shower.  Send thy angry storm, dark with death,  if it ...

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कविता : आशा
सुहृद! मत देखो- मेरी शिथिल मंद गति, खारा पानी आँखों का मेरे, देखो- अन्तर प्रवहित उद्दाम सिन्धु की धार और हिय-गह्वर का मधु प्यार। मीत! मत उलझो- यह जो उर का पत्र पीत इसमें ही विलसित नव वसंत अभिलषित और मत सहमो- देख हठी जड़ प्रस्तर इससे ही उज्ज्वल जीवन जल निःसृत...

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कविता: बादल तुम आना
विलस रहा भर व्योम सोम मन तड़प रहा यह देख चांदनी विरह अश्रु छुप जाँय, छुपाना बादल तुम आना ।। 1 ।। झुलस रहा तृण-पात और कुम्हलाया-सा मृदु गात धरा दग्ध, संतप्त हृदय की तृषा बुझाना बादल तुम आना।। 2 ।।

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शैलबाला शतक - भोजपुरी स्तुति काव्य : तेरह
शैलबाला शतक के छन्द पराम्बा के चरणों में अर्पित स्तवक हैं। यह छन्द विगलित अन्तर के ऐकान्तिक उच्छ्वास हैं। इनकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। भोजपुरी भाषा के इच्छुरस का सोंधा पाक हैं यह छन्द। इस रचना में भोजपुरी की लोच में, नमनीयता में सहज ही...

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शैलबाला शतक - भोजपुरी स्तुति काव्य : बारह
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक...

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शैलबाला शतक - भोजपुरी स्तुति काव्य : ग्यारह
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक...

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कविता : इंतज़ार उसका था
[ एक. ] सलीका आ भी जाता सिसक उठता झाड़ कर धूल पन्नों की पढ़ता कुछ शब्द सुभाषित ढूंढ़ता झंकारता उर-तार राग सुवास गाता रहस-वन मन विचरता। मैं स्वयं पर रीझ तो जाता पर इंतज़ार उसका था। [ दो. ] साँवली-सी डायरी में एक तारीख पर टँका हुआ उजला पन्ना और उसके अक्षरों को हर...

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ग़ज़ल - चाँदनी या मुख़्तसर सी धूप लाना, भूलना मत
नज़र में भरकर नज़र कुछ सिमट जाना, भूलना मत। देखना होकर मगन फिर चौंक जाना, भूलना मत। मौज़ खोकर ज़िन्दगी ग़र आ किनारों में फँसे नाव अपनी खींचकर मझधार लाना, भूलना मत। न पाया ढूढ़कर भी दर्द दिल ने बेखबर मेरे उसे अपने सुरीले प्यार का किस्सा सुनाना, भूलना मत। रोशनी गु...

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शैलबाला शतक - भोजपुरी स्तुति काव्य : तीन
प्रस्तुत हैं चार और कवित्त!  करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह चार प्रस्तुत कवित्त! शतक में शुरुआत के आठ कवित्त काली के रौद्र रूप का साक्षात दृश्य उपस्थित करते हैं।  पिछली दो प्रविष्टियाँ सम्मुख हो चुकी हैं आपके। शैलबाला-शतक ...

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शैलबाला शतक - भोजपुरी स्तुति काव्य : तीन
प्रस्तुत हैं चार और कवित्त!  करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह चार प्रस्तुत कवित्त! शतक में शुरुआत के आठ कवित्त काली के रौद्र रूप का साक्षात दृश्य उपस्थित करते हैं।  पिछली दो प्रविष्टियाँ सम्मुख हो चुकी हैं आपके। शैलबाला-शतक ...
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