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जानिए बेहोशी के कारण तथा बेहोश होने पर रोगी को फर्स्ट ऐड कैसे देना चाहिए !
#Unconsciousness Causes, Symptoms, Types, #FirstAid.

सड़क पर चलते फिरते समय, घर में कोई काम करने या ऑफिस की सीढ़ियां, चढ़ते-उतरते कई व्यक्ति बेहोशी (Unconsciousness) के शिकार हो जाते हैं। हिस्टीरिया रोग में लड़कियां और मिरगी रोग में पुरुष बार-बार बेहोशी के शिकार होते हैं। अधिक दिनों तक किसी संक्रामक रोग से पीड़ित रहने पर स्त्री-पुरुष बेहोशी के शिकार हो सकते हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण भी बेहोशी हो सकती है। खून की कमी व मधुमेह रोग में कभी-कभी इतनी अधिक शारीरिक कमजोरी हो जाती है कि रोगी सिर चकराने से लड़खड़ाकर गिर पड़ता है और बेहोश हो जाता है। कई बार अचानक कोई सदमा लगने से भी कई लोग बेहोश हो जाते है | दूषित वातावरण में फैली गैसों के कारण बेहोशी हो सकती है। ऐसे में फर्स्ट एड का उद्देश्य अचानक बेहोश वाले रोगी को ऐसी अस्थाई सहायता पहुंचाना है ताकि डॉक्टर की देखरेख में आने तक या अस्पताल पहुंचने तक उस रोगी का जीवन सुरक्षित रहे। रोगी को ठीक होने में सहायता मिले, उसकी हालत खराब न हो और उसे आराम मिले। इसलिए सभी को इस विषय पर जानकारी होना बेहद जरुरी है क्योंकि इससे आप किसी की जान बचा सकते है | कोई भी व्यक्ति आमतौर पर तभी बेहोश होता है, जबकि उसके नर्वस सिस्टम एवं दिमाग की प्रक्रिया व्यस्त हो जाते हैं। अक्सर लोग सिर में चोट लगने से बेहोशी हो जाते है। साधारण चोट से बेहोशी नहीं पैदा होती, बेहोशी बड़ी चोट के कारण ही होती है।

बेहोश होने पर फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा )

बेहोशी हर व्यक्ति के साथ अलग कारणों से हो सकती है। ऐसे में, जैसे ही बेहोशी छाए, रोगी को तुरंत उठाएं। किसी अलग स्थान पर लिटा दें। रोगी के आसपास शोर, भीड़ करना ठीक नहीं। उस पर झुकें नहीं। हवा को रोकना नहीं चाहिए |
बेहोश रोगी के कमीज़ के बटन खोल दें। जितना संभव हो, कपड़े ढीले करें ताकि उसे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। उसे लेटे हुए कोई दिक्कत न आए, इस बात का भी अवश्य ध्यान रखें।
रोगी को खूब खुली हवा मिलनी चाहिए। सावधानी के तौर पर यह देख लेना चाहिए कि रोगी की नाक में कुछ रूकावट तो नहीं हो रही है जैसे की रक्त तो नहीं जम गया है ।
रोगी जिस जगह पर हो वहां कोई गन्दी गैस अथवा धुआं आदि नहीं होना चाहिए। जैसा की अकसर सडक दुर्घटनाओ में होता है जहाँ भीडभाड के साथ ही साथ धुवां भी अधिक होता है |
रोगी के मुंह में यदि नकली दांत हों तो उन्हें निकाल देने चाहिए।
अगर साँस लेने की क्रिया रुकती और फेल होती दिखाई दे तो कृत्रिम सांस चालू कर देनी चाहिए।
अगर रोगी की साँस तेज़ आवाज के साथ न होता हो तो उसे पीठ के बल लिटाना चाहिए तथा सिर एवं कन्धों के नीचे एक तकिया लगाकर इन दोनों भागों को ऊंचा कर देना चाहिए और सिर एक ओर घुमा देना चाहिए। Read for more details - http://bit.ly/2MLwieq

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जानिए बेहोशी के कारण तथा बेहोश होने पर रोगी को फर्स्ट ऐड कैसे देना चाहिए !
#Unconsciousness Causes, Symptoms, Types, #FirstAid.

सड़क पर चलते फिरते समय, घर में कोई काम करने या ऑफिस की सीढ़ियां, चढ़ते-उतरते कई व्यक्ति बेहोशी (Unconsciousness) के शिकार हो जाते हैं। हिस्टीरिया रोग में लड़कियां और मिरगी रोग में पुरुष बार-बार बेहोशी के शिकार होते हैं। अधिक दिनों तक किसी संक्रामक रोग से पीड़ित रहने पर स्त्री-पुरुष बेहोशी के शिकार हो सकते हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण भी बेहोशी हो सकती है। खून की कमी व मधुमेह रोग में कभी-कभी इतनी अधिक शारीरिक कमजोरी हो जाती है कि रोगी सिर चकराने से लड़खड़ाकर गिर पड़ता है और बेहोश हो जाता है। कई बार अचानक कोई सदमा लगने से भी कई लोग बेहोश हो जाते है | दूषित वातावरण में फैली गैसों के कारण बेहोशी हो सकती है। ऐसे में फर्स्ट एड का उद्देश्य अचानक बेहोश वाले रोगी को ऐसी अस्थाई सहायता पहुंचाना है ताकि डॉक्टर की देखरेख में आने तक या अस्पताल पहुंचने तक उस रोगी का जीवन सुरक्षित रहे। रोगी को ठीक होने में सहायता मिले, उसकी हालत खराब न हो और उसे आराम मिले। इसलिए सभी को इस विषय पर जानकारी होना बेहद जरुरी है क्योंकि इससे आप किसी की जान बचा सकते है | कोई भी व्यक्ति आमतौर पर तभी बेहोश होता है, जबकि उसके नर्वस सिस्टम एवं दिमाग की प्रक्रिया व्यस्त हो जाते हैं। अक्सर लोग सिर में चोट लगने से बेहोशी हो जाते है। साधारण चोट से बेहोशी नहीं पैदा होती, बेहोशी बड़ी चोट के कारण ही होती है।

बेहोश होने पर फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा )

बेहोशी हर व्यक्ति के साथ अलग कारणों से हो सकती है। ऐसे में, जैसे ही बेहोशी छाए, रोगी को तुरंत उठाएं। किसी अलग स्थान पर लिटा दें। रोगी के आसपास शोर, भीड़ करना ठीक नहीं। उस पर झुकें नहीं। हवा को रोकना नहीं चाहिए |
बेहोश रोगी के कमीज़ के बटन खोल दें। जितना संभव हो, कपड़े ढीले करें ताकि उसे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। उसे लेटे हुए कोई दिक्कत न आए, इस बात का भी अवश्य ध्यान रखें।
रोगी को खूब खुली हवा मिलनी चाहिए। सावधानी के तौर पर यह देख लेना चाहिए कि रोगी की नाक में कुछ रूकावट तो नहीं हो रही है जैसे की रक्त तो नहीं जम गया है ।
रोगी जिस जगह पर हो वहां कोई गन्दी गैस अथवा धुआं आदि नहीं होना चाहिए। जैसा की अकसर सडक दुर्घटनाओ में होता है जहाँ भीडभाड के साथ ही साथ धुवां भी अधिक होता है |
रोगी के मुंह में यदि नकली दांत हों तो उन्हें निकाल देने चाहिए।
अगर साँस लेने की क्रिया रुकती और फेल होती दिखाई दे तो कृत्रिम सांस चालू कर देनी चाहिए।
अगर रोगी की साँस तेज़ आवाज के साथ न होता हो तो उसे पीठ के बल लिटाना चाहिए तथा सिर एवं कन्धों के नीचे एक तकिया लगाकर इन दोनों भागों को ऊंचा कर देना चाहिए और सिर एक ओर घुमा देना चाहिए। Read for more details - http://bit.ly/2MLwieq

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सड़क पर चलते फिरते समय, घर में कोई काम करने या ऑफिस की सीढ़ियां, चढ़ते-उतरते कई व्यक्ति बेहोशी (Unconsciousness) के शिकार हो जाते हैं। हिस्टीरिया रोग में लड़कियां और मिरगी रोग में पुरुष बार-बार बेहोशी के शिकार होते हैं। अधिक दिनों तक किसी संक्रामक रोग से पीड़ित रहने पर स्त्री-पुरुष बेहोशी के शिकार हो सकते हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण भी बेहोशी हो सकती है। खून की कमी व मधुमेह रोग में कभी-कभी इतनी अधिक शारीरिक कमजोरी हो जाती है कि रोगी सिर चकराने से लड़खड़ाकर गिर पड़ता है और बेहोश हो जाता है। कई बार अचानक कोई सदमा लगने से भी कई लोग बेहोश हो जाते है | दूषित वातावरण में फैली गैसों के कारण बेहोशी हो सकती है। ऐसे में फर्स्ट एड का उद्देश्य अचानक बेहोश वाले रोगी को ऐसी अस्थाई सहायता पहुंचाना है ताकि डॉक्टर की देखरेख में आने तक या अस्पताल पहुंचने तक उस रोगी का जीवन सुरक्षित रहे। रोगी को ठीक होने में सहायता मिले, उसकी हालत खराब न हो और उसे आराम मिले। इसलिए सभी को इस विषय पर जानकारी होना बेहद जरुरी है क्योंकि इससे आप किसी की जान बचा सकते है | कोई भी व्यक्ति आमतौर पर तभी बेहोश होता है, जबकि उसके नर्वस सिस्टम एवं दिमाग की प्रक्रिया व्यस्त हो जाते हैं। अक्सर लोग सिर में चोट लगने से बेहोशी हो जाते है। साधारण चोट से बेहोशी नहीं पैदा होती, बेहोशी बड़ी चोट के कारण ही होती है।

बेहोश होने पर फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा )

बेहोशी हर व्यक्ति के साथ अलग कारणों से हो सकती है। ऐसे में, जैसे ही बेहोशी छाए, रोगी को तुरंत उठाएं। किसी अलग स्थान पर लिटा दें। रोगी के आसपास शोर, भीड़ करना ठीक नहीं। उस पर झुकें नहीं। हवा को रोकना नहीं चाहिए |
बेहोश रोगी के कमीज़ के बटन खोल दें। जितना संभव हो, कपड़े ढीले करें ताकि उसे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। उसे लेटे हुए कोई दिक्कत न आए, इस बात का भी अवश्य ध्यान रखें।
रोगी को खूब खुली हवा मिलनी चाहिए। सावधानी के तौर पर यह देख लेना चाहिए कि रोगी की नाक में कुछ रूकावट तो नहीं हो रही है जैसे की रक्त तो नहीं जम गया है ।
रोगी जिस जगह पर हो वहां कोई गन्दी गैस अथवा धुआं आदि नहीं होना चाहिए। जैसा की अकसर सडक दुर्घटनाओ में होता है जहाँ भीडभाड के साथ ही साथ धुवां भी अधिक होता है |
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अगर साँस लेने की क्रिया रुकती और फेल होती दिखाई दे तो कृत्रिम सांस चालू कर देनी चाहिए।
अगर रोगी की साँस तेज़ आवाज के साथ न होता हो तो उसे पीठ के बल लिटाना चाहिए तथा सिर एवं कन्धों के नीचे एक तकिया लगाकर इन दोनों भागों को ऊंचा कर देना चाहिए और सिर एक ओर घुमा देना चाहिए। Read for more details - http://bit.ly/2MLwieq

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बेहोश होने पर फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा )

बेहोशी हर व्यक्ति के साथ अलग कारणों से हो सकती है। ऐसे में, जैसे ही बेहोशी छाए, रोगी को तुरंत उठाएं। किसी अलग स्थान पर लिटा दें। रोगी के आसपास शोर, भीड़ करना ठीक नहीं। उस पर झुकें नहीं। हवा को रोकना नहीं चाहिए |
बेहोश रोगी के कमीज़ के बटन खोल दें। जितना संभव हो, कपड़े ढीले करें ताकि उसे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। उसे लेटे हुए कोई दिक्कत न आए, इस बात का भी अवश्य ध्यान रखें।
रोगी को खूब खुली हवा मिलनी चाहिए। सावधानी के तौर पर यह देख लेना चाहिए कि रोगी की नाक में कुछ रूकावट तो नहीं हो रही है जैसे की रक्त तो नहीं जम गया है ।
रोगी जिस जगह पर हो वहां कोई गन्दी गैस अथवा धुआं आदि नहीं होना चाहिए। जैसा की अकसर सडक दुर्घटनाओ में होता है जहाँ भीडभाड के साथ ही साथ धुवां भी अधिक होता है |
रोगी के मुंह में यदि नकली दांत हों तो उन्हें निकाल देने चाहिए।
अगर साँस लेने की क्रिया रुकती और फेल होती दिखाई दे तो कृत्रिम सांस चालू कर देनी चाहिए।
अगर रोगी की साँस तेज़ आवाज के साथ न होता हो तो उसे पीठ के बल लिटाना चाहिए तथा सिर एवं कन्धों के नीचे एक तकिया लगाकर इन दोनों भागों को ऊंचा कर देना चाहिए और सिर एक ओर घुमा देना चाहिए। Read for more details - http://bit.ly/2MLwieq

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सड़क पर चलते फिरते समय, घर में कोई काम करने या ऑफिस की सीढ़ियां, चढ़ते-उतरते कई व्यक्ति बेहोशी (Unconsciousness) के शिकार हो जाते हैं। हिस्टीरिया रोग में लड़कियां और मिरगी रोग में पुरुष बार-बार बेहोशी के शिकार होते हैं। अधिक दिनों तक किसी संक्रामक रोग से पीड़ित रहने पर स्त्री-पुरुष बेहोशी के शिकार हो सकते हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण भी बेहोशी हो सकती है। खून की कमी व मधुमेह रोग में कभी-कभी इतनी अधिक शारीरिक कमजोरी हो जाती है कि रोगी सिर चकराने से लड़खड़ाकर गिर पड़ता है और बेहोश हो जाता है। कई बार अचानक कोई सदमा लगने से भी कई लोग बेहोश हो जाते है | दूषित वातावरण में फैली गैसों के कारण बेहोशी हो सकती है। ऐसे में फर्स्ट एड का उद्देश्य अचानक बेहोश वाले रोगी को ऐसी अस्थाई सहायता पहुंचाना है ताकि डॉक्टर की देखरेख में आने तक या अस्पताल पहुंचने तक उस रोगी का जीवन सुरक्षित रहे। रोगी को ठीक होने में सहायता मिले, उसकी हालत खराब न हो और उसे आराम मिले। इसलिए सभी को इस विषय पर जानकारी होना बेहद जरुरी है क्योंकि इससे आप किसी की जान बचा सकते है | कोई भी व्यक्ति आमतौर पर तभी बेहोश होता है, जबकि उसके नर्वस सिस्टम एवं दिमाग की प्रक्रिया व्यस्त हो जाते हैं। अक्सर लोग सिर में चोट लगने से बेहोशी हो जाते है। साधारण चोट से बेहोशी नहीं पैदा होती, बेहोशी बड़ी चोट के कारण ही होती है।

बेहोश होने पर फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा )

बेहोशी हर व्यक्ति के साथ अलग कारणों से हो सकती है। ऐसे में, जैसे ही बेहोशी छाए, रोगी को तुरंत उठाएं। किसी अलग स्थान पर लिटा दें। रोगी के आसपास शोर, भीड़ करना ठीक नहीं। उस पर झुकें नहीं। हवा को रोकना नहीं चाहिए |
बेहोश रोगी के कमीज़ के बटन खोल दें। जितना संभव हो, कपड़े ढीले करें ताकि उसे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो। उसे लेटे हुए कोई दिक्कत न आए, इस बात का भी अवश्य ध्यान रखें।
रोगी को खूब खुली हवा मिलनी चाहिए। सावधानी के तौर पर यह देख लेना चाहिए कि रोगी की नाक में कुछ रूकावट तो नहीं हो रही है जैसे की रक्त तो नहीं जम गया है ।
रोगी जिस जगह पर हो वहां कोई गन्दी गैस अथवा धुआं आदि नहीं होना चाहिए। जैसा की अकसर सडक दुर्घटनाओ में होता है जहाँ भीडभाड के साथ ही साथ धुवां भी अधिक होता है |
रोगी के मुंह में यदि नकली दांत हों तो उन्हें निकाल देने चाहिए।
अगर साँस लेने की क्रिया रुकती और फेल होती दिखाई दे तो कृत्रिम सांस चालू कर देनी चाहिए।
अगर रोगी की साँस तेज़ आवाज के साथ न होता हो तो उसे पीठ के बल लिटाना चाहिए तथा सिर एवं कन्धों के नीचे एक तकिया लगाकर इन दोनों भागों को ऊंचा कर देना चाहिए और सिर एक ओर घुमा देना चाहिए। Read for more details - http://bit.ly/2MLwieq
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जानिए घर पर फेशियल करने की विधि तथा फेशियल के त्वचा पर लाभ
#FacialSteps #Benefits

बढ़ती उम्र में भी त्वचा की खूबसूरती को बनाए रखना सभी के लिए मुश्किल होता है खासकर महिलाओं के लिए तो यह विशेषतौर से चुनौती भरा काम होता है. खासतौर पर उम्र के 30 वें पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाएं अपनी त्वचा में होने वाले ढीलेपन और झुर्रियों से काफी परेशान रहती हैं. दरअसल, 30 की उम्र के बाद त्वचा में प्राकृतिक मॉइश्चराइजर बनना बंद हो जाता है, जिस की वजह से त्वचा में वह कसाव नहीं रहता है जो 30 की उम्र से पहले रहता है, फेशियल मसाज इसी समस्या के समाधान का तरीका है क्योंकि यह त्वचा पर चढ़ी डैड सैल्स की परत को निकाल देती हैं और त्वचा पर कसाव के साथ-साथ निखार और चमक भी लाती हैं | चेहरे की खूबसूरती बनाए रखने के लिए फेशियल एक अच्छा उपाय है। फेशियल फैशन के अनुरूप कोई मेकअप नहीं, बल्कि यह चेहरे पर किया जाने वाला एक प्रकार का मसाज है। फेशियल मसाज से त्वचा में रक्त संचार अच्छी तरह होने लगता है जिससे चेहरे पर एक नई चमक आ जाती है। उम्र के हिसाब से पड़ने वाली झुर्रियां फेशियल मसाज करवाते रहने से कम हो जाती हैं। त्वचा सुंदर तथा मुलायम बनी रहती है। तनाव के कारण चेहरे की त्वचा में आया खिंचाव दूर होता है।

फेशियल मसाज से जुड़े कुछ सुझाव तथा सावधानियां

फेशियल मसाज हमेशा सधे हाथों द्वारा करें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में फेशियल कभी न करें।
यदि दूसरों से फेशियल मसाज करवाएं तो ध्यान रखें कि फेशियल करने वाला कुशल हो। क्योंकि फेशियल के दौरान नाक, आंख, गाल, होंठ, गर्दन, माथा आदि का मसाज थोड़ी-सी गलती से आपको परेशानी में डाल सकता है।
फेशियल मसाज करने वाले को चेहरे के प्रेशर प्वॉइंट के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए।
कहां अधिक दबाव देना है और कहां कम दबाव देना है-इस बारे में सही जानकारी न होने पर परेशानी उत्पन्न हो जाती है। Read here for more details - http://bit.ly/2pbDUxr
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जानिए घर पर फेशियल करने की विधि तथा फेशियल के त्वचा पर लाभ
#FacialSteps #Benefits

बढ़ती उम्र में भी त्वचा की खूबसूरती को बनाए रखना सभी के लिए मुश्किल होता है खासकर महिलाओं के लिए तो यह विशेषतौर से चुनौती भरा काम होता है. खासतौर पर उम्र के 30 वें पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाएं अपनी त्वचा में होने वाले ढीलेपन और झुर्रियों से काफी परेशान रहती हैं. दरअसल, 30 की उम्र के बाद त्वचा में प्राकृतिक मॉइश्चराइजर बनना बंद हो जाता है, जिस की वजह से त्वचा में वह कसाव नहीं रहता है जो 30 की उम्र से पहले रहता है, फेशियल मसाज इसी समस्या के समाधान का तरीका है क्योंकि यह त्वचा पर चढ़ी डैड सैल्स की परत को निकाल देती हैं और त्वचा पर कसाव के साथ-साथ निखार और चमक भी लाती हैं | चेहरे की खूबसूरती बनाए रखने के लिए फेशियल एक अच्छा उपाय है। फेशियल फैशन के अनुरूप कोई मेकअप नहीं, बल्कि यह चेहरे पर किया जाने वाला एक प्रकार का मसाज है। फेशियल मसाज से त्वचा में रक्त संचार अच्छी तरह होने लगता है जिससे चेहरे पर एक नई चमक आ जाती है। उम्र के हिसाब से पड़ने वाली झुर्रियां फेशियल मसाज करवाते रहने से कम हो जाती हैं। त्वचा सुंदर तथा मुलायम बनी रहती है। तनाव के कारण चेहरे की त्वचा में आया खिंचाव दूर होता है।

फेशियल मसाज से जुड़े कुछ सुझाव तथा सावधानियां

फेशियल मसाज हमेशा सधे हाथों द्वारा करें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में फेशियल कभी न करें।
यदि दूसरों से फेशियल मसाज करवाएं तो ध्यान रखें कि फेशियल करने वाला कुशल हो। क्योंकि फेशियल के दौरान नाक, आंख, गाल, होंठ, गर्दन, माथा आदि का मसाज थोड़ी-सी गलती से आपको परेशानी में डाल सकता है।
फेशियल मसाज करने वाले को चेहरे के प्रेशर प्वॉइंट के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए।
कहां अधिक दबाव देना है और कहां कम दबाव देना है-इस बारे में सही जानकारी न होने पर परेशानी उत्पन्न हो जाती है। Read here for more details - http://bit.ly/2pbDUxr

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जानिए घर पर फेशियल करने की विधि तथा फेशियल के त्वचा पर लाभ
#FacialSteps #Benefits

बढ़ती उम्र में भी त्वचा की खूबसूरती को बनाए रखना सभी के लिए मुश्किल होता है खासकर महिलाओं के लिए तो यह विशेषतौर से चुनौती भरा काम होता है. खासतौर पर उम्र के 30 वें पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाएं अपनी त्वचा में होने वाले ढीलेपन और झुर्रियों से काफी परेशान रहती हैं. दरअसल, 30 की उम्र के बाद त्वचा में प्राकृतिक मॉइश्चराइजर बनना बंद हो जाता है, जिस की वजह से त्वचा में वह कसाव नहीं रहता है जो 30 की उम्र से पहले रहता है, फेशियल मसाज इसी समस्या के समाधान का तरीका है क्योंकि यह त्वचा पर चढ़ी डैड सैल्स की परत को निकाल देती हैं और त्वचा पर कसाव के साथ-साथ निखार और चमक भी लाती हैं | चेहरे की खूबसूरती बनाए रखने के लिए फेशियल एक अच्छा उपाय है। फेशियल फैशन के अनुरूप कोई मेकअप नहीं, बल्कि यह चेहरे पर किया जाने वाला एक प्रकार का मसाज है। फेशियल मसाज से त्वचा में रक्त संचार अच्छी तरह होने लगता है जिससे चेहरे पर एक नई चमक आ जाती है। उम्र के हिसाब से पड़ने वाली झुर्रियां फेशियल मसाज करवाते रहने से कम हो जाती हैं। त्वचा सुंदर तथा मुलायम बनी रहती है। तनाव के कारण चेहरे की त्वचा में आया खिंचाव दूर होता है।

फेशियल मसाज से जुड़े कुछ सुझाव तथा सावधानियां

फेशियल मसाज हमेशा सधे हाथों द्वारा करें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में फेशियल कभी न करें।
यदि दूसरों से फेशियल मसाज करवाएं तो ध्यान रखें कि फेशियल करने वाला कुशल हो। क्योंकि फेशियल के दौरान नाक, आंख, गाल, होंठ, गर्दन, माथा आदि का मसाज थोड़ी-सी गलती से आपको परेशानी में डाल सकता है।
फेशियल मसाज करने वाले को चेहरे के प्रेशर प्वॉइंट के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए।
कहां अधिक दबाव देना है और कहां कम दबाव देना है-इस बारे में सही जानकारी न होने पर परेशानी उत्पन्न हो जाती है। Read here for more details - http://bit.ly/2pbDUxr

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#FacialSteps #Benefits

बढ़ती उम्र में भी त्वचा की खूबसूरती को बनाए रखना सभी के लिए मुश्किल होता है खासकर महिलाओं के लिए तो यह विशेषतौर से चुनौती भरा काम होता है. खासतौर पर उम्र के 30 वें पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाएं अपनी त्वचा में होने वाले ढीलेपन और झुर्रियों से काफी परेशान रहती हैं. दरअसल, 30 की उम्र के बाद त्वचा में प्राकृतिक मॉइश्चराइजर बनना बंद हो जाता है, जिस की वजह से त्वचा में वह कसाव नहीं रहता है जो 30 की उम्र से पहले रहता है, फेशियल मसाज इसी समस्या के समाधान का तरीका है क्योंकि यह त्वचा पर चढ़ी डैड सैल्स की परत को निकाल देती हैं और त्वचा पर कसाव के साथ-साथ निखार और चमक भी लाती हैं | चेहरे की खूबसूरती बनाए रखने के लिए फेशियल एक अच्छा उपाय है। फेशियल फैशन के अनुरूप कोई मेकअप नहीं, बल्कि यह चेहरे पर किया जाने वाला एक प्रकार का मसाज है। फेशियल मसाज से त्वचा में रक्त संचार अच्छी तरह होने लगता है जिससे चेहरे पर एक नई चमक आ जाती है। उम्र के हिसाब से पड़ने वाली झुर्रियां फेशियल मसाज करवाते रहने से कम हो जाती हैं। त्वचा सुंदर तथा मुलायम बनी रहती है। तनाव के कारण चेहरे की त्वचा में आया खिंचाव दूर होता है।

फेशियल मसाज से जुड़े कुछ सुझाव तथा सावधानियां

फेशियल मसाज हमेशा सधे हाथों द्वारा करें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में फेशियल कभी न करें।
यदि दूसरों से फेशियल मसाज करवाएं तो ध्यान रखें कि फेशियल करने वाला कुशल हो। क्योंकि फेशियल के दौरान नाक, आंख, गाल, होंठ, गर्दन, माथा आदि का मसाज थोड़ी-सी गलती से आपको परेशानी में डाल सकता है।
फेशियल मसाज करने वाले को चेहरे के प्रेशर प्वॉइंट के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए।
कहां अधिक दबाव देना है और कहां कम दबाव देना है-इस बारे में सही जानकारी न होने पर परेशानी उत्पन्न हो जाती है। Read here for more details - http://bit.ly/2pbDUxr

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एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ाने के लिए डाइट
Foods That Boost #Estrogen #Hormone

एस्ट्रोजन हार्मोन का कार्य : महिलाओं में एस्ट्रोसिन व प्रोजिस्ट्रोन दो तरह के हार्मोन प्राकृतिक रूप से बनते हैं। गर्भ धारण करने के लिए ये दोनों ही हार्मोन बेहद जरूरी होते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों को बनाने वाले ओस्टियोब्लास्ट के लिए भी महत्वपूर्ण होता हैं। आमतौर पर महिलाओं को मोनोपॉज 45 से 55 की उम्र में होता है। मोनोपॉज के दौरान महिलाओं का एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिर जाता है जिससे ओस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हड्डियां जल्दी कमजोर होने लगती हैं। कम एस्ट्रोजन से शरीर में कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है और जिसकी वजह से हड्डियों का घनत्व गिरने लगता है।

एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से महिलाएं दिल की बीमारियों की शिकार भी हो रही है, यह हार्मोन ही महिलाओं में हार्ट-अटैक के लिए एक सुरक्षा-कवच देने का काम करता है। पुरुषों में हार्ट-अटैक के मामले इसीलिए अधिक देखे जाते थे कि उनमें एस्ट्रोजन कम होता है। लेकिन मोनोपॉज के कारण उम्र बढने पर स्त्रियों में भी एस्ट्रोजन का निर्माण होना बंद हो जाता है या कम हो जाता है, इसलिए मोनोपॉज के बाद महिलाओं और पुरुषों में हार्ट-अटैक का खतरा एक जैसा ही होता है। चिकित्सकों के अनुसार अब महिलाओं में युवावस्था में ही एस्ट्रोजन का स्तर घटने लगता है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्ट-अटैक तेजी से बढ़ रहा है एस्ट्रोजेन महिला और पुरुष में भिन्नता के लिए भी जिम्मेदार है। इसलिए यहां हम कुछ ऐसे फलों और सब्जियों की सूची दे रहे हैं जिनके जरिये आप एस्ट्रोजेन बढ़ा सकती हैं तथा एस्ट्रोजन हारमोन के स्त्राव को नियमित करने में मदद करते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहाँ जाकर पढ़ें - http://bit.ly/2OkAK5v
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