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Dhruv Singh (एकलव्य)
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"सरल संदेशों में लिपटा हूँ, मैं अनजाना राही ,चंद शब्द में, बात मैं कहता ,कालजयी कलम का सिपाही "
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२४..........अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ खास मायने
'अभिव्यक्ति' की स्वतंत्रता  के कुछ खास मायने हैं।  हम  अपने-पराये  के छदम्ब  से उठकर  न्यायपरक बातों पर  अपना  सम्पूर्ण ध्यान  आकृष्ट करते हैं। भेद-भाव की दहलीज़  लाँगते  हुए पूरी कर्मनिष्ठा से अपने गंतव्य की ओर बिना  किसी  लागलपेट के प्रस्थान करते हैं।अंततः...
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आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'रविवार' २१ जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/
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आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'रविवार' २१ जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/
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आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'रविवार' २१ जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/
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आदरणीय राही जी हमें अतिप्रसन्नता हो रही है आपको यह अवगत कराते हुए कि आपके द्वारा पठित आपकी रचना "तुम्हारा साथ - 2" का पाठ को २० जनवरी २०१८ शनिवार को "लोकतंत्र" संवाद मंच पर लिंक किया गया है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/
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आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'शनिवार' २० जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/
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२३...... ज़र्रे को उड़ते देखा है !
कहते हैं ! चाहते हो अगर नाम  बदनाम तो, जगज़ाहिर है  सिर से पाँव तलक  उन गलियों में ! फिर भी, एक तसल्ली है  अरे ! ओ दुनियाँ वालों  ले तो रहे हो नाम।  क़ब्रिस्तान में ही सही  रोज़ आकर  मेरी क़ब्र पर  ज़रा एक फूल तो रख दो ! तुम्हारा क्या चला जाता है ? एक रुपये तो ख़...
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