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Dev kumar
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दर्द है जो सीने में उसे लफ़्ज़ों की धूप देकर। एहसास-ए-जिगर को ग़ज़लों का रूप देकर। वजह-बेवजह बस लिखता रहता हूँ।
दर्द है जो सीने में उसे लफ़्ज़ों की धूप देकर। एहसास-ए-जिगर को ग़ज़लों का रूप देकर। वजह-बेवजह बस लिखता रहता हूँ।

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दैनिक जागरण में प्रकाशित मेरे कुछ शब्द।
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बाबा जाहरवीर की कथा
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कभी हो 'मुलाक़ात तो कहूँ वक़्त से ।
यार कभी हमें भी मिल जाया करो ।
~देव कुमार~
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दिमाग़ में टिक-टिक करतीं छोटी-छोटी नुकीली कीलें एकदम से शांत हो जातीं हैं । जब मैं आपकी रचना पढ़ता हूँ तो दुनिया-जहां की उलझनों से परे एक अलग ही जहां में बड़ी राहत महसूस करता हूँ ।
आपको बहुत-बहुत शुक्रिया इतना अच्छा लिखने के लिए। नव वर्ष की मंगलकामनाये
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Dev kumar commented on a post on Blogger.
बहुत ही गंभीर है ये किस्सा आपने इसपर विचार किया और इसे लोगों के बीच रखा इसके लिए मैं आपको नमन करता हूँ और आशा करता हूँ की आपके द्वारा लिखा गया ये लोगों को जागरूक करेगा ।
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गोवर्धन पूजन की बधाई और शुभकामनाएँ
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दीपों के पर्व की आपको और आपके परिवार को बधाई और मंगलकामनाएं ।
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