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Abhinav Gupta
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कोंग्रेस के पालतू....

चिदंबरम को 7 बार अग्रिम जमानत मिलना शायद ये भी वर्ल्ड रिकार्ड होगा!
हम सोचते हैं,सुप्रीम कोर्ट अभी भी निष्पक्ष है!!
जो यह उम्मीद. लगाए बैठे है कि भ्रष्ट कांगीयो को सजा होगी, वो अपनी सोच
बद ले ।एक रिटायर्ड होगा तो दूसरा आयेगा। लगभग #10वर्ष लगेंगे इनको
समर्थकों को खत्म होने मे !

#बेईमान_न्यायाधीश
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धर्म रक्षा हेतु बलिदान : गुरु तेगबहादुर
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एक बार सिखों के नवें गुरु श्री तेगबहादुर जी हर दिन की तरह दूर-दूर से आये भक्तों से मिल रहे थे। लोग उन्हें अपनी निजी समस्याएँ तो बताते ही थे; पर मुस्लिम अत्याचारों की चर्चा सबसे अधिक होती थी। मुस्लिम आक्रमणकारी हिन्दू गाँवों को जलाकर मन्दिरों और गुरुद्वारों को भ्रष्ट कर रहे थे। नारियों का अपमान और जबरन धर्मान्तरण उनके लिए सामान्य बात थी। गुरुजी सबको संगठित होकर इनका मुकाबला करने का परामर्श देते थे।

पर उस दिन का माहौल कुछ अधिक ही गम्भीर था। कश्मीर से आये हिन्दुओं ने उनके दरबार में दस्तक दी थी। वहाँ जो अत्याचार हो रहे थे, उसे सुनकर गुरुजी की आँखें भी नम हो गयीं। वे गहन चिन्तन में डूब गये। रात में उनके पुत्र गोविन्दराय ने जब चिन्ता का कारण पूछा, तो उन्होंने सारी बात बताकर कहा - लगता है कि अब किसी महापुरुष को धर्म के लिए बलिदान देना पड़ेगा; पर वह कौन हो, यही मुझे समझ नहीं आ रहा है।

गोविन्दराय ने एक क्षण का विलम्ब किये बिना कहा - पिताजी, आज आपसे बड़ा महापुरुष कौन है ? बस, यह सुनते ही गुरु जी के मनःचक्षु खुल गये। उन्होंने गोविन्द को प्यार से गोद में उठा लिया। अगले दिन उन्होंने कश्मीरी हिन्दुओं को कह दिया कि औरंगजेब को बता दो कि यदि वह गुरु तेगबहादुर को मुसलमान बना ले, तो हम सब भी इस्लाम स्वीकार कर लेंगे।

कश्मीरी हिन्दुओं से यह उत्तर पाकर औरंगजेब प्रसन्न हो गया। उसे लगा कि यदि एक व्यक्ति के मुसलमान बनने से हजारों लोग स्वयं ही उसके पाले में आ जायेंगे, तो इससे अच्छा क्या होगा ? उसने दो सरदारों को गुरुजी को पकड़ लाने को कहा। गुरुजी अपने पाँच शिष्यों भाई मतिदास, भाई सतिदास, भाई दयाला, भाई चीमा और भाई ऊदा के साथ दिल्ली चल दिये।

मार्ग में सब जगह हिन्दुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस पर औरंगजेब ने आगरा में उन्हें गिरफ्तार करा लिया। उन्हें लोहे के ऐसे पिंजड़े में बन्द कर दिया गया, जिसमें कीलें निकली हुई थीं। दिल्ली आकर गुरुजी ने औरंगजेब को सब धर्मावलम्बियों से समान व्यवहार करने को कहा; पर वह कहाँ मानने वाला था।

उसने कोई चमत्कार दिखाने को कहा, पर गुरुजी ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस पर उन्हें और उनके शिष्यों को शारीरिक तथा मानसिक रूप से खूब प्रताड़ित किया गया, पर वे सब तो आत्मबलिदान की तैयारी से आये थे। अतः औरंगजेब की उन्हें मुसलमान बनाने की चाल विफल हो गयी।

सबसे पहले नौ नवम्बर को भाई मतिदास को आरे से दो भागों में चीर दिया गया। अगले दिन भाई सतिदास को रुई में लपेटकर जलाया गया। भाई दयाला को पानी में उबालकर मारा गया। गुरुजी की आँखों के सामने यह सब हुआ; पर वे विचलित नहीं हुए। अन्ततः 11 नवम्बर, 1675 को दिल्ली के चाँदनी चौक में गुरुजी का भी शीश काट दिया गया। जहाँ उनका बलिदान हुआ, वहाँ आज गुरुद्वारा शीशगंज विद्यमान है।

औरंगजेब हिन्दू जनता में आतंक फैलाना चाहता था, पर गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान से हिन्दुओं में भारी जागृति आयी। उनके बारे में कहा गया कि उन्होंने सिर तो दिया, पर सार नहीं दिया। आगे चलकर उनके पुत्र दशम गुरु गोविन्दसिंह जी ने हिन्दू धर्म की रक्षार्थ खालसा पन्थ की स्थापना की।
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गुलामो की हालत आज ये हैं के पप्पू उनके बाप को चोर बोल दे तो वो हाँ बोल देंगे
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Officials at Little Flower School, Narsapur, Telangana forcefully removed mangalsutras of Hindu women & sacred thread of Hindu men who had come for recruitment exam conducted by Telangana State Public Service Commission (TSPSC) while entering the exam hall, hurting their sentiments.
On the other hand, Muslim women with Burqa were allowed.

Hail Secularism.

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👇👇 कश्मीर में मॉब लिंचिंग। ✴️✴️
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दो नारे भारत को बहुत महंगे पड़ रहे है।
हिन्दू-मुस्लिम भाई भाई हिन्दी-चीनी भाई भाई
एक नारा गांधी ने दिया और दूसरा नेहरू ने !

मेरी पहचान जय श्री राम हैं.......... जिसमे निहित है राष्ट्रप्रेम
और आपका???????????????

(१) मेरे देश का नाम आर्यवर्त है ।
(२) मेरी भाषा संस्कृत है ।
(३) मेरा धर्म वैदिक धर्म है ।
(४) मैं ज्ञान और तप से ब्राह्मण हूँ ,बल से क्षत्रीय, उदर से वैश्य, सेवा से शुद्र हूँ । अतः मैं आर्य हूँ ।
(५) मैं कर्म के आधार पर वर्ण व्यवस्था को मानने वाला हूँ ।
(६) मुझे मेरे पूर्वजों पर गर्व है ।
(७) मेरे महापुरुष प्रेरणापुरुष हैं , पतञ्जली, गौतम, कपिल, कणाद, जैमिनी, सुश्रुत, पाणीनि, धनवंतरी, याज्ञवलक्य, अष्टावक्र आदि ।
(८) मैं भीष्म, द्रोण, राम, परशुराम की भांती दृढ़ प्रतिज्ञयी हूँ । इस परम्परा का सम्वाहक हूँ ।
(९) मैं भीम, अर्जुन, राममूर्ती, विश्वामित्र की भांती पराक्रमी हूँ ।
(१०) मैं अपने राष्ट्र के शत्रुओं की सीना फाड़ डालने को संकल्पित हूँ ।
(११) मैं अपने और दूसरों की स्त्रीयों का सम्मान करने वाल व्यक्ति हूँ ।
(१२) मैं सत्य मार्ग का अनुयायी हूँ ।
(१३) मैं सूर्य की भांती तेजस्वी हूँ ।
(१४) मैं अपने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के लिये कटिबद्ध हूँ ।
ओ३म् तत् सत् ।
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