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AWGP Shantikunj Haridwar
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👉 जीवन देवता की साधना-आराधना (भाग 13) 20 Jan
🌹 त्रिविध भवबन्धन एवं उनसे मुक्ति 🔴 आवश्यकता हैं भ्रान्तियों से निकलने और यथार्थता को अपनाने की। इस दिशा में मान्यताओं को अग्रगामी बनाते हुए हमें सोचना होगा कि जीवन साधना ही आध्यात्मिक स्वस्थता और बलिष्ठता है। इसी के बदले प्रत्यक्ष जीवन में मरण की प्रतीक्...
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🌹 त्रिविध भवबन्धन एवं उनसे मुक्ति 🔴 आवश्यकता हैं भ्रान्तियों से निकलने और यथार्थता को अपनाने की। इस दिशा में मान्यताओं को अग्रगामी बनाते हुए हमें सोचना होगा कि जीवन साधना ही आध्यात्मिक स्वस्थता और बलिष्ठता है। इसी के बदले ...
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👉 चरित्र निर्माण
🔵 सही कहा गया है कि हर आदमी अपने-2 विचारों का पुतला है, पहले विचार उठता है, तब उस पर अमल होता है। बार-बार अमल करने से आदत बनती है और आदतों से आचरण निर्माण होता है। 🔴 बाज लोग सच्चरित्रता से यही मतलब निकालते हैं, कि ‘आदमी दूसरे की बहू-बेटियों को अपनी ही माँ...
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🔵 सही कहा गया है कि हर आदमी अपने-2 विचारों का पुतला है, पहले विचार उठता है, तब उस पर अमल होता है। बार-बार अमल करने से आदत बनती है और आदतों से आचरण निर्माण होता है। 🔴 बाज लोग सच्चरित्रता से यही मतलब निकालते हैं, कि ‘आदमी दूस...
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👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 29)
🌹 एक के द्वारा दूसरे के लिए जप-अनुष्ठान 🔴 जहां तक हो सके अपनी साधना स्वयं ही करनी चाहिए। विपत्ति के समय वह दूसरे से भी कराई जा सकती है। पर उसकी आन्तरिक भावना और बाह्य आचरण प्रक्रिया साधु ब्राह्मण स्तर की ही होनी चाहिए। प्राचीन काल में ऐसे कृत्यों के लिए ब...
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🌹 एक के द्वारा दूसरे के लिए जप-अनुष्ठान 🔴 जहां तक हो सके अपनी साधना स्वयं ही करनी चाहिए। विपत्ति के समय वह दूसरे से भी कराई जा सकती है। पर उसकी आन्तरिक भावना और बाह्य आचरण प्रक्रिया साधु ब्राह्मण स्तर की ही होनी चाहिए। प्रा...
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👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 27) 19 Jan
🌞  हिमालय में प्रवेश अपने और पराये 🔵 गंगानानी चट्टी से आगे जहां वर्षा के कारण बुरी तरह फिसलन हो रही थी। एक ओर पहाड़ दूसरी ओर गंगा का तंग रास्ता—उस कठिन समय में इस लाठी ने ही कदम कदम पर जीवन मृत्यु की पहेली को सुलझाया। उसने भी यदि जूतों की तरह साथ छोड़ दिय...
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🌞 हिमालय में प्रवेश अपने और पराये 🔵 गंगानानी चट्टी से आगे जहां वर्षा के कारण बुरी तरह फिसलन हो रही थी। एक ओर पहाड़ दूसरी ओर गंगा का तंग रास्ता—उस कठिन समय में इस लाठी ने ही कदम कदम पर जीवन मृत्यु की पहेली को सुलझाया। उसने...
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👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 76) 19 Jan
🌹 सामाजिक नव निर्माण के लिए 🔴 युग-निर्माण योजना— लौकिक दृष्टि से प्रस्तुत योजना सामाजिक क्रान्ति एवं बौद्धिक क्रान्ति की आवश्यकता पूरी करती है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकताएं यही दो हैं। हमारी विचारणा और सामाजिकता इतनी दुर्बल हो गई है कि इसे बदला जाना आवश्यक ...
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🌹 सामाजिक नव निर्माण के लिए 🔴 युग-निर्माण योजना— लौकिक दृष्टि से प्रस्तुत योजना सामाजिक क्रान्ति एवं बौद्धिक क्रान्ति की आवश्यकता पूरी करती है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकताएं यही दो हैं। हमारी विचारणा और सामाजिकता इतनी दुर्...
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👉 प्रेरणादायक प्रसंग 20 Jan 2017

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👉 आज का सद्चिंतन 20 Jan 2017

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👉 आप अपने बारे में क्या सोचते हैं?
🔴 एक भिखारी किसी स्टेशन पर पैंसिलों से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे में 50 रुपए डाल दिए लेकिन उसने कोई पैंसिल नहीं ली। उसके बाद वह ट्रेन में बैठ गया। डिब्बे का दरवाजा बंद होने ही वाला था कि युवा व्यवसायी एकाएक ट्र...
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🔴 एक भिखारी किसी स्टेशन पर पैंसिलों से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे में 50 रुपए डाल दिए लेकिन उसने कोई पैंसिल नहीं ली। उसके बाद वह ट्रेन में बैठ गया। डिब्बे का दरवाजा बंद होने ही वा...
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👉 आत्मचिंतन के क्षण 20 Jan 2017
🔴 धर्मक्षेत्र को आज हेय इसलिए समझा जाता है कि उसमें ओछे और अवांछनीय व्यक्तित्व भरे पड़े हैं। उन्होंने धर्म को बदनाम कियाहै। इतनी उपयोगी एवं उत्कृष्ट आस्था के प्रति लोगों को नाक-भों सिकोड़ने पड़ रहे हैं। इस स्थिति को बदलने का एक ही उपाय है कि बढ़िया लोग उस क्षे...
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🔴 धर्मक्षेत्र को आज हेय इसलिए समझा जाता है कि उसमें ओछे और अवांछनीय व्यक्तित्व भरे पड़े हैं। उन्होंने धर्म को बदनाम कियाहै। इतनी उपयोगी एवं उत्कृष्ट आस्था के प्रति लोगों को नाक-भों सिकोड़ने पड़ रहे हैं। इस स्थिति को बदलने का एक...
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👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 23) 20 Jan
🌹 आत्मविश्वास क्या नहीं कर सकता? 🔵 जापान के एक छोटे से राज्य पर समीपवर्ती एक बड़े राज्य ने हमला कर दिया। अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेना देखकर जापान का सेनापति हिम्मत हार बैठा। उसने राजा से कहा—‘‘हमारी साधनहीन छोटी-सी सैन्य टुकड़ी इसका सामना कदाचित...
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🌹 आत्मविश्वास क्या नहीं कर सकता? 🔵 जापान के एक छोटे से राज्य पर समीपवर्ती एक बड़े राज्य ने हमला कर दिया। अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेना देखकर जापान का सेनापति हिम्मत हार बैठा। उसने राजा से कहा—‘‘हमारी साधनहीन छोटी-सी...
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👉 हमारी वसीयत और विरासत (भाग 27) 19 Jan
🌞 दिए गए कार्यक्रमों का प्राण-पण से निर्वाह 🔴 इस प्रथम साक्षात्कार के समय मार्गदर्शक सत्ता द्वारा तीन कार्यक्रम दिए गए थे। सभी नियमोपनियमों के साथ २४ वर्ष का २४ गायत्री महापुरश्चरण सम्पन्न किया जाना था। अखण्ड घृत दीपक को भी साथ-साथ निभाना था। अपनी पात्रता...
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🌞 दिए गए कार्यक्रमों का प्राण-पण से निर्वाह 🔴 इस प्रथम साक्षात्कार के समय मार्गदर्शक सत्ता द्वारा तीन कार्यक्रम दिए गए थे। सभी नियमोपनियमों के साथ २४ वर्ष का २४ गायत्री महापुरश्चरण सम्पन्न किया जाना था। अखण्ड घृत दीपक को भी...
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Story
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गायत्री परिवार ब्लोग जीवन जीने कि कला के, संस्कृति के आदर्श सिद्धांतों के आधार पर परिवार, समाज, राष्ट्र युग निर्माण करने वाले व्यक्तियों का संघ है।
Introduction
गायत्री परिवार ब्लोग जीवन जीने कि कला के,  संस्कृति के आदर्श सिद्धांतों के आधार पर परिवार, समाज, राष्ट्र युग निर्माण करने वाले व्यक्तियों का संघ है।

इसमे आप आध्यत्मिक और व्यवहारिक कहानिया , आलेख और युग ऋषि पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित मुख्य किताबो के अंशो से प्रेरणा पा सकते है।

युग निर्माण योजना का प्रधान उद्देश्य है - विचार क्रान्ति। मूढ़ता और रूढ़ियों से ग्रस्त अनुपयोगी विचारों का ही आज सर्वत्र प्राधान्य है। आवश्यकता इस बात की है कि (१) सत्य (२) प्रेम (३) न्याय पर आधारित विवेक और तर्क से प्रभावित हमारी विचार पद्धति हो। आदर्शों को प्रधानता दी जाए और उत्कृष्ट जीवन जीने की, समाज को अधिक सुखी बनाने के लिए अधिक त्याग, बलिदान करने की स्वस्थ प्रतियोगिता एवं प्रतिस्पर्धा चल पड़े। वैयक्तिक जीवन में शुचिता-पवित्रता, सच्चरित्रता, ममता, उदारता, सहकारिता आए। सामाजिक जीवन में एकता और समता की स्थापना हो।

इस संसार में एक राष्ट्र, एक धर्म, एक भाषा, एक आचार रहे; जाति और लिंग के आधार पर मनुष्य-मनुष्य के बीच कोई भेदभाव न रहे। हर व्यक्ति को योग्यता के अनुसार काम करना पड़े; आवश्यकतानुसार गुजारा मिले। धनी और निर्धन के बीच की खाई पूरी तरह पट जाए। न केवल मनुष्य मात्र को वरन् अन्य प्राणियों को भी न्याय का संरक्षण मिले। दूसरे के अधिकारों को तथा अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति हर किसी में उगती रहे; सज्जनता और सहृदयता का वातावरण विकसित होता चला जाए, ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करने में युग निर्माण योजना प्राणपण से प्रयत्नशील  है।
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