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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-01-2019) को <a href=<charchamanch.blogspot.in/" > "गंगा-तट पर सन्त" (चर्चा अंक-3224) </a> पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
उत्तरायणी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-01-2019) को <a href=<charchamanch.blogspot.in/" > "गंगा-तट पर सन्त" (चर्चा अंक-3224) </a> पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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उत्तरायणी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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सोमवार, 21 जनवरी 2019
दोहे "कुम्भ-श्रद्धा का आधार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

संगम नगरी में जुटे, कोटि-कोटि नर-नार।
कुम्भ सनातन धर्म की, श्रद्धा का आधार।।

तप करने को आ गये, गंगा-तट पर सन्त।
भजन-कीर्तन-भागवत, करते नित्य महन्त।।

पौष विदा अब हो गया, कुहरा गया सिधार।
अमृत सबको बाँटती, गंगा जी की घार।।

धीरे-धीरे बढ़ रहा, अब दिन का दिनमान।
माघ मास में कीजिए, पूजा, जप, तप-दान।।

माता के नवरात्र हों, या कोई भी पर्व।
अपने-अपने पर्व पर, दुनियाभर को गर्व।।
--
https://uchcharan.blogspot.com/2019/01/blog-post_21.html
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दोहे "कुम्भ-श्रद्धा का आधार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)
संगम
नगरी में जुटे, कोटि-कोटि नर-नार। कुम्भ
सनातन धर्म की, श्रद्धा का आधार।। तप
करने को आ गये, गंगा-तट पर सन्त। भजन-कीर्तन-भागवत,
करते नित्य महन्त।। पौष
विदा अब हो गया, कुहरा गया सिधार। अमृत
सबको बाँटती, गंगा जी की घार।। धीरे-धीरे
बढ़ रहा, अब ...
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Monday, January 21, 2019
"पहन पीत परिधान" (चर्चा अंक-3223)
मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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दोहे
"खुश हो रहा बसन्त"

उच्चारण
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शायद वो आ गए हैं ...
दानिश भारती
परखेगा ये ज़माना धोखे में आ न जाना ------------
दिलचस्प तज्रबा है दुनिया से दिल लगाना ...
मेरी धरोहर पर
yashoda Agrawal
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गुलाबी इश्क के पन्ने

palash "पलाश" पर
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी
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तहरीर

मेरी जुबानी पर
Sudha Singh
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भूखे रहने से बेहतर है कि
खिचड़ी का आनन्द उठाया जाये

उड़न तश्तरी ....
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मेरी किताब
"यायावरी की कहानियां :
लौट के बताता हूँ "

मुकुल का मीडिया पर
Mukul Srivastava
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शीर्षकहीन
एक लघु कथा
आपका ब्लॉग पर
i b arora
--
३४२.
रेलगाड़ी

कविताएँ पर Onkar
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कैलाश बनवासी की कहानी
‘नो’

पहली बार पर
Santosh Chaturvedi
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ठीक हो न जाएँ

Rohitas Ghorela
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फ़िलहाल विपक्ष के
किसी एक जमूरे में
नरेंद्र मोदी की सत्ता को
उखाड़ फेकने की क्षमता नहीं है
सरोकारनामा पर
Dayanand Pandey
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601.
फ़रिश्ता
(क्षणिका)
लम्हों का सफ़र पर
डॉ. जेन्नी शबनम
By रूपचन्द्र शास्त्री मयंक at January 21, 2019
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https://charchamanch.blogspot.com/2019/01/3223.html
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (21-01-2019) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/"> "पहन पीत परिधान" (चर्चा अंक-3223) </a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
तहरीर
तहरीर
sudhaa1075.blogspot.com
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रविवार, 20 जनवरी 2019
दोहे "खुश हो रहा बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मौसम अच्छा हो गया, हुआ शीत का अन्त।
पहन पीत परिधान को, खुश हो रहा बसन्त।।
--
पेड़ों ने पतझाड़ में, दिये पात सब झाड़।
हिम से अब भी हैं ढके, चोटी और पहाड़।।
--
नवपल्लव की आस में, पेड़ तक रहे बाट।
भक्त नहाने चल दिये, गंगा जी के घाट।।
--
युगलों पर चढ़ने लगा, प्रेमदिवस का रंग।
बदला सा परिवेश है, बदल गये हैं ढंग।।
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उपवन में गदरा रहे, पौधों के अब अंग।
मधुमक्खी लेकर चली, कुनबा अपने संग।।
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फूली सरसों खेत में, पहन पीत परिधान।
गुनगुन की गुंजार से, भ्रमर गा रहे गान।।
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गेहूँ और मसूर भी, लहर-लहर लहराय।
अपनी खेती देखकर, कृषक रहे मुसकाय।।
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https://uchcharan.blogspot.com/2019/01/blog-post_20.html
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दोहे "खुश हो रहा बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
मौसम अच्छा हो गया, हुआ शीत का अन्त। पहन पीत परिधान को, खुश हो रहा बसन्त।। -- पेड़ों ने पतझाड़ में, दिये पात सब झाड़। हिम से अब भी हैं ढके, चोटी और पहाड़।। -- नवपल्लव की आस में, पेड़ तक रहे बाट। भक्त नहाने चल दिये, गंगा जी के घाट।। -- युगलों पर चढ़ने लगा, प्...
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Sunday, January 20, 2019
"अजब गजब मान्यताएंँ" (चर्चा अंक-3222)
मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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अनुवाद
"हरे पेड़ के नीचे
BY WILLIAM SHAKESPEARE"
(अनुवादक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

उच्चारण
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मानवता

गूँगी गुड़िया पर
Anita Saini
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उल्टा स्वस्तिक भी शुभ की कामना से...
अजब गजब मान्यताएं

ज्ञानवाणी पर वाणी गीत
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जब भी देखा उसे

Akanksha पर
Asha Saxena
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गढवाल केन्द्रीय विश्वविध्यालय

अंधड़ ! पर
पी.सी.गोदियाल "परचेत"
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शिशिर

कविता "जीवन कलश" पर
purushottam kumar sinha
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ज़िन्दगी
ज़िन्दगी!
तेरी ज़िन्दगी मेरी ज़िन्दगी
इसकी ज़िन्दगी उसकी ज़िन्दगी
हम सबकी ज़िन्दगी।
रोती है ज़िन्दगी
रुलाती है ज़िन्दगी
हँसती है ज़िन्दगी
हँसाती है ज़िन्दगी...
मन के वातायन पर
Jayanti Prasad Sharma
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टूटेगा तो बिखर जाएगा...
सीमा 'सदा' सिंघल

मेरी धरोहर पर
Digvijay Agrawal
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मैं अश्त्थामा बोल रहा हूँ (2)
वही पुरातन परिवेश लपेटे ,
लोगों से अपनी पहचान छिपाता
इस गतिशील संसार में
एकाकी भटक रहा हूँ .
चिरजीवी हूँ न मैं ,
हाँ मैं अश्वत्थामा...
लालित्यम् पर
प्रतिभा सक्सेना
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कथा-गाथा :
पिरामिड के नीचे :
नरेश गोस्वामी

समालोचन पर arun dev
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16-31 January 2019 Taabar Toli

टाबर टोळी
(बच्चों के लिए देश का पहला अखबार) पर
दीनदयाल शर्मा
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हीन भावना से ग्रस्त हैं हम
कल मैंने एक आलेख लिखा था - पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं । हम भारतीयों का पैसे के प्रति ऐसा ही अनुराग है। लेकिन इसके मूल में हमारी हीन भावना है। दुनिया जब विज्ञान के माध्यम से नयी दुनिया में प्रवेश कर रही थी, तब हम पुरातन में ही उलझे थे। किसी भी परिवार का बच्चा अपने माता-पिता पर विश्वास नहीं करता, वह उन्हें पुरातन पंथी ही मानता है और हमेशा असंतुष्ट रहता है...
अजित गुप्‍ता का कोना
By रूपचन्द्र शास्त्री मयंक at January 20, 2019
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https://charchamanch.blogspot.com/2019/01/3222.html
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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-01-2019) को <a href="https://charchamanch.blogspot.com/"> "अजब गजब मान्यताएंँ" (चर्चा अंक-3222) </a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
उत्तरायणी-लोहड़ी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
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