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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक's posts

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (23-07-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/"> "शंखनाद करो कृष्ण" (चर्चा अंक 2675) </a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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शनिवार, 22 जुलाई 2017
प्रकाशन "दोहा दंगल में मेरे दोहे"

अमर शहीदों का कभी, मत करना अपमान।
किया इन्दोंने देशहित, अपना तन बलिदान।।

जीवन तो त्यौहार है, जानों इनका सार।
प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार।।

जब तक सूरज-चन्द्रमा, तब तक जीवित प्यार।
दौलत से मत तौलना, पावन प्यार-दुलार।।

गौमाता सिही मिले, दूध-दही-नवनीत।
सबको होनी चाहिए, गौमाता से प्रीत।।

कैमीकल का उर्वरक, कर देगा बरबाद।
खेतों में डालो सदा, गोबर की ही खाद।।

कुटिया-महलों में जलें, जगमग-जगमग दीप।
सरिताओं के रेत में, मोती उगले सीप।।

पथ में मिलते रोज ही, भाँति-भाँति के लोग।
तब ही होती मित्रता, जब बनता संयोग।।

रक्खो कदम जमीन पर, मत उड़ना बिन पंख।
जो पारंगत सारथी, वही बजाता शंख।।

सरिता और तड़ाग के, सब ही जाते नीर।
मगर आचमन के लिए, गंगा का है नीर।।

शिशुओं की किलकारियाँ, गूँजें सबके द्वार।
बेटा-बेटी में करो, समता का व्यवहार।।

चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।
संस्कार देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।

तोड़ रही दम सभ्यता, आहत हैं परिवेश।
पुस्तक तक सीमित हुए, सन्तों के सन्देश।।

ढेल नहीं पाया मनुज, कभी समय का वार।
ज्ञानी-राजा-रंक भी, गये समय से हार।।

कभी रूप की धूप पर, मत करना अभिमान।
डरकर रहना समय से, समय बड़ा बलवान।।

सच्ची होती मापनी, झूठे सब अनुमान।
ताकत पर अपनी नहीं, करना कुछ अभिमान।।
--
http://uchcharan.blogspot.com/2017/07/blog-post_22.html 
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शनिवार, 22 जुलाई 2017
प्रकाशन "दोहा दंगल में मेरे दोहे"

अमर शहीदों का कभी, मत करना अपमान।
किया इन्दोंने देशहित, अपना तन बलिदान।।

जीवन तो त्यौहार है, जानों इनका सार।
प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार।।

जब तक सूरज-चन्द्रमा, तब तक जीवित प्यार।
दौलत से मत तौलना, पावन प्यार-दुलार।।

गौमाता सिही मिले, दूध-दही-नवनीत।
सबको होनी चाहिए, गौमाता से प्रीत।।

कैमीकल का उर्वरक, कर देगा बरबाद।
खेतों में डालो सदा, गोबर की ही खाद।।

कुटिया-महलों में जलें, जगमग-जगमग दीप।
सरिताओं के रेत में, मोती उगले सीप।।

पथ में मिलते रोज ही, भाँति-भाँति के लोग।
तब ही होती मित्रता, जब बनता संयोग।।

रक्खो कदम जमीन पर, मत उड़ना बिन पंख।
जो पारंगत सारथी, वही बजाता शंख।।

सरिता और तड़ाग के, सब ही जाते नीर।
मगर आचमन के लिए, गंगा का है नीर।।

शिशुओं की किलकारियाँ, गूँजें सबके द्वार।
बेटा-बेटी में करो, समता का व्यवहार।।

चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।
संस्कार देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।

तोड़ रही दम सभ्यता, आहत हैं परिवेश।
पुस्तक तक सीमित हुए, सन्तों के सन्देश।।

ढेल नहीं पाया मनुज, कभी समय का वार।
ज्ञानी-राजा-रंक भी, गये समय से हार।।

कभी रूप की धूप पर, मत करना अभिमान।
डरकर रहना समय से, समय बड़ा बलवान।।

सच्ची होती मापनी, झूठे सब अनुमान।
ताकत पर अपनी नहीं, करना कुछ अभिमान।।
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http://uchcharan.blogspot.com/2017/07/blog-post_22.html 

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प्रकाशन "दोहा दंगल में मेरे दोहे"
अमर शहीदों का कभी, मत करना अपमान। किया इन्दोंने देशहित, अपना तन बलिदान।। जीवन तो त्यौहार है, जानों इनका सार। प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार।। जब तक सूरज-चन्द्रमा, तब तक जीवित प्यार। दौलत से मत तौलना, पावन प्यार-दुलार।। गौमाता सिही मिले, दूध-दही-नवनीत। ...

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"मोह से निर्मोह की ओर" (चर्चा अंक 2674)
मित्रों! शनि वार  की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- सुबह हुई   Sudhinama  पर  sadhana vaid    -- देश के 14वे राष्ट्रपति    computer tips & tricks   -- यदि खुद 'खुश' रहना चाहते हैं...  तो दूसरों क...

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"जब-जब ये सावन आता है" चर्चा - 2673
आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है  चलते हैं चर्चा की ओर १९० वीं जयंती साम्प्रदायिकता और संस्कृति   बेमन से लिक्खी हुई, कविता बने बबाल। गुनहगारों को सज़ा मिले, ये ज़रूरी तो नहीं नूरपुर की रानी काजल  मस्त रहो अपनी भक्ति की चरस में यादें कभी नहीं मिटती सीता...

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (21-07-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/">"जब-जब ये सावन आता है" चर्चा - 2673 </a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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Thursday, July 20, 2017
''क्या शब्द खो रहे अपनी धार'' (चर्चा अंक 2672)
मित्रों!
गुरूवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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विविध दोहे '
'सीधी-सच्ची बात''
भारत माता के लिए, हुए पुत्र बलिदान।
ऐसे बेटों पर सदा, माता को अभिमान।१।

दिल से जो है निकलती, वो ही करे कमाल।
बेमन से लिक्खी हुई, कविता बने बबाल।२।

राजनीति के खेल में, कुटिल चला जो चाल।
उसकी जय-जयकार है, उसका ही सब माल।३।...
उच्चारण
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बज़्म -ए -ज़िन्दगी - -

अग्निशिखा : पर Shantanu Sanyal
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मोदी के पीएम बनने के बाद
अडानी के भाव गिरे!

बतंगड़ BATANGAD पर
HARSHVARDHAN TRIPATHI
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मै गलत नही

palash "पलाश" पर
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी
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Phone battery को
ओवर चार्ज होने से कैसे बचाएं

computer tips & tricksपरFaiyaz Ahmad
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सफ़ेद कुरता

निविया (Nivia) पर Neelima Sharma
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कार्टून :-
भाग जा प्रेत, नहीं तो तेरा ऑपरेशन कर दूंगा

Kajal Kumar's Cartoons
काजल कुमार के कार्टून
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"माया - मायावती की "
!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा

DEMOCRACY'S 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER - SURATGARH,RAJASTHAN,INDIA
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ये तोपें हिन्द की गर खुल गईं दुश्मन का क्या होगा,
मिटेगा हर निशाँ दुनियाँ के नक्शे से बयाँ होगा...
MaiN Our Meri Tanhayii पर
Harash Mahajan
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गुफ्तगू के इलाहाबाद विशेषांक में

गुफ्तगू पर editor : guftgu
-- ----- || दोहा-एकादश || -----
धरम अनादर मति करो होत होत जहाँ अवसान |
ताहि कंधे पौढ़त सो पहुँचे रे समसान || १ ||...
NEET-NEET पर Neetu Singhal
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महिला व्यंग्यकार और
पुरुष व्यंग्यकार का अंतर्विरोध-

sapne(सपने) पर shashi purwar
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जी! ना! कैसा हो? /
डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय

अनुशील पर अनुपमा पाठक
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मप्र सरकार –
अज्ञान के अंधेरों से
ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो
18 July 2017
ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik
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749
दूर जाते हुए
डा कविता भट्ट

दूर जाते हुए मन सीपी-सा उसकी यादों के समंदर में खोया था
जिसके सीने को मैंने कई बार अपने आँसुओं से भिगोया था

खोज रही थी आने वाले हर चेहरे में उसका निश्छल चेहरा
भोली आँखें- जिनकी नमी वो ज़माने से छिपाता ही रहा

सहज साहित्य
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बरसो रे !
मेरे मन की पर
अर्चना चावजी Archana Chaoji
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ललिता का बेटा
बिना किसी अपेक्षा के, अपनी अंतरात्मा की आवाज पर, निस्वार्थ भाव से किसी के लिए किया गया कोई भी कर्म जिंदगी भर संतोष प्रदान करता रहता है। यह रचना काल्पनिक नहीं बल्कि सत्य पर आधारित है। श्रीमती जी शिक्षिका रह चुकी हैं। उनका एक अनुभव उन्हीं के शब्दों में ....
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा
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जिम कार्बेट नेशनल पार्क,
नैनीताल, उत्तराखंड

.... Mere Man Ki पर Rishabh Shukla
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रेप-----
अंजली अग्रवाल
आज मुझे एक बार फिर
आदरणीय अंजली अग्रवाल जी की
ये कविता याद आ गयी....
कविता मंच पर kuldeep thakur
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हम पत्थर एवं अन्य कविताएं-
सुरेन्द्र भसीन

सुबोध सृजन
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थोड़ा रोमांच भर लायें.....
निधि सक्सेना
बहुत कड़वा हो गया है जिंदगी का स्वाद
चलो किसी खूबसूरत वादी से
थोड़ा रोमांच भर लायें..
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal
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क्या शब्द खो रहे अपनी धार ?
मेरे दिल की बात पर Swarajya karun
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टाइम मशीनः
शिवः खंड चारः
भस्मांकुर
गुस्ताख़ पर Manjit Thakur
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सेफू! तू भी अपनी माँ की बदौलत है
उत्तर भारतीय शादी में और इस कार्यक्रम में कुछ अन्तर नहीं था। हमारे यहाँ की शादी कैसी होती है? शादी का मुख्य बिन्दु है पाणिग्रहण संस्कार। लेकिन यह सबसे अधिक गौण बन गया है, सारे नाच-कूद हो जाते हैं उसके बाद समय मिलने पर या चुपके से यह संस्कार भी करा दिया जाता है। जितने भी फिल्मों के अवार्ड फंक्शन होते हैं, उनमें भी यही होता है। अवार्ड के लिये एक मिनट और हँसी-ठिठोली के लिये दस मिनट। शादी में सप्तपदी से अधिक महिला संगीत पर फोकस रहता है, यहाँ भी कलाकारों के नृत्य पर ध्यान लगा रहता है। आप किसी भी शादी में मेहमान बनकर जाइए, बस वहाँ सब...
अजित गुप्‍ता का कोना
प्रस्तुतकर्ता रूपचन्द्र शास्त्री मयंक चर्चा मंच पर Thursday, July 20, 2017
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http://charchamanch.blogspot.in/2017/07/2672.html 

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''क्या शब्द खो रहे अपनी धार'' (चर्चा अंक 2672)
मित्रों! गुरू वार  की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- विविध दोहे '  'सीधी-सच्ची बात''    भारत माता के लिए ,  हुए पुत्र बलिदान। ऐसे बेटों पर सदा ,  माता को अभिमान।१। दिल से जो है निकलती ,  वो ही कर...

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (20-07-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/"> ''क्या शब्द खो रहे अपनी धार'' (चर्चा अंक 2672) </a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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