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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
</a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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शनिवार, 27 मई 2017
गीत "इनकी किस्मत कौन सँवारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
लड़ते खुद की निर्धनता से,
भारत माँ के राजदुलारे।
कूड़ा-कचरा बीन रहे हैं,
बालक देखो प्यारे-प्यारे।।

भूख बन गई है मजबूरी,
बाल श्रमिक करते मजदूरी,
झूठे सब सरकारी दावे,
इनकी किस्मत कौन सँवारे।
बीन रहे हैं कूड़ा-कचरा,
बालक अपने प्यारे-प्यारे।।
टूटे-फूटे हैं कच्चे घर,
नहीं यहाँ पर, पंखे-कूलर.
महलों को मुँह चिढ़ा रही है,
इनकी झुग्गी सड़क किनारे।
बीन रहे हैं कूड़ा-कचरा,
बालक अपने प्यारे-प्यारे।।
मिलता इनको झिड़की-ताना,
दूषित पानी, झूठा खाना,
जनसेवक की सेवा में हैं,
अफसर-चाकर कितने सारे।
बीन रहे हैं कूड़ा-कचरा,
बालक अपने प्यारे-प्यारे।।
--
http://uchcharan.blogspot.in/2017/05/blog-post_27.html

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गीत "इनकी किस्मत कौन सँवारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
  लड़ते खुद की निर्धनता से , भारत माँ के राजदुलारे। कूड़ा-कचरा  बीन रहे हैं , बालक देखो प्यारे-प्यारे।।   भूख बन गई है मजबूरी , बाल श्रमिक करते मजदूरी , झूठे सब सरकारी दावे , इनकी किस्मत कौन सँवारे। बीन रहे हैं कूड़ा-कचरा , बालक अपने प्यारे-प्यारे।। टूटे-फू...

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शुक्रवार, 26 मई 2017
गीतिका "स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना।
पग ठहरता नहीं, आगमन के बिना।।

देश-दुनिया की चिन्ता, किसी को नहीं,
मन सुधरता नहीं, अंजुमन के बिना।

मोह माया तो, दुनिया का दस्तूर है,
सुख पसरता नहीं, संगमन के बिना।

खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
बल निखरता नहीं, संयमन के बिना।

क्या करेगा यहाँ, अब अकेला चना,
दल उभरता नहीं, संगठन के बिना।

“रूप” कैसे खिले, धूप कैसे मिले?
रवि ठहरता नहीं है, गगन के बिना।
--
http://uchcharan.blogspot.in/2017/05/blog-post_26.html

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गीतिका "स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना। पग ठहरता नहीं, आगमन के बिना।। देश-दुनिया की चिन्ता, किसी को नहीं, मन सुधरता नहीं, अंजुमन के बिना। मोह माया तो, दुनिया का दस्तूर है, सुख पसरता नहीं, संगमन के बिना। खोखली देह में, प्राण कैसे पले, बल निख रता  नहीं, संयमन के बिना...

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गुरुवार, 25 मई 2017
बालकविता "फल वाले बिरुए उपजाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
जब गर्मी का मौसम आता,
सूरज तन-मन को झुलसाता।
तन से टप-टप बहे पसीना,
जीना दूभर होता जाता।

ऐसे मौसम में पेड़ों पर,
फल छा जाते हैं रंग-रंगीले।
उमस मिटाते हैं तन-मन की,
खाने में हैं बहुत रसीले।

ककड़ी-खीरा औ' खरबूजा,
प्यास बुझाता है तरबूजा।
जामुन पाचन करने वाली,
लीची मीठे रस का कूजा।

आड़ू और खुमानी भी तो,
सबके ही मन को भाते हैं।
आलूचा और काफल भी तो,
हमें बहुत ही ललचाते हैं।

कुसुम दहकते हैं बुराँश पर,
लगता मोहक यह नज़ारा।
इन फूलों के रस का शर्बत,
शीतल करता बदन हमारा।

आँगन और बगीचों में कुछ,
फल वाले बिरुए उपजाओ।
सुख से रहना अगर चाहते,
पेड़ लगाओ-धरा बचाओ।
--
http://uchcharan.blogspot.in/2017/05/blog-post_3.html

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बालकविता "फल वाले बिरुए उपजाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
जब गर्मी का मौसम आता , सूरज तन-मन को झुलसाता।   तन से टप-टप बहे पसीना ,  जीना दूभर होता जाता।     ऐसे मौसम में पेड़ों पर ,  फल छा जाते हैं रंग-रंगीले।   उमस मिटाते हैं तन-मन की ,  खाने में हैं बहुत रसीले।     ककड़ी-खीरा औ' खरबूजा ,  प्यास बुझाता है तरबूजा। ...
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