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अजय कुमार झा
Worked at District and Sessions Judge Office , Delhi
Attended Central School Danapur Cantt
Lived in Krishna Nagar , Delhi
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अपना इश्क है ,अपनी आग ,अपना ही दरिया है
किसी को पार जाना है , कोइ ख़ाक हो जाना है
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#खडीखबर : फैन की दुर्गति देख आमिर ने अपनी पिक्चर का नाम बदला
अब वो "द दंगल बुक " के नाम से रिलीज़ होगी ;) ;) ;) ;)
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#खडीखबर : नीतीश भाजपा के खिलाफ बना रहे हैं बड़ा मोर्चा
बना लो पहले ............चराउंगा लेकिन मैं ही : लालू यादव
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लाइ वी न गई ..................................ते निभाई वी न गई
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अपनी पोस्टों के साथ ह्यूमर ,सीरीयस, आदि अवश्य लिखें अन्यथा वे  पोस्टें हादसे का शिकार भी  हो सकती  हैं आपका तो जो होगा सो होगा ;)
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‪#‎खडीखबर‬ : राहुल गांधी आज "मोहाली" जायेंगे
उन्हें पूरा यकीन है कि एक जैसा साउंड करने के कारण "मोगली" का परिवार वहीँ मिलेगा
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इस बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोकप्रिय गाने "चड्डी पहन के फूल खिला है " में चड्डी वो वाली और खिला फूल भी वो वाला नहीं है , सिनेमा कांग्रेसी भी देख सकते हैं ;) ;) ;) ;)
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पेड़ों में , ताली बजी ,, पत्तों की सीटी बजी ,अजी हंसही मची ,
बच्चों की ,मोर गिलहरी ,हिरन सुनहरी उछल रहा है ,
जंगल जंगल बात चली है , पता चला है , चड्डी पहन के फूल खिला है ....


द जंगल बुक ....नहीं ये सिनेमा ...द जंगल जीवन ...है ...सब कुछ है ...कुदरत , क़ानून , इंसान , जानवर , पेड़ , नदियाँ , परिवार , कुनबा ,प्यार ,ममता , दोस्ती कसम , समाज , डर , संघर्ष , बदला ,फरेब , हिम्मत आग ,पानी सभ्यता और रक्त फूल अग्नि .......बच्चों ने तो जो देखा सो देखा मगर मैं बहुत बारीकी से जाने क्या क्या देख गया इस नन्ही सी फिल्म में ....बताता हूँ पोस्ट में .

..अरे हाँ एक जरूरी बात ....ये मधुर गीत पूरे सिनेमा में कहीं भी नहीं दिखाया गया ...शायद फिल्म का हिस्सा नहीं था ये .....दस स्टार के साथ स्पेशल रिकमंडेशन ....जरूर होकर आइये इस थ्रीडी जंगल में और मिल कर आइये ..मोगली , शेर खान , बगीरा , बालू और लुई से ...देखिये रक्त फूल की तपिश और रौशनी को
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#खड़ीखबर : संघ के खिलाफ लड़ने के लिए नीतीश में माँगा साथ
आईएसआईएस और अलकायदा ,दोनों तैयार बैठे हैं ;) ;) ;) ;)
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संसार है इक नदिया ,दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाएँ , हम बहते धारे  हैं .......
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#खडीखबर : आइला मैं मोगली के पापा मम्मी को जानती हूँ मैंने उनकी पिक्चर भी देखी है टार्जन और किमी काटकर जी ;) ;) ;)
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आहा आज के दिन की सबसे खूबसूरत पोस्ट , पोर पोर तक भक्ति भाव में सराबोर , प्रभु यूं ही बांचते रहे , हम अज्ञानियों के लिए ये अमृत सरीखा है ,आज लोगबाग देखा कि राम जी से भी सवाल पूछ रहे हैं वो भी हैश टैग करके ...राम की महिमा जो जाने सो राम कहाए ..सुन्दर ..उत्तम उत्तम उत्तम भाई सुन्दर सुन्दर सुन्दर भाई  ......
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अजय कुमार's Collections
Story
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अभी मुझमें कहीं बाकी है थोडी सी जिंदगी ....................................................
Introduction

यदि एक पंक्ति में कहूं तो , एक आम आदमी जिसकी कोशिश है कि इंसान बना जाए , शेष कुछ नहीं । पिताजी फ़ौज में थे और माता गृहणि , माता पिता की दूसरे नंबर की संतान , प्रारंभ से ही पिताजी के साथ उनके नियमित स्थानांतरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण और केंद्रीय विद्यालयों में अध्य्यन । वक्त ने करवट लिया और शहरों की खाक छानते छानते , उस वक्त ग्राम्य जीवन की शुरूआत हुआ जब यकायक ही परिवार ने गांव की ओर प्रस्थान किया । यौवन और संघर्ष के दिन , कॉलेज और युनिवर्सटी के दिन , जो भी बीते वो ग्राम्य जीवन से ही जुडे रहे और मैं भी भीतर तक जुडा रहा कहीं गांव की मिट्टी , पोखर , पवन और सब कुछ से ।

ऐतिहासिल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ प्रतिष्ठा स्नातक की शिक्षा के बाद , मित्रों के समूह के साथ ही वर्ष 1996 में दिल्ली की ओर प्रस्थान । लक्ष्य था खुद को साबित और स्थापित करना । पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान ही ,वर्ष 1998 में  सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई । संप्रति , दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पदस्थापित हूं और साथ साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है ।

पढने लिखने का शौक कब हुआ नहीं जानता ठीक ठीक । विद्यालय में कभी मेधावी छात्र नहीं रहा , मगर बचपन में कॉमिक्स , लडकपन में विजय विकास , कर्नल रंजीत , गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद , जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद के दिनों में हिंदी साहित्य दिले के भीतर तक बस गया । संपादक के नाम हज़ारों पत्र , दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जागर लेख , कहानियां , कविताएं , व्यंग्य , और जाने क्या क्या कितना लिखवा , पढना और लिखना आदत से अब एक जुनून सा बन गए हैं , लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं , जितना लिखूं कम है । समय बदला और कलम कागज की जगह ये टकटक कंप्यूटर ने ले लिया , यात्रा बदस्तूर जारी है , बिना थके , बिना रुके ……………

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