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अजय कुमार झा
Worked at District and Sessions Judge Office , Delhi
Attended Central School Danapur Cantt
Lived in Krishna Nagar , Delhi
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साँसों में तेरी खुशू के डेरे .........बाहों में तेरी मस्ती के घेरे
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#‎खड़ीख़बर‬ :मैं नेपाल के दुःख को समझ सकता हूँ , पहले भी वहां गैस से बहुत लोग मारे गए थे : राहुल गांधी very sadly बोले
सर वो ये वो जगह  नहीं है जहाँ गैस रिसी थी ..ये नेपाल है सर नेपाल ...............भोपाल नहीं
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#खड़ीख़बर : मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार  को नेपाल जाने की इजाजत नहीं मिली ,
सरकार ने कहा आपको जाना है तो जाओ , पीछे से मांझी को अपनी  सीट पे बिठा जाओ ;) ;) ;)
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Gyanendra Mohan's profile photo
 
बहुत सुन्दर।
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ल्यो आज की पहली सूचना मेल से मिली है कि गूगल ने हमारे ब्लॉग "बिखरे आखर" को एडसेंस के लिए मंजूरी दे दी है , माने कि पिरचार खिडकी युक्त ब्लॉग बनने वाला हमारा पहला ब्लॉग 
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Kuldeep Saini's profile photo
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चलिए आखिरकार " कार्यक्षेत्र" में अब स्वयं अग्रेसर होकर योजनाओं को  कार्यमूर्त देने का समय आ गया है । कई वर्षों के बाद आगामी इक्कीस फ़रवरी को प्रस्तावित "दिल्ली जिला न्यायालय कर्मचारी कल्याण संघ " ...में बतौर महासचिव (General Secretary) , दावेदारी सुनिश्चित ..........भविष्य में ,,,,,,,,न्यायालयों के प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन , अदालतों में मुकदमों के बोझ को एकदम न्यून कर देने एवं अत्याधुनिक तीव्र सेवा सुनिश्चित करने के लिए तैयार की जा रही एक मेगा रिपोर्ट को उचित व्यक्तियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा ........आप अच्छे , किसी बहुत अच्छे की उम्मीद कर सकते हैं ............परीक्षाओं के इस मौसम में ..तगडी मेहनत होने वाली है ..:) :) :) :) 
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Shankarlal Devasi's profile photo
 
Shankarlal









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  इसमें कोई संदेह नहीं कि व्हाट्स एप्प ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स में खुद को सांझा करने के अन्य सभी प्लेटफ़ार्मों को पीछे छोड दिया है किंतु , फ़ेसबुक अब भी रत्ती भर भी निष्क्रिय नहीं हुआ है इसलिए हमारी मित्र मंडली में कही सुनी...
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Have him in circles
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Sandeep Mishra's profile photo
dhafne gabriele's profile photo
Vijay Mishra's profile photo
G.G. BHARDWAJ's profile photo
Monica Gupta's profile photo
Jaydeo Kainthola's profile photo
Sachin Khare's profile photo
swarna delhi's profile photo
Jahaj Mandir's profile photo
 
सब कुछ नहीं कहेंगे जुबां से , अब कुछ नज़रें भी बयां करेंगी
अब करने दो  चाकरी इन आँखों  को ,कब तलक नौकरी जुबां करेगी ......

चेहरे को किताब  बनाने वाले हुनरबाज़ हो ............
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Pankaj Dwivedi's profile photo
 
bahut dinon ke baad dikhayee diye yahan?
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आजकल दिल्ली का मौसम अफ़लातून हुआ जा रहा है , यूं तो "दिल्ली मेरी जान".की तर्ज़ पे यहीं उत्ता मसाला तो तकरीबन रोज़ ही फ़ैला या फ़ैलाया जाता रहता है कि शाम को टेलिविजन पर बकर काटने के लिए बैठे तमाम तबेलेनुमा टीवी महाबहस में सबको कुछ न कुछ जुगाली के लिए तो मिल ही जाना चाहिए , और मिल भी जाता है । फ़िर ठीक चुनावों से पहले तो टीवी चैनलों में उस तरह की तैयारी की जाती है जैसे मेले से ठीक पहले कल्लन हलवाई अपनी कडाई कडछी के पेंच कस के मजबूत कर लिया करते थे ताकि जलेबी निकालने में तनिक भी स्पीड कम न हो । और स्पीड देखिए टीवी वालों ने तो बाइस मिनट में दो सौ बाइस जलेबियां , मेरा मतलब खबरें ठोंक के कल्लन हलवाई को भी काम्प्लैक्स दे डाला है 
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आजकल दिल्ली का मौसम अफ़लातून हुआ जा रहा है , यूं तो "दिल्ली मेरी जान".की तर्ज़ पे यहीं उत्ता मसाला तो तकरीबन रोज़ ही फ़ैला या फ़ैलाया जाता रहता है कि शाम को टेलिविजन पर बकर काटने के लिए बैठे तमाम तबेलेनुमा टीवी महाबहस में सबको कुछ...
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Shankarlal Devasi's profile photoKuldeep Saini's profile photo
 
Shankarlal

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देश परिवर्तन मोड में था , लोग मानो बिजली पानी के मुद्दों तक पर सडकों पर उतरने को आमादा हो चुके थे , आज़िज़ होने की स्थिति ने वो चमत्कार कर दिखाया जिसकी उम्मीद उन्हें भी नहीं थी जिनके साथ ये चमत्कार हो गया । मगर हाय रे भारतीय लोकतंत्र और हाय रे एक आम आदमी, की  पोलिटिकल इम्मैच्योरिटी यानि राजनैतिक अपरिपक्वता , इसका परिणाम आत्मघाती साबित हुआ , और मुट्ठी भर तने हुए लोग भी एक अनुशासन में नहीं रह सके । बिखराव को अगर रोकने की पुरज़ोर कोशिश की जाती तो शायद स्थिति कुछ और ही होती ।
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समय घूम फ़िर कर वहीं आ खडा होता है और ऐसे समय में तो मुझे लगता है मानो हम सब किसी पार्क में एक दूसरे के पीछे भाग भाग कर गोल गोल घूम घूम कर रेलगाडी छुक छुक छुक छुक खेलने में लगे हैं  । दिल्ली विधानसभा चुनाव एक बार फ़िर से लडे जा...
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Shankarlal Devasi's profile photo
 
SHANKARLAL

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अजय कुमार झा

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अच्छा है , बहुत ही काम की जानकारी , चिकित्सा जगत में आउटडेटेड को दरकिनार करते चलना बहुत जरूरी है । बांचते रहिए डाक्टर साहेब
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Parveen Chopra's profile photo
 
धन्यवाद..अजय जी..
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Story
Tagline
अभी मुझमें कहीं बाकी है थोडी सी जिंदगी ....................................................
Introduction

यदि एक पंक्ति में कहूं तो , एक आम आदमी जिसकी कोशिश है कि इंसान बना जाए , शेष कुछ नहीं । पिताजी फ़ौज में थे और माता गृहणि , माता पिता की दूसरे नंबर की संतान , प्रारंभ से ही पिताजी के साथ उनके नियमित स्थानांतरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण और केंद्रीय विद्यालयों में अध्य्यन । वक्त ने करवट लिया और शहरों की खाक छानते छानते , उस वक्त ग्राम्य जीवन की शुरूआत हुआ जब यकायक ही परिवार ने गांव की ओर प्रस्थान किया । यौवन और संघर्ष के दिन , कॉलेज और युनिवर्सटी के दिन , जो भी बीते वो ग्राम्य जीवन से ही जुडे रहे और मैं भी भीतर तक जुडा रहा कहीं गांव की मिट्टी , पोखर , पवन और सब कुछ से ।

ऐतिहासिल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ प्रतिष्ठा स्नातक की शिक्षा के बाद , मित्रों के समूह के साथ ही वर्ष 1996 में दिल्ली की ओर प्रस्थान । लक्ष्य था खुद को साबित और स्थापित करना । पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान ही ,वर्ष 1998 में  सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई । संप्रति , दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पदस्थापित हूं और साथ साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है ।

पढने लिखने का शौक कब हुआ नहीं जानता ठीक ठीक । विद्यालय में कभी मेधावी छात्र नहीं रहा , मगर बचपन में कॉमिक्स , लडकपन में विजय विकास , कर्नल रंजीत , गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद , जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद के दिनों में हिंदी साहित्य दिले के भीतर तक बस गया । संपादक के नाम हज़ारों पत्र , दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जागर लेख , कहानियां , कविताएं , व्यंग्य , और जाने क्या क्या कितना लिखवा , पढना और लिखना आदत से अब एक जुनून सा बन गए हैं , लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं , जितना लिखूं कम है । समय बदला और कलम कागज की जगह ये टकटक कंप्यूटर ने ले लिया , यात्रा बदस्तूर जारी है , बिना थके , बिना रुके ……………

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