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अजय कुमार झा
Worked at District and Sessions Judge Office , Delhi
Attended Central School Danapur Cantt
Lived in Krishna Nagar , Delhi
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#‎खड़ीखबर‬ :आयात से महंगाई को "मात" देगी केंद्र सरकार
बई ..वैरी गुड .......मगर सरकार ये "चैस" खेलेगी कब तक
;) ;) ;)
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हमको मिली हैं आज ये घड़ियाँ नसीब से ,
जी भर के देख लीजीये हमको करीब से ,
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो ........शायद फिर इस जनम मुलाक़ात हो न हो .............................
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#‎खड़ीखबर‬ :अन्तरिक्ष जाकर लौट आया पहला स्वदेशी यान ,
ऊपर व्हाट्सअप न मिलने के कारण यान का मन ही नहीं लगा
;) ;) ;) ;)
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‪#‎खड़ीखबर‬ :मुझे अपने निर्दोष होने का सबूत देने की जरूरत नहीं.................... (मैं कांग्रेसी हूँ ) : हरीश रावत
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प्रमोटेड पास का सुख तुम क्या जानो टॉप परसेंट वाले रमेस बाबू
पुराना बच्चा
फर्स्ट आने से डर नहीं लगता साहब , कटआउट के लफड़े से लगता है
ने बच्चा
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#‎खड़ीखबर‬ :नीतीश जिस प्रकार से शराब बंदी को लेकर हर राज्य को चैलेन्ज कर रहे हैं सभी डरे हुए हैं कि कहीं अगला चैलेंज ये न दे दें कि दम है तो अनपढ़ को डिप्टी बना के दिखाओ तो जानें ;) ;)
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#खड़ीखबर : एक बार यूपी चुनाव भी निपट लूं , फिर तो मैं स्टार्ट अप इण्डिया से लोन लेकर ...डंडे(गन्ने) का जूस निकालने की दूकान खोलूँगा : राहुल गांधी
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Have him in circles
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#‎खड़ीखबर‬ :ब्रेड , बर्गर , पिज्जा व् पाव् से हो सकता है कैंसर : दैनिक जागरण
बाप रे ............................................कल से बंद (दानिक जागरण पढना )
;) ;) ;)
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वो हुस्न के जलवे हों या इश्क की आगाजें ,
आज़ाद परिंदों की रुकती नहीं परवाज़ें ....

आते हुए कदमों से , जाते हुए क़दमों , बनी रहेगी राह गुजर ,
जो हम गए तो कुछ नहीं , इक रास्ता है ज़िंदगी , जो थम गए तो कुछ नहीं ...
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मेरे सतगुरु जी तुसी मेर करो , मैं दर तेरे ते आई होईयां ,
मेरे करमा वल न वेख्यो जी , मैं करमा तो शरमाई होईयां ...........
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#‎खड़ीखबर‬ :पुदुचेरी में कांग्रेस की जीत का जश्न
बैंड और डीजे बजवाने किरण बेदी पहुँच रही हैं :) :) :)
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अजय कुमार झा

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डोर की तलाश ख़त्म होने पर हमें भी खबर करिएगा जी ..हम खुद भी उसी तलाश में हैं
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जी भाई।

बस इसी आस में जी रहे हैं अब तलक
एक दिन जरूर मिलना होगा हमारा।
आखिर, कहीं तो ये डोर एक-दूजे से मिलेगी।
कटी पतंग की तरह जीते-जीते ये जिंदगी मैं
अब बहुत बोर हो गया हूं।।
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अजय कुमार's Collections
Story
Tagline
अभी मुझमें कहीं बाकी है थोडी सी जिंदगी ....................................................
Introduction

यदि एक पंक्ति में कहूं तो , एक आम आदमी जिसकी कोशिश है कि इंसान बना जाए , शेष कुछ नहीं । पिताजी फ़ौज में थे और माता गृहणि , माता पिता की दूसरे नंबर की संतान , प्रारंभ से ही पिताजी के साथ उनके नियमित स्थानांतरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण और केंद्रीय विद्यालयों में अध्य्यन । वक्त ने करवट लिया और शहरों की खाक छानते छानते , उस वक्त ग्राम्य जीवन की शुरूआत हुआ जब यकायक ही परिवार ने गांव की ओर प्रस्थान किया । यौवन और संघर्ष के दिन , कॉलेज और युनिवर्सटी के दिन , जो भी बीते वो ग्राम्य जीवन से ही जुडे रहे और मैं भी भीतर तक जुडा रहा कहीं गांव की मिट्टी , पोखर , पवन और सब कुछ से ।

ऐतिहासिल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ प्रतिष्ठा स्नातक की शिक्षा के बाद , मित्रों के समूह के साथ ही वर्ष 1996 में दिल्ली की ओर प्रस्थान । लक्ष्य था खुद को साबित और स्थापित करना । पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान ही ,वर्ष 1998 में  सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई । संप्रति , दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पदस्थापित हूं और साथ साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है ।

पढने लिखने का शौक कब हुआ नहीं जानता ठीक ठीक । विद्यालय में कभी मेधावी छात्र नहीं रहा , मगर बचपन में कॉमिक्स , लडकपन में विजय विकास , कर्नल रंजीत , गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद , जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद के दिनों में हिंदी साहित्य दिले के भीतर तक बस गया । संपादक के नाम हज़ारों पत्र , दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जागर लेख , कहानियां , कविताएं , व्यंग्य , और जाने क्या क्या कितना लिखवा , पढना और लिखना आदत से अब एक जुनून सा बन गए हैं , लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं , जितना लिखूं कम है । समय बदला और कलम कागज की जगह ये टकटक कंप्यूटर ने ले लिया , यात्रा बदस्तूर जारी है , बिना थके , बिना रुके ……………

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